18+ Erotic Thriller
My Five Cruel Dangerous Hubbies
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एक लड़की उस अंधेरे कमरे में अकेली बंद थी।
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना व...
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना व...
एक लड़की उस अंधेरे कमरे में अकेली बंद थी।
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना वो चीख सकती थी, ना किसी से मदद माँग सकती थी। उसका शरीर थरथरा रहा था — न जाने डर से या थकावट से।
कमरे में एक पीली, झिलमिलाती बल्ब जैसी रोशनी कोने से आ रही थी, जो अब जलती-बुझती हुई सा लग रही थी। उसी अधूरी रौशनी में छत से टपकती बूंदें और कमरे की दीवारों पर रेंगते चूहे साफ नज़र आ रहे थे। उनमें से एक चूहा धीरे-धीरे लड़की की ओर सरकने लगा। वो घबरा गई — डर के मारे उसका बदन काँप उठा, मगर वो हिल भी नहीं पा रही थी।
साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
उसके उलझे हुए बाल चेहरे पर चिपके हुए थे, और कपड़ों की हालत भी अब बदतर थी। चारों ओर एक सड़ांध सी महक थी, जैसे इस कमरे ने कभी उजाला देखा ही न हो।
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना वो चीख सकती थी, ना किसी से मदद माँग सकती थी। उसका शरीर थरथरा रहा था — न जाने डर से या थकावट से।
कमरे में एक पीली, झिलमिलाती बल्ब जैसी रोशनी कोने से आ रही थी, जो अब जलती-बुझती हुई सा लग रही थी। उसी अधूरी रौशनी में छत से टपकती बूंदें और कमरे की दीवारों पर रेंगते चूहे साफ नज़र आ रहे थे। उनमें से एक चूहा धीरे-धीरे लड़की की ओर सरकने लगा। वो घबरा गई — डर के मारे उसका बदन काँप उठा, मगर वो हिल भी नहीं पा रही थी।
साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
उसके उलझे हुए बाल चेहरे पर चिपके हुए थे, और कपड़ों की हालत भी अब बदतर थी। चारों ओर एक सड़ांध सी महक थी, जैसे इस कमरे ने कभी उजाला देखा ही न हो।
Chapter
238
Words
201.5K
Updated
13 hrs ago
Published
May 24, 2025
Published Chapters
My Five Crule dangerous hubbys - Chapter 1
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 2
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 3
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 4
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 5
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 6
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 7
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 8
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 9
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( इंटीमेट 1 )My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 10
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( इंटीमेट 2 )My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 11
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 12
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 13
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 14
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 15
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 16
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 17
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 18
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 19
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 20
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 21
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 22
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 23
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 24
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 25
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 26
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 27
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 28
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My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 30
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My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 37
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My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 38
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My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 39
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My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 40
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एक लड़की उस अंधेरे कमरे में अकेली बंद थी।
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना वो चीख सकती थी, ना किसी से मदद माँग सकती थी। उसका शरीर थरथरा रहा था — न जाने डर से या थकावट से।
कमरे में एक पीली, झिलमिलाती बल्ब जैसी रोशनी कोने से आ रही थी, जो अब जलती-बुझती हुई सा लग रही थी। उसी अधूरी रौशनी में छत से टपकती बूंदें और कमरे की दीवारों पर रेंगते चूहे साफ नज़र आ रहे थे। उनमें से एक चूहा धीरे-धीरे लड़की की ओर सरकने लगा। वो घबरा गई — डर के मारे उसका बदन काँप उठा, मगर वो हिल भी नहीं पा रही थी।
साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
उसके उलझे हुए बाल चेहरे पर चिपके हुए थे, और कपड़ों की हालत भी अब बदतर थी। चारों ओर एक सड़ांध सी महक थी, जैसे इस कमरे ने कभी उजाला देखा ही न हो।
उसके दोनों हाथ और पैर मोटी रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे — इतनी कसकर कि उसकी कलाईयों और टखनों पर गहरे निशान पड़ चुके थे। मुँह पर मोटे कपड़े की पट्टी बाँधी गई थी, जिससे ना वो चीख सकती थी, ना किसी से मदद माँग सकती थी। उसका शरीर थरथरा रहा था — न जाने डर से या थकावट से।
कमरे में एक पीली, झिलमिलाती बल्ब जैसी रोशनी कोने से आ रही थी, जो अब जलती-बुझती हुई सा लग रही थी। उसी अधूरी रौशनी में छत से टपकती बूंदें और कमरे की दीवारों पर रेंगते चूहे साफ नज़र आ रहे थे। उनमें से एक चूहा धीरे-धीरे लड़की की ओर सरकने लगा। वो घबरा गई — डर के मारे उसका बदन काँप उठा, मगर वो हिल भी नहीं पा रही थी।
साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
उसके उलझे हुए बाल चेहरे पर चिपके हुए थे, और कपड़ों की हालत भी अब बदतर थी। चारों ओर एक सड़ांध सी महक थी, जैसे इस कमरे ने कभी उजाला देखा ही न हो।
Tamanna Parween
My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 239 • 23 days ago
Firoj Kerketta
My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 2 • 2 months ago
Khushi Malviya
My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 5 • 3 months ago
Ritu Ritu
5 months ago
good 👍
0 likes • My Five Crule dangerous hubbys - Chapter 1
NEETU GAHLOT
7 months ago
अमीषा के कैरेक्टर को कुछ ज्यादा ही बेवकूफ नहीं बना दिया <br>क्योंकि ऐसी कोई भी लड़की नहीं है जो इतनी जिल्लत इतनी बेजती सहने के बाद इतनी दया भाव रखें और वह भी तब जब वह जानती है कि यह सब नाटक है <br>अमीषा के कैरेक्टर को और स्ट्रांग बनाना चाहिए <br>और यह चाचा-चाची अपना घर छोड़कर बेटी के ससुराल में क्या कर रहे हैं???? 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
0 likes • My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 226No fan art available for this story yet.
iska next part kb aayega
0 likes • My Five Cruel Dangerous Hubbies - Chapter 239