क्या प्यार करोगे मुझसे? Ch. 2

क्या प्यार करोगे मुझसे? - Chapter 2

Posted by Divya yadav • Oct 11, 2025 04:18 PM

फलक का वहां रहना लगभग नामुमकिन था। वो उसी पल नैना के घर से चली जाना चाहती थी पर नैना ने उसे रोक लिया।

ये रात बहुत लंबी थी। फलक को नींद ही नहीं आ रही थी। वो बस आँखें मूंदे नैना के सोने का इंतजार कर रही थी। कुछ देर बाद जब उसे लगा की नैना अब सो चुकी है। तो उसने अपनी आँखें खोली और जल्दी से उठ बैठी। वो अपना दुपट्टा संभाले रूम के बाहर निकल ही रही थी की अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

फलक ने एकदम से अपनी आँखें भींच ली। उसने जल्दी से नैना की तरफ पलट कर उसे एक्सप्लेन करना चाहा। पर जैसे ही उसने नैना की आँखों में आँसू देखे। वो खामोश हो गई।

"मुझे पता है, मैं चाहे जितनी कोशिश कर लूँ। तु नहीं रुकेगी। पर जाने से पहले तुझे मेरी कुछ बातें माननी पड़ेगी। बोल! मानेगी ना?" नैना ने उम्मीद से फलक की तरफ देखा।

फलक चाह कर भी नैना को मना नहीं कर पाई और उसकी भी आँखें भर आई। उसने फौरन हां में अपनी मुंडी हिला दी।

नैना ने उसको एक छोटा सा बैग थमाते हुए कहा। "ये तु अपने पास रख और यहां से दूर चली जा। पर तुझे हमेशा मेरे टच में रहना होगा! चाहे जितनी भी मुश्किलें क्यों ना आए तेरी लाइफ में। तु कभी कोई गलत कदम नहीं उठाएगी। प्रॉमिस कर तु मेरी सारी बात मानेगी!" नैना ने अपने आंसु साफ करते हुए अपना हाथ आगे बढाया। तो फलक कभी उसके हाथ को तो कभी उसके चेहरे को देखती।

"प्रॉमिस मि?" नैना ने दोबारा कहा।

"पर नैना.....?" फलक ने कुछ कहना चाहा तो नैना ने उसे टोकते हुए कहा। "मुझे कुछ नहीं सुनना फलक तु बस मुझसे प्रॉमिस कर।" फलक ने हार कर उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा। "प्रॉमिस!"

नैना ने उसका हाथ खींचते हुए कहा। "फिलहाल थोड़ा सा आराम कर ले। फिर मैं तुझे नहीं रोकूंगी।" फलक ने कुछ नहीं कहा और वो नैना की बात मान गई। कुछ ही देर में दोनों गहरी नींद में थी।

अचानक फलक हड़बड़ा के उठी तो नैना अब भी सो रही थी। फलक ने उसे देख कर स्माइल दी। आखिर वही तो थी। जिसने उसे समझा उसका साथ दिया। पर वो ये बिल्कुल भी नहीं चाहती थी की उसकी वजह से उसकी फैमिली में कोई प्रॉब्लम हो। वो जल्दी से बाहर जाने लगी। तभी नैना ने उसे टोका। "तु कुछ भूल रही है फलक!"

फलक के कदम ठिठक गए। उसने पलट कर देखा तो नैना उसे घूर रही थी और उसके हाथ में वही बैग था जो नैना ने फलक को दिया था।

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कुछ देर बाद फलक और नैना रेल्वे स्टेशन पर थे। नैना ने फलक को टिकट थमाते हुए कहा। "ये ले टिकिट! पहुंच के कॉल करना तुम्हारे बैग में फोन है।"

नैना की बात सुनकर फलक ने हैरानी से उसे देखा। तभी ट्रेन की आवाज सुन नैना ने फलक की हैरान आँखें इग्नोर की और उसे ट्रेन में चढ़ने का इशारा किया।

फलक की आँखें नम हो गई। उसने झट से नैना को अपने गले से लगा लिया। "चल अब सेंटी मत हो और जल्दी जा वरना ट्रेन मिस हो जायेगी।" फलक हल्के से मुस्कुरा दी और नैना को बाय कह वो ट्रेन में सवार हो गई।

कुछ ही पलों में वो ट्रेन नैना की आँखों से ओझल हो गया। "ये नया सफर तेरी लाइफ में सिर्फ खुशियाँ ही लाए।" नैना ने कहा और वहां से चली गई।

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खिड़की के पास बैठी फलक की नज़रें बाहर थी। वो खामोशी से अपने शहर को पीछे छूटते हुए देख रही थी। वहीं उसके सामने वाली सीट पर एक लड़की बैठी थी। उसकी उम्र लगभग चौदह से पंद्रह साल की थी। छोटा सा खूबसूरत चेहरा उस पर बड़े फ्रेम वाला चश्मा! वो लड़की बेहद क्यूट लग रही थी। वो अपनी पलकें झपकाते हुए फलक को ही देख रही थी।

बहुत देर से खुद पर किसी की नज़रें महसूस कर फलक ने अब अपनी नजरें सामने की तो सामने बैठी लड़की मुस्कुरा दी। फलक ने भी उसे हल्की सी स्माइल दी और वापस से अपनी नजरें खिड़की की तरफ कर दी। तभी सामने बैठी लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी। "हाई! माय नेम इज माही! क्या मैं आपके पास बैठ सकती हुं?" माही ने अपना नाम बताते हुए फलक से पूछा।

फलक ने वापस माही की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली। "बिल्कुल!"

माही झट से फलक के पास आ कर बैठ गई।

"आप बहुत सुंदर हो! क्या मैं आपको दी बुला सकती हुं?" माही ने अपनी आँखें टिमटिमाते हुए बेहद मासूमी से पूछा। फलक उसे देख कर मुस्कुरा दी और हामी भर दी। ये देख कर माही का चेहरा खुशी से चमक उठा।

"अच्छा! क्या तुम अकेली हो! साथ में कोई नहीं है क्या?" फलक ने इधर उधर देखते हुए कहा। तो माही एकदम से उदास हो गई।

"तुम अकेली हो?" फलक ने हैरानी से माही की तरफ देखते हुए कहा। तो माही ने हामी भर दी।

"तुम अकेली! तुम जानती हो, ये सेफ नहीं है!" फलक ने हैरानी और गुस्से के मिले जुले भाव से कहा तो माही ने मुंह फुला लिया।

फलक ने ये देख कर खुद को शांत किया और माही से कहने लगी। "अच्छा सॉरी! देखो! अकेले कहीं जाना सेफ नहीं। अगर तुम्हारे घर वालो ने तुम्हें अकेले भेजा है तो वो गलत है। तुम अभी बहुत छोटी हो!"

"हां वही तो! अभी मैं छोटी हुं, इसलिए मैं अपने घर जा रही हुं। मुझे हॉस्टल में नहीं रहना।" माही ने बेहद मासूमी से कहा।

"मतलब तुम हॉस्टल से भाग के आई हो?" फलक उस बच्ची की हरकत से हैरान थी। वहीं उसका सवाल सुन कर माही ने फौरन हां में अपनी मुंडी हिला दी।

"तुम्हारा घर कहां है, तुम्हें अपना एड्रेस तो पता है ना?" फलक ने पूछा तो माही ने फौरन हां में अपना सिर हिला दिया।

"ठीक है, अब जब तक तुम अपने घर नहीं पहुंच जाती। तुम मेरे साथ रहोगी। ओके?" फलक ने माही को घूरते हुए कहा तो माही ने मुंह लटका के हां में अपना सिर हिला दिया। वहीं फलक तो ये सोच के रिलेक्स थी की ये बच्ची किसी गलत हाथो मे ना लगी। उसने माही का हाथ पकड़ लिया और उसके साथ ऐसे ही कुछ कुछ बातें करने लगी। माही तो शुरू से ही फलक के साथ कंफर्टेबल थी। कुछ ही देर में उनकी मंजिल आ गई।

देहरादून

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