My Unwanted Crush - Chapter 1
सुबह का समय था। रैणावत हाउस हमेशा की तरह शांत और सलीके से सजा हुआ था। बड़े से लिविंग रूम में हल्की सुनहरी धूप खिड़कियों से अंदर आ रही थी। दीवारों पर लगी खूबसूरत पेंटिंग्स, कोनों में रखे सफेद लिली के फूल और बीच में रखा ग्लास सेंटर टेबल पूरे घर की शान बढ़ा रहे थे।
रैणावत परिवार शहर के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक था। उनका घर हमेशा सादगी और शाहीपन का बेहतरीन मेल दिखाता था।
सोफे पर माया रैणावत बैठी थीं। उनके सामने उनकी बचपन की दोस्त नेहा नोमानी बैठी हुई थीं। दोनों के हाथ में गर्म चाय के कप थे।
दोनों के चेहरों पर पुरानी दोस्ती की वही सच्ची मुस्कान थी।
नेहा ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा—
“माया… कितना समय हो गया ना… हम लोग ऐसे आराम से बैठकर बातें भी नहीं कर पाए।”
माया हल्के से मुस्कुराईं।
“हाँ नेहा… जिंदगी इतनी व्यस्त हो गई है कि कभी-कभी लगता है वक्त ही हाथ से निकल गया।”
नेहा ने कमरे की सजावट को देखते हुए कहा—
“वैसे तुम्हारा घर अभी भी उतना ही खूबसूरत है जितना पहले था।”
माया हंस पड़ीं।
“घर तभी खूबसूरत लगता है नेहा… जब उसमें अपनों की हंसी गूंजती रहे।”
दोनों पुरानी यादों में खोकर बातें कर ही रही थीं कि तभी ऊपर की मंजिल से किसी के तेज कदमों की आवाज आई।
कुछ ही सेकंड बाद सीढ़ियों से नीचे उतरती हुई लक्स्या दिखाई दी।
लक्स्या, इशानी की छोटी बहन थी। चेहरे पर हमेशा शरारती मुस्कान रहती थी और आंखों में चमक।
उसके हाथ में फोन था और चेहरे पर ऐसा एक्सप्रेशन जैसे उसे कोई बहुत बड़ा राज पता चल गया हो।
“मॉम… मॉम…”
उसने नाटकीय अंदाज में आवाज लगाई।
माया ने उसे देखते ही थोड़ा सख्त होकर कहा—
“लक्स्या… फिर से तुमने हमारी बातें सुनी?”
लक्स्या हंस पड़ी।
“अरे मॉम… मैं जासूसी नहीं कर रही थी… बस सुनाई दे गया।”
नेहा ने मुस्कुराकर पूछा—
“अच्छा… क्या सुनाई दे गया?”
लक्स्या ने ड्रामेटिक अंदाज में दोनों की तरफ देखा और बोली—
“आप लोग दीदी की शादी की बात कर रहे हो… और वो भी विधुत नोमानी के साथ।”
इतना सुनते ही कमरे में कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
माया ने गहरी सांस ली और नेहा की तरफ देखा।
“हाँ… हम यही बात कर रहे थे।”
अभी ये बात खत्म भी नहीं हुई थी कि तभी ऊपर से गुस्से भरे कदमों की आवाज आई।
सीढ़ियों से तेजी से उतरती हुई इशानी रैणावत दिखाई दी।
उसके चेहरे पर साफ गुस्सा था। उसकी बड़ी-बड़ी आंखों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी।
जैसे ही वह नीचे आई, उसने बिना किसी भूमिका के कहा—
“मैं ये शादी नहीं करूंगी।”
उसकी तेज आवाज पूरे लिविंग रूम में गूंज गई।
माया और नेहा दोनों चौंक गईं।
“इशानी…” माया ने उसे शांत करने की कोशिश की।
लेकिन इशानी का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था।
“मॉम… आपने मुझसे पूछा तक नहीं… और मेरी शादी की बात भी पक्की कर दी?”
नेहा ने नरमी से कहा—
“बेटा… हम तो बस बात कर रहे थे…”
लेकिन इशानी ने उनकी बात बीच में ही काट दी।
“माया आंटी को पूरी दुनिया में कोई और लड़की नहीं मिली क्या… जो अपने बेटे की शादी मेरे गले में डालने आ गईं?”
उसकी बात सुनकर नेहा का चेहरा थोड़ा उतर गया।
माया तुरंत सख्त हो गईं।
“इशानी! ये क्या तरीका है बात करने का?”
इशानी ने गुस्से से कहा—
“मॉम… मैं अभी LLB सेकंड ईयर में हूं। मेरी पढ़ाई चल रही है। मुझे अभी शादी नहीं करनी।”
लक्स्या चुपचाप पूरा ड्रामा देख रही थी।
वह हंसी रोकने की कोशिश कर रही थी।
नेहा ने प्यार से कहा—
“इशानी… तुम गलत समझ रही हो। हम लोग सिर्फ एक रिश्ता देख रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं है।”
लेकिन इशानी का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था।
“और वो भी विधुत नोमानी!”
उसने नाम ऐसे लिया जैसे उसे उससे बहुत चिढ़ हो।
“वो मुझसे छह साल बड़ा है… और ऊपर से उसका एटीट्यूड… उफ्फ।”
लक्स्या तुरंत बोली—
“अरे दीदी… इतना भी बुरा नहीं है जीजू।”
इशानी ने उसे घूरा।
“लक्स्या… तुम चुप रहो।”
लक्स्या हंसते हुए बोली—
“पर दीदी… बचपन से तो आप दोनों फैमिली फ्रेंड हो ना।”
इशानी ने झुंझलाकर कहा—
“फैमिली फ्रेंड होना और शादी करना अलग बात है।”
नेहा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“विधुत अब पहले जैसा नहीं है। वह बहुत जिम्मेदार हो गया है।”
माया ने भी हामी भरी।
“हाँ इशानी… अब वह अपने पापा सुमित नोमानी का बिजनेस संभाल रहा है।”
इशानी ने ताना मारा—
“अच्छा… तो अब वो बहुत बड़े बिजनेसमैन बन गए?”
लक्स्या फिर हंस पड़ी।
“दीदी… आपको पता है… पूरे शहर की आधी लड़कियां तो उन पर क्रश रखती हैं।”
इशानी ने चिढ़कर कहा—
“तो उन्हीं में से किसी से शादी करवा दो ना।”
माया ने सख्ती से कहा—
“इशानी बस।”
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
नेहा ने धीरे से कहा—
“बेटा… अगर तुम्हें सच में ये रिश्ता पसंद नहीं है तो हम आगे बात नहीं करेंगे।”
इशानी कुछ सेकंड तक चुप रही।
फिर उसने धीरे लेकिन साफ आवाज में कहा—
“मुझे किसी से भी शादी नहीं करनी… अभी नहीं।”
इतना कहकर वह तेज कदमों से वहां से चली गई।
उसके जाने के बाद लक्स्या धीरे से बोली—
“ड्रामा क्वीन।”
माया ने उसे घूरा।
“लक्स्या!”
वह तुरंत चुप हो गई।
नेहा ने हल्की सांस ली।
“शायद हम लोगों ने जल्दी कर दी।”
माया ने दुखी होकर कहा—
“मैं तो बस चाहती थी कि मेरी बेटी की जिंदगी सुरक्षित हो।”
उसी समय घर के बाहर एक ब्लैक लग्जरी कार आकर रुकी।
कार का दरवाजा खुला।
उसमें से एक लंबा, स्मार्ट और बेहद कॉन्फिडेंट आदमी बाहर निकला।
विधुत नोमानी।
उसकी आंखों में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।
ब्लैक सूट में वह किसी फिल्म स्टार से कम नहीं लग रहा था।
उसने घर की तरफ देखा और हल्की मुस्कान उसके होंठों पर आ गई।
“तो… मिस इशानी रैणावत…”
उसने धीमे से कहा।
“देखते हैं… तुम मुझसे शादी से इतना भाग क्यों रही हो।”
वह धीरे-धीरे घर की तरफ बढ़ा।
उसे बिल्कुल नहीं पता था कि अंदर अभी-अभी उसकी वजह से कितना बड़ा तूफान खड़ा हुआ है।
और शायद…
वह खुद भी उस तूफान का सबसे बड़ा कारण बनने वाला था।
और यही से शुरू होने वाली थी—
एक ऐसी कहानी… जिसमें नफरत, तकरार और अनजाने में पनपने वाला एक अनचाहा क्रश छुपा था।