Chapter 130
मोक्ष का आना , मानवी के आंसू - Chapter 130
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
सुबह से शाम होने को आई थी। सभी लोग परेशानी से हॉल में बैठे हुए थे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अचानक यह हुआ क्या। कल जहाँ खुशियों से भरा माहौल था, वहाँ आज एकदम गमगीन उदासी छाई