Chapter 20
कुछ ऐसा जो रुक न सका - Chapter 20
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नीली किरणें और तेज हो गईं। कमरे में गूंज रहा था— धक… धक… धक… जैसे समय सचमुच खत्म हो रहा हो। वैदेही की उंगलियाँ अब भी विक्रम की कलाई पकड़े थीं। मजबूती से। जिद की तरह। “तुम कहीं नहीं