Historical Fiction Historical Romance Fiction
अनुबंध: रूह और दीवारें
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यह कहानी है ध्वनि की, जिसकी दुनिया उसकी पुश्तैनी हवेली 'नूर मंजिल' में बसती है। उसके लिए वह हवेली सिर्फ़ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उसके बचपन की यादें और उसके पहले प्यार विहान से किया गया एक अधूरा वादा है। लेकिन वक्त तब करवट बदलता है जब 'नूर मंजिल' पर नी...
यह कहानी है ध्वनि की, जिसकी दुनिया उसकी पुश्तैनी हवेली 'नूर मंजिल' में बसती है। उसके लिए वह हवेली सिर्फ़ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उसके बचपन की यादें और उसके पहले प्यार विहान से किया गया एक अधूरा वादा है। लेकिन वक्त तब करवट बदलता है जब 'नूर मंजिल' पर नीलामी का साया मंडराने लगता है। ध्वनि के पास उसे बचाने का कोई रास्ता नहीं बचता, सिवाय एक 'सौदा' करने के।
दूसरी ओर है सिद्धार्थ सिंघानिया—शहर का सबसे बड़ा, सबसे क्रूर और अहंकारी बिजनेसमैन। जिसके लिए रिश्ते सिर्फ़ मुनाफे का सौदा हैं और भावनाएं कमज़ोरी। उसे अपने दादाजी की वसीयत और अरबों की जायदाद हासिल करने के लिए एक 'पत्नी' की ज़रूरत है। वह ध्वनि की मजबूरी का फायदा उठाता है और उसके सामने एक प्रस्ताव रखता है—"एक साल की बनावटी शादी, और बदले में नूर मंजिल की आज़ादी।"
ध्वनि इस 'गोल्डन केज' (सुनहरे पिंजरे) में कदम तो रख देती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। वह सिद्धार्थ से साफ़ कह देती है—"आप मुझे खरीद सकते हैं, लेकिन मुझे छू नहीं सकते।"
जुनून, साज़िश और सस्पेंस
क्या ध्वनि इस 'अनुबंध' की बेड़ियों को तोड़ पाएगी? क्या सिद्धार्थ का पत्थर जैसा दिल ध्वनि के लिए पिघलेगा, या उसका जुनून सब कुछ राख कर देगा? और जब सात समंदर पार से विहान वापस लौटेगा, तब क्या होगा इस बेनाम रिश्ते का अंजाम?
साज़िशों के जाल, नफरत की आग और जुनून की हद पार करती यह दास्तां आपको अंत तक बांधे रखेगी। जहाँ हर मोड़ पर एक नया राज है और हर दहलीज़ पर एक नई परीक्षा।
दूसरी ओर है सिद्धार्थ सिंघानिया—शहर का सबसे बड़ा, सबसे क्रूर और अहंकारी बिजनेसमैन। जिसके लिए रिश्ते सिर्फ़ मुनाफे का सौदा हैं और भावनाएं कमज़ोरी। उसे अपने दादाजी की वसीयत और अरबों की जायदाद हासिल करने के लिए एक 'पत्नी' की ज़रूरत है। वह ध्वनि की मजबूरी का फायदा उठाता है और उसके सामने एक प्रस्ताव रखता है—"एक साल की बनावटी शादी, और बदले में नूर मंजिल की आज़ादी।"
ध्वनि इस 'गोल्डन केज' (सुनहरे पिंजरे) में कदम तो रख देती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। वह सिद्धार्थ से साफ़ कह देती है—"आप मुझे खरीद सकते हैं, लेकिन मुझे छू नहीं सकते।"
जुनून, साज़िश और सस्पेंस
क्या ध्वनि इस 'अनुबंध' की बेड़ियों को तोड़ पाएगी? क्या सिद्धार्थ का पत्थर जैसा दिल ध्वनि के लिए पिघलेगा, या उसका जुनून सब कुछ राख कर देगा? और जब सात समंदर पार से विहान वापस लौटेगा, तब क्या होगा इस बेनाम रिश्ते का अंजाम?
साज़िशों के जाल, नफरत की आग और जुनून की हद पार करती यह दास्तां आपको अंत तक बांधे रखेगी। जहाँ हर मोड़ पर एक नया राज है और हर दहलीज़ पर एक नई परीक्षा।
Chapter
48
Words
54.9K
Updated
1 day ago
Published
Mar 23, 2026
Published Chapters
अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 1
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 2
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 3
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 4
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 5
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 6
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 7
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 8
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 9
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 10
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 11
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 12
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 13
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 14
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 15
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 16
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 17
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 18
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 19
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 20
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 21
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 22
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 23
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 24
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 25
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 26
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 27
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 28
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 29
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 30
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 31
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 32
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 33
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 34
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 35
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 36
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 37
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 38
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 39
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अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 40
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यह कहानी है ध्वनि की, जिसकी दुनिया उसकी पुश्तैनी हवेली 'नूर मंजिल' में बसती है। उसके लिए वह हवेली सिर्फ़ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उसके बचपन की यादें और उसके पहले प्यार विहान से किया गया एक अधूरा वादा है। लेकिन वक्त तब करवट बदलता है जब 'नूर मंजिल' पर नीलामी का साया मंडराने लगता है। ध्वनि के पास उसे बचाने का कोई रास्ता नहीं बचता, सिवाय एक 'सौदा' करने के।
दूसरी ओर है सिद्धार्थ सिंघानिया—शहर का सबसे बड़ा, सबसे क्रूर और अहंकारी बिजनेसमैन। जिसके लिए रिश्ते सिर्फ़ मुनाफे का सौदा हैं और भावनाएं कमज़ोरी। उसे अपने दादाजी की वसीयत और अरबों की जायदाद हासिल करने के लिए एक 'पत्नी' की ज़रूरत है। वह ध्वनि की मजबूरी का फायदा उठाता है और उसके सामने एक प्रस्ताव रखता है—"एक साल की बनावटी शादी, और बदले में नूर मंजिल की आज़ादी।"
ध्वनि इस 'गोल्डन केज' (सुनहरे पिंजरे) में कदम तो रख देती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। वह सिद्धार्थ से साफ़ कह देती है—"आप मुझे खरीद सकते हैं, लेकिन मुझे छू नहीं सकते।"
जुनून, साज़िश और सस्पेंस
क्या ध्वनि इस 'अनुबंध' की बेड़ियों को तोड़ पाएगी? क्या सिद्धार्थ का पत्थर जैसा दिल ध्वनि के लिए पिघलेगा, या उसका जुनून सब कुछ राख कर देगा? और जब सात समंदर पार से विहान वापस लौटेगा, तब क्या होगा इस बेनाम रिश्ते का अंजाम?
साज़िशों के जाल, नफरत की आग और जुनून की हद पार करती यह दास्तां आपको अंत तक बांधे रखेगी। जहाँ हर मोड़ पर एक नया राज है और हर दहलीज़ पर एक नई परीक्षा।
दूसरी ओर है सिद्धार्थ सिंघानिया—शहर का सबसे बड़ा, सबसे क्रूर और अहंकारी बिजनेसमैन। जिसके लिए रिश्ते सिर्फ़ मुनाफे का सौदा हैं और भावनाएं कमज़ोरी। उसे अपने दादाजी की वसीयत और अरबों की जायदाद हासिल करने के लिए एक 'पत्नी' की ज़रूरत है। वह ध्वनि की मजबूरी का फायदा उठाता है और उसके सामने एक प्रस्ताव रखता है—"एक साल की बनावटी शादी, और बदले में नूर मंजिल की आज़ादी।"
ध्वनि इस 'गोल्डन केज' (सुनहरे पिंजरे) में कदम तो रख देती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। वह सिद्धार्थ से साफ़ कह देती है—"आप मुझे खरीद सकते हैं, लेकिन मुझे छू नहीं सकते।"
जुनून, साज़िश और सस्पेंस
क्या ध्वनि इस 'अनुबंध' की बेड़ियों को तोड़ पाएगी? क्या सिद्धार्थ का पत्थर जैसा दिल ध्वनि के लिए पिघलेगा, या उसका जुनून सब कुछ राख कर देगा? और जब सात समंदर पार से विहान वापस लौटेगा, तब क्या होगा इस बेनाम रिश्ते का अंजाम?
साज़िशों के जाल, नफरत की आग और जुनून की हद पार करती यह दास्तां आपको अंत तक बांधे रखेगी। जहाँ हर मोड़ पर एक नया राज है और हर दहलीज़ पर एक नई परीक्षा।
Sukhmanbrar brar
अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 6 • 2 months ago
Savita Bolij
अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 1 • 2 months ago
Neha Bathla
अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 32 • 2 months ago
Savita Bolij
2 months ago
nice
0 likes • अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 1
Neha Bathla
2 months ago
Nice story
0 likes • अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 32No fan art available for this story yet.
👍👍👍👌👌👌👌very nice story
0 likes • अनुबंध: रूह और दीवारें - Chapter 6