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Chapter 44

कुछ ऐसा जो रुक न सका - Chapter 44

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मंदिर से बाहर आए कई घंटे बीत चुके थे। पहाड़ों के ऊपर सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था। आसमान नारंगी और बैंगनी रंग से भर गया था। हवा में अब वह डर नहीं था जो कुछ समय पहले था। लेकिन फिर भी… स

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