My Unwanted Crush Ch. 2

My Unwanted Crush - Chapter 2

Posted by okenja • Mar 16, 2026 02:23 PM

कहानी आज से लगभग सात साल पहले

उस समय इशानी रैणावत सिर्फ सातवीं क्लास में पढ़ती थी। वह बहुत ही मासूम, भोली और थोड़ी सी गोल-मटोल सी लड़की थी। बड़ी-बड़ी आंखें, मासूम चेहरा और हमेशा चुप रहने वाली आदत।

इशानी बचपन से ही थोड़ी इंट्रोवर्ट थी। उसे ज्यादा लोगों से बात करना पसंद नहीं था। स्कूल में भी उसके बहुत कम दोस्त थे। वह ज्यादातर समय अपनी किताबों, ड्रॉइंग और म्यूजिक में बिताती थी।

उसी समय उसके पापा विवेक रैणावत ने शहर की एक पॉश सोसाइटी में नया घर खरीदा।

यह सोसाइटी बहुत बड़ी और आलीशान थी। बड़े-बड़े बंगले, हरे-भरे गार्डन और हर जगह चमकती रोशनी।

इसी सोसाइटी में सुमित नोमानी भी रहते थे, जो विवेक रैणावत के पुराने दोस्त थे।

जब विवेक अपने परिवार के साथ वहां रहने आए तो दोनों परिवारों की दोस्ती धीरे-धीरे और गहरी हो गई।

सुमित जी की पत्नी नेहा नोमानी भी बहुत मिलनसार और खुशमिजाज महिला थीं।

कुछ ही दिनों में दोनों परिवार एक-दूसरे के घर आना-जाना शुरू हो गया।

लेकिन एक इंसान था जिसे यह सब बिल्कुल पसंद नहीं था।

वह थी इशानी।

उसे नए लोगों से मिलना, उनके घर जाना या उनसे बात करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था।

वह अक्सर कोई न कोई बहाना बना देती।

“मॉम… मेरा होमवर्क है।”

“मॉम… मुझे सिर दर्द हो रहा है।”

या फिर—

“मॉम… मुझे कहीं नहीं जाना।”

माया रैणावत उसकी इस आदत को देखकर कभी-कभी परेशान हो जाती थीं।

एक दिन दिवाली का त्योहार था।

पूरी सोसाइटी रंग-बिरंगी लाइट्स से चमक रही थी।

हर घर के बाहर रंगोली बनी हुई थी। हवा में मिठाइयों और फूलों की खुशबू घुली हुई थी।

शाम के समय सुमित नोमानी के घर पर एक बड़ी दिवाली पार्टी रखी गई थी।

सुमित जी ने अपने खास दोस्तों और पड़ोसियों को बुलाया था।

माया ने इशानी को आवाज लगाई—

“इशानी… जल्दी तैयार हो जाओ। हमें नोमानी हाउस जाना है।”

इशानी अपने कमरे में बैठी किताब पढ़ रही थी।

उसने तुरंत कहा—

“मॉम… मैं नहीं जाऊंगी।”

माया ने सख्ती से कहा—

“हर बार ऐसा नहीं चलेगा। वो लोग हमारे इतने अच्छे दोस्त हैं।”

इशानी ने धीरे से कहा—

“मुझे वहां अच्छा नहीं लगता।”

माया उसके पास आईं और प्यार से बोलीं—

“बस थोड़ी देर के लिए चलो। फिर हम वापस आ जाएंगे।”

काफी समझाने के बाद आखिरकार इशानी तैयार हो गई।

उसने हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना। उसके बाल आधे खुले थे और माथे पर छोटी सी बिंदी।

वह बहुत प्यारी लग रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर अभी भी हल्की झुंझलाहट थी।

कुछ देर बाद रैणावत परिवार नोमानी हाउस पहुंचा।

नोमानी हाउस रोशनी से जगमगा रहा था।

दरवाजे पर सुंदर रंगोली बनी हुई थी और चारों तरफ दीये जल रहे थे।

जैसे ही वे अंदर पहुंचे, नेहा नोमानी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

“अरे माया… विवेक… आओ-आओ।”

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

फिर उनकी नजर इशानी पर गई।

“अरे… ये हमारी छोटी सी इशानी है ना?”

इशानी हल्का सा मुस्कुराई लेकिन कुछ बोली नहीं।

नेहा ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा।

“कितनी प्यारी लग रही हो।”

घर के अंदर पार्टी चल रही थी। लोग बातें कर रहे थे, बच्चे खेल रहे थे और बैकग्राउंड में हल्का म्यूजिक बज रहा था।

इशानी को वहां थोड़ी अजीब सी फीलिंग हो रही थी।

वह भीड़ से दूर एक कोने में जाकर खड़ी हो गई।

उसी समय सीढ़ियों से कोई नीचे उतर रहा था।

लंबा कद, आत्मविश्वास से भरा हुआ चेहरा और हल्की सी मुस्कान।

वह था विधुत नोमानी।

उस समय वह लगभग 18 साल का था।

विधुत अपने दोस्तों के साथ हंसते-बोलते नीचे आ रहा था।

जैसे ही उसकी नजर कमरे में खड़ी छोटी सी लड़की पर पड़ी, वह कुछ सेकंड के लिए रुक गया।

वह लड़की बाकी बच्चों से अलग थी।

ना वह शोर कर रही थी… ना खेल रही थी… बस चुपचाप खड़ी थी।

विधुत धीरे-धीरे उसकी तरफ आया।

इशानी उसे आते देख थोड़ी घबरा गई।

वह तुरंत नीचे देखने लगी।

विधुत उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

“हाय।”

इशानी ने धीरे से ऊपर देखा।

“हाय…”

उसने बहुत हल्की आवाज में कहा।

विधुत ने मुस्कुराते हुए पूछा—

“तुम विवेक अंकल की बेटी हो ना?”

इशानी ने सिर हिला दिया।

“हाँ।”

“नाम क्या है?”

“इशानी।”

विधुत हल्का सा हंसा।

“इतनी धीरे क्यों बोल रही हो… क्या मैं इतना डरावना हूं?”

इशानी थोड़ा घबरा गई।

“नहीं…”

विधुत ने मजाक में कहा—

“तो फिर ऐसे क्यों खड़ी हो जैसे टीचर ने क्लास में पकड़ लिया हो?”

इशानी को उसकी बात सुनकर हल्की सी हंसी आ गई।

विधुत ने पहली बार उसकी मुस्कान देखी।

उसने सोचा—

ये लड़की सच में बहुत अलग है।

तभी पीछे से लक्स्या दौड़ती हुई आई।

“दीदी… आप यहां हो!”

विधुत ने हैरानी से पूछा—

“ये तुम्हारी बहन है?”

लक्स्या ने तुरंत कहा—

“हाँ… और ये बहुत ज्यादा चुप रहती है।”

इशानी ने उसे घूरा।

विधुत हंस पड़ा।

“अच्छा… तो तुम इंट्रोवर्ट हो।”

इशानी कुछ नहीं बोली।

तभी बाहर पटाखों की आवाज आई।

लक्स्या चिल्लाई—

“फायरवर्क्स!”

वह तुरंत बाहर भाग गई।

विधुत ने इशानी से कहा—

“चलो… फायरवर्क्स देखते हैं।”

इशानी थोड़ी झिझकी।

लेकिन फिर धीरे-धीरे उसके साथ बाहर चली गई।

बाहर पूरा आसमान रंग-बिरंगे पटाखों से चमक रहा था।

इशानी ने आसमान की तरफ देखा।

उसकी आंखों में चमक आ गई।

विधुत ने उसे देखा और मुस्कुराया।

“अब तो तुम थोड़ी खुश लग रही हो।”

इशानी ने धीरे से कहा—

“मुझे पटाखे अच्छे लगते हैं।”

विधुत ने मजाक में कहा—

“अच्छा… तो अगली बार पार्टी में आने से मना मत करना।”

इशानी ने कोई जवाब नहीं दिया।

लेकिन उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।

उसे नहीं पता था कि—

आज की यह छोटी सी मुलाकात…

भविष्य में उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी कहानी बनने वाली थी।

और यही से शुरू हुआ था—

एक अनकहा रिश्ता… जो आगे चलकर एक अनचाहे क्रश में बदलने वाला था।

Ye Kani kuch alag he phle to do no ne ankha pyar hota ge fir kuch esha hota he ki jo kal crush ta vo aj uska sabse bda dusman hogya he or kya vidhut or ishni ki sadi ho payegi

Samisha kar kar bata dena OK bya my lovely friends 🧡

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