18+ Dark Romance
H0t Casanova Lover
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धारा ने काँपती आवाज़ में कहा, “मैं सोऊँगी… उस बिगड़े हुए आदमी के साथ… क्योंकि अपने पति को बचाने का मेरे पास कोई और रास्ता नहीं है।”
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Cas...
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Cas...
धारा ने काँपती आवाज़ में कहा, “मैं सोऊँगी… उस बिगड़े हुए आदमी के साथ… क्योंकि अपने पति को बचाने का मेरे पास कोई और रास्ता नहीं है।”
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Casanova है। उसकी दुनिया में पैसे की कोई कमी नहीं, और औरतों की तो कतार लगी रहती है। उसे किसी से कोई लगाव नहीं, क्योंकि उसका मानना है कि प्यार एक फालतू फीलिंग है जो सिर्फ़ कमज़ोरों को होती है।
हर रिश्ते को वो एक सौदा समझता है — जहाँ उसे फायदा हो, वहीं दिल लगाना है, और जहाँ नुकसान दिखे, वहीं उसे तोड़ देना है।
उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है उसका कंट्रोल — लोगों पर, हालातों पर, और खुद पर भी। लेकिन उसके इसी कंट्रोल को चुनौती देती है एक लड़की… समीरा।
समीरा, एक ऐसी लड़की जो बाहर से बेहद खूबसूरत, आकर्षक और आत्मविश्वासी है। उसकी मुस्कान में ठहराव है, चाल में गरिमा है, लेकिन उसकी आँखों में एक थकी हुई उदासी छिपी है — क्योंकि वो एक शादी से बंधी हुई है जो सिर्फ़ नाम की है। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें प्यार की जगह समझौता है, और खुशी की जगह बोझ।
लेकिन समीरा टूटी नहीं है, बल्कि उसने खुद को और मज़बूत कर लिया है। अब वो किसी की दया नहीं चाहती — वो चाहती है इज़्ज़त, सपने, और खुद की पहचान।
जब समीरा और आयुष पहली बार टकराते हैं, तो ये सिर्फ़ नज़रों की नहीं, एगो की टक्कर होती है। आयुष को लगता है, वो उसे भी वैसे ही जीत लेगा जैसे बाकी लड़कियों को — एक मुस्कान, कुछ अदाएं, और थोड़ी सी नज़दीकियाँ। लेकिन समीरा उससे अलग है। वो न तो आसानी से झुकती है, न डरती है। वो जानती है कि ये आदमी खतरनाक है — और फिर भी उसकी तरफ़ खिंचती चली जाती है।
उधर आयुष के अंदर कुछ बदलने लगता है। वो समीरा को सिर्फ़ एक टारगेट की तरह नहीं देख पाता, लेकिन उसका अतीत और अहंकार उसे मोहब्बत मानने नहीं देते।
उसके लिए ये सब अब एक खेल है — इगो, पावर और बदले का खेल।
लेकिन खेल जब दिल से खेलने लग जाए, तो जीत-हार मायने नहीं रखती… सिर्फ़ टूटन बचती है।
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Casanova है। उसकी दुनिया में पैसे की कोई कमी नहीं, और औरतों की तो कतार लगी रहती है। उसे किसी से कोई लगाव नहीं, क्योंकि उसका मानना है कि प्यार एक फालतू फीलिंग है जो सिर्फ़ कमज़ोरों को होती है।
हर रिश्ते को वो एक सौदा समझता है — जहाँ उसे फायदा हो, वहीं दिल लगाना है, और जहाँ नुकसान दिखे, वहीं उसे तोड़ देना है।
उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है उसका कंट्रोल — लोगों पर, हालातों पर, और खुद पर भी। लेकिन उसके इसी कंट्रोल को चुनौती देती है एक लड़की… समीरा।
समीरा, एक ऐसी लड़की जो बाहर से बेहद खूबसूरत, आकर्षक और आत्मविश्वासी है। उसकी मुस्कान में ठहराव है, चाल में गरिमा है, लेकिन उसकी आँखों में एक थकी हुई उदासी छिपी है — क्योंकि वो एक शादी से बंधी हुई है जो सिर्फ़ नाम की है। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें प्यार की जगह समझौता है, और खुशी की जगह बोझ।
लेकिन समीरा टूटी नहीं है, बल्कि उसने खुद को और मज़बूत कर लिया है। अब वो किसी की दया नहीं चाहती — वो चाहती है इज़्ज़त, सपने, और खुद की पहचान।
जब समीरा और आयुष पहली बार टकराते हैं, तो ये सिर्फ़ नज़रों की नहीं, एगो की टक्कर होती है। आयुष को लगता है, वो उसे भी वैसे ही जीत लेगा जैसे बाकी लड़कियों को — एक मुस्कान, कुछ अदाएं, और थोड़ी सी नज़दीकियाँ। लेकिन समीरा उससे अलग है। वो न तो आसानी से झुकती है, न डरती है। वो जानती है कि ये आदमी खतरनाक है — और फिर भी उसकी तरफ़ खिंचती चली जाती है।
उधर आयुष के अंदर कुछ बदलने लगता है। वो समीरा को सिर्फ़ एक टारगेट की तरह नहीं देख पाता, लेकिन उसका अतीत और अहंकार उसे मोहब्बत मानने नहीं देते।
उसके लिए ये सब अब एक खेल है — इगो, पावर और बदले का खेल।
लेकिन खेल जब दिल से खेलने लग जाए, तो जीत-हार मायने नहीं रखती… सिर्फ़ टूटन बचती है।
Chapter
169
Words
167.3K
Updated
10 hrs ago
Published
Jul 13, 2025
Published Chapters
H0t Casanova lover - Chapter 1 ( होटल रूम इंटीमेसी )
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H0t Casanova lover - Chapter 2 ( होटल रूम इंटीमेसी 2)
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H0t Casanova lover - Chapter 3 ( अधूरी प्यास )
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H0t Casanova lover - Chapter 4 (चादरें अब भी अस्त-व्यस्त थी )
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H0t Casanova lover - Chapter 5(### **"केबिन के अंदर... आँखों से खेल"**)
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H0t Casanova lover - Chapter 6 ( शहर का प्राइवेट डिस्को क्लब )
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H0t Casanova lover - Chapter 7 (## **" – गर्म दीवारें, ठंडी आँखें"** )
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H0t Casanova lover - Chapter 8 (**न कपड़े, न बहाने, न दूरी** )
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H0t Casanova lover - Chapter 9 ( शावर इंटीमे*सी )
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H0t Casanova lover - Chapter 10 (हर उँगली को धीरे-धीरे रगड़ता )
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H0t Casanova Lover - Chapter 11
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H0t Casanova Lover - Chapter 12 (“ओह्ह… आयूष… प्लीज़…” )
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H0t Casanova Lover - Chapter 13
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H0t Casanova Lover - Chapter 14
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H0t Casanova Lover - Chapter 15
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H0t Casanova Lover - Chapter 16
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H0t Casanova Lover - Chapter 17
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H0t Casanova Lover - Chapter 18
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H0t Casanova Lover - Chapter 19
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H0t Casanova Lover - Chapter 20
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H0t Casanova Lover - Chapter 21
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H0t Casanova Lover - Chapter 22
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H0t Casanova Lover - Chapter 23
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H0t Casanova Lover - Chapter 24
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H0t Casanova Lover - Chapter 25
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H0t Casanova Lover - Chapter 28
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H0t Casanova Lover - Chapter 37
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H0t Casanova Lover - Chapter 38
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H0t Casanova Lover - Chapter 39
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H0t Casanova Lover - Chapter 40
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धारा ने काँपती आवाज़ में कहा, “मैं सोऊँगी… उस बिगड़े हुए आदमी के साथ… क्योंकि अपने पति को बचाने का मेरे पास कोई और रास्ता नहीं है।”
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Casanova है। उसकी दुनिया में पैसे की कोई कमी नहीं, और औरतों की तो कतार लगी रहती है। उसे किसी से कोई लगाव नहीं, क्योंकि उसका मानना है कि प्यार एक फालतू फीलिंग है जो सिर्फ़ कमज़ोरों को होती है।
हर रिश्ते को वो एक सौदा समझता है — जहाँ उसे फायदा हो, वहीं दिल लगाना है, और जहाँ नुकसान दिखे, वहीं उसे तोड़ देना है।
उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है उसका कंट्रोल — लोगों पर, हालातों पर, और खुद पर भी। लेकिन उसके इसी कंट्रोल को चुनौती देती है एक लड़की… समीरा।
समीरा, एक ऐसी लड़की जो बाहर से बेहद खूबसूरत, आकर्षक और आत्मविश्वासी है। उसकी मुस्कान में ठहराव है, चाल में गरिमा है, लेकिन उसकी आँखों में एक थकी हुई उदासी छिपी है — क्योंकि वो एक शादी से बंधी हुई है जो सिर्फ़ नाम की है। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें प्यार की जगह समझौता है, और खुशी की जगह बोझ।
लेकिन समीरा टूटी नहीं है, बल्कि उसने खुद को और मज़बूत कर लिया है। अब वो किसी की दया नहीं चाहती — वो चाहती है इज़्ज़त, सपने, और खुद की पहचान।
जब समीरा और आयुष पहली बार टकराते हैं, तो ये सिर्फ़ नज़रों की नहीं, एगो की टक्कर होती है। आयुष को लगता है, वो उसे भी वैसे ही जीत लेगा जैसे बाकी लड़कियों को — एक मुस्कान, कुछ अदाएं, और थोड़ी सी नज़दीकियाँ। लेकिन समीरा उससे अलग है। वो न तो आसानी से झुकती है, न डरती है। वो जानती है कि ये आदमी खतरनाक है — और फिर भी उसकी तरफ़ खिंचती चली जाती है।
उधर आयुष के अंदर कुछ बदलने लगता है। वो समीरा को सिर्फ़ एक टारगेट की तरह नहीं देख पाता, लेकिन उसका अतीत और अहंकार उसे मोहब्बत मानने नहीं देते।
उसके लिए ये सब अब एक खेल है — इगो, पावर और बदले का खेल।
लेकिन खेल जब दिल से खेलने लग जाए, तो जीत-हार मायने नहीं रखती… सिर्फ़ टूटन बचती है।
आयुष खुराना — नाम सुनते ही मुंबई की बिज़नेस इंडस्ट्री काँप जाती है। वो शहर का सबसे तेज़ दिमाग़ और सबसे बड़ा Casanova है। उसकी दुनिया में पैसे की कोई कमी नहीं, और औरतों की तो कतार लगी रहती है। उसे किसी से कोई लगाव नहीं, क्योंकि उसका मानना है कि प्यार एक फालतू फीलिंग है जो सिर्फ़ कमज़ोरों को होती है।
हर रिश्ते को वो एक सौदा समझता है — जहाँ उसे फायदा हो, वहीं दिल लगाना है, और जहाँ नुकसान दिखे, वहीं उसे तोड़ देना है।
उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है उसका कंट्रोल — लोगों पर, हालातों पर, और खुद पर भी। लेकिन उसके इसी कंट्रोल को चुनौती देती है एक लड़की… समीरा।
समीरा, एक ऐसी लड़की जो बाहर से बेहद खूबसूरत, आकर्षक और आत्मविश्वासी है। उसकी मुस्कान में ठहराव है, चाल में गरिमा है, लेकिन उसकी आँखों में एक थकी हुई उदासी छिपी है — क्योंकि वो एक शादी से बंधी हुई है जो सिर्फ़ नाम की है। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें प्यार की जगह समझौता है, और खुशी की जगह बोझ।
लेकिन समीरा टूटी नहीं है, बल्कि उसने खुद को और मज़बूत कर लिया है। अब वो किसी की दया नहीं चाहती — वो चाहती है इज़्ज़त, सपने, और खुद की पहचान।
जब समीरा और आयुष पहली बार टकराते हैं, तो ये सिर्फ़ नज़रों की नहीं, एगो की टक्कर होती है। आयुष को लगता है, वो उसे भी वैसे ही जीत लेगा जैसे बाकी लड़कियों को — एक मुस्कान, कुछ अदाएं, और थोड़ी सी नज़दीकियाँ। लेकिन समीरा उससे अलग है। वो न तो आसानी से झुकती है, न डरती है। वो जानती है कि ये आदमी खतरनाक है — और फिर भी उसकी तरफ़ खिंचती चली जाती है।
उधर आयुष के अंदर कुछ बदलने लगता है। वो समीरा को सिर्फ़ एक टारगेट की तरह नहीं देख पाता, लेकिन उसका अतीत और अहंकार उसे मोहब्बत मानने नहीं देते।
उसके लिए ये सब अब एक खेल है — इगो, पावर और बदले का खेल।
लेकिन खेल जब दिल से खेलने लग जाए, तो जीत-हार मायने नहीं रखती… सिर्फ़ टूटन बचती है।
Kiran Jaiswal
H0t Casanova Lover season 2 - Chapter 169 • 2 days ago
Kiran Jaiswal
H0t Casanova Lover season 2- Chapter 168 • 7 days ago
Jainab Parveen
H0t Casanova Lover season 2- Chapter 166 (उसे पहनकर मेरे रूम में रात दस बजे ) • 15 days ago
Kiran Jaiswal
7 days ago
nice chapter👍
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Jainab Parveen
15 days ago
nice chapter
0 likes • H0t Casanova Lover season 2- Chapter 166 (उसे पहनकर मेरे रूम में रात दस बजे )No fan art available for this story yet.
nice chapter👍
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