Chapter 2 (खुशी!)
थोड़ी देर बाद, जब उस बच्ची ने इधर-उधर देखने के बाद उस लड़के की ओर देखा, तो उस लड़के ने मुस्कराते हुए कहा, "क्या हुआ? क्या देख रही थी इतनी देर से?"
उस लड़की ने कहा, "वो... मैं कभी यहाँ आई नहीं हूँ।"
उस लड़के ने कहा, "अब तो आ गई न!"
उस बच्ची ने कहा, "हाँ!"
उस लड़के ने कहा, "तो अब इधर-उधर देखना बंद करो और खाना खाओ।"
उस बच्ची ने इधर-उधर देखते हुए कहा, "पर खाना है कहाँ?"
उस लड़के ने पीछे की ओर इशारा करके कहा, "वो आ रहा है।"
उस बच्ची ने अपने पीछे देखा, तो वहाँ चार वेटर अपने दोनों हाथों में बहुत-सी डिशेज़ लेकर उसी ओर आ रहे थे। उन वेटर्स ने वो सारी प्लेटें वहाँ लाकर रख दीं और अपना सिर झुका कर वापस चले गए। उन प्लेटों में अलग-अलग तरह की डिशेज़ थीं, जो शायद उस बच्ची ने कभी देखी भी न हों।
उस बच्ची ने सारे खाने को देखते हुए एक्साइटमेंट के साथ कहा, "इतना सब कुछ... मेरे लिए!"
उस लड़के ने उस बच्ची के गाल खींचते हुए कहा, "हाँ, इतना सब कुछ सिर्फ आपके लिए।"
वो बच्ची इतना सारा खाना देख कर खुश हो गई। वो जल्दी से स्प्रिंग रोल उठा कर खाने लगी, लेकिन उसने अपने हाथ अपने मुँह के पास ही रोक लिए।
ये देख कर उस लड़के ने नासमझी से कहा, "क्या हुआ?"
तो उस बच्ची ने कहा, "आप मुझसे इसके पैसे तो नहीं लोगे न?"
उस लड़के ने हँस कर कहा, "नहीं, मैं इसके पैसे आपसे नहीं लूँगा।"
उस बच्ची ने मजे से कहा, "फिर ठीक है।"
उस लड़के ने उसके सिर पर हाथ फेर कर कहा, "तो अब खाना खाओ।"
उस बच्ची ने कहा, "हम्म!"
और खाना खाने लगी। वो एक साथ सब कुछ खा रही थी, जिससे उसका ध्यान आस-पास गया ही नहीं।
तभी उसकी नज़र अपने सामने बैठे लड़के पर पड़ी, तो उसने कहा, "आप क्यों नहीं खा रहे हो, भैया?"
वो लड़का, जो किसी सोच में डूबा हुआ था, उस बच्ची की आवाज़ सुन कर होश में आया। उसने उस बच्ची से कहा, "मैंने खा लिया है, आप खाओ।"
इतने में उस लड़के के फोन पर कोई मैसेज आया। उस लड़के ने अपना फोन चेक किया और फिर उस बच्ची की ओर देख कर कहा, "अच्छा, आपका नाम क्या है?"
उस बच्ची ने अपना पूरा ध्यान खाने पर रखते हुए ही कहा, "मेरा नाम खुशी है।"
उस लड़के ने अपनी भौंहें सिकोड़ कर कहा, "सिर्फ खुशी?"
खुशी ने नॉर्मली कहा, "हाँ, सिर्फ खुशी।"
उस लड़के ने फिर से सवाल करते हुए कहा, "और आपके मम्मी-पापा?"
उस लड़के का सवाल सुन कर खुशी के हाथ पास्ता खाते-खाते रुक गए। उसने मायूसी से कहा, "मेरा कोई नहीं है।"
उस लड़के ने फिर से कहा, "तो आप रहती कहाँ हो?"
खुशी ने अपने कंधे उचका कर कहा, "कहीं भी रह लेती हूँ।"
उस लड़के ने टेबल की ओर थोड़ा-सा झुक कर कहा, "देखो खुशी, आप किसी से भी, कोई भी झूठ बोल लो, लेकिन अपने मम्मी-पापा के होते हुए ये नहीं बोलना चाहिए कि वो जिंदा नहीं हैं।"
खुशी ने हिचकिचाते हुए कहा, "मैं सच बोल रही हूँ, भैया।"
उस लड़के ने पीछे होकर अपनी कुर्सी पर पसरते हुए, अपने हाथ बाँध कर कहा, "रश्मि और विनय... यही नाम है न आपके मम्मी और पापा का?"
उस लड़के के मुँह से अपने माता-पिता का नाम सुन कर खुशी को झटका-सा लगा। उसके हाथ जहाँ के तहाँ रुक गए।
उसने उस लड़के की ओर देख कर सवाल करते हुए कहा, "आपको कैसे पता, भैया?"
उस लड़के ने अपनी भौंहें उठा कर कहा, "मतलब, आपने झूठ बोला था।"
खुशी ने अपनी नज़रें झुका कर कहा, "सॉरी, भैया।"
उसने अपने हाथ भी पीछे खींच लिए थे। इसलिए उस लड़के ने कहा, "खाना खाओ।"
खुशी ने 'ना' में सिर हिलाते हुए कहा, "नहीं।"
उस लड़के ने थोड़ी कड़क आवाज़ में कहा, "मैंने कहा न, खाओ!"
उसकी आवाज़ सुन कर खुशी चुपचाप अपनी नज़रें झुकाए खाना खाने लगी।
ये देख कर उस लड़के ने आराम से कहा, "और अब ये बताओ कि झूठ क्यों बोला?"
खुशी ने अपनी नज़रें उठा कर उसकी ओर देखा, तो लड़के ने आगे कहा, "और हाँ, इस बार सच बोलना। ठीक है!"
खुशी ने धीरे से कहा, "हम्म!"
उस लड़के ने सीधा होते हुए कहा, "तो चलो, बताओ। झूठ क्यों बोला?"
खुशी ने हिचकिचाते हुए कहा, "वो... वो..."
उस लड़के ने चिढ़ कर कहा, "अब बोलो भी।"
खुशी ने नम आँखों के साथ सुबकते हुए कहा, "जब भी मैं किसी से बोलती हूँ कि मुझे भूख लगी है, और उन लोगों को पता चलता है कि मेरे मम्मी-पापा जिंदा हैं, तो वो लोग मुझे बहुत ही अजीब तरीके से देखते हैं। मुझे कुछ खाने को भी नहीं देते और... और अगर मम्मी-पापा से मिल लेते हैं, तो उन्हें भी बुरा-बुरा बोलते हैं।"
उस लड़के ने अपने मन में ही कहा, "वो तो बोलेंगे ही। काम ही ऐसे इंसान के लिए करते थे वो दोनों। अब समझ आ गया होगा कि जो अपनों के सगे नहीं हुए, वो उनके क्या खाक सगे होंगे।"
फिर उसने खुशी की ओर देख कर कहा, "इस बार तो सच बोल रही हो न?"
खुशी ने हाँ में सिर हिला दिया, तो उस लड़के ने कहा, "अच्छा। अगर कोई आपके मम्मी-पापा को बुरा-बुरा न बोले और आपको किसी और से खाना माँगने की जरूरत भी न पड़े, फिर तो आप नहीं कहोगी न कि आपके मम्मी-पापा नहीं हैं?"
खुशी ने अपने आँसू साफ करते हुए कहा, "नहीं।"
उस लड़के ने अपने हाथ टेबल पर रखते हुए कहा, "तो चलो, आज इस बात का इंतजाम कर ही देते हैं कि आपके मम्मी-पापा को कोई भी बुरा-बुरा न बोले।"
फिर उसने अपनी भौंहें उठा कर कहा, "क्यों?"
खुशी ने चमकती हुई आँखों के साथ कहा, "आप ऐसा कर सकते हो?"
उस लड़के ने सोचते हुए कहा, "हाँ, कर तो सकता हूँ।"
फिर उसने खुशी की ओर देख कर अपनी भौंहें उठा कर कहा, "अगर वो लोग मेरा कहा करने को तैयार हो जाएँ, तो!"
खुशी ने तुरंत कहा, "हाँ, हाँ! वो लोग जरूर करेंगे। आप जो बोलोगे, वो सब करेंगे।"
उस लड़के ने अपने हर शब्द पर जोर देते हुए कहा, "सिर्फ उनको ही नहीं, आपको भी कुछ करना पड़ेगा।"
जारी है...