अनचाहा गठबंधन ✨ - Chapter 142
दरवाजे पर तो विशाखा गुस्से में खड़ी थी सारा तीर्थ घबरा कर ललिता के पीछे खड़े हो गए इधर सारा अपने कमरे में सोफे पर आराम से बैठी थी पहले जो डर रोना बाते थी उसके चेहरे जबान पर आंखों में कुछ दिखाई नहीं दे रहा वो बिल्कुल कूल थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं ओर फोन पर किसी से बात करते हुए बोली " जी डॉक्टर....
अब आगे ....
विशाखा गुस्से भरी आंखों से दोनो को देख रही थी दोनो घबरा गए थे ललिता विशाखा ओर तीर्थ दीप्ति के बीच में खड़ी थी वो विशाखा से बोली " जीजी .... जो हुआ ...
"तुम्हारे कहने पर हुआ मै ये बात जानती हूं ललिता मुझे बताने की जरूरत नहीं हैं तुम्हे मुझसे बेहतर कोई जान ही नहीं सकता तुम कितनी चालाक औरत हो जहां फायदा होता है वही पलट जाती हो जैसे बेटी का फायदा हुआ तो मै दुश्मन हो गई "
बीच में विशाखा बड़े अजीब भाव से बोली ललिता चुप हो गई । विशाखा के बातो में गुस्सा ओर उसके ऊपर हंसना दोनो ही था ।
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