Chapter 174
महताबे हयात! - Chapter 174
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बढ़ते है कहानी की ओर--- रफीक हाशिम लाउंज में बैठे इशाल को देख रहे थे , जो सबको उनका काम समझाते हुए अपना खाना खा रहीं थी । रफीक हाशिम कुछ माने या ना माने , मगर वह यह बात जरूर मानते