I Want You Ch. 2

I Want You - Chapter 2

Posted by okenja • Mar 11, 2026 01:40 PM

​अहमदाबाद की दोपहर जितनी सुनहरी और शांत दिख रही थी, अर्चना के आलीशान बंगले के भीतर का माहौल उतना ही भारी और तनावपूर्ण होने वाला था। खिड़की से छनकर आती धूप कमरे के कालीन पर नाच रही थी, जहाँ हेतु (हितवंशी राजावत) अपनी चचेरी बहन अर्चना के साथ बैठी थी। 15 साल की मासूम हेतु, जिसकी आँखों में दुनिया के लिए सिर्फ कौतूहल और सपने थे, वह अर्चना के कॉलेज प्रोजेक्ट्स की रंगीन फाइलों को बड़े चाव से देख रही थी।

​हेतु के मन में दूर-दूर तक किसी डर का साया नहीं था। उसे क्या पता था कि इसी शहर के सबसे रसूखदार, रईस और जुनूनी इंसान, उर्मिश राव की तीखी और शिकारी नज़रें उस पर गड़ चुकी हैं। उर्मिश, जो 28 साल की उम्र में कामयाबी के शिखर पर था, लेकिन जिसका दिल एक अंधेरे जुनून की गिरफ्त में था।

​तभी बंगले के लोहे के भारी गेट खुलने की आवाज़ आई। नीचे एक काली चमचमाती लग्जरी कार आकर रुकी। कार का दरवाजा खुला और उससे एक विदेशी कद-काठी का आदमी उतरा। उसका शरीर कसरती था, जिसे एक महंगे डार्क सूट ने पूरी तरह ढक रखा था। चेहरे पर पत्थर जैसी कठोरता थी और आँखों में एक अजीब सी ठंडी चमक, जो किसी को भी असहज कर दे। यह लियोन थॉमसन था—उर्मिश राव का सबसे खास, सबसे वफादार और सबसे खतरनाक आदमी। उर्मिश अक्सर अपने हाथ गंदे करने से पहले लियोन को शतरंज के एक वजीर की तरह आगे बढ़ाता था।

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​अर्चना के पिता उस वक्त घर पर नहीं थे। नौकरों ने लियोन के रुतबे और उसके साथ आए बॉडीगार्ड्स को देखकर उसे ससम्मान ड्राइंग रूम में बैठाया। ऊपर कमरे में बैठी अर्चना को जब नौकर ने खबर दी कि कोई बहुत खास और गंभीर दिखने वाला मेहमान आया है, तो वह थोड़ा हैरान हुई।

​"हेतु, तू यहीं रुक, मैं देख कर आती हूँ कौन है। शायद पापा का कोई बिजनेस क्लाइंट होगा," अर्चना ने अपनी छोटी बहन के गाल थपथपाते हुए मुस्कुराकर कहा।

​हेतु ने मासूमियत से सिर हिला दिया। लेकिन जैसे ही अर्चना कमरे से बाहर निकली, हेतु के सीने में एक अजीब सी हलचल हुई। उसके हाथ-पैर अचानक ठंडे पड़ने लगे। उसे वही अनजाना सा डर महसूस हुआ जो कुछ दिन पहले बाज़ार में खरीदारी करते वक्त हुआ था—ऐसा अहसास जैसे कोई उसे लगातार देख रहा हो।

​जिज्ञासा और एक अनजाने डर के वशीभूत होकर, हेतु दबे पाँव सीढ़ियों तक आई। वह सीढ़ियों के पास लगी नक्काशीदार रेलिंग के पीछे छिप गई और नीचे झाँकने लगी। नीचे का दृश्य उसे किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा था, लेकिन यहाँ खतरा असली था।

​ड्राइंग रूम के बीचों-बीच लियोन थॉमसन खड़ा था। उसका खड़ा होने का अंदाज़ किसी मेहमान जैसा नहीं, बल्कि एक ऐसे शिकारी जैसा था जिसने अपना इलाका पहले ही चिह्नित कर लिया हो।

​"मिस अर्चना," लियोन की भारी और कर्कश आवाज़ पूरे हॉल में गूँजी। "मुझे उम्मीद है आप मुझे पहचानती होंगी। मैं उर्मिश राव सर का पर्सनल सेक्रेटरी और उनका दायां हाथ हूँ।"

​अर्चना की मुस्कुराहट गायब हो गई। वह थोड़ा झिझकी और उसके चेहरे पर घबराहट की लकीरें उभर आईं। वह जानती थी कि उर्मिश उसकी सहेली निया का भाई है, लेकिन उसने यह भी सुन रखा था कि उर्मिश राव को 'ना' सुनना पसंद नहीं है और वह जो चाहता है, उसे पाकर ही रहता है।

​"जी... जी कहिए? सब ठीक तो है? निया कैसी है? अचानक आपका यहाँ आना...?" अर्चना ने संभलते हुए पूछा।

​लियोन ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने धीरे से अपनी कोट की अंदरूनी जेब से एक फोटो निकाली। वह हेतु की वही तस्वीर थी जो उस दिन निया के बर्थडे पर गुपचुप तरीके से ली गई थी। फोटो में हेतु अपनी सहेली अर्चना के साथ खिलखिलाकर हंस रही थी।

​"निया ठीक है। लेकिन उर्मिश सर को एक बहुत ज़रूरी जानकारी चाहिए," लियोन ने फोटो अर्चना की ओर बढ़ाते हुए कहा। "यह लड़की... हितवंशी राजावत। हमें पता चला है कि यह आपकी सगी रिश्तेदार है और अभी इसी शहर में, आपके पास है। क्या यह सच है?"

​सीढ़ियों के पीछे छिपी हेतु का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसका गला सूख गया। 'मेरा नाम? मेरी तस्वीर?' उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शहर का इतना बड़ा आदमी उसके बारे में पूछ रहा है।

​लियोन एक कदम और आगे बढ़ा और एक चमचमाता हुआ विजिटिंग कार्ड टेबल पर पटक दिया। "सर का सख्त हुक्म है। अगर आपको इस लड़की की लोकेशन के बारे में ज़रा भी भनक लगे, या यह आपको कहीं भी दिखे, तो आप बिना एक पल गंवाए इस नंबर पर फोन करेंगी। यह उर्मिश सर का पर्सनल नंबर है। याद रहे, सर को 'ना' सुनना पसंद नहीं है और काम में देरी तो उन्हें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं।"

​लियोन की आवाज़ में एक छिपी हुई धमकी थी जो हवा में जहर की तरह घुल रही थी। अर्चना बुरी तरह हैरान और परेशान थी। "पर... उर्मिश भाई को हेतु से क्या काम? वो तो अभी महज 15 साल की है, एक बच्ची है। अभी तो वो ठीक से दुनिया भी नहीं जानती।"

​लियोन ने एक फीकी और डरावनी मुस्कान दी। "सर को क्या काम है, यह पूछने की जुर्रत तो मैं भी नहीं करता। बस इतना जान लीजिए कि वो उसे ढूंढ रहे हैं... पागलों की तरह। उर्मिश सर ने उसे एक बार देख लिया है, और अब वो उसे अपना बनाने की जिद ठाने बैठे हैं। अगर आपने मदद की, तो राव खानदान के साथ आपके परिवार के ताल्लुक बहुत मज़बूत होंगे। और अगर नहीं..."

​लियोन ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी, लेकिन उसकी आँखों की चमक ने सब कुछ बयां कर दिया।

​खौफ का साया और पलायन

​ऊपर छिपकर सुन रही हेतु के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई। उसे चक्कर आने लगे और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। अतीत की धुंधली यादें बिजली की तरह उसके दिमाग में कौंधीं। उसे याद आया कि कैसे निया के बर्थडे की रात एक शख्स उसे लगातार घूर रहा था। उसकी वो बर्फ जैसी ठंडी आँखें, चेहरे का वो बेखौफ और कठोर भाव, और वो रसूख—वही उर्मिश राव था!

​‘वो मुझे ढूंढ रहा है... पागलों की तरह?’ हेतु का पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो गया। 15 साल की उस मासूम उम्र में उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई अजनबी उसके पीछे इस कदर पड़ सकता है। उसे लगा कि वह किसी मकड़ी के जाल में फंस गई है। उसे डर था कि अगर अर्चना ने उसे अभी नीचे बुला लिया, तो वह भयानक आदमी उसे वहीं पकड़ लेगा और कभी वापस नहीं जाने देगा।

​बिना एक पल गंवाए, हेतु पीछे मुड़ी। उसे पता था कि अर्चना के कमरे का पिछला हिस्सा एक छोटे गलियारे से जुड़ा है जो नौकरों के रास्ते से सीधे घर के पिछले गेट पर निकलता है। उसका दम घुट रहा था। उसे बस एक ही बात समझ आ रही थी—उसे यहाँ से भागना है। उसे अपने घर पहुँचना है, अपने पापा विजय शंकर की गोद में छिपना है और अपने भाई अपूर्व के पीछे खड़ा होना है।

​उसने थरथराते हाथों से अपना बैग उठाया। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। वह कमरे की खिड़की के पास वाले गुप्त रास्ते से नीचे उतरी और बिना पीछे मुड़कर देखे, बंगले के पिछले गेट से बाहर भाग निकली।

​दोपहर की सड़कों पर भीड़ थी, लेकिन हेतु को हर चेहरा उर्मिश राव जैसा लग रहा था। उसे लग रहा था कि हर काली कांच वाली कार उसका पीछा कर रही है। हर अजनबी आदमी उसे लियोन थॉमसन जैसा महसूस हो रहा था। उसके कानों में लियोन के शब्द बार-बार गूँज रहे थे— "वो उसे ढूंढ रहे हैं... पागलों की तरह।"

​दौड़ते-दौड़ते उसके पैर थक चुके थे, लेकिन डर उसे रुकने नहीं दे रहा था। वह बस इतना जानती थी कि उसे इस शहर से, इस जुनून से बहुत दूर चले जाना है। उसे अहसास हो गया था कि उर्मिश राव की वो एक झलक उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बनने वाली थी।

​हेतु ने एक ऑटो रिक्शा पकड़ा और उसे बस स्टैंड की तरफ चलने को कहा। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी, जैसे कोई अदृश्य साया उसे छूने ही वाला हो। 15 साल की हेतु की मासूमियत अब खौफ में बदल चुकी थी, और उसे बचाने के लिए उसके पास सिर्फ उसका परिवार था। लेकिन क्या उसका परिवार उस इंसान का मुकाबला कर पाएगा जिसके पास सत्ता, पैसा और एक खतरनाक जुनून था?

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