रूह से रूबरू (Complete ✅) Ch. 2

रूह से रूबरू - Chapter 2

Posted by kp Queen • Aug 25, 2026 03:27 PM

: दायरे, अधिकार और पहली जलन

अद्वैत का विशाल केबिन इतना शांत था कि दोनों की सांसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।

अद्वैत के शरीर से निकलती भारी Alpha ऑरा पूरे कमरे में फैल चुकी थी। कियान का शरीर अंदर से कांपने लगा। उसने अपनी उँगलियों से अपनी शर्ट का निचला हिस्सा कसकर भींच लिया। अद्वैत की आँखें कियान की इस घबराहट को एक-एक पल के लिए दर्ज कर रही थीं।

"मैं... मैं भाग नहीं रहा था, सर," कियान ने अपनी थरथराती आवाज़ को सँभालने की कोशिश की। उसकी मासूम आँखें अद्वैत के चेहरे पर टिकीं, "मुझे क्लास के लिए देर हो रही थी।"

अद्वैत ने एक कदम और आगे बढ़ाया। उनके बीच की दूरी अब महज़ कुछ इंच रह गई थी। अद्वैत ने अपना दाहिना हाथ उठाया। उसकी लंबी, गर्म उँगलियाँ कियान के कॉलर के पास से गुज़रीं और उसकी गर्दन के पीछे बने उस संवेदनशील हिस्से (Nape) के बहुत करीब आकर ठहर गईं, जहाँ ओमेगास का 'Scent Gland' होता है।

कियान की सांसें अटक गईं। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगा जैसे सीना चीरकर बाहर आ जाएगा। अद्वैत ने धीरे से अपना सिर नीचे झुकाया और कियान के कान के पीछे हल्की सी सांस ली।

"तुमने Suppressants (दवाइयाँ) खाई हैं..." अद्वैत की आवाज़ अचानक बहुत ठंडी और गहरी हो गई। उसकी आँखों में एक खतरनाक सा गुस्सा तैरा, "तुम अपनी असली पहचान मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहे हो, कियान?"

कियान का चेहरा डर से फ़ैला। 'इसे कैसे पता चला?'

इससे पहले कि कियान कुछ बोल पाता, अद्वैत ने अपनी उँगलियों से कियान की ठुड्डी (Chin) को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया। पकड़ में दर्द नहीं था, लेकिन एक अटूट अधिकार (Possessiveness) था। अद्वैत की गहरी, काली आँखें सीधे कियान की आँखों में झाँक रही थीं।

"मेरी इजाज़त के बिना... इस शहर का कोई भी अल्फा तुम्हें छू नहीं सकता," अद्वैत की आवाज़ में एक अजीब सा जुनून था। "और तुम... अपनी इस मीठी खुशबू को इन सस्ती दवाइयों के पीछे छुपाने की बेवकूफ़ी दोबारा नहीं करोगे।"

कियान ने अद्वैत के चौड़े सीने पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे पीछे धकेलने की कोशिश की, लेकिन अद्वैत चट्टान की तरह अपनी जगह पर अड़ा रहा।

"आप... आप मेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते, सर!" कियान ने अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर कहा, उसकी आँखों में पानी भर आया था। "मैं यहाँ सिर्फ एक इंटर्न हूँ। मेरी पर्सनल लाइफ से आपका कोई लेना-देना नहीं है।"

अद्वैत के होठों पर एक हल्की, तीखी मुस्कान आई। उसने कियान की ठुड्डी को छोड़ा और एक कदम पीछे हटा। "पर्सनल लाइफ? तुम्हारी हर चीज़ अब मुझसे जुड़ी है, कियान। यह तुम बहुत जल्द सीख जाओगे।"

अद्वैत ने अपनी मेज़ की तरफ इशारा किया, जहाँ एक पतली, नीली फाइल रखी थी। "बाहर तुम्हारा ग्लास केबिन है। इस फाइल में 'रॉयल टावर्स' के ब्लूप्रिंट्स हैं। शाम 5 बजे से पहले मुझे इसका पूरा एनालिसिस चाहिए।"

कियान ने बिना एक शब्द कहे फाइल उठाई और तेज़ी से बाहर निकल गया। उसका पूरा शरीर अभी भी कांप रहा था।

दोपहर के 2 बज रहे थे।

कियान अपने ग्लास केबिन में बैठा लैपटॉप पर काम कर रहा था। अद्वैत अपने केबिन से कांच के पार से ही कियान को लगातार देख सकता था। जब भी कियान अपने बिखरे बालों को उँगलियों से पीछे हटाता, अद्वैत की नज़रें उसकी पतली गर्दन और गुलाबी होठों पर ठहर जातीं।

तभी, लिफ्ट का दरवाज़ा खुला।

एक लंबा, हैंडसम लड़का बाहर निकला। उसने कैज़ुअल जैकेट पहनी थी और चेहरे पर एक दोस्ताना मुस्कान थी। वह 'रॉयल कॉर्प्स' का हेड आर्किटेक्ट—'विक्रम' (An Beta/Alpha) था।

विक्रम सीधे कियान की मेज़ के पास गया। "अरे! तुम नए इंटर्न हो? मैं विक्रम हूँ, हेड आर्किटेक्ट।"

कियान ने राहत की सांस ली और मुस्कुराया, "जी, मैं कियान हूँ।"

"बहुत बढ़िया कियान! तुम्हारा काम मैंने देखा, बहुत इम्प्रेसिव है," विक्रम ने हँसते हुए कहा और बड़े अनौपचारिक तरीके से कियान के कंधे पर हाथ रख दिया। "शाम को कॉफी पर चलोगे? मैं तुम्हें यहाँ के रूल्स समझा दूंगा।"

कियान अभी जवाब देने ही वाला था कि...

अचानक पूरे फ्लोर का तापमान जैसे शून्य से नीचे चला गया।

कांच के केबिन का दरवाज़ा इतनी ज़ोर से खुला कि उसकी आवाज़ पूरे फ्लोर पर गूंज उठी। अद्वैत बाहर निकला। उसकी आँखें पूरी तरह से काली पड़ चुकी थीं। उसके शरीर से इतनी खतरनाक, हिंसक Alpha ऑरा (Aggressive Pheromones) बाहर निकली कि विक्रम का हाथ अपने आप कियान के कंधे से हट गया। विक्रम की सांसें भारी होने लगीं।

कियान ने घबराकर अद्वैत को देखा। अद्वैत के चलने में एक ऐसा जुनून था जैसे कोई शेर अपने इलाके में किसी घुसपैठिये को देखकर आगे बढ़ता है।

अद्वैत विक्रम के ठीक सामने आकर खड़ा हो गया।

"विक्रम..." अद्वैत की आवाज़ इतनी ठंडी और भयानक थी कि सुनने वाले की रीढ़ में कँपकँपी छूट जाए। "तुम्हे अपने केबिन में होना चाहिए था।"

"स-सर... मैं बस नए इंटर्न को गाइड कर रहा था," विक्रम ने घबराते हुए अपनी गर्दन नीचे कर ली।

"यह तुम्हारा काम नहीं है," अद्वैत ने अपनी नज़रें विक्रम से हटाकर सीधे कियान पर टिकाईं। अद्वैत की आँखों में साफ़ दिख रहा था कि उसे कियान को किसी और के छूने की बात बर्दाश्त नहीं हुई थी। "कियान का गाइड... सिर्फ मैं हूँ। दोबारा इसके करीब दिखने की गलती मत करना।"

विक्रम ने बिना एक पल गंवाए सर झुकाया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

कियान हैरान और गुस्से में अद्वैत को देखने लगा। "आप यह क्या कर रहे हैं सर? वो बस मुझसे बात कर रहे थे! आप हर किसी पर ऐसे गुस्सा क्यों..."

अद्वैत ने कियान का हाथ पकड़ा और उसे खिंचते हुए अपने केबिन के अंदर ले गया। दरवाज़ा अपने आप लॉक हो गया।

अद्वैत ने कियान को दीवार से सटा दिया। उसके दोनों हाथ कियान के सिर के दोनों तरफ दीवार पर जम गए। अद्वैत का चेहरा कियान के चेहरे से महज़ एक इंच दूर था। उसकी आँखों में जलन (Jealousy) और पागलपन सा जुनून तैर रहा था।

"उसने तुम्हें छुआ, कियान..." अद्वैत की सांसें गर्म और तेज़ थीं। "मुझे पसंद नहीं है कि कोई और तुम्हें देखे, तुमसे बात करे या तुम्हें छुए।"

"आप पागल हैं!" कियान की आँखों से एक आँसू छलक कर अद्वैत के हाथ पर गिरा। "आप मेरे मालिक नहीं हैं!"

कियान का आँसू देखकर अद्वैत का गुस्सा पल भर के लिए थम गया। उसके चेहरे के सख्त भाव थोड़े नरम पड़े। उसने अपनी अँगूठे की पोर से बहुत धीरे से कियान का आँसू पोंछा। उसकी छुअन में अब एक अजीब सी तड़प थी।

"मैं तुम्हारा मालिक नहीं बनना चाहता, कियान..." अद्वैत ने धीमी, लेकिन बेहद गहरी आवाज़ में कहा। "मैं तुम्हारा 'अल्फा' बनना चाहता हूँ।"

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