इश्तियाक! Ch. 2

इश्तियाक! - Chapter 2

Posted by Neha Sayyed • Apr 04, 2026 10:01 PM

बढ़ते है कहानी की ओर---

हंसिका अभी भी गुस्से में वहीं खड़ी थी कि तभी पीछे से आते तन्मय ने उसे पुकारा - " हंसिका मैम चले .. ? "

" मैं उस पागल आदमी के साथ नहीं जाऊंगी । " वह झुंझला कर बोली ।

" सर पागल नहीं है । "

" अपनी उम्र से दस साल छोटी लड़की को शादी के लिए प्रेशराइज्ड करना .. मुझे नहीं लगता कि कोई नॉर्मल इंसान ऐसा करता होगा । "

" मगर जहां तक मै जानता हूं , उन्होंने आपको प्रेशराइज्ड नहीं किया था । आपने अपनी फ्रीडम को चुना था , और शादी करना उसी ऑप्शन में था । " तन्मय ने जैसे उसे याद दिलाया था । तो वहीं हंसिका दांत पिस कर रह गई ।

" वैसे आप गई कहां थी घर से निकलने के बाद .. ? "

" तुम्हें इससे क्या .. ? मैं चाहे कहीं भी जाऊं । अपने काम - से - काम रखो ना " कहते हुए वह बाहर की तरफ बढ़ गई थी जबकि तन्मय बड़बड़ाता हुआ उसके पीछे चल दिया था । - " लेकिन मेरा काम तो यहीं है ना मैम ! "

" तुम भी पागल हो अपने बॉस की तरह , इलाज़ करवाओ । " वह गुस्से में कहती जा रहीं थी । वह दोनो गाड़ी तक पहुंचे तो तन्मय ने उसके लिए पिछली सीट का दरवाजा खोला ताकि वह अलंकृत के पास बैठ सके जबकि हंसिका पैसेंजर सीट पर बैठ गई थी ।

यह देख अलंकृत के साथ तन्मय और ड्राइवर तीनो की नज़रे हंसिका पर जा ठहरी थी ।

" अर्... हंसिका मैम  .. आपकोे पीछे बैठना है । " तन्मय ने फ़ौरन उसकी तरफ वाला दरवाजा खोल कर कहा तो हंसिका बड़े लापरवाह अंदाज़ में बोली - " मैं अब यहीं बैठ चुकी हूं । "

तन्मय कुछ कहता उससे पहले ही अलंकृत अपनी सर्द आवाज में बोला - " तुम पीछे आ रहीं हो या मैं ड्राइविंग सीट सम्हालू , हंसिका .. ? क्या तुम चाहती हो कि मैं ऐसा करूं .. ? "

अलंकृत की बात उसकी रीढ़ की हड्डी तक को सिहरनें पर मजबूर कर गई थी । अनिच्छा से वह आगे वाली सीट से उतरी और चुप चाप पीछे बैठ गई । मगर अलंकृत से एक दूरी बना कर । और अलंकृत ने इस बात पर कोई ख़ास ध्यान दिया भी नहीं था , क्योंकि यह उसके लिए इतना मैटर नहीं करता था । तन्मय के बैठते ही ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी थी ।

हंसिका के घर पहुंचने तक गाड़ी में बस ख़ामोशी ही रहीं थी । गाड़ी उसके घर के बाहर रुकी तो हंसिका बगैर कुछ कहे ही उतरने लगी तो अलंकृत उसकी कलाई पकड़ता हुआ बोला - " ठीक है , एक हफ्ता है तुम्हारे पास । आराम से अपना सामान पैक करो । "

" मुझे या मेरी मम्मी को आपके घर आकर रहने का कोई शौक नहीं है । " वह अपना हाथ छुड़वाते हुए बोली । मगर छुड़वा नहीं पाई कि अलंकृत की पकड़ काफी मजबूत थी ।

हंसिका ने देखा कि वह उसकी कलाई छोड़ नहीं रहा था तो उसने अपने नाखून उसके हाथ की पुश्त पर गढ़ाते हुए कहा था - " और अपने गार्ड्स से कहो कि अभी हमारा घर छोड़ दे । " 

" तुम पर यकीन नहीं कर सकता । "

" आप... आपने कहा था , अलंकृत । अब आप अपनी कही बातो से फ़िर रहे है । आप ऐसा नहीं कर सकते । " वह लगभग चौक पड़ी थी ।

" मै सब कर सकता हूं । "

हंसिका आंखों में दुनियाजहां की हैरानगी लिए उसे देखते हुए बोली - " तो फिर आपने मुझे फंसाया .. ? जो भी आपने कहा था , उसका क्या .. ? "

" इस बात पर मै एग्री नहीं करता । जब तक तुम और तुम्हारी मां यहां है , गार्ड्स यहीं रहेंगे । " अलंकृत की आंखो में अजीब सी सख्ती थी जबकि हंसिका की आंखे छलक पड़ी थी ।

" ठीक है , मुझे आपकी हर बात मंजूर है । लेकिन आप बस मेरे भाई को हमारे पास ले आए । " वह गिड़गिड़ाते हुए बोली । अलंकृत ने एक गहरी सांस ली और उसका हाथ छोड़ दिया ।

" जाओ... "

" मेरा भाई .. ? "

" बोला है अपने गार्ड्स को । ढूंढ लेंगे वो उसे । "

" क्या मतलब ढूंढ लेंगे .. ? क्या मेरा भाई आप लोगो के पास नहीं है .. ? "

" नहीं... " अलंकृत ने छोटा सा ही जवाब दिया जबकि हंसिका सुन्न सी होकर उसे देखने लगी ।

" आप ऐसा कैसे कह सकते है , आख़िरी दफा मैने उसे आपकी गाड़ी में जाते हुए देखा था । " वह जैसे उसकी बात पर यकीन ही नहीं कर पा रहीं थी ।

" हां , वो मेरे साथ गया था । मगर फिर पता नहीं कहां चला गया । "

" आप झूठ बोल रहे है .. कहीं आपने... आपने उसे मार तो नहीं दिया .. ? "

उसके इल्ज़ाम पर अलंकृत ने कुछ नहीं कहा । तो उसके चहरे पर थप्पड़ मारते हुए वह चीखी - " आपने मेरे भाई को क्यों मारा । "

उसने दोबारा हाथ उठाना चाहा तो अलंकृत ने उसका हाथ पकड़ कर झटक दिया - " निकलो यहां से , वरना तुम भी मरोगी मेरे हाथो से । "

" आई हैट यू... @### " एक भद्दी सी गाली देते हुए वह गाड़ी से उतर , घर की तरफ दौड़ गई थी । उसके जाते ही अलंकृत ने आंखे बंद की और अपनी पुश्त सीट पर अच्छे से टिकाते हुए बोला - " क्लब चलो , तन्मय । "

" लेकिन सर .. डॉक्टर ने मना.... "

वह अपनी बात पूरी कर पाता उससे पहले ही अलंकृत चिल्लाया - " अब तुम मुझे बताओगे की मुझे क्या करना है .. ? मैं तुम्हे सैलरी देता हूं , ताकि तुम मेरे ऑडर्स फॉलो करो । ना कि मुझे ऑडर्स दो । सो , जितना कहा है उतना करो । "

तन्मय ने आहिस्ते से सॉरी कहा और ड्राइवर को चलने का कहा ।

क्रमशः

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