My Unwanted Crush - Chapter 3
(7 Years Before)
दिवाली की रात धीरे-धीरे और भी खूबसूरत होती जा रही थी। आसमान में रंग-बिरंगे पटाखे चमक रहे थे और पूरी सोसाइटी रोशनी से जगमगा रही थी। हर घर के बाहर दीये जल रहे थे, रंगोली सजी हुई थी और बच्चों की हंसी पूरे माहौल को और भी खुशियों से भर रही थी।
नोमानी हाउस इस बार सोसाइटी का सबसे चमकदार घर लग रहा था। बड़े से गार्डन में लाइट्स की झालरें लगी थीं। मेहमान इधर-उधर खड़े बातें कर रहे थे, बच्चे दौड़ रहे थे और हवा में मिठाइयों की खुशबू घुली हुई थी।
गार्डन के बीच में कुछ बच्चे फुलझड़ियां जला रहे थे।
लेकिन इस शोर-शराबे से थोड़ा दूर, गार्डन के एक कोने में इशानी चुपचाप खड़ी थी।
उसकी उम्र उस समय बस तेरह साल थी। गोल-मटोल सा चेहरा, बड़ी मासूम आंखें और हल्के गुलाबी रंग का छोटा सा लहंगा पहने वह किसी गुड़िया से कम नहीं लग रही थी।
वह चुपचाप आसमान में चमकते पटाखों को देख रही थी।
जब भी कोई बड़ा पटाखा फूटता, उसकी आंखों में चमक आ जाती।
लेकिन फिर वह तुरंत शांत हो जाती।
इशानी हमेशा से ऐसी ही थी—थोड़ी इंट्रोवर्ट, थोड़ी शर्मीली, और भीड़ से दूर रहने वाली।
उसे ज्यादा लोगों के बीच रहना पसंद नहीं था।
वह बस दूर खड़ी होकर सब कुछ देखना पसंद करती थी।
उसी समय थोड़ी दूरी पर विधुत नोमानी खड़ा था।
वह अपने कुछ दोस्तों के साथ हंसते-बोलते गार्डन में आया था, लेकिन अचानक उसकी नजर उस छोटी सी लड़की पर पड़ी जो बाकी बच्चों से अलग खड़ी थी।
बाकी बच्चे शोर मचा रहे थे, दौड़ रहे थे, हंस रहे थे।
लेकिन वह लड़की बस चुपचाप आसमान देख रही थी।
विधुत ने कुछ सेकंड उसे ध्यान से देखा।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
ये लड़की बाकी बच्चों जैसी नहीं है… उसने मन ही मन सोचा।
तभी अचानक पीछे से किसी ने जोर से आवाज लगाई—
“दीदी!”
लक्स्या दौड़ते हुए आई।
उसकी उम्र लगभग दस साल थी और वह हमेशा की तरह ऊर्जा से भरी हुई थी।
वह सीधे इशानी के पास आकर बोली—
“दीदी! चलो ना… हम लोग गेम खेल रहे हैं।”
इशानी ने तुरंत सिर हिलाया।
“नहीं… मुझे नहीं खेलना।”
लक्स्या ने मुंह बनाया।
“आप हमेशा ऐसे ही करती हो। हर बार मना कर देती हो।”
इशानी ने कुछ नहीं कहा।
उसी समय पीछे से एक आवाज आई—
“कौन सा गेम?”
दोनों बहनों ने मुड़कर देखा।
विधुत वहां खड़ा था।
लक्स्या तुरंत उत्साहित हो गई।
“दीया गेम!”
विधुत ने भौंह उठाई।
“दीया गेम?”
लक्स्या हंसने लगी।
“हाँ! जो टीम सबसे जल्दी ज्यादा दीये जलाएगी… वही जीतेगी।”
विधुत ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“अच्छा… तो मैं भी खेलूंगा।”
लक्स्या की आंखों में शरारत चमक उठी।
“ठीक है… लेकिन आपकी टीम में दीदी होंगी।”
इशानी तुरंत चौंक गई।
“क्या? नहीं!”
लेकिन लक्स्या ने उसकी बात अनसुनी कर दी।
“बस… तय हो गया।”
विधुत हल्का सा हंस पड़ा।
“लगता है तुम मुझसे डर रही हो।”
इशानी ने तुरंत जवाब दिया—
“मैं किसी से नहीं डरती।”
विधुत ने मुस्कुराकर कहा—
“तो फिर गेम खेलो।”
इशानी ने मजबूरी में हामी भर दी।
गार्डन में एक टेबल पर बहुत सारे छोटे-छोटे दीये रखे हुए थे।
लक्स्या ने सबको इकट्ठा करके नियम बताए—
“हर टीम को 20 दीये जलाने हैं। जो टीम पहले पूरा करेगी… वही जीतेगी।”
दो टीमें बन गईं।
एक टीम में विधुत और इशानी
दूसरी टीम में कुछ और बच्चे।
लक्स्या ने जोर से कहा—
“रेडी… स्टार्ट!”
जैसे ही उसने कहा, सबने जल्दी-जल्दी दीये जलाने शुरू कर दिए।
इशानी थोड़ा घबरा रही थी।
वह धीरे-धीरे माचिस जलाकर एक-एक दीया जला रही थी।
लेकिन अचानक हवा का झोंका आया।
दो दीये बुझ गए।
विधुत हंस पड़ा।
“अगर तुम ऐसे धीरे-धीरे करोगी तो हम हार जाएंगे।”
इशानी ने नाराज़ होकर कहा—
“तो आप ही कर लो।”
विधुत ने तुरंत तेजी से माचिस जलाई और एक-एक करके दीये जलाने लगा।
कुछ ही मिनटों में उनकी टीम आगे निकल गई।
लक्स्या खुशी से चिल्लाई—
“और विजेता हैं… विधुत भैया और इशानी दीदी!”
सब बच्चे ताली बजाने लगे।
इशानी थोड़ी हैरान थी।
उसे उम्मीद नहीं थी कि वे जीत जाएंगे।
विधुत ने मुस्कुराकर कहा—
“देखा… हम जीत गए।”
इशानी ने धीरे से कहा—
“ये आपकी वजह से हुआ।”
विधुत ने मजाक में कहा—
“मतलब तुम मान रही हो कि मैं अच्छा हूं।”
इशानी ने तुरंत कहा—
“नहीं।”
विधुत जोर से हंस पड़ा।
उसी समय सुमित नोमानी और विवेक रैणावत वहां आ गए।
सुमित जी ने मुस्कुराकर कहा—
“अरे वाह… यहां तो प्रतियोगिता चल रही है।”
विवेक रैणावत हंसते हुए बोले—
“लगता है मेरी बेटी भी अब पार्टी एंजॉय कर रही है।”
इशानी थोड़ा शर्माने लगी।
वह तुरंत वहां से हटकर फिर से गार्डन के कोने में चली गई।
विधुत भी धीरे-धीरे उसके पीछे चला गया।
“तुम इतनी चुप क्यों रहती हो?” उसने पूछा।
इशानी ने धीमे स्वर में कहा—
“बस… मुझे ज्यादा बात करना पसंद नहीं।”
विधुत ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“लेकिन जब तुम हंसती हो ना… तब अच्छा लगता है।”
इशानी ने तुरंत नजरें झुका लीं।
कुछ सेकंड दोनों चुप रहे।
तभी आसमान में एक बहुत बड़ा पटाखा फूटा।
पूरा आसमान सुनहरी रोशनी से भर गया।
इशानी की आंखें चमक उठीं।
“वाह…”
उसने धीरे से कहा।
विधुत उसे देखता रहा।
उसने मन ही मन सोचा—
ये लड़की सच में बहुत अलग है…
तभी लक्स्या फिर से दौड़ती हुई आई।
“दीदी! मॉम आपको बुला रही हैं।”
इशानी ने सिर हिलाया।
वह धीरे-धीरे घर के अंदर चली गई।
विधुत वहीं खड़ा रहा।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि—
क्यों एक छोटी सी, चुप रहने वाली लड़की ने उसका ध्यान इतना खींच लिया।
लेकिन शायद उसी पल…
उसके मन में एक छोटी सी जिज्ञासा जन्म ले चुकी थी।
उसे क्या पता था कि—
आज की यह छोटी सी मुलाकात…
आने वाले सालों में उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी कहानी बनने वाली थी।
और वही छोटी सी, मासूम लड़की…
एक दिन उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा अनचाहा क्रश बनने वाली थी। apko vidhut ka character kesha laga comment karke batana mat bhulna . Apko is story ke update ke liye muje follow karna mat bhulna