इश्तियाक! Ch. 1

इश्तियाक! - Chapter 1

Posted by Neha Sayyed • Apr 04, 2026 10:01 PM

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जहाँ फैमिली कोर्ट के बाहर लोगों का लगातार आना - जाना लगा हुआ था कि छुट्टियों की वजह से वह बंद होने जा रहा था । वहीं उसके सामने ही कुछ दूरी पर एक काली कार के भीतर अजीब सा भारीपन महसूस किया जा सकता था ।

" वह अभी तक आई क्यों नहीं है .. ? " पिछली सीट पर बैठे अलंकृत ने सर्द लहजे में अपने असिस्टेंट तन्मय से पूछा था , जो इस वक्त पैसेंजर सीट पर बैठा लगातार किसी को फोन मिलाए जा रहा था ।

तन्मय पेशानी पर लकीरें लिए हुए उसकी तरफ गर्दन घुमा कर बोला - " सर... आधा घंटा पहले गार्ड ने कहा था कि वह घर से निकल गई है । अब तक तो उन्हें आ जाना चाहिए था । मैं फोन कर रहा हूं , मगर वह फोन भी नहीं उठा रहीं है । "

तन्मय की बात सुनकर अलंकृत का चेहरा गुस्से में काला पड़ गया था ।

" अगर घर से आधा घंटा पहले निकली थी तो अब तक आई क्यों नहीं .. ? "

" सर... मै फ़ौरन उनका पता लगवाता हूं । "

" जल्दी करो , शादी आज ही करनी है मुझे । " अपनी पेशानी पर हाथ रखे वह अपने गुस्से को दबाएं ख़ामोश सा बैठ गया था ।

तन्मय ने किसी को कॉल लगाई और उसने एक जल्दबाजी में कहा - " हेलो ! .. एक काम है । हंसिका मैम कहीं चली गई है , पता लगाओ कहां है । और जहां भी मिले फौरन उन्हें कोर्ट ले आओ । "

अलंकृत अपनी आंखे बंद करता हुआ गुस्से में मन - ही - मन बोला - " तुम पर जब - जब यक़ीन किया , तुमने हर दफ़ा मेरे यक़ीन को पाश - पाश किया है । अगर आज तुमने मौके का फ़ायदा उठाने की कोशिश की होंगी ना तो फिर खैर नहीं तुम्हारी , हंसिका । "

अभी कोई कुछ और सोचता , उससे पहले ही तन्मय की साइड वाले विंडो ग्लास पर किसी ने नॉक किया था । तन्मय ने फ़ौरन शीशा नीचे किए तो वहां हंसिका को खड़ा देख वह एक राहत की सांस लेकर बोला - " थैंक गॉड आप आ गई हंसिका मैम ! "

अलंकृत ने आंखे खोल कर उस तरफ देखा , वहां वाकई हंसिका ही थी । हंसिका ने बेज़ारी से तन्मय को देखा और फिर एक नज़र अलंकृत पर डाल वापस उसे ही देखती हुई बोली - " अपने सो कॉल्ड बॉस से कहो कि कर ले आकर शादी । "

और वहां से कोर्ट की तरफ बढ़ गई थी । जबकि सीधे बैठते हुए अलंकृत एक सख्ती से बोला - " तन्मय ! .. पता लगाओ कि घर से निकलने और यहां तक पहुंचने के बीच वाले वक्त में यह कहां थी । "

" जी.. सर ! " तन्मय ने एक मैसेज किया तब तक अलंकृत गाड़ी से निकल चुका था । अपने स्याह कोट के बटन को बंद करते हुए वह आगे बढ़ गया था जबकि जल्दबाजी में तन्मय भी गाड़ी से उतर कर उसके पीछे ही चल दिया था ।

दोनो रजिस्ट्रार के केबिन में पहुंचे तो वहां पहले ही आकर हंसिका कुर्सी पर बैठ चुकी थी । अलंकृत उसके बगल खाली पड़ी कुर्सी पर आराम से बैठ गया । तन्मय ने रजिस्ट्रार के सामने दोनो के डॉक्यूमेंट्स रखे , जिन्हें अटैच करते हुए उन्होंने सारी चीजें सही से चेक की ।

हंसिका के डॉक्यूमेंट्स देखते हुए उन्हें एहसास हुआ कि वह लड़की एक हफ्ते पहले ही अठारह की हुई थी । और अलंकृत अठाईस साल का था । उन्होंने नजर उठा कर उन्हें देखा , जो एक दूसरे की तरफ देख तक नहीं रहे थे । दोनो की उम्र में खासा फासला था ।

उन्होंने एक दफा कन्फर्म किया कि वह दोनों वाकई शादी करना चाहते थे .. ? तो दोनों ने एक साथ हां कहा था ।रजिस्ट्रार ने हामी में सिर हिला कर मैरिज पेपर्स पर दोनों के साइन लिए । गवाहों के साइन लेने के बाद रजिस्ट्रार ने स्टैंप लगाई और दोनो को शादी की बधाई दी ।

फिर हंसिका वहां से उठी और उस कैबिन से निकल गई जबकि अलंकृत अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला - " तन्मय , कॉपी ले लो । "

और खुद भी बाहर निकल गया । कोरिडोर में तेजी से आगे बढ़ती हंसिका की आंखों में आंसू भर आए थे । जिन्हें साफ करते हुए वह सामने से मुड़ने ही वाली थी कि तभी उसे एहसास हुआ कि किसी ने उसे उसकी बाजू से पकड़ कर खींचा था । वह कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसके कानो में अलंकृत की आवाज पड़ी थी ।

" कहां भागे जा रहीं हो .. ? "

" आप कोई नहीं होते , जिसे मैं जवाब दूं । " वह उखड़ कर बोली और फ़ौरन उसके हाथ को झटक दिया ।

अलंकृत के लबों पर एक मुस्कान आ गई । जैसे वह उसका उपहास उठा रहा हो - " कम - से - कम अब तो तुम यह नहीं कह सकती कि मैं तुम्हारा कोई नहीं हूं । बस अभी... कुछ ही मिनट्स पहले हमने शादी की है । "

" आपने मुझे मजबूर किया । "

" मैने तुम्हे कोई मजबूर नहीं किया । "

" आपने किया । "

" मैने सिर्फ ऑप्शंस रखे थे । क्योंकि मुझे घर वालों की मुसीबत से निकलना था । और तुमसे अच्छा रास्ता मेरे पास नहीं था । " वह उसकी नाक को पिंच करता हुआ बोला तो हंसिका ने खा जाने वाली नज़रों से उसे घूरा था।

" आप मुसीबत से निकले नहीं है बल्कि मुसीबत में आ चुके है । होंगे आप अलंकृत रावत , जिसे आता होंगा लोगों को अपनी उंगलियों पर नचाना । मगर मै हंसिका हूं... आपने मुझे और मेरी लाइफ को जितना कंट्रोल करना था कर लिया , मगर अब नहीं । अपने गार्ड्स से अभी कहिए कि वह हमारा घर छोड़ दे , जिसपर पिछले सात सालों से वह डेरा जमाए बैठे है । " वह दांत पिसते हुए बोली ।

" वो मैं कह दूंगा मगर तुम और तुम्हारी मां... मेरे घर शिफ्ट हो रहीं है आज ही ।"

" व्हाट!!!!!!!! कभी नहीं ! " वह एकदम चीखी थी ।

जबकि अलंकृत हामी में सिर हिला कर वहां से आगे बढ़ गया था ।

क्रमशः

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