रूह से रूबरू - Chapter 3
धड़कनों का दायरा और अनकही राहत
अद्वैत के लफ़्ज़—"मैं आपका 'अल्फा' बनना चाहता हूँ"—केबिन के सन्नाटे में गूँज गए।
कियान की आँखें फ़ैल गईं। उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़कने लगा कि उसे लगा अद्वैत उसकी हर एक धड़कन सुन सकता है। अद्वैत का अँगूठा अभी भी कियान के गाल पर टिका हुआ था, जहाँ से उसने आँसू पोंछा था। उसकी छुअन में अब वो कड़क गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी कशिश और नर्मी थी।
कियान ने अद्वैत की चौड़ी छाती पर अपने दोनों हाथ रखे और उसे थोड़ा पीछे धकेलने की कोशिश की। "आप... आप जानते भी हैं कि आप क्या कह रहे हैं, सर? हम दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। आप इस शहर के सबसे बड़े बिज़नसमैन हैं और मैं बस एक स्टूडेंट..."
"फ़र्क?" अद्वैत ने कियान के लफ़्ज़ों को बीच में ही काट दिया। उसने कियान के दोनों हाथों को, जो उसकी छाती पर थे, अपनी एक ही बड़ी हथेली में जकड़ लिया और उन्हें अपने दिल के ठीक ऊपर रख दिया।
कियान को अद्वैत की धड़कन महसूस हुई—तेज़, भारी और उग्र।
"क्या तुम्हें लगता है कि यह दिल हैसियत या फ़र्क देखता है?" अद्वैत की आँखें अब भी कियान के होठों और उसकी घबराई हुई आँखों पर टिकी थीं। "जब से मैंने तुम्हें उस ऑडिटोरियम में देखा है, कियान... मेरी पूरी दुनिया ठहर गई है।"
कियान का गला सूख गया। उसने अपनी नज़रें फेरने की कोशिश की, लेकिन अद्वैत ने अपनी दूसरी हथेली कियान की कमर पर टिका दी और उसे थोड़ा और करीब खींच लिया।
"मुझे देखो, कियान," अद्वैत की आवाज़ में एक अधिकार था जो हुक्म नहीं, बल्कि एक गुज़ारिश जैसा लग रहा था।
कियान ने धीरे से अद्वैत की तरफ़ देखा। अद्वैत की गहरी, भूरी-काली आँखों में कोई छल या चलाकी नहीं थी—वहाँ सिर्फ़ एक ज़िद थी, एक जुनूनी सच्चाई थी।
"मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता," अद्वैत ने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, लेकिन कियान को अपने घेरे से बाहर निकलने नहीं दिया। "लेकिन अगर कोई और तुम्हें छुएगा या तुम्हारे करीब आने की कोशिश करेगा, तो मैं अपना आपा खो दूँगा। यह मेरी अल्फा इंस्टिंक्ट है... या शायद, तुम्हारे लिए मेरी दीवानगी।"
कियान की सांसें तेज़ चल रही थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस इंसान पर गुस्सा करे या उसकी इस बेपनाह शिद्दत के सामने घुटने टेक दे। वह जानता था कि एक ओमेगा होने के नाते उसे किसी अल्फा के इतने करीब नहीं आना चाहिए, लेकिन अद्वैत की चंदन और देवदार जैसी नशीली खुशबू (Scent) उसे अंदर से शांत कर रही थी। कियान के शरीर का सारा तनाव धीरे-धीरे पिघलने लगा था।
तभी, अद्वैत के डेस्क पर रखा फोन बज उठा।
बज़र की आवाज़ से केबिन का तिलस्म टूटा। कियान ने तुरंत अद्वैत के घेरे से खुद को अलग किया और दो कदम पीछे हट गया। अद्वैत ने एक गहरी सांस ली, अपनी शर्ट की आस्तीन को ठीक किया और अपनी पुरानी कड़क पर्सनैलिटी में वापस आ गया।
अद्वैत ने इंटरकॉम उठाया, "हाँ बोलो।"
"सर, मिस्टर कश्यप बोर्ड मीटिंग के लिए कॉन्फ्रेंस रूम में आपका इंतज़ार कर रहे हैं," सेक्रेटरी की आवाज़ आई।
"मैं पाँच मिनट में आता हूँ," अद्वैत ने फोन रखा और फिर कियान की तरफ़ मुड़ा।
कियान अपनी नज़रें ज़मीन पर टिकाए खड़ा था, उसके गालों पर अब भी हल्की लाली छाई हुई थी।
अद्वैत ने अपने सूट का बटन बंद किया और कियान के पास आया। उसने कियान की ठुड्डी को बहुत नर्मी से छुआ, "अपने केबिन में जाओ। आज के लिए तुम्हारा काम खत्म हो गया है। कार नीचे तैयार है, ड्राइवर तुम्हें तुम्हारे अपार्टमेंट छोड़ देगा।"
"मैं बस से चला जाऊँगा, सर," कियान ने धीरे से कहा।
"यह मेरा ऑर्डर है, कियान," अद्वैत के होठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई, जो इतनी दुर्लभ थी कि कियान एक पल के लिए उसे देखता ही रह गया। "और अपने इस 'अल्फा' का ऑर्डर मानना तुम्हें सीखना पड़ेगा।"
शाम के 8 बजे रहे थे।
कियान अपने छोटे से अपार्टमेंट के कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ था। कमरे में अंधेरा था, बस खिड़की से बाहर की स्ट्रीट लाइट की रोशनी अंदर आ रही थी।
कियान ने अपनी हथेली को अपने सीने पर रखा। उसे अब भी अद्वैत के दिल की वो तेज़ धड़कन महसूस हो रही थी। उसने अपनी आँखें बंद कीं तो अद्वैत की वो जुनूनी आँखें और उसकी भारी आवाज़ उसके कानों में गूँजने लगी—'मैं तुम्हारा अल्फा बनना चाहता हूँ...'
"क्या मैं सही कर रहा हूँ?" कियान ने खुद से सवाल किया। "वो अद्वैत सिंघानिया हैं... अगर उन्हें मेरी सच्चाई पूरी तरह पता चल गई, तो क्या होगा? अगर मैं उनके इस जुनून में पूरी तरह बह गया, तो मेरा क्या होगा?"
तभी कियान के फोन की स्क्रीन जगमगा उठी।
एक अननोन नंबर से मैसेज आया था। कियान ने फोन उठाया और मैसेज खोला:
"उम्मीद है तुम सुरक्षित घर पहुँच गए हो। कल सुबह 9 बजे। लेट मत होना, छोटे ओमेगा। - A"
कियान ने फोन अपने सीने से लगा लिया। उसके होठों पर अनजाने में ही एक मीठी सी मुस्कान बिखर गई। उसे इस बात का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि अद्वैत के इस बढ़ते जुनून और पॉजेसिवनेस के पीछे, यूनिवर्सिटी और बिज़नेस वर्ल्ड की एक बहुत बड़ी साज़िश उनका इंतज़ार कर रही थी।
उस एक मैसेज ने कियान के दिल में हलचल तो मचाई थी, लेकिन जैसे ही सुबह की धूप उसके कमरे में आई, कियान का दिमाग ठंडे यथार्थ में लौट आया।
कियान कोई ऐसा-वैसा लड़का नहीं था जो किसी अमीर, ताकतवर अल्फा के दो मीठे बोल या रुआब से फिसल जाए। उसने बचपन से अकेले संघर्ष किया था। उसने देखा था कि कैसे समाज में Alpha लोग अपनी ताकत के दम पर Omegas को सिर्फ अपनी मर्जी से चलाते हैं।
'अद्वैत सिंघानिया को लगता है कि वो अपनी दौलत, अपनी ऑरा और हुक्म से मुझे हासिल कर लेंगे?' कियान ने शीशे में खुद को देखते हुए अपनी शर्ट के बटन बंद किए। उसकी मासूम आँखों में इस बार एक अजीब सी ज़िद और कड़ाई थी। 'मैं उनका कोई खिलौना नहीं हूँ जिसे वो अपनी पॉजेसिवनेस से बांधकर रखें।'
कियान ने उस दिन ठान लिया कि वह अद्वैत को अपनी सीमा दिखाएगा।
सुबह के ठीक 9 बजे, कियान 'रॉयल कॉर्प्स' के 45वें माले पर पहुँचा।
अद्वैत अपने केबिन में बैठा कॉफी की चुस्कियां ले रहा था। जैसे ही उसने कियान को देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी चमक आ गई। उसने उम्मीद की थी कि कल के मैसेज के बाद कियान थोड़ा शर्माया हुआ या झिझका हुआ होगा।
लेकिन कियान सीधे अद्वैत के केबिन में घुसा। उसका चेहरा एकदम भावहीन था। उसके हाथ में एक कागज़ था।
"गुड मॉर्निंग, सर," कियान की आवाज़ बेहद पेशेवर और ठंडी थी।
अद्वैत ने अपनी कॉफी का कप मेज़ पर रखा और अपनी आँखें सिकुड़ीं। उसे कियान का यह बदला हुआ, सख्त रूप समझ नहीं आया। "गुड मॉर्निंग, कियान। बैठो।"
"नहीं, सर। मैं यहाँ बैठने नहीं आया हूँ," कियान ने वह कागज़ अद्वैत की मेज़ पर रख दिया।
अद्वैत ने नज़रें उठाकर कागज़ को देखा। उस पर बड़ा-बड़ा लिखा था—'Resignation Letter' (इस्तीफा)।
अद्वैत का चेहरा पल भर में कड़क हो गया। उसकी ऑरा अचानक भारी होने लगी, जिससे कमरे में ठंडक सी छा गई। "यह क्या बकवास है, कियान?"
"यह बकवास नहीं है, सर। यह मेरा इस्तीफा है," कियान ने अद्वैत की तीखी, डरावनी आँखों में आँखें डालकर सीधे कहा। "मैं इस इंटर्नशिप को आगे नहीं बढ़ा सकता।"
अद्वैत अपनी कुर्सी से धीरे से उठा। उसकी विशाल काया जब मेज़ के पार खड़ी हुई, तो कोई भी आम इंसान डर से कांप उठता, लेकिन कियान अपनी जगह से एक इंच भी पीछे नहीं हटा।
"रीज़न?" अद्वैत की आवाज़ इतनी धीमी और कड़क थी कि ऐसा लगा जैसे तूफ़ान आने से पहले की शांति हो।
"रीज़न यह है कि मैं यहाँ काम करने आया हूँ, किसी के पर्सनल पॉजेसिवनेस (Possessiveness) का शिकार बनने नहीं," कियान ने एक-एक शब्द साफ-साफ कहा। "कल आपने जो भी कहा—अल्फा बनने की बात, दूसरों से जलना, मुझे अपना समझने की ज़िद—मुझे यह सब मंज़ूर नहीं है। आप मेरे बॉस हैं और मैं सिर्फ एक इंटर्न। इसके अलावा हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है और न कभी हो सकता है।"
अद्वैत के चेहरे पर गुस्से की एक लाल रेखा खिंच गई। उसकी मुट्ठियां इतनी कसकर बंद हुईं कि उसकी नसें उभर आईं। आज तक किसी ने अद्वैत सिंघानिया के मुंह पर इस तरह इनकार नहीं किया था।
"तुम्हे लगता है कि तुम जब चाहो आ सकते हो और जब चाहो जा सकते हो?" अद्वैत मेज़ को पार करके कियान के ठीक सामने आकर खड़ा हो गया। "मैंने तुम्हें चुना है, कियान। तुम मेरी परमिशन के बिना यह कंपनी तो क्या, इस शहर को भी नहीं छोड़ सकते।"
कियान ने हल्की सी कड़वी मुस्कान दिखाई, "आप अपनी ताकत और पैसे से मेरी जॉब छीन सकते हैं, मेरी स्कॉलरशिप रुकवा सकते हैं, मिस्टर सिंघानिया... लेकिन आप मुझे अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। एक ओमेगा होने का मतलब यह नहीं है कि मैं किसी अल्फा के आगे घुटने टेक दूंगा।"
कियान मुड़ा और जाने लगा।
"कियान!" अद्वैत ने कड़क आवाज़ में पुकारा और तेज़ी से आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ना चाहा।
लेकिन कियान ने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया, जैसे अद्वैत की छुअन से उसे तकलीफ़ हुई हो। "मुझे मत छुइए, सर। अगर आप सच में मेरी इज्ज़त करते हैं, तो मुझे प्रोफेशनल दायरा मत पार करने दीजिए।"
कियान बिना मुड़े केबिन से बाहर निकल गया।
केबिन में सन्नाटा छा गया। अद्वैत वहीं खड़ा रहा। उसका हाथ हवा में ही अधर में अटका रह गया। कियान के उन कड़े शब्दों ने अद्वैत के सीने में एक अजीब सी चुभन पैदा कर दी थी। पहली बार किसी के इनकार ने अद्वैत के अहंकार को नहीं, बल्कि उसके दिल को ठेस पहुंचाई थी।
अद्वैत ने मेज़ पर रखा कांच का ग्लास उठाकर दीवार पर दे मारा। ग्लास चूर-चूर हो गया।
"तुम मुझसे दूर भागने की कोशिश कर रहे हो, छोटे ओमेगा..." अद्वैत ने टूटे हुए कांच को देखते हुए गहरी सांस ली, उसकी आँखों में अब गुस्से से ज़्यादा एक जुनूनी ज़िद थी। "लेकिन जितना तुम पीछे हटोगे, मैं तुम्हें पाने के लिए उतना ही आगे बढ़ूँगा। तुम्हें अपनी मर्जी से मेरे पास आना ही होगा।"