love Revenge Love
आंखो में हो तुम
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इस बार तुम्हे एक रुपया भी नहीं मिलेगा ! बहुत कर ली अपनी मनमानी.....और ये जितना कर्ज किया है ना..... अपनी कमाई से सब चुकाकर......अपनी इंडिया की टिकट भी खुद अंरेज करके आओगे......समझे....."
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत...
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत...
इस बार तुम्हे एक रुपया भी नहीं मिलेगा ! बहुत कर ली अपनी मनमानी.....और ये जितना कर्ज किया है ना..... अपनी कमाई से सब चुकाकर......अपनी इंडिया की टिकट भी खुद अंरेज करके आओगे......समझे....."
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत कीजिए.....इतने सालों बाद घर आने का मौका मिला है.....आप नहीं दे सकते तो मैं दे देती हूं...."
" बिल्कुल चुप.....इस नबावजादे ने बहुत ऐश कर ली....सब तुम्हारी वजह से...... तुुमने ही तो उसको सर चढ़ाया है....... कंट्रोल किया होता तो रुपए की कीमत जानता....... अगर तुमने एक रुपया भी दिया ना तो उम्र भर मुझसे बात मत करना......."
फिर सेक्रेट्री को बुलाकर " मैडम के अकाउंट की डिटेल मुझे चाहिए......"
धवल को अपने पापा की बात सुनकर गुस्सा आ गया और फोन काट दिया.....उसके बाद उसकी मां का फोन आता रहा लेकिन उसने बात नहीं की !
धवल पर एकाएक उसके पापा ने खुद से कमाने का बम फोड़ा था ! अपने पापा की तरह गुस्सा भी जल्दी आता था !
धवल गुस्से में बाइक लेकर मियामी की सड़को पर चल पड़ा ! कुछ दूर चलने के बाद रिजर्व मोड पर बाइक में फ्यूल खत्म हो गया ! कुछ दूर पैदल बाइक को घसीटने पर एक फिलिंग स्टेशन दिखाई दिया....उसे देख चैन की सांस ली !
लड़की से इंग्लिश में फ्यूल डालने को कहा और फ्यूल डाल कर पेमेंट करने लगा तो इंडियन करंसी उसके हाथ में थी, ये देख उसने माथा पीट लिया !
लड़की को देखकर " सॉरी....."
बाइक साइड में खड़ी करने लगा ! पाइप रखकर लड़की उसके पास आई " हे क्या हुआ ??? "
उसकी हिंदी सुनकर धवल चौक कर " आर यू इंडियन ??? "
लड़की " हां....तुम चाहो तो इंडियन करेंसी मुझे दे सकते हो बदले में मैं पे कर दूंगी......"
धवल ने चैन की सांस लेकर " वैसे भी बाइक सेल करनी है !...."
कहकर लड़की की ओर रुपए बढाए !.....
लड़की एक्साइटमेंट में " ये तो नई है.....आपको बेचनी क्यों है ???? "
धवल गुस्से में " कर्ज उतारकर इंडिया घर वापस जाना है......"
लड़की ने पर्सनल मैटर जानकर कुछ नहीं कहा ! कुछ सोचकर " अच्छा बाइक सेल कर रहे हो तो मैं लेने के लिए तैयार हूं....."
धवल " बाइक सेल करने से क्या होगा.... जॉब भी तो मिलने दो..... "
लड़की धीरे से " वैसे इस फिलिंग स्टेशन पर अभी दो दिन पहले ही सीट खाली हुई है......चाहो तो बात कर सकते हो !"
धवल हैरानी से " तुम मेरी हेल्प क्यों करना चाहती हो ??? "
लड़की कंधे उचका कर " मुझे लगा कठिनाई में हो..... "
धवल उसकी शुद्ध हिन्दी सुनकर अचंभित हुआ !
धवल जाने लगा फिर रुककर " अच्छा सुनो मिस...तुम बात करना में कल डाक्यूमेंट्स लेकर आ जाऊंगा ! "
लड़की " माई नेम इज मृगांशी.... "
धवल मस्ती में " कितना टफ है ये......हिरणी बोल दूं......."
मृगांशी ने कमर पर हाथ लगाकर घूर कर देखा तभी धवल जोर से हंस दिया ! मृगांशी का फोन रिंग हुआ ! फोन देखकर फटाफट उठाया " हैलो पापा.....बस आ रही हूं.....पंद्रह मिनट में.......जरूरी काम आ गया.....घर आकर सब बताती हूं ! ओके बॉय...."
धवल मुस्कुराकर मृगांशी को इशारा कर " इंडियन डैड...... " मन में " एक मेरे डैड है....एक नंबर के खड़ूस......भला ऐसे कोई करता है क्या....वो भी तब जब उनका बेटा विदेश में अकेला हो.....अब बच्चे की जान लेकर ही छोड़ेंगे लाइफ में थोड़ी मौज मस्ती तो होनी चाहिए......."
सोचते हुए अपने रूम की तरफ निकल गया वहां जाकर देखा तो साथ वाले दोस्त इंडिया जाने की तैयारी कर रहे थे और एक वह था कि इंडिया तो जाना दूर..........बल्कि रूम का रेंट और अदर्श अपने खर्चे के लिए भी जुगाड़ करना पड़ेगा...... उसके बाद ही कोई इंडिया जाने का सपना पूरा होगा !
तभी उसका दोस्त बोला " अपने नानू से बोलकर देख ना कुछ बात बन जाए......."
" नहीं , अब तो मैं खुद के दम पर ही इंडिया जाऊंगा ! " धवल गहरी सर्द आवाज में बोला
मृगांशी चेंज करके डायनिंग चेयर पर बैठकर " पापा.....आज एक लड़का मिला था फिलिंग स्टेशन पर....अपनी बाइक सेल करना चाहता.....मैं ले लूं......"
प्लेट में रोटी रखते हुए उसकी मम्मी " कोई जरूरत नहीं है....कॉलेज खत्म हो गया है.....फिलिंगस्टेशन पास में है...."
मृगांशी ने हैरत से अपनी मम्मी की ओर देखकर " मम्मी.... आप बेफिजूल की टेंशन लेती हो....."
उसकी मम्मी चेयर खिसका कर बैठते हुए " लेकिन बाइक चाहिए ही क्यों ???? "
मृगांशी " कुछ दिन बाद मेरे दोस्त मियामी बीच पर जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ! मम्मी प्लीज अब मना मत करना..... और अपने लॉजिक मत देना.....प्लीज....."
उसकी मम्मी से रहा न गया " तुम्हे पता है ना........तुफान का कोई भरोसा नहीं है !......."
मृगांशी बेचारगी से " पापाऽऽऽऽ....."
उसके पापा " पहले खाना खाओ.....फिर कुछ सोचते हैं ! "
तीनों ने खाना खाया ही था कि मृगांशी का फोन रिंग हुआ और नाम देख कर एक्साइटमेंट में " मम्मी -पापा वेदांक भाई का वीडियो कॉल है !....."
मृगांशी वेदांक से बात करती है.......
धवल ने फोन चैक किया तो उसकी मां की अनलिमिटेड मिस कॉल थी ! फोन मिलाते ही उसकी छोटी बहन बरस पड़ी !
" फोन नहीं उठाने का मतलब आप समझते हो ना.....मम्मा का बीपी हाई हो गया है आपके फोन न उठाने से......उनकी सोच पता है कहां चली गई......आपने सुसाइड अटेंप्ट तो नहीं कर लिया है.....ये अपना गूस्सा अपने पास रखो.....और ये सब कर के किस को दिखा रहे हैं.......आप पापा से गुस्सा है......तो उनसे रहिए ना लेकिन मां.......आप सोच नहीं सकते किस हद तक अपना दिमाग खराब कर लिया है..... रो-रोकर बुरा हाल हो गया है......" प्रणामी गला भर आया था !
धवल " इमोशनल होने की जरूरत नहीं है.....तुम सबकी छाती पर बैठ कर ऐसे ही परेशान करूंगा.....समझी.....और क्या कह रही थी...सुसाइड अटेंप्ट ये फालतू की बाते मेरे लिए नहीं बनी है ! मां को बोल दे मैं ठीक हूं....."
" सच्ची में घर आ इतना मारूंगी ना , याद रखेगा......फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करेगा ! " इतना बोल धवल की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए !
धवल मनुहार से " सॉरी मम्मा.....प्लीज आप ये सब मत कीजिए.......जस्ट चिल आप मॉर्डन है.....ओल्ड लेडी की तरह मत कीजिए....... "
" भाई मां (दादी) पीछे ही है......" प्रणामी हंसकर
धवल कान पकड़कर दादी को देख कर " सॉरी ओल्ड लेडी....."
(दादी) मां" घर आ फिर देख चप्पल से आरती उतारूंगी तेरी.... एक टाइम में तेरा बाप भी ऐसे ही था....."
धवल " अच्छा गॉइज.......कल शायद जॉब मिल जाए ! "
" कांग्रेचुलेशन भाई......" एक्साइटमेंट में प्रणामी फिर सोच कर " कौन महामूर्ख है जो आपको जॉब दे रहा है !..... "
" देवी का अवतार लेकर आई है कोई......साक्षात लक्ष्मी....उसने बाइक लेने की इच्छा जताई है....." धवल खोया सा.....
प्रणामी उंगली हिलाकर " पक्का भूतनी है......उसे पता लग गया कि ये भी मेरी तरह आलसी.....नल्ला....निकम्मा....."
धवल घूर कर " अब चुप हो रही है या नहीं......मां..... "
धवल की मम्मी ने आंखे दिखाई तो मां (दादी )ने अपने आंचल में छिपा लिया !
क्रमशः*****
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत कीजिए.....इतने सालों बाद घर आने का मौका मिला है.....आप नहीं दे सकते तो मैं दे देती हूं...."
" बिल्कुल चुप.....इस नबावजादे ने बहुत ऐश कर ली....सब तुम्हारी वजह से...... तुुमने ही तो उसको सर चढ़ाया है....... कंट्रोल किया होता तो रुपए की कीमत जानता....... अगर तुमने एक रुपया भी दिया ना तो उम्र भर मुझसे बात मत करना......."
फिर सेक्रेट्री को बुलाकर " मैडम के अकाउंट की डिटेल मुझे चाहिए......"
धवल को अपने पापा की बात सुनकर गुस्सा आ गया और फोन काट दिया.....उसके बाद उसकी मां का फोन आता रहा लेकिन उसने बात नहीं की !
धवल पर एकाएक उसके पापा ने खुद से कमाने का बम फोड़ा था ! अपने पापा की तरह गुस्सा भी जल्दी आता था !
धवल गुस्से में बाइक लेकर मियामी की सड़को पर चल पड़ा ! कुछ दूर चलने के बाद रिजर्व मोड पर बाइक में फ्यूल खत्म हो गया ! कुछ दूर पैदल बाइक को घसीटने पर एक फिलिंग स्टेशन दिखाई दिया....उसे देख चैन की सांस ली !
लड़की से इंग्लिश में फ्यूल डालने को कहा और फ्यूल डाल कर पेमेंट करने लगा तो इंडियन करंसी उसके हाथ में थी, ये देख उसने माथा पीट लिया !
लड़की को देखकर " सॉरी....."
बाइक साइड में खड़ी करने लगा ! पाइप रखकर लड़की उसके पास आई " हे क्या हुआ ??? "
उसकी हिंदी सुनकर धवल चौक कर " आर यू इंडियन ??? "
लड़की " हां....तुम चाहो तो इंडियन करेंसी मुझे दे सकते हो बदले में मैं पे कर दूंगी......"
धवल ने चैन की सांस लेकर " वैसे भी बाइक सेल करनी है !...."
कहकर लड़की की ओर रुपए बढाए !.....
लड़की एक्साइटमेंट में " ये तो नई है.....आपको बेचनी क्यों है ???? "
धवल गुस्से में " कर्ज उतारकर इंडिया घर वापस जाना है......"
लड़की ने पर्सनल मैटर जानकर कुछ नहीं कहा ! कुछ सोचकर " अच्छा बाइक सेल कर रहे हो तो मैं लेने के लिए तैयार हूं....."
धवल " बाइक सेल करने से क्या होगा.... जॉब भी तो मिलने दो..... "
लड़की धीरे से " वैसे इस फिलिंग स्टेशन पर अभी दो दिन पहले ही सीट खाली हुई है......चाहो तो बात कर सकते हो !"
धवल हैरानी से " तुम मेरी हेल्प क्यों करना चाहती हो ??? "
लड़की कंधे उचका कर " मुझे लगा कठिनाई में हो..... "
धवल उसकी शुद्ध हिन्दी सुनकर अचंभित हुआ !
धवल जाने लगा फिर रुककर " अच्छा सुनो मिस...तुम बात करना में कल डाक्यूमेंट्स लेकर आ जाऊंगा ! "
लड़की " माई नेम इज मृगांशी.... "
धवल मस्ती में " कितना टफ है ये......हिरणी बोल दूं......."
मृगांशी ने कमर पर हाथ लगाकर घूर कर देखा तभी धवल जोर से हंस दिया ! मृगांशी का फोन रिंग हुआ ! फोन देखकर फटाफट उठाया " हैलो पापा.....बस आ रही हूं.....पंद्रह मिनट में.......जरूरी काम आ गया.....घर आकर सब बताती हूं ! ओके बॉय...."
धवल मुस्कुराकर मृगांशी को इशारा कर " इंडियन डैड...... " मन में " एक मेरे डैड है....एक नंबर के खड़ूस......भला ऐसे कोई करता है क्या....वो भी तब जब उनका बेटा विदेश में अकेला हो.....अब बच्चे की जान लेकर ही छोड़ेंगे लाइफ में थोड़ी मौज मस्ती तो होनी चाहिए......."
सोचते हुए अपने रूम की तरफ निकल गया वहां जाकर देखा तो साथ वाले दोस्त इंडिया जाने की तैयारी कर रहे थे और एक वह था कि इंडिया तो जाना दूर..........बल्कि रूम का रेंट और अदर्श अपने खर्चे के लिए भी जुगाड़ करना पड़ेगा...... उसके बाद ही कोई इंडिया जाने का सपना पूरा होगा !
तभी उसका दोस्त बोला " अपने नानू से बोलकर देख ना कुछ बात बन जाए......."
" नहीं , अब तो मैं खुद के दम पर ही इंडिया जाऊंगा ! " धवल गहरी सर्द आवाज में बोला
मृगांशी चेंज करके डायनिंग चेयर पर बैठकर " पापा.....आज एक लड़का मिला था फिलिंग स्टेशन पर....अपनी बाइक सेल करना चाहता.....मैं ले लूं......"
प्लेट में रोटी रखते हुए उसकी मम्मी " कोई जरूरत नहीं है....कॉलेज खत्म हो गया है.....फिलिंगस्टेशन पास में है...."
मृगांशी ने हैरत से अपनी मम्मी की ओर देखकर " मम्मी.... आप बेफिजूल की टेंशन लेती हो....."
उसकी मम्मी चेयर खिसका कर बैठते हुए " लेकिन बाइक चाहिए ही क्यों ???? "
मृगांशी " कुछ दिन बाद मेरे दोस्त मियामी बीच पर जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ! मम्मी प्लीज अब मना मत करना..... और अपने लॉजिक मत देना.....प्लीज....."
उसकी मम्मी से रहा न गया " तुम्हे पता है ना........तुफान का कोई भरोसा नहीं है !......."
मृगांशी बेचारगी से " पापाऽऽऽऽ....."
उसके पापा " पहले खाना खाओ.....फिर कुछ सोचते हैं ! "
तीनों ने खाना खाया ही था कि मृगांशी का फोन रिंग हुआ और नाम देख कर एक्साइटमेंट में " मम्मी -पापा वेदांक भाई का वीडियो कॉल है !....."
मृगांशी वेदांक से बात करती है.......
धवल ने फोन चैक किया तो उसकी मां की अनलिमिटेड मिस कॉल थी ! फोन मिलाते ही उसकी छोटी बहन बरस पड़ी !
" फोन नहीं उठाने का मतलब आप समझते हो ना.....मम्मा का बीपी हाई हो गया है आपके फोन न उठाने से......उनकी सोच पता है कहां चली गई......आपने सुसाइड अटेंप्ट तो नहीं कर लिया है.....ये अपना गूस्सा अपने पास रखो.....और ये सब कर के किस को दिखा रहे हैं.......आप पापा से गुस्सा है......तो उनसे रहिए ना लेकिन मां.......आप सोच नहीं सकते किस हद तक अपना दिमाग खराब कर लिया है..... रो-रोकर बुरा हाल हो गया है......" प्रणामी गला भर आया था !
धवल " इमोशनल होने की जरूरत नहीं है.....तुम सबकी छाती पर बैठ कर ऐसे ही परेशान करूंगा.....समझी.....और क्या कह रही थी...सुसाइड अटेंप्ट ये फालतू की बाते मेरे लिए नहीं बनी है ! मां को बोल दे मैं ठीक हूं....."
" सच्ची में घर आ इतना मारूंगी ना , याद रखेगा......फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करेगा ! " इतना बोल धवल की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए !
धवल मनुहार से " सॉरी मम्मा.....प्लीज आप ये सब मत कीजिए.......जस्ट चिल आप मॉर्डन है.....ओल्ड लेडी की तरह मत कीजिए....... "
" भाई मां (दादी) पीछे ही है......" प्रणामी हंसकर
धवल कान पकड़कर दादी को देख कर " सॉरी ओल्ड लेडी....."
(दादी) मां" घर आ फिर देख चप्पल से आरती उतारूंगी तेरी.... एक टाइम में तेरा बाप भी ऐसे ही था....."
धवल " अच्छा गॉइज.......कल शायद जॉब मिल जाए ! "
" कांग्रेचुलेशन भाई......" एक्साइटमेंट में प्रणामी फिर सोच कर " कौन महामूर्ख है जो आपको जॉब दे रहा है !..... "
" देवी का अवतार लेकर आई है कोई......साक्षात लक्ष्मी....उसने बाइक लेने की इच्छा जताई है....." धवल खोया सा.....
प्रणामी उंगली हिलाकर " पक्का भूतनी है......उसे पता लग गया कि ये भी मेरी तरह आलसी.....नल्ला....निकम्मा....."
धवल घूर कर " अब चुप हो रही है या नहीं......मां..... "
धवल की मम्मी ने आंखे दिखाई तो मां (दादी )ने अपने आंचल में छिपा लिया !
क्रमशः*****
Chapter
165
Words
203.6K
Updated
16 hrs ago
Published
Mar 10, 2025
Published Chapters
आंखो में हो तुम - Chapter 1
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 2
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 3
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 4
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 5
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 6
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 7
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 8
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 9
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 10
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 11
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 12
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 13
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 14
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 15
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 16
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 17
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 18
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 19
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 20
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 21
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 22
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 23
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 24
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 25
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 26
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 27
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 28
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 29
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 30
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 31
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 32
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 33
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 34
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 35
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 36
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 37
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 38
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 39
Free
आंखो में हो तुम - Chapter 40
Free
इस बार तुम्हे एक रुपया भी नहीं मिलेगा ! बहुत कर ली अपनी मनमानी.....और ये जितना कर्ज किया है ना..... अपनी कमाई से सब चुकाकर......अपनी इंडिया की टिकट भी खुद अंरेज करके आओगे......समझे....."
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत कीजिए.....इतने सालों बाद घर आने का मौका मिला है.....आप नहीं दे सकते तो मैं दे देती हूं...."
" बिल्कुल चुप.....इस नबावजादे ने बहुत ऐश कर ली....सब तुम्हारी वजह से...... तुुमने ही तो उसको सर चढ़ाया है....... कंट्रोल किया होता तो रुपए की कीमत जानता....... अगर तुमने एक रुपया भी दिया ना तो उम्र भर मुझसे बात मत करना......."
फिर सेक्रेट्री को बुलाकर " मैडम के अकाउंट की डिटेल मुझे चाहिए......"
धवल को अपने पापा की बात सुनकर गुस्सा आ गया और फोन काट दिया.....उसके बाद उसकी मां का फोन आता रहा लेकिन उसने बात नहीं की !
धवल पर एकाएक उसके पापा ने खुद से कमाने का बम फोड़ा था ! अपने पापा की तरह गुस्सा भी जल्दी आता था !
धवल गुस्से में बाइक लेकर मियामी की सड़को पर चल पड़ा ! कुछ दूर चलने के बाद रिजर्व मोड पर बाइक में फ्यूल खत्म हो गया ! कुछ दूर पैदल बाइक को घसीटने पर एक फिलिंग स्टेशन दिखाई दिया....उसे देख चैन की सांस ली !
लड़की से इंग्लिश में फ्यूल डालने को कहा और फ्यूल डाल कर पेमेंट करने लगा तो इंडियन करंसी उसके हाथ में थी, ये देख उसने माथा पीट लिया !
लड़की को देखकर " सॉरी....."
बाइक साइड में खड़ी करने लगा ! पाइप रखकर लड़की उसके पास आई " हे क्या हुआ ??? "
उसकी हिंदी सुनकर धवल चौक कर " आर यू इंडियन ??? "
लड़की " हां....तुम चाहो तो इंडियन करेंसी मुझे दे सकते हो बदले में मैं पे कर दूंगी......"
धवल ने चैन की सांस लेकर " वैसे भी बाइक सेल करनी है !...."
कहकर लड़की की ओर रुपए बढाए !.....
लड़की एक्साइटमेंट में " ये तो नई है.....आपको बेचनी क्यों है ???? "
धवल गुस्से में " कर्ज उतारकर इंडिया घर वापस जाना है......"
लड़की ने पर्सनल मैटर जानकर कुछ नहीं कहा ! कुछ सोचकर " अच्छा बाइक सेल कर रहे हो तो मैं लेने के लिए तैयार हूं....."
धवल " बाइक सेल करने से क्या होगा.... जॉब भी तो मिलने दो..... "
लड़की धीरे से " वैसे इस फिलिंग स्टेशन पर अभी दो दिन पहले ही सीट खाली हुई है......चाहो तो बात कर सकते हो !"
धवल हैरानी से " तुम मेरी हेल्प क्यों करना चाहती हो ??? "
लड़की कंधे उचका कर " मुझे लगा कठिनाई में हो..... "
धवल उसकी शुद्ध हिन्दी सुनकर अचंभित हुआ !
धवल जाने लगा फिर रुककर " अच्छा सुनो मिस...तुम बात करना में कल डाक्यूमेंट्स लेकर आ जाऊंगा ! "
लड़की " माई नेम इज मृगांशी.... "
धवल मस्ती में " कितना टफ है ये......हिरणी बोल दूं......."
मृगांशी ने कमर पर हाथ लगाकर घूर कर देखा तभी धवल जोर से हंस दिया ! मृगांशी का फोन रिंग हुआ ! फोन देखकर फटाफट उठाया " हैलो पापा.....बस आ रही हूं.....पंद्रह मिनट में.......जरूरी काम आ गया.....घर आकर सब बताती हूं ! ओके बॉय...."
धवल मुस्कुराकर मृगांशी को इशारा कर " इंडियन डैड...... " मन में " एक मेरे डैड है....एक नंबर के खड़ूस......भला ऐसे कोई करता है क्या....वो भी तब जब उनका बेटा विदेश में अकेला हो.....अब बच्चे की जान लेकर ही छोड़ेंगे लाइफ में थोड़ी मौज मस्ती तो होनी चाहिए......."
सोचते हुए अपने रूम की तरफ निकल गया वहां जाकर देखा तो साथ वाले दोस्त इंडिया जाने की तैयारी कर रहे थे और एक वह था कि इंडिया तो जाना दूर..........बल्कि रूम का रेंट और अदर्श अपने खर्चे के लिए भी जुगाड़ करना पड़ेगा...... उसके बाद ही कोई इंडिया जाने का सपना पूरा होगा !
तभी उसका दोस्त बोला " अपने नानू से बोलकर देख ना कुछ बात बन जाए......."
" नहीं , अब तो मैं खुद के दम पर ही इंडिया जाऊंगा ! " धवल गहरी सर्द आवाज में बोला
मृगांशी चेंज करके डायनिंग चेयर पर बैठकर " पापा.....आज एक लड़का मिला था फिलिंग स्टेशन पर....अपनी बाइक सेल करना चाहता.....मैं ले लूं......"
प्लेट में रोटी रखते हुए उसकी मम्मी " कोई जरूरत नहीं है....कॉलेज खत्म हो गया है.....फिलिंगस्टेशन पास में है...."
मृगांशी ने हैरत से अपनी मम्मी की ओर देखकर " मम्मी.... आप बेफिजूल की टेंशन लेती हो....."
उसकी मम्मी चेयर खिसका कर बैठते हुए " लेकिन बाइक चाहिए ही क्यों ???? "
मृगांशी " कुछ दिन बाद मेरे दोस्त मियामी बीच पर जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ! मम्मी प्लीज अब मना मत करना..... और अपने लॉजिक मत देना.....प्लीज....."
उसकी मम्मी से रहा न गया " तुम्हे पता है ना........तुफान का कोई भरोसा नहीं है !......."
मृगांशी बेचारगी से " पापाऽऽऽऽ....."
उसके पापा " पहले खाना खाओ.....फिर कुछ सोचते हैं ! "
तीनों ने खाना खाया ही था कि मृगांशी का फोन रिंग हुआ और नाम देख कर एक्साइटमेंट में " मम्मी -पापा वेदांक भाई का वीडियो कॉल है !....."
मृगांशी वेदांक से बात करती है.......
धवल ने फोन चैक किया तो उसकी मां की अनलिमिटेड मिस कॉल थी ! फोन मिलाते ही उसकी छोटी बहन बरस पड़ी !
" फोन नहीं उठाने का मतलब आप समझते हो ना.....मम्मा का बीपी हाई हो गया है आपके फोन न उठाने से......उनकी सोच पता है कहां चली गई......आपने सुसाइड अटेंप्ट तो नहीं कर लिया है.....ये अपना गूस्सा अपने पास रखो.....और ये सब कर के किस को दिखा रहे हैं.......आप पापा से गुस्सा है......तो उनसे रहिए ना लेकिन मां.......आप सोच नहीं सकते किस हद तक अपना दिमाग खराब कर लिया है..... रो-रोकर बुरा हाल हो गया है......" प्रणामी गला भर आया था !
धवल " इमोशनल होने की जरूरत नहीं है.....तुम सबकी छाती पर बैठ कर ऐसे ही परेशान करूंगा.....समझी.....और क्या कह रही थी...सुसाइड अटेंप्ट ये फालतू की बाते मेरे लिए नहीं बनी है ! मां को बोल दे मैं ठीक हूं....."
" सच्ची में घर आ इतना मारूंगी ना , याद रखेगा......फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करेगा ! " इतना बोल धवल की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए !
धवल मनुहार से " सॉरी मम्मा.....प्लीज आप ये सब मत कीजिए.......जस्ट चिल आप मॉर्डन है.....ओल्ड लेडी की तरह मत कीजिए....... "
" भाई मां (दादी) पीछे ही है......" प्रणामी हंसकर
धवल कान पकड़कर दादी को देख कर " सॉरी ओल्ड लेडी....."
(दादी) मां" घर आ फिर देख चप्पल से आरती उतारूंगी तेरी.... एक टाइम में तेरा बाप भी ऐसे ही था....."
धवल " अच्छा गॉइज.......कल शायद जॉब मिल जाए ! "
" कांग्रेचुलेशन भाई......" एक्साइटमेंट में प्रणामी फिर सोच कर " कौन महामूर्ख है जो आपको जॉब दे रहा है !..... "
" देवी का अवतार लेकर आई है कोई......साक्षात लक्ष्मी....उसने बाइक लेने की इच्छा जताई है....." धवल खोया सा.....
प्रणामी उंगली हिलाकर " पक्का भूतनी है......उसे पता लग गया कि ये भी मेरी तरह आलसी.....नल्ला....निकम्मा....."
धवल घूर कर " अब चुप हो रही है या नहीं......मां..... "
धवल की मम्मी ने आंखे दिखाई तो मां (दादी )ने अपने आंचल में छिपा लिया !
क्रमशः*****
धवल की मुट्ठियां कस गई , पीछे से उसकी मां की आवाज आ रही थी " ऐसा मत कीजिए.....इतने सालों बाद घर आने का मौका मिला है.....आप नहीं दे सकते तो मैं दे देती हूं...."
" बिल्कुल चुप.....इस नबावजादे ने बहुत ऐश कर ली....सब तुम्हारी वजह से...... तुुमने ही तो उसको सर चढ़ाया है....... कंट्रोल किया होता तो रुपए की कीमत जानता....... अगर तुमने एक रुपया भी दिया ना तो उम्र भर मुझसे बात मत करना......."
फिर सेक्रेट्री को बुलाकर " मैडम के अकाउंट की डिटेल मुझे चाहिए......"
धवल को अपने पापा की बात सुनकर गुस्सा आ गया और फोन काट दिया.....उसके बाद उसकी मां का फोन आता रहा लेकिन उसने बात नहीं की !
धवल पर एकाएक उसके पापा ने खुद से कमाने का बम फोड़ा था ! अपने पापा की तरह गुस्सा भी जल्दी आता था !
धवल गुस्से में बाइक लेकर मियामी की सड़को पर चल पड़ा ! कुछ दूर चलने के बाद रिजर्व मोड पर बाइक में फ्यूल खत्म हो गया ! कुछ दूर पैदल बाइक को घसीटने पर एक फिलिंग स्टेशन दिखाई दिया....उसे देख चैन की सांस ली !
लड़की से इंग्लिश में फ्यूल डालने को कहा और फ्यूल डाल कर पेमेंट करने लगा तो इंडियन करंसी उसके हाथ में थी, ये देख उसने माथा पीट लिया !
लड़की को देखकर " सॉरी....."
बाइक साइड में खड़ी करने लगा ! पाइप रखकर लड़की उसके पास आई " हे क्या हुआ ??? "
उसकी हिंदी सुनकर धवल चौक कर " आर यू इंडियन ??? "
लड़की " हां....तुम चाहो तो इंडियन करेंसी मुझे दे सकते हो बदले में मैं पे कर दूंगी......"
धवल ने चैन की सांस लेकर " वैसे भी बाइक सेल करनी है !...."
कहकर लड़की की ओर रुपए बढाए !.....
लड़की एक्साइटमेंट में " ये तो नई है.....आपको बेचनी क्यों है ???? "
धवल गुस्से में " कर्ज उतारकर इंडिया घर वापस जाना है......"
लड़की ने पर्सनल मैटर जानकर कुछ नहीं कहा ! कुछ सोचकर " अच्छा बाइक सेल कर रहे हो तो मैं लेने के लिए तैयार हूं....."
धवल " बाइक सेल करने से क्या होगा.... जॉब भी तो मिलने दो..... "
लड़की धीरे से " वैसे इस फिलिंग स्टेशन पर अभी दो दिन पहले ही सीट खाली हुई है......चाहो तो बात कर सकते हो !"
धवल हैरानी से " तुम मेरी हेल्प क्यों करना चाहती हो ??? "
लड़की कंधे उचका कर " मुझे लगा कठिनाई में हो..... "
धवल उसकी शुद्ध हिन्दी सुनकर अचंभित हुआ !
धवल जाने लगा फिर रुककर " अच्छा सुनो मिस...तुम बात करना में कल डाक्यूमेंट्स लेकर आ जाऊंगा ! "
लड़की " माई नेम इज मृगांशी.... "
धवल मस्ती में " कितना टफ है ये......हिरणी बोल दूं......."
मृगांशी ने कमर पर हाथ लगाकर घूर कर देखा तभी धवल जोर से हंस दिया ! मृगांशी का फोन रिंग हुआ ! फोन देखकर फटाफट उठाया " हैलो पापा.....बस आ रही हूं.....पंद्रह मिनट में.......जरूरी काम आ गया.....घर आकर सब बताती हूं ! ओके बॉय...."
धवल मुस्कुराकर मृगांशी को इशारा कर " इंडियन डैड...... " मन में " एक मेरे डैड है....एक नंबर के खड़ूस......भला ऐसे कोई करता है क्या....वो भी तब जब उनका बेटा विदेश में अकेला हो.....अब बच्चे की जान लेकर ही छोड़ेंगे लाइफ में थोड़ी मौज मस्ती तो होनी चाहिए......."
सोचते हुए अपने रूम की तरफ निकल गया वहां जाकर देखा तो साथ वाले दोस्त इंडिया जाने की तैयारी कर रहे थे और एक वह था कि इंडिया तो जाना दूर..........बल्कि रूम का रेंट और अदर्श अपने खर्चे के लिए भी जुगाड़ करना पड़ेगा...... उसके बाद ही कोई इंडिया जाने का सपना पूरा होगा !
तभी उसका दोस्त बोला " अपने नानू से बोलकर देख ना कुछ बात बन जाए......."
" नहीं , अब तो मैं खुद के दम पर ही इंडिया जाऊंगा ! " धवल गहरी सर्द आवाज में बोला
मृगांशी चेंज करके डायनिंग चेयर पर बैठकर " पापा.....आज एक लड़का मिला था फिलिंग स्टेशन पर....अपनी बाइक सेल करना चाहता.....मैं ले लूं......"
प्लेट में रोटी रखते हुए उसकी मम्मी " कोई जरूरत नहीं है....कॉलेज खत्म हो गया है.....फिलिंगस्टेशन पास में है...."
मृगांशी ने हैरत से अपनी मम्मी की ओर देखकर " मम्मी.... आप बेफिजूल की टेंशन लेती हो....."
उसकी मम्मी चेयर खिसका कर बैठते हुए " लेकिन बाइक चाहिए ही क्यों ???? "
मृगांशी " कुछ दिन बाद मेरे दोस्त मियामी बीच पर जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ! मम्मी प्लीज अब मना मत करना..... और अपने लॉजिक मत देना.....प्लीज....."
उसकी मम्मी से रहा न गया " तुम्हे पता है ना........तुफान का कोई भरोसा नहीं है !......."
मृगांशी बेचारगी से " पापाऽऽऽऽ....."
उसके पापा " पहले खाना खाओ.....फिर कुछ सोचते हैं ! "
तीनों ने खाना खाया ही था कि मृगांशी का फोन रिंग हुआ और नाम देख कर एक्साइटमेंट में " मम्मी -पापा वेदांक भाई का वीडियो कॉल है !....."
मृगांशी वेदांक से बात करती है.......
धवल ने फोन चैक किया तो उसकी मां की अनलिमिटेड मिस कॉल थी ! फोन मिलाते ही उसकी छोटी बहन बरस पड़ी !
" फोन नहीं उठाने का मतलब आप समझते हो ना.....मम्मा का बीपी हाई हो गया है आपके फोन न उठाने से......उनकी सोच पता है कहां चली गई......आपने सुसाइड अटेंप्ट तो नहीं कर लिया है.....ये अपना गूस्सा अपने पास रखो.....और ये सब कर के किस को दिखा रहे हैं.......आप पापा से गुस्सा है......तो उनसे रहिए ना लेकिन मां.......आप सोच नहीं सकते किस हद तक अपना दिमाग खराब कर लिया है..... रो-रोकर बुरा हाल हो गया है......" प्रणामी गला भर आया था !
धवल " इमोशनल होने की जरूरत नहीं है.....तुम सबकी छाती पर बैठ कर ऐसे ही परेशान करूंगा.....समझी.....और क्या कह रही थी...सुसाइड अटेंप्ट ये फालतू की बाते मेरे लिए नहीं बनी है ! मां को बोल दे मैं ठीक हूं....."
" सच्ची में घर आ इतना मारूंगी ना , याद रखेगा......फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करेगा ! " इतना बोल धवल की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए !
धवल मनुहार से " सॉरी मम्मा.....प्लीज आप ये सब मत कीजिए.......जस्ट चिल आप मॉर्डन है.....ओल्ड लेडी की तरह मत कीजिए....... "
" भाई मां (दादी) पीछे ही है......" प्रणामी हंसकर
धवल कान पकड़कर दादी को देख कर " सॉरी ओल्ड लेडी....."
(दादी) मां" घर आ फिर देख चप्पल से आरती उतारूंगी तेरी.... एक टाइम में तेरा बाप भी ऐसे ही था....."
धवल " अच्छा गॉइज.......कल शायद जॉब मिल जाए ! "
" कांग्रेचुलेशन भाई......" एक्साइटमेंट में प्रणामी फिर सोच कर " कौन महामूर्ख है जो आपको जॉब दे रहा है !..... "
" देवी का अवतार लेकर आई है कोई......साक्षात लक्ष्मी....उसने बाइक लेने की इच्छा जताई है....." धवल खोया सा.....
प्रणामी उंगली हिलाकर " पक्का भूतनी है......उसे पता लग गया कि ये भी मेरी तरह आलसी.....नल्ला....निकम्मा....."
धवल घूर कर " अब चुप हो रही है या नहीं......मां..... "
धवल की मम्मी ने आंखे दिखाई तो मां (दादी )ने अपने आंचल में छिपा लिया !
क्रमशः*****
Pushplata Dabas
आंखो में हो तुम - Chapter 1 • 4 months ago
sandhya rana
आंखो में हो तुम - Chapter 7 • 4 months ago
sandhya rana
आंखो में हो तुम - Chapter 6 • 4 months ago
shama gupta
5 months ago
nice story
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Priya Srivastava
7 months ago
hi
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good one
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