हम तुम्हें चाहतें हैं ऐसे - Chapter 2
सिंघानिया मेंशन का माहौल हमेशा की तरह भारी और संजीदा था।
जयराज सिंघानिया—सिंघानिया खानदान का बड़ा बेटा। 32 साल की उम्र, 6 फीट से ज़्यादा लंबी हाइट, सांवला रंग, बड़ी-बड़ी काली आँखें, चेहरे पर घना दाढ़ी-मूँछों का ताना-बाना और चाल में वही पुरानी ठसक। काम ही उसकी ज़िंदगी था और काम ही उसका सुकून।
कई साल पहले उसने एक इंटरनेशनल मॉडल, अलीशा से अपनी मर्ज़ी से शादी की थी। पर वो रिश्ता ज़्यादा दिन नहीं चला। एक मासूम बच्चे को जन्म देने के बाद अलीशा सब कुछ छोड़कर चली गई, क्योंकि उसे अपने करियर और आज़ादी से प्यार था। एक बच्चे की माँ कहलाना उसे कतई मंज़ूर नहीं था। वह युग को पीछे छोड़कर ऐसी गई कि फिर कभी मुड़कर नहीं देखा। जयराज अपने 5 साल के बेटे युग से बेपनाह प्यार करता था, पर बिज़नेस की मसरूफ़ियत के चलते उसकी माँ जया ही युग की देखभाल करती थीं।
घर में जयराज से छोटे दो भाई भी थे—समर सिंघानिया और ऋषभ सिंघानिया। दोनों की शादियाँ हो चुकी थीं। समर की पत्नी रेखा ज़बान की तीखी थी और बात-बात पर सुनाने से बाज़ नहीं आती थी; समर खुद उससे दबता था। वहीं ऋषभ की पत्नी माला ज़बान की बेहद मीठी, पर दिमाग़ से बहुत तेज़-तर्रार थी। समर का एक बेटा था अंश, और ऋषभ की एक बेटी थी निशा। यह तीनों बच्चे—युग, अंश और निशा—लगभग एक ही उम्र के थे और साथ में प्ले स्कूल जाते थे।
रेखा और माला दोनों की नज़रें सिंघानिया मेंशन के बड़े बेटे और उसकी जायदाद पर थीं। वे दोनों चाहती थीं कि जयराज की शादी उनकी अपनी-अपनी छोटी बहनों से हो जाए। इसीलिए वे अक्सर अपनी बहनों को घर बुलातीं और जय के आसपास रहने के मौके तलाशतीं। लेकिन जयराज ने कभी किसी को तवज्जो नहीं दी।
जो जयराज कभी खुशमिज़ाज हुआ करता था, अलीशा के धोखे के बाद पूरी तरह बदल चुका था। उसने दिल के दरवाज़े बंद कर लिए थे। अपनी शारीरिक ज़रूरतों के लिए उसके वन-नाइट स्टैंड्स ज़रूर रहे, पर वे सिर्फ़ एक रात तक सीमित थे—अगली सुबह के बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शादी और रिश्ते उसके लिए बेमानी हो चुके थे। उसे लगता था कि कोई भी औरत युग की सही माँ नहीं बन सकती और न ही वह खुद अब किसी के साथ एडजस्ट कर पाएगा।
इसीलिए जब डैड ने 19 साल की लड़की से उसकी शादी की बात उठाई, तो उसका दिमाग़ घूम गया। बत्तीस का सख्त मर्द और उन्नीस की मासूम लड़की! पर डैड की इमोशनल ज़िद के आगे उसे झुकना ही पड़ा।
उधर स्टडी रूम से जय के बाहर निकलते ही, जया ने अपने पति राजन सिंघानिया की तरफ़ चिंतित नज़रों से देखा।
"वैसे आपको एक बार और सोच लेना चाहिए राजन," जया ने आहिस्ते से कहा।
"मैंने बहुत सोच-समझकर फ़ैसला किया है जया," राजन ने इत्मीनान से जवाब दिया। "तुम जानवी को जानती ही हो... मुझे वह लड़की बहुत पसंद है।"
"मैं जानवी को जानती हूँ, इसीलिए तो कह रही हूँ," जया की आवाज़ में फिक्र साफ़ थी। "जानवी तो हवा का एक ताज़ा झोंका है। इतनी कम उम्र में इतने दुख देखने के बावजूद वह कितनी खुशमिज़ाज है। जब वह हँसती है, तो पूरा घर हँसने लगता है। तो क्या आपको लगता है कि हमारा जयराज और वह एक साथ खुश रह पाएँगे? मुझे उस बच्ची की भी फ़िक्र है।"
राजन मुस्कुराए, "फ़िक्र मत करो जया। जय जानवी को बहुत खुश रखेगा... पलकों पर बिठाकर रखेगा। क्या तुम्हें नहीं लगता कि हमारे इस सख्त बेटे को भी ज़िंदगी में एक ठंडी हवा के झोंके की ज़रूरत है?"
"आपकी बातें मेरी समझ से बाहर हैं," जया ने सिर हिलाते हुए कहा। "पर क्या उसकी फ़ैमिली मानेगी जय के लिए? दोनों की उम्र में इतना बड़ा फ़र्क़ है..."
"मेरी जानवी के दादाजी से बात हो गई है," राजन ने बात साफ़ की। "वह इस रिश्ते के लिए पूरी तरह तैयार हैं। और जानवी कभी अपने दादा की बात नहीं टालती। जैसा वे कहेंगे, वह वैसा ही करेगी, तुम अच्छे से जानती हो।"
"सही बात है... बिन माँ-बाप की बच्ची से कौन पूछेगा उसकी चॉइस," जया के मुँह से एक ठंडी साँस निकली।
राजन ने जया का हाथ थामा, "इसीलिए तो जानवी को अपने घर लेकर आ रहा हूँ। वह मेरे स्वर्गवासी दोस्त की बेटी है... तुम बन जाना उसकी माँ।"
जया के होठों पर एक हलकी मुस्कान आ गई, "हाँ, मुझे भी लगता है कि जय की पत्नी और उसके बेटे... दोनों की माँ मुझे ही बनना पड़ेगा।"
जया ने मुस्कुरा तो दिया, पर उसके दिल के कोने में अब भी यह सवाल तैर रहा था कि 32 साल का पत्थर जैसा जयराज और 19 साल की मोम जैसी जानवी—जब ये दो अलग दुनिया एक होंगी, तो क्या होगा?
कौन है वो?
कौन है वो 19 साल की लड़की, जिसे सिंघानिया मेंशन की इतनी बड़ी दौलत और शोहरत से कोई लगाव नहीं?
कौन है वो, जिसकी एक मासूम मुस्कान बड़े से बड़े दुखों को भुला देने का हुनर रखती है?
बचपन में ही माँ-बाप का साया सिर से उठ जाने के बाद, अपने दादाजी के संस्कारों में पली-बढ़ी जानवी... जो हवा के एक ठंडे झोंके की तरह किसी की भी उदास ज़िंदगी में खुशियाँ भर सकती है।
पर आखिर क्यों किस्मत उसे उस राह पर ला खड़ा करती है, जहाँ उसकी अपनी मर्जी का कोई मोल नहीं? क्यों 32 साल के सख्त, ज़िद्दी और अतीत के जख्मों से भरे जयराज सिंघानिया की ज़िंदगी में उसे बिना उसकी पसंद पूछे भेजा जा रहा है?
क्या वो मासूम जानवी, जयराज के सीने में जमी नफ़रत और गुस्से की बर्फ़ को पिघला पाएगी? या फिर सिंघानिया मेंशन की कड़वाहट में उसकी अपनी हँसी कहीं खो जाएगी?
जानिए कौन है जानवी और क्या लिखा है उसकी किस्मत में... बने रहिए हमारे साथ इस अनोखी कहानी में!
उम्मीद करती हूँ कि हमारी नई सीरीज़ 'हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे' का यह पहला मोड़ आपको बेहद पसंद आया होगा!
32 साल के सख्त जयराज और 19 साल की मासूम जानवी की यह अनोखी दास्तान आपको कैसी लगी? क्या जानवी अपनी मिठास से जयराज का गुस्सा पिघला पाएगी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें ज़रूर बताइए!
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आगे क्या होगा जयराज और जानवी की ज़िंदगी में? जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ... मिलते हैं अगले एपिसोड में!