क्या प्यार करोगे मुझसे? - Chapter 3
स्टेशन पर उतरते ही फलक ने माही का हाथ पकड़ा और आगे बढ़ गई। चलते चलते ही उसने अपने हाथ में पकड़ा बैग खोल कर देखा। तो उसमें कुछ पैसे और एक छोटा सा कि पैड वाला मोबाइल था। फलक वहीं एक बेंच पर बैठ गई और माही को अपने पास बिठा दिया। फलक ने सबसे पहले नैना को कॉल कर अपने पहुंचने की खबर दी तो नैना ने उसे एक नाम बताया! "अंजली!" अंजली नैना की फ्रेंड थी। जो देहरादून से थी। उसकी हेल्प से उसने फलक के लिए एक रेंट का रूम ढूंढ दिया था और एक रेस्टोरेंट में वेट्रेस की जॉब भी। ये सुन कर फलक और ज्यादा भावुक हो गई। उसकी फ्रेंड उसके लिए इतना कुछ कर रही थी।
"थैंक यू नैना! थैंक यू सो मच।" फलक ने अपनी आँखों में आई नमी साफ करते हुए कहा।
"अब सेंटी मत हो! मैं कुछ दिनों में आती हुं तुमसे मिलने।" इतना कह नैना ने कॉल एंड कर दिया और अब फलक ने माही की तरफ देखते हुए कहा। "तुम्हें अपने घर का नंबर पता है?"
माही ने फौरन हां में अपना सिर हिला दिया। तो फलक ने नंबर डॉयल किया और माही को पकड़ा दिया।
कुछ रिंग के बाद ही दूसरी तरफ से किसी ने कॉल रिसीव कर लिया और सामने से एक गंभीर आवाज उभरी। जो किसी लड़की की थी।
"हैलो दी! मैं माही।" माही ने आवाज सुनते ही कहा।
"माही तुम! तुम्हें हॉस्टल में फोन किसने दिया।" सामने से नाराजगी भरी आवाज उभरी।
"दी मैं हॉस्टल में नहीं हुं। मैं स्टेशन में हुं।" माही ने डरते हुए कहा।
"क्या! तु..... तुम! कौन से स्टेशन में हो जल्दी बताओ मैं अभी आती हुं।" सामने वाले ने अपना गुस्सा किसी तरह कंट्रोल करते हुए कहा।
"मैं देहरादून स्टेशन में हुं दी!" माही धीरे से बोली। तो सामने से कॉल एंड हो गया।
माही ने फोन फलक की तरफ बढ़ा दिया।
"क्या हुआ?" फलक ने फोन अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"दी आ रही है, वो गुस्से में है।" माही ने मायूसी से कहा।
"ऐसा तो होना ही था। तुमने इतनी बड़ी गलती जो की है, उन्हें तुम्हारी फिक्र हो रही होगी।" फलक ने कहा तो माही का चेहरा और लटक गया।
लगभग दस मिनट बाद एक गाड़ी स्टेशन पर आ कर रुकी और एक लड़की उसमे से तेज़ी से बाहर आई। हल्की गोरी रंगत लिए वो लड़की खूबसूरत लग रही थी। परेशान सी वो लड़की तेज़ी से अंदर आई और अपनी नजरें इधर उधर दौड़ाने लगी।
वहीं बेंच पर बैठी माही की नज़र जैसे ही उस लड़की पर पड़ी। वो चीख पड़ी। "दी!"
आवाज सुनते ही उस लड़की ने माही की तरफ देखा और तभी माही की नजरों का पीछा करते हुए फलक ने भी उस तरफ देखा। सामने उसकी हम उम्र एक लड़की खड़ी थी।
फलक भी अपनी जगह से माही साथ खड़ी हो गई और वो लड़की उनके पास आ गई।
उस लड़की ने फलक को गौर से देखते हुए कहा। "फलक! राइट....?"
फलक हैरानी से अपनी आँखें बड़ी कर उस लड़की को देखने लगी।
"इतना हैरान होने की जरूरत नहीं है, मुझे नैना ने तुम्हारी तस्वीर भेजी थी। उसने बताया होगा तुम्हें मेरे बारे में, मेरा नाम अंजली है।" अंजली ने अपना इंट्रोडक्शन देते हुए कहा तो फलक के फेस पर हल्की सी स्माइल आ गई।
"और तुम.......!" अंजली ने गुस्से से माही के कान पकड़ते हुए कहा।
"दी सॉरी! प्लीज माफ कर दो! पर मुझे वापस जाने के लिए मत कहना। मुझे बस आपके साथ रहना है, प्लीज दी।" कहते कहते माही के आंसु बहने लगे। ये देख कर अंजली ने उसके कान को छोड़ दिया। और उसके सामने झुकते हुए बोली। "माही! मैने कितनी बार कहा है, तुम्हारा यूं अकेले निकलना सेफ नहीं है, तुम मेरी सुनती क्यों नहीं। अगर आज दीदी तुम्हारे साथ नहीं होती तो?" अंजली ने माही को अपने सीने से लगा लिया।
माही ने भी अपना सिर अंजली के सीने में छुपा लिया।
_______________
कुछ देर बाद अंजली की गाड़ी एक छोटे से मगर खूबसूरत बगीचे के बीच बने घर के आगे रुकी। गाड़ी के रुकते ही सामने से अंजली और माही बाहर आए और पीछे से फलक।
"ये है हमारा घर! ऊपर एक रूम खाली है, तुम वहां रह सकती हो! वैसे भी मैं अकेले ही रहती हुं।" अंजली ने मुस्कुरा कर कहा और माही का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ गई और उसके पीछे अपना छोटा सा बैग लिए फलक।
_____________________
"ये तुम्हारा रूम! तुम फिलहाल मेरे कपड़े यूज कर सकती हो।" माही ने मुस्कुरा कर कहा। पर फलक अब भी खामोश थी। उसे तो सब सपने सा लग रहा था।
"तुम्हारी फैमिली.......!" फलक अंजली से कुछ कहना चाहती थी। पर कह ही नहीं पा रही थी।
"डॉन्ट वरी! मुझे नैना ने सब बता दिया है और वैसे भी यहां मेरे और मेरी बहन के सिवाय कोई नहीं रहता और अब तुम भी हो।" अंजली ने मुस्कुरा कर कहा तो फलक के होंठो पर भी स्माइल आ गई।
ये दिन यूहीं बीत गया। रात में एक सुकून भरी नींद के बाद जब फलक ने अपनी आँखें खोली तो उसे बेहद अच्छा महसूस हुआ। आज से उसकी लाइफ की नई शुरुवात होनी थी। वो जल्दी से नहा कर रेडी हो गई और नीचे आई।
नीचे माही और अंजली उसी का वेट कर रहे थे।
हल्के गुलाबी रंग का सिंपल सा सूट पहने फलक काफी खूबसूरत लग रही थी। बस उसके चेहरे पर एक स्माइल की ही कमी थी।
"क्या मैं लेट हुं?" फलक ने उनकी तरफ देखते हुए मासूमी से पूछा।
"नहीं! हम बस अभी ही आए हैं, आओ ब्रेकफास्ट कर लो! फिर तुम्हें तुम्हारे काम वाली जगह भी छोड़ दूं। नैना ने मुझे बताया की तुम्हारे पास कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं है, तो ब मुश्किल मुझे यही जॉब मिली तुम्हारे लिए। वो रेस्टोरेंट मेरे दूर के अंकल का है तो तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। आज मैंने छुट्टी ली हुई है तो तुम्हें आज मैं वहां ड्रॉप कर दूंगी। मुझे माही का एडमिशन भी करवाना है।" अंजली ने फलक और माही को ब्रेकफास्ट सर्व करते हुए कहा तो माही और फलक मुस्कुरा दी।
तीनों ने अपना ब्रेकफास्ट किया और घर को लॉक कर के बाहर निकल गई।
अंजली ने सबसे पहले फलक को रेस्टोरेंट में छोड़ा और वहां के मैनेजर से बात कर के वो माही के साथ वहां से चली गई।
फलक ने अपने आप को रिलैक्स किया और अपने काम में लग गई।
To be continue:-