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Chapter 143

अनचाहा गठबंधन ✨ - Chapter 143

ललिता ने आंखे में आंखे डाल कर कहा विशाखा आवक सो बस देखती रह गई ललिता अपनी बात  कह वहां से निकल गई बाकी तीर्थ दीप्ति भी  पीछे पीछे गए विशाखा बस खड़ी रह गई अपनी जगह पर मुट्ठी कस गई चाभियों पर ।

अब आगे ...

घर में आए इवान ईवा को दिन भी नहीं गुजारा बवाल शुरू हो चुका था हर जगह से.... वही मंजरी जी की तबियत थोड़ी पहले से खराब थी तो उधम जी नहीं चाहते वो किसी बात की फिकर करे ।

क्योंकि विशाखा को समझाने के लिए हर एक चीज़ कर के देख चुके है वो नहीं सुनने वाली है अब वो इतने बुरे तो नहीं  है विशाखा को घर से बाहर फेक दे उनकी बहु है बेटी बना कर लाए थे।

विशाखा सब से चहेती थी उनकी लेकिन वो ऐसा कुछ करेंगी उन्हें पता नहीं था ओर वही विशाखा उनके प्रति साजिश नहीं कर रही खाना नहीं दे रही पानी नहीं दे रही यह वो अपने बेटे के लिए प्यार ज्यादा दिखा रही है जो कि  सही नहीं है ।

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