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Chapter 48

आंखो में हो तुम - Chapter 48

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मृगांशी के गालों से लुढ़कते आँसू धवल से दूरी का एहसास करा रहे थे। वह अपने माँ-बाप के बारे में सोच रही थी! तकिये में मुँह छिपाकर रो पड़ी! नाश्ता करते हुए धवल ने कहा, "माँ, पैरों का

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