Chapter 130
Chapter 130 (वो तो बहुत पहले ही किसी का हो चुका है!))
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
सुबह का समय था जब यश की बातें सुन कर अनिरुद्ध एकटक उसे देखे जा रहा था। उसे ऐसे देख कर यश ने कहा, "क्या हुआ भाई? आप हमें ऐसे क्यों देख रहे हैं?" अनिरुद्ध ने कहा, "देख रहे हैं कि प्य