Forced Marriage ❤️ Ch. 2

चैप्टर 2

Posted by nikki tha little writer • Sep 29, 2025 08:28 AM

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उज्जैन

उस शख्स ने जब अपने गार्ड्स को हटने का इशारा किया तो गाईर्ड्स गौरी के सामने से हट गए और अब उस शख्स के सामने गौरी का चेहरा था। गौरी ने अभी भी अपनी आंखें बंद की हुई थर्थी और हाँथ जोड़ कर खड़ी थी।

एक पल को सामने खड़ा शख्स भी गौरी की खूबसूरती में खो गया था। गौरी का वो दूध सा गोरा रंग, उसके काले लम्बे बाल जिन बालों की कुछ लटें गौरी के चेहरे पर आ रहीं थी। सामने खड़ा शख्स अभी गौरी की खूबसूरती को निहार ही रहा था की तभी गौरी ने अपनी आंखें खोल लीं।

गौरी की नज़र अपने सामने खड़े शख्स पर पड़ी, उसके सामने 6 फुट का एक आदमी खड़ा था, गोरा रंग, सिक्स पैक एब्स, उसके चेहरे पर एक अलग सा तेज और गुरूर तो उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रहा था, ये कहना कोई गलत नहीं होगा की गौरी ने आज से पहले इतना हैंडसम लड़का नहीं देखा था

गौरी अभी उसके चेहरे को निहार ही रही थी तभी उसके कानो में एक कर्कश आवाज़ पड़ी तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मना करने के बाद भी मंदिर के अंदर आने की ?

ये सुनकर गौरी जैसे होश में आयी और बोली जी क्या कहा आपने ?

सामने खड़ा शख्स गौरी को घूरते हुए बोला- मेरे पास इतना टाइम नहीं है की मैं तुम जैसे छोटे लोगों पर बर्बाद करूँ, इतना कह कर वो शख्स वहां से जाने लगा ।

गौरी ने उसे जाते हुए देखा तो बोली- महाकाल के मंदिर में तो हर कोई छोटा ही होता है, बड़े तो सिर्फ वहीं हैं यहाँ। औरअगर कोई खुद को उनसे भी बढ़ा मानता है तो उससे बड़ा बेवकूफ तो कोई नहीं होगा ।

उसकी ये बात सुनकर वो शख्स पलटा और गुस्से से गौरी की तरफ देखने लगा, तभी एक आदमी गौरी के पास आते हुए बोला- मैडम आप जानती भी हैं की आप किनसे बात कर रही हैं, ये शिवांश सिंह रायज़ादा हैं, ये......

वो आगे कुछ बोलता की गौरी बोल पड़ी हमें इन्हें जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हम बस इतना जानते हैं की ये एक नंबर के स्वार्थी इंसान हैं जो सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं।

तभी वो आदमी गौरी से कुछ कहने को होता है की पीछे से वही कर्कश आवाज़ आती है देव, मूव....

ये सुनकर सामने खड़ा इंसान जिसका नाम देव था वो गौरी के सामने से हट जाता हैं, और गौरी के सामने वही गुरूर से भरा चेहरा होता है।

वो शख्स अपनी गुस्से भरी आवाज़ में कहता है - आज तक किसी ने शिवांश सिंह रायज़ादा के सामने बोलने की हिम्मत नहीं की और तुम दो टके की लड़की मुझसे ऊँची आवाज़ में बात कर रही हो ?

गौरी मुस्कुराते हुए बोली - भगवान् के सामने खड़े होकर खुदपर इतना गुरूर, आज तक शायद आप ऐसे लोगों से मिले होंगे जो आपके आगे नहीं बोलते होंगे लेकिन हम उनमे से नहीं हैं। आप पैसों से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन भगवान को नहीं, भगवान सबके हैं हर किसी को हक़ है उनकी पूजा करने का और ये हक़ आप उनसे नहीं छीन सकते हैं।

इतना कह कर गौरी ने अपने कंधे पर टांगे हुए बैग से अपना फ़ोन निकाला और आयुष को कॉल लगा दिया। दूसरी तरफ आयुष जो बेचैनी से गौरी को ढूंढ रहा था और ना जाने कितनीही बार वो गौरी को फोन कर चूका था, उसने जब गौरी का कॉल देखा तो पिक करते हुए परेशानी से बोला दीदी, कहाँ हो आप ? मैं कबसे आपको फ़ोन कर रहा था।

गौरी मुस्कुराते हुए बोली सॉरी मेरे भाई, लेकिन अब मेरी बात ध्यान से सुनो, बाहर जितने भी लोग खड़े हैं ना उन सभी के साथ तुम मंदिर में आ जाओ हम भी यहीं हैं, और हाँ अगर तुम्हे कोई आने से रोके तो कह देना की शिव ने बुलाया है। ये कह कर गौरी ने मुस्कुरा कर शिवांश की तरफ देखा जो अभी भी गुस्से से गौरी को देख रहा था।

कुछ ही पल बाद, जो मंदिर अभी तक खाली था वो अब भक्तों की भीड़ की वजह से पूरी तरह से भर चूका था।

तभी कुछ गॉर्डस ने शिवांश को कवर कर लिया और देव ने कहा - बॉस काफी लोग आ चुके हैं यहाँ, आपका यहाँ रहना सेफ नहीं है हमें यहाँ से अभी चलना चाहिए। पीछे चॉपर आपका वेट कर रहा है।

देव के कहने पर शिवांश गुस्से से गौरी को घूरते हुए वहां से जाने लगा लेकिन गौरी के चेहरे पर अभी भी एक प्यारी सी मुस्कराहट थी।

शिवांश मंदिर के बड़े से ग्राउंड में खड़े चॉपर में जाकर बैठ गया और उसके चॉपर ने अपनी मंज़िल के तरफ उड़ान भर ली। वहीं आयुष गौरी के पास आया और बोला दीदी, कहाँ चली गयीं थी आप ?

गौरी मुस्कुराते हुए उसके हाँथ से पूजा का सामान लेते हुए बोली - कहीं नहीं, चलो हम दर्शन कर लेते हैं।

इतना कह कर उसने आयुष का हाँथ पकड़ा और दर्शन करने चली गयी । 1

वहीं चॉपर में बैठे शिवांश ने सीट पर पीछे की तरफ अपना सर टिकाये अपनी आंखें बंद कर रखी थीं और अभी भी उसकेज़हन में गौरी का मुस्कुराता हुआ चेहरा था लेकिन जैसे ही उसे गौरी की कहीं हुई बातें और उसकी बेख़ौफ़ आँखें याद आयीं तो उसने झटके से अपनी आंखें खोल ली और गुस्से से अपनी मुट्ठी कस ली।

उसे इतने गुस्से में देख सामने बैठे देव ने कहा बॉस, क्या हुआ सब ठीक है ?

शिवांश उसकी तरफ गुस्से से देखते हुए बोला वो लड़की, मुझे उस लड़की के बारे में सारी इनफार्मेशन चाहिए मैं भी तो देखूं की कौन है वो जिसने शिवांश सिंह रायज़ादा से नज़रें मिलाकर बात करने की हिम्मत की, और वो गार्ड्स जो आज मंदिर के बाहर थे लोगों को रोकने के लिए, वो सभी मुझे आज शाम को अपने फार्म हाउस पर चाहिए ।

ये सुनकर देव ने हाँ में सर हिलाया और सोचने लगा की आज तो उन गार्ड्स की खैर नहीं, क्योंकि देव को पता था की जब तक कोई बहुत बड़ी और ख़ास बात ना हो तब तक शिवांश कभी भी फार्म हाउस पर अपने अलावा किसी को नहीं बुलाता था।

वहीं गौरी भी दर्शन करके मंदिर से बाहर आ चुकी थी और होटल से अपना सामान लेकर स्टेशन पहुँच गयी थी। आयुष और गौरी दोनों ही ट्रैन में बैठे अपनी मंज़िल की तरफ जा रहे थे।

कहाँ है गौरी की मंज़िल ? और क्या करेगा शिवांश गौरी के बारे में जान कर ? आगे जानने के लिए जुड़े रहिये इस कहानी के साथ

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