Chapter 34
मन वैरागी है - Chapter 34
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मैं गुमसुम रहने लगा,और मुझे हॉस्टल भेज दिया गया।रेहान भी मेरे साथ था ।वह बचपन से मेरा दोस्त है। मेरी चुप्पी को घर वालों ने बस मेरा स्वभाव समझ कर जाने दिया । बच्चे जब बड़े होने लगते