D & V : Princes Beyond Royalty Ch. 1

Chapter 1 (चीखें!)

Posted by Dev Srivastava • Jan 14, 2025 08:04 AM

Disclaimer: इस कहानी के सभी पात्र पूर्णतः काल्पनिक एवं मौलिक हैं। इसका किसी भी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से मेल केवल एक संयोग मात्र होगा।

इस कहानी का उद्देश्य किसी के भी विचारों अथवा धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं है। यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए लिखी गई है, तो कृपया मनोरंजन की दृष्टि से ही पढ़ें।

---

रात का समय,

आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और रह-रह कर बिजली चमक रही थी। साथ में घनघोर बारिश भी हो रही थी। इसी बारिश में वो कोई पुराने फैक्ट्री-जैसी जगह थी, जहाँ से किसी के चीखने की आवाज़ें आ रही थीं।

वो चीखें बहुत ही हृदय-विदारक थीं। धीरे-धीरे उन चीखों में मिला हुआ दर्द बढ़ता जा रहा था, और ऐसा लग रहा था कि उस शख्स के साथ आसमान भी रो रहा है।

उस फैक्ट्री के अंदर एक महिला और एक पुरुष आराम से सोफे पर बैठे हुए थे। महिला की उम्र 45-46 साल रही होगी, तो वहीं पुरुष की उम्र 50-51 साल।

वो दोनों आराम से बैठ कर सामने हो रहे तमाशे के मजे ले रहे थे, या यूँ कहें कि ये तमाशा किया ही इन दोनों ने था। उनके सामने एक 15-16 साल का लड़का बंधा हुआ था।

उसके हाथ और पैर रस्सियों के जरिए दीवारों से बंधे हुए थे। अंधेरा होने की वजह से उसका चेहरा नजर नहीं आ रहा था, लेकिन उसकी चीखों में उसका दर्द साफ महसूस हो रहा था।

उसके पीछे कुछ हट्टे-कट्टे आदमी खड़े थे, जो उस पर कोड़े बरसाए जा रहे थे। उस लड़के के शरीर पर बहुत सारे घाव बन चुके थे और जगह-जगह से खून रिस रहा था, लेकिन उस महिला और उस पुरुष को इस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। ऐसा लग रहा था मानो उस लड़के की चीखों से इन दोनों को सुकून मिल रहा हो।

कुछ समय बाद वो लड़का बेहोश हो गया, तो उस महिला ने खड़े होते हुए कहा, "इसकी खातिरदारी रुकनी नहीं चाहिए।"

उनके आदमियों ने हाँ में सिर हिला दिया। तो वो आदमी भी उठ खड़ा हुआ और वो दोनों वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद उन आदमियों ने अपनी गर्दन उस लड़के की ओर घुमा ली, जो बेहोश होकर झूला हुआ था।

2 साल बाद...

सुबह का समय था, जब एक लड़का आराम से सड़क पर चलता जा रहा था। उसकी उम्र कोई 17-18 साल के आस-पास रही होगी। उसके चेहरे पर एक अलग ही नूर था।

उसने अपने कानों में मैग्नेटिक इयररिंग्स पहने हुए थे। उसके मुँह पर एक मास्क था। उसने सफेद रंग की शर्ट के साथ काले रंग की पैंट पहन रखी थी और साथ में एक काले रंग का ब्लेजर पहन रखा था।

ब्लेजर की बाजुओं को उसने कोहनी तक मोड़ रखा था। उसके पैरों में सफेद रंग के स्नीकर्स थे। उसकी पीठ पर एक स्कूल बैग टँगा हुआ था।

उसके बाएँ हाथ में एक काले रंग की स्पोर्ट्स वॉच थी और दाएँ हाथ में कलावा बँधा हुआ था। उसके गले में सोने की चेन जैसा कुछ दिख रहा था, लेकिन बता पाना मुश्किल था कि वो चेन ही थी या कुछ और।

उस लड़के के बाल सलीके से सेट थे और उसने अपने कानों में हेडफोन पहन रखा था। उसे आस-पास के लोगों से कोई मतलब नहीं था। वो तो बस म्यूजिक सुनते हुए, सामने की ओर देखते हुए, अपने हाथ पैंट की पॉकेट में डाले हुए आगे बढ़ रहा था।

लेकिन तभी कोई उसका पैंट पकड़ कर उसे खींचने लगा। उस लड़के ने अपनी सर्द नज़रें उस ओर घुमाईं, तो वहाँ पर एक छोटी-सी बच्ची खड़ी थी, जिसकी उम्र कोई 5-6 साल के आस-पास रही होगी। उसकी आँखों में आँसू भरे हुए थे। उसने मैले से कपड़े पहने हुए थे और उसके बाल भी पूरी तरह से बिखरे हुए थे।

उसे देख कर उस लड़के की आँखें नॉर्मल हो गईं। उसने अपने हेडफोन उतार कर गले में लटका लिए और उस बच्ची के पास बैठ गया।

उसने उस बच्ची के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा, "क्या हो गया, बच्चा? आप ऐसे रो क्यों रही हो?"

उस बच्ची ने रोते हुए ही कहा, "भैया, बहुत जोर की भूख लगी है। कुछ खाने को दे दो।"

उस बच्ची के शब्द सुन कर उस लड़के की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने उन्हें साफ करके कहा, "ओह! तो आपको भूख लगी है। अच्छा, तो बताओ क्या खाओगी आप?"

उस बच्ची ने मासूमियत से कहा, "जो भी आप खिला दो, भैया।"

उस लड़के ने उस बच्ची के आँसू पोंछते हुए कहा, "ओके, तो चलो, आज हम छोले भटूरे खाएँगे। क्या कहती हो?"

छोले-भटूरे का नाम सुनते ही उस बच्ची की आँखों में चमक आ गई। उसने बड़ी-सी मुस्कान के साथ अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। तो उस लड़के ने उस बच्ची का हाथ पकड़ा और दूसरी ओर बढ़ गया।

वो लड़का उस बच्ची को लेकर एक रेस्टोरेंट में चला गया। वो दोनों एक टेबल पर पहुँचे, तो लड़के ने एक कुर्सी खींच कर उस बच्ची से कहा, "बैठो!"

उस बच्ची ने खुद को प्वाइंट करके कहा, "मैं?"

तो उस लड़के ने कहा, "तुम्हारे अलावा मैं किसी और को यहाँ लेकर आया हूँ क्या!"

उस बच्ची ने कहा, "नहीं।" तो लड़के ने कहा, "तो तुम्हें ही कहूँगा न!"

उस बच्ची ने अपनी नज़रें झुका लीं, तो उस लड़के ने कहा, "अब बैठ जाओ।"

वो बच्ची उस कुर्सी पर बैठ गई और आस-पास की चीज़ें देखने लगी। वो हर चीज़ को बड़े ही कौतूहल से देखे जा रही थी, और वो लड़का उसकी हरकतों को देख कर हँस रहा था।

तभी ना जाने उसके दिमाग में क्या आया कि उसने अपना फोन निकाला और चुपके से उस बच्ची की एक फोटो खींच कर किसी को मैसेज कर दिया। फिर उसने अपना फोन पॉकेट में रखा और वापस से उस लड़की को देख कर मुस्कुराने लगा।

इतने में वेटर वहाँ आ गया। उस वेटर ने उस लड़के को देख कर हल्के से अपना सिर झुका दिया, तो उस लड़के ने भी अपना सिर हाँ में हिला दिया। वेटर ने मेन्यू उस लड़के की ओर बढ़ाते हुए बहुत ही आदर के साथ कहा, "आप क्या लेना पसंद करेंगे, सर?"

उस लड़के ने मेन्यू लिया और कुछ चीज़ों का ऑर्डर दे दिया। ऑर्डर लेकर वेटर वहाँ से चला गया। उसके जाने के बाद वो लड़का फिर से उस बच्ची को देखने लगा।

उसने उस बच्ची को देखते हुए नम आँखों के साथ अपने मन में खुद से ही कहा, "कितनी अच्छी होती है न कॉमन लोगों की लाइफ! भले ही गरीबी हो, दुख हो, लेकिन छोटी-छोटी बातों से खुशी भी तो मिल जाती है। हमें तो वो भी नसीब नहीं होती।"

जारी है...

100%