Forced Marriage ❤️ Ch. 1

चैप्टर 1

Posted by nikki tha little writer • Sep 28, 2025 08:04 PM

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कहानी शुरू होती है उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से, जो उज्जैन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। कईयों की मन्नतें यहाँ आकर पूरी हो जाती हैं, तो कईयों के खाली झोली महाकाल भर देते हैं। बस अपनी बिगड़ी बनाने की आस और महाकाल में आस्था होने की वजह से में लोग यहाँ दर्शन करने आते हैं, ऐसे ही दर्शन करने आज गौरी भी आई थी।

गौरी, एक लड़की जिसने सफेद रंग का अनारकली सूट पहना था। उसने अपने लम्बे बालों की गूथ कर चोटी बनाई हुई थी, माथे पर छोटी सी बिंदी, कान में झुमके और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कराहट के साथ दुनिया भर की खूबसूरती लिए अपने छोटे भाई के साथ मंदिर की तरफ चल रही थी। तभी उसके साथ चल रहे 17 साल के लड़के ने कहा, "गौरी दीदी, आराम से चलो, इतनी जल्दी किस बात की है?"

गौरी, जिसका नाम था, उस लड़के की तरफ देख कर बोली, "आयुष, हमें 8 बजे तक होटल वापस भी जाना है। पता है ना कि हमारी ट्रेन 10 बजे की है, इसलिए जल्दी से दर्शन करेंगे और फिर चलेंगे।" ये कहकर गौरी मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ने लगी।

मंदिर के बाहर काफी भीड़ थी, यह देख कर गौरी परेशान हो गई। उसने कहा, "हे महादेव! यहाँ तो बहुत भीड़ है, हम अंदर कैसे जाएंगे?"

आयुष बोला, "दीदी, आप यहीं रुकना, मैं सामने वाली दुकान से पूजा के लिए सामान लेकर आता हूँ।" इतना कहकर वह सामने की दुकान से सामान लेने चला गया।

गौरी वहीं खड़ी होकर मंदिर के बाहर की भीड़ को देख रही थी।उसने देखा कि मंदिर के बाहर दर्शन के लिए लोग तो काफी जमा थे लेकिन मंदिर के अंदर कोई भी नहीं जा रहा था। यह देख कर गौरी उन लोगों की भीड़ के पास गई और वहीं खड़ी एक औरत से पूछा, "आंटी जी, यह इतनी भीड़ क्यों हैं यहाँ और कोई मंदिर के अंदर क्यों नहीं जा रहा है?"

वह औरत निराशा से बोली, "अरे बिटिया, क्या बताएं, पैसों के दम पर तो लोग आजकल भगवान को भी खरीदने को तैयार हैं।"

गौरी ने कहा, "जी, मैं कुछ समझी नहीं?"

वह औरत बोली, "बिटिया, कोई अमीरजादा अंदर पूजा कर रहा है, जिसकी वजह से हम आम लोगों को दर्शन करने नहीं दिया जा रहा है, ताकि उसे कोई परेशानी ना हो।"

यह सुनकर गौरी को बहुत गुस्सा आया और वह उस भीड़ से निकलते हुए आगे की तरफ जाने लगी। उसने देखा कि कुछ लोग जिन्होंने एक ही जैसे काले कपड़े पहन रखे थे, वे सभी लोगों को मंदिर के बाहर ही रुकने के लिए कह रहे थे।

गौरी उनसे बोली, "आप हमें अंदर जाने क्यों नहीं दे रहे हैं?"

उनमें से एक आदमी अपनी कड़क आवाज में बोला, "मैडम, हमारे बॉस अंदर पूजा कर रहे हैं। जैसे ही उनकी पूजा खत्म होगी, आप सभी लोगों को भी अंदर जाने दिया जाएगा। लेकिन प्लीज अभी आप लोग अंदर नहीं जा सकते हैं।"

गौरी ने पूछा, "और आपके बॉस की पूजा कब तक खत्म होगी?"

वह आदमी बोला, "सॉरी मैडम, ये हम नहीं बता सकते हैं। आप प्लीज थोड़ा साइड होकर खड़ी हो जाइए।"गौरी गुस्से से उसकी तरफ देखती है और बिना उसकी बात माने दनदनाती हुई मंदिर के अंदर जाने लगती है। यह देखकर दो गार्ड्स गौरी के पीछे उसे पकड़ने के लिए भागते हैं, तभी गौरी उनकी तरफ देखते हुए बोली, "देखिए, आप में से अगर किसी ने भी हमें हाथ भी लगाया तो महादेव की सौगंध, हमसे बुरा कोई नहीं होगा।"

यह सुनकर वे दोनों गार्ड्स वहीं रुक जाते हैं और गौरी मंदिर के प्रांगण में पहुँच जाती है। वहाँ जाकर गौरी देखती है कि सामने ही एक बड़ा यज्ञ हो रहा था, जिसमें कई पंडित भगवा वस्त्र पहने मिलकर उस यज्ञ को संपन्न करवा रहे थे। उन सभी से अलग एक इंसान, जिसने कपड़े के नाम पर सिर्फ एक धोती पहनी हुई थी, वह उस यज्ञ में आहुति दे रहा था। उस इंसान की पीठ गौरी की तरफ होने की वजह से वह उसका चेहरा नहीं देख पा रही थी, लेकिन उसे पीछे से ही देखकर यह समझ पा रही थी कि शायद यह वही बॉस है, जिसके बारे में बाहर खड़े आदमी बोल रहे थे।

मंदिर के प्रांगण में यज्ञ स्थान से कुछ दूरी पर कई गार्ड्स खड़े थे। गौरी यज्ञ में विघ्न नहीं डालना चाहती थी, इसलिए वहीं चुपचाप एक कोने में खड़ी हो गई। तभी बाहर से दो गार्ड्स मंदिर में आए और गौरी को बाहर जाने के लिए कहने लगे।

गौरी ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, "देखिए, हम यहाँ आपके बॉस से सिर्फ बात करने आए हैं और उनसे बात किए बिना हम नहीं जाएंगे। अगर आप लोग नहीं चाहते हैं कि इस पूजा में कोई विघ्न आए तो हमें शांति से यहाँ खड़े रहने दीजिए। पूजा खत्म होने के बाद ही हम उनसे बात करेंगे।" गौरी ने भी अपने दुपट्टे को सर से ओढ़ लिया था और हाथ जोड़कर आंख बंद कर वहीं खड़ी हो गई थी।गौरी की आवाज इतनी तेज थी कि यज्ञ में आहुति दे रहे शख्स के कानों में भी पड़ रही थी, लेकिन उस इंसान ने एक बार भी पीछे पलटकर नहीं देखा। कुछ ही देर में पूजा खत्म हुई और अंतिम आहुति दी गई। महापंडित की आवाज आई, "शिवांश, यज्ञ संपन्न हुआ। अब आप अपने स्थान से खड़े हो सकते हैं।"

यह सुनकर वह शख्स अपनी जगह से खड़ा हुआ और पलट गया। उसने देखा कि कुछ गार्ड्स किसी को घेरकर खड़े थे। उसने अपने हाथ के इशारे से गार्ड्स को साइड होने को कहा। अपने बॉस का इशारा समझ, सभी गार्ड्स गौरी के सामने से हट गए।

कौन है यह शिवांश? और गौरी उससे क्या कहेगी? कैसी होगी इनकी पहली मुलाकात ?

जानने के लिए पढ़ते रहिये इस खूबसूरत कहानी को...

स्टोरी को प्लीज पूरा सपोर्ट दीजिए , और बताइए आपको कैसी लगी प्लीज । डिअर डिअर यह स्टोरी मैंने प्रतिलिपि पर नहीं डाली है यह सिर्फ यहीं पर अपलोड कर रही हूं , प्लीज ट्राई जरूर कीजिए । आई होप आपको यह स्टोरी पसंद आएगी कमेंट जरुर कीजिएगा ।

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