Chapter 19
मन वैरागी है - Chapter 19
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वह अभी छत पर खड़ी थी। दोपहर का वक्त था ।दिन अब खुलने लगे थे ।आजकल धूप काफी तेज होती ।फरवरी के आखिरी दिन चल रहे थे ।अब तक जो चारों ओर सरसों ने अपनी पीली आभा बिखेर रखी थी। वह सिमटनी