Substitute bride - Chapter 3
अगले दिन शादी के समय बरात आ चुकी थी। पंडित जी ने वरपूजा शुरू कर दी थी। सभी रिश्तेदार खड़े होकर दूल्हे को देख रहे थे। सभी लड़कियाँ दूल्हे को देखकर मंत्रमुग्ध हो रही थीं, क्योंकि वह किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। मरून कलर की शेरवानी में गोल्डन साफ़ा बाँधे हुए, वह किसी राजकुमार जैसा लग रहा था; जो अपनी राजकुमारी को अपनी हमसफर बनाकर ले जाने वाला था। लेकिन दूल्हे के चेहरे पर शादी के उल्लास की कोई खुशी नहीं दिख रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसे बंदूक की नोक पर शादी के लिए मजबूर किया हो। तभी वरपूजा हो गई और दूल्हे को मंडप में बैठाया गया।
तभी शादी का मुहूर्त हो गया। पंडित जी ने कन्या को लाने के लिए कहा। अनीता जी, अनुष्का की माँ, अनुष्का को लेने कमरे में गईं। जब वे कमरे में पहुँचीं, तो उन्हें अनुष्का कहीं दिखाई नहीं दी। शादी का जोड़ा और सारा सामान वहीं पड़ा हुआ था। अनीता जी परेशान हो गईं। तभी उन्हें टेबल पर रखा एक पत्र दिखाई दिया। उन्होंने वह पत्र उठाकर पढ़ा, तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई और वे धम्म से बेड पर बैठ गईं।
अनीता जी को काफी देर तक आते न देखकर, नवीन जी स्वयं अनुष्का के कमरे में आए। वहाँ अनीता जी को बेसुध बैठे देखकर वे हैरान रह गए। वे कुछ कहने वाले ही थे कि उनकी नज़र अनीता जी के हाथ में पकड़े कागज़ पर गई। उन्होंने वह कागज़ हाथ में लेकर पढ़ना शुरू कर दिया।
अनुष्का
माफ़ करना पापा, मुझे माफ़ कर देना, लेकिन मैं यह शादी नहीं कर सकती। आपने अपनी कंपनी को बचाने के लिए अपनी बेटी को दांव पर लगा दिया, लेकिन एक बार भी मुझसे नहीं पूछा कि मैं क्या चाहती हूँ। मेरे भी कुछ सपने हैं, मैं भी किसी से प्यार करती हूँ, लेकिन आपने कभी मेरी बात नहीं समझी। एक पल के लिए आपकी बात मानकर मैं शादी करने को भी तैयार थी, लेकिन ऐसे लड़के से शादी करके क्या फायदा जो कभी मुझे प्यार ना करे? कभी मुझे अपनी बीवी होने का हक़ ना दे? इस तरह से तो मैं एक खिलौना बनकर रह जाऊँगी, जिससे जब मन किया आपने खेला और जब आपका मन भर गया, तो किसी और को खेलने के लिए दे दिया। तो माफ़ी चाहती हूँ, मैं खिलौना नहीं बन सकती पापा। मैं ऐसे लड़के से शादी नहीं कर सकती जो मुझे कभी अपनी लाइफ में अपनाएगा ही नहीं। मैं शेखर के साथ अपनी ज़िंदगी शुरू करने जा रही हूँ। मुझे ढूँढ़ने की कोशिश मत कीजिएगा, वरना जो धमकी आपने दी, उसे सच में करके दिखा दूँगी। आपकी नालायक बेटी अनुष्का। क्योंकि लायक तो मैं कभी बन ही नहीं पाई।
अनुष्का
पत्र पढ़कर नवीन जी वहीं सोफे पर बैठकर अपना सिर पकड़ लिए। वहीं नीचे मंडप में सभी लोग नवीन जी और अनीता जी का इंतज़ार कर रहे थे। काफी देर बाद उनके न आने पर, पवन जी और आरती जी दोनों कमरे में आए। उन्हें इस तरह देखकर एक-दूसरे को देखा।
फिर आरती जी नवीन जी के पास आकर बोलीं, "क्या हुआ भैया? आप और भाभी यहाँ बैठे हुए हैं और अनुष्का कहाँ है? पंडित जी कब से वहाँ पर राह देख रहे हैं। शादी का मुहूर्त भी शुरू हो चुका है!"
नवीन जी ने उन्हें देखते हुए कहा, "कैसी शादी बहना? जब दुल्हन ही शादी से भाग चुकी है, तो फिर शादी कैसी? अब तो यहाँ पर मातम होगा, मेरी मौत का मातम!"
आरती जी गुस्से में बोलीं, "यह कैसी बात कर रहे हैं भैया? आप पागल हो गए हैं क्या? और अनुष्का कहाँ भाग कर जाएगी? देखिए होगी यहीं कहीं। और भाभी आप उसे ढूँढ़ने की जगह यहाँ पागलों की तरह बैठी हुई हैं! (फिर पवन जी की तरफ़ देखते हुए) सुनिए, आप बाहर जाकर देखिए, क्या पता अनुष्का बाहर हो, मानवी और तान्या के साथ।" पवन जी उनकी बात सुनकर बाहर जाने लगे, कि नवीन जी ने उन्हें रोकते हुए कहा, "रुक जाइए जीजा जी! बाहर उसे ढूँढ़ने जाने से पहले एक बार इस पत्र को पढ़ लीजिए। फिर आपकी सारी गलतफ़हमियाँ दूर हो जाएँगी!" इतना कहकर उन्होंने वह पत्र पवन जी की तरफ़ बढ़ा दिया। पवन जी जैसे ही वह पत्र पढ़ते हैं, वे भी शॉक हो जाते हैं! आरती जी ने भी वह पत्र पढ़ा, तो वे भी परेशानी में वहीं बैठ गईं!
वहीं मानवी और तान्या, जो अभी तक शादी के मंडप में नहीं गई थीं, और न ही उन्हें दूल्हे को देखने में कोई रूचि थी, क्योंकि उनकी बहन इस शादी से खुश नहीं थी, वे दोनों बढ़िया-बढ़िया खाने पर हाथ साफ़ कर रही थीं, क्योंकि शादी में कुछ मजेदार हो या न हो, लेकिन खाना ज़रूर मजेदार होता है।
तान्या रसमलाई खाते हुए मानवी से बोली, "यार मानवी, यह रसमलाई तो इतनी टेस्टी है कि मेरा मन कर रहा है, भाड़ में जाए शादी और मैं यहीं पर बैठकर पूरी रात रसमलाई खाऊँ!"
मानवी गुलाब जामुन खाते हुए बोली, "हाँ यार, सही कह रही है तू। वैसे भी दीदी इस शादी से खुश नहीं है, तो हम वहाँ जाकर क्या करेंगे? इससे अच्छा तो यह है कि हम यहाँ बैठकर अपनी फ़ेवरेट चीज़ों को खाकर ही खुश हो लें।"
तभी तान्या की मासी, जो कुछ परेशान सी घूम रही थी, जैसे ही उनकी नज़र मानवी और तान्या पर पड़ी, तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया और गुस्से में उन दोनों के पास आकर दोनों के सर पर पीछे से एक-एक थप्पड़ मार दिया। जिससे दोनों ने "आउच" की आवाज़ करते हुए पीछे मुड़कर देखा, तो तान्या की मासी गुस्से में खड़ी दोनों को घूर रही थी। उन्हें देखते ही दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और दोनों अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गईं।
मासी गुस्से में बोलीं, "तुम दोनों यहाँ बैठकर चटकारे मारकर ठूस रही हो, और वहाँ भैया, भाभी और दीदी कितने परेशान हैं, पता भी है?" दोनों ने एक-दूसरे को देखा और फिर कंधे उचकाकर उनकी तरफ़ देखा। तान्या ने अपनी मासी से कहा, "मासी, हमें क्या पता वहाँ क्या हुआ है और वे इतनी परेशान क्यों हैं? शादी तो दीदी की हो रही है ना, परेशान तो दीदी को होना चाहिए।"
मासी ने गुस्से में एक थप्पड़ दिखाते हुए कहा, "अभी मारूँगी! एक तो अनुष्का कहीं मिल नहीं रही है, ऊपर से तुम दोनों यहाँ पर खाना खा रही हो! जाकर वहाँ पर देखो और उन लोगों को संभालो। तब तक मैं पूरे घर में चेक करती हूँ, शायद झूठी चिट्ठी लिखकर यहीं कहीं छुपी हो। तुम्हारे मौसा जी भी एयरपोर्ट गए हैं, दीपक को भी मैंने रेलवे स्टेशन भेजा है। बस कैसे भी करके यह लड़की मिल जाए तो मेरी जान में जान आए!"
वहीं अनुष्का के भागने की खबर सुनकर दोनों हैरान रह जाती हैं और जल्दी से अंदर ऊपर की तरफ़ जाने लगती हैं। तान्या मानवी से बोली, "यार मानवी, दीदी को अगर भागना ही था तो हमें ही बता देती, हम कौन सा उन्हें रोक रहे थे? और आज की जगह कल भागती तो इतना ड्रामा भी नहीं होता!"
मानवी ने उसकी बात में सहमति जताते हुए कहा, "हाँ यार, फिर लड़के वालों को शायद इतनी इंसल्ट महसूस नहीं होती जितनी अब होगी जब वे बिना दुल्हन के वापस जाएँगे!"
वहीं शादी में भर-भर के मीडिया आई हुई थी, क्योंकि मुंबई के सबसे बड़े बिज़नेसमैन ऋषभ सहगल की शादी थी, और यह कोई आम बात नहीं थी। अनुष्का के देरी करने की वजह से सभी लोग बातें बनाने लगे थे और इन बातों से सहगल परिवार परेशान हो रहा था।
अब कौन जाने क्या होगा आगे? पढ़ते रहिए 'सब्सटिट्यूट ब्राइड' और रेटिंग समीक्षा ज़रूर दीजिएगा।