My Five cruel dangerous hubbies - Chapter 3
INFERNO कोई क्लब नहीं था, वो तो एक नब्ज़ थी — अंधेरे की।
बाहर की दुनिया में घड़ियाँ 12 बजा चुकी थीं, लेकिन INFERNO के अंदर समय काँच की तरह ठहर चुका था।
कमरे की दीवारें चाँदी की थीं, जिनमें रगों जैसी नीली लाइटें दौड़ती थीं — जैसे खून और सन्नाटा आपस में गठबंधन कर चुके हों। फ़र्श पर मख़मली गहरे लाल गलीचे बिछे थे, जिस पर चलना ऐसा लगता था जैसे किसी की खोपड़ी पर पैर रखा हो। हर दीवार पर धातु के नक़्शे थे, मगर वो नक़्शे नक़्शे नहीं थे — वो चेहरों के स्केच थे… मरे हुए लोगों के।
कमरा "द ब्लैक ज़ीरो" — सिर्फ़ विक्राल के लिए आरक्षित।
विक्राल — नाम कम था, धमनी ज़्यादा।
सिल्क ब्लैक टक्सीडो की चुप्पी उसके बदन से ऐसे लिपटी थी जैसे किसी सांप ने खुद को वज़ीर बना लिया हो। बटन खुला था, शर्ट ब्लड-ब्लू — जैसे किसी ने नीला खून बहाकर ही रंग तैयार किया हो। उसके ग्लव्स अब भी हाथ में थे — काले, लेदर के, जिनपर महीन सिलाई से Latin में कुछ उभरा था: Mortem Tacitam — "मृत्यु जो बोले नहीं।"
चेहरा… कुछ था ही नहीं वहाँ। ना मुस्कान, ना क्रोध, बस एक सलीके से तराशी गई रेखा जैसी आँखें — स्थिर और बर्फ़ीली।
उसे देखकर यह तय कर पाना कठिन था कि वो इंसान था या कोई मशीन जो सिर्फ़ मृत्यु के लिए प्रोग्राम की गई हो।
कमरे में घुसने वाली लड़की, नाम नहीं था उसका, और शायद होना भी नहीं चाहिए था।
उसके क़दमों की आहट से कमरे की रोशनी बदल गई। INFERNO की लाइटें एक रहस्यमय AI से जुड़ी थीं — जो हर इंसान की नीयत, दिल की धड़कन और त्वचा के तापमान को पढ़ सकती थीं। जैसे ही वह लड़की अंदर आई, कमरे की ब्लू टोन पर्पल में बदल गई — एक अजीब सेंसुअल थ्रेट जैसा माहौल।
लड़की की चाल में कॉन्फिडेंस था, लेकिन आँखों में जिज्ञासा भी।
वो ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी — और विक्राल को वैसे लोग ही पसंद थे।
कमरे का तापमान 18 डिग्री था।
विक्राल सोफ़े से उठकर सीधे शीशे की दीवार के पास गया, जहाँ नीली रौशनी उसके चेहरे को विभाजित कर रही थी।
लड़की की नज़रें उसकी पीठ पर टिकी थीं — वहाँ कोई टैटू नहीं था, लेकिन मांसपेशियों की बनावट खुद में किसी कोड जैसी थी।
"तुम जानती हो, यहाँ कोई खेल नहीं होता,"
उसने बगैर पीछे देखे कहा।
लड़की की आवाज़ नहीं आई, सिर्फ़ उसकी सैंडल की एक आहट — जैसे उसने एक क़दम और बढ़ाया हो।
विक्राल मुड़ा।
धीरे… जैसे कोई शेर अपना चेहरा पलटता है — शिकार की अनुमति नहीं माँगता, बस देता है।
उनके बीच सिर्फ़ पाँच फीट की दूरी थी — लेकिन वो पाँच फीट एक पूरी दुनियां जैसी लग रही थी।
शांति ऐसी थी कि दिल की धड़कनें भी बाहर सुनाई देने लगें।
विक्राल की चाल — जैसे बर्फ़ पर रखा गरम शीशा। वो धीरे-धीरे पास आया। कोई जल्दबाज़ी नहीं।
उसने हाथ बढ़ाया — लेकिन छुआ नहीं। सिर्फ़ हथेली को लड़की की गर्दन से आधा इंच दूर रोके रखा।
उसका ग्लव्स वहाँ हवा में ठहर गया।
उसके होंठ नहीं हिले — पर साँस महसूस हुई… बिल्कुल गले की नस पर।
लड़की ने हल्की साँस छोड़ी, लेकिन विक्राल के चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
उसके लिए ये खेल नहीं था। ये था नाप लेना — कौन कितना भय में काँपता है।
फिर उसने धीरे से ग्लव्स उतारे — एक-एक उंगली से, जैसे वह किसी विस्फोटक चीज़ को खोल रहा हो।
अब उसकी नंगी हथेली हवा में थी — हल्की सी ठंडी, लेकिन कंपन से भरी।
उसने लड़की की कॉलर हड्डी को छुआ — सिर्फ़ उंगलियों के सिरों से।
वह छुअन स्पर्श नहीं थी, वो एक चेतावनी थी।
लड़की ने आँखें बंद कीं।
उसका बदन सिहर गया — किसी ख़ुशी या शर्म से नहीं, बल्कि क्योंकि ये स्पर्श भीतर तक गया था… और वहाँ कुछ जगाया नहीं, खींचा।
विक्राल की उंगलियाँ अब धीरे-धीरे ऊपर उठीं — गर्दन से जबड़े तक।
ना कोई जल्दबाज़ी, ना कोई हड़बड़ी — सिर्फ़ संवेदनशीलता की एक स्पष्ट स्क्रिप्ट।
“तुम्हें डर नहीं लगता?”
उसकी आवाज़ अब बिल्कुल पास से आई।
लड़की ने सिर्फ़ इतना कहा, “नहीं, बस ये जानना है… क्या मैं वाकई ज़िंदा हूँ।”
विक्राल अब ठीक सामने था।
उसने अपने हाथ उसके कंधे तक लाए, और उसके टॉप की स्ट्रैप्स को उँगलियों से छुआ।
उसने एक झटका नहीं दिया — न ही कोई जबरदस्ती — बस एक ऐसा सन्नाटा पैदा किया, जिसमें कपड़ा खुद सरकने लगे।
टॉप अब नीचे गिर चुका था।
लड़की अब कमज़ोर नहीं, लेकिन नग्नता के बिल्कुल नए अर्थ में खड़ी थी।
विक्राल ने तब भी उसे नहीं छुआ।
वो अब बेड के किनारे की ओर बढ़ा — वहाँ बैठ गया, फिर लेट गया — पूरी तरह शांत।
उसने लड़की को देखने के बजाय, छत की तरफ देखा।
"तुम सोचती हो, शरीर से क्या शुरू होता है?"
उसका स्वर धीमा था, जैसे कोई पुराना पियानो एक ही नोट बार-बार बजा रहा हो।
लड़की उसके पास आई।
बेड पर उसके बगल में बैठी, फिर धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा।
विक्राल ने तब भी प्रतिक्रिया नहीं दी — उसकी साँसें धीमी थीं, आँखें छत पर।
फिर लड़की धीरे से उसके ऊपर झुकी — जैसे कोई किताब किसी खाली पन्ने पर झुकती है।
वो अब उसके चेस्ट पर थी।
उनके बीच कुछ नहीं था — लेकिन सब कुछ था।
उसने उसकी आँखों में देखा।
और विक्राल ने पहली बार आँखें झपकाईं।
सिर्फ़ एक बार।
INFERNO की छत पर अचानक लाइट बदली — ब्लू से डार्क रेड में।
वो AI समझ चुका था — यहाँ कोई कनेक्शन बन गया है, जो सेक्स से ज़्यादा जटिल था।
ये स्पर्श नहीं था, ये मौन का सामना था।
विक्राल अब भी शांत था, लेकिन उसकी साँसें अब पहली बार मानवीय थीं।
लड़की अब भी उस पर थी, लेकिन उन्होंने कोई हरकत नहीं की।
ना किस, ना फॉरप्ले, ना भूख।
बस एक मौन चेन जो बंध चुकी थी — बिना वादा, बिना शब्द, बिना प्रेम।
INFERNO के सिस्टम ने उस रात उस कमरे का नाम बदल दिया:
"The Still Touch" — एक ऐसा कमरा जहाँ शरीर नग्न हुआ, लेकिन आत्मा शांत रही।
INFERNO के दरवाज़े चुपचाप खुलते थे, जैसे ज़ख्म — आवाज़ नहीं करते, मगर असर छोड़ते हैं।
यहाँ कोई घंटियाँ नहीं बजती थीं, कोई स्वागत नहीं होता था — स्वागत की जगह, तुम्हें एक अजीब सी ठंडक छूती थी, जैसे मौत ने दरवाज़े पर हाथ रखा हो।
क्लब के अंदर 27 फीट नीचे बना सिल्वर चैंबर एक गोपनीय महल की तरह था — रनधीर “द फाइनेंसर” के लिए तैयार किया गया, उस आदमी के लिए जो चीज़ें ख़रीदता नहीं था, उन्हें चुपचाप ओवरराइट कर देता था।
कमरे का इंटीरियर:
कमरे में हर चीज़ रनधीर की तरह थी — महंगी, शांत और खतरनाक।
दीवारें असली चांदी की परतों से जड़ी थीं, जिन पर हल्की रोशनी ऐसे पड़ती थी जैसे लाशों पर पड़ा चांद।
एक कोना काले शीशे का था — जहाँ से परछाइयाँ ही दिखती थीं, चेहरे नहीं।
बीच में रखा एक low-height प्लेटिनम बेड, जिसकी चादरें काले रेशम की थीं, और तकियों पर “R&R” एम्ब्रॉयडरी थी — रनधीर और रेजिस्टेंस।
एक दीवार पर लटकी थी एक ancient vault-clock — जिसकी सूइयाँ उल्टी दिशा में चलती थीं। समय यहाँ किसी के मुताबिक नहीं चलता था, सिर्फ़ रनधीर के।
रनधीर:
सिल्वर ग्रे अरमानी कोट में रनधीर एक सजीव निवेश की तरह दिख रहा था — महँगा, सीमित, और किसी भी वक्त बेचा जा सकने वाला।
उसकी आँखें वैसी नहीं थीं जो किसी को देखती हों — वो किसी को कैलकुलेट करती थीं।
उसके कोट की पॉकेट में रखा स्टील-पेन सिर्फ़ साइन के लिए नहीं था — वह खतरे का टूल था, ठीक उसके जले हुए पासपोर्ट की तरह, जो अतीत की तमाम पहचान को भस्म कर चुका था।
लड़की का आगमन:
दरवाज़ा बिना खटखटाए खुला — और वह अंदर आई।
लंबे काले बाल, एकदम स्ट्रेट — जैसे किसी कैलकुलेशन से ब्रश किए गए हों।
लिपस्टिक रेड वाइन जैसी, लेकिन आँखों में वो बर्बादी थी जो एक फाइनेंसर के बैलेंस शीट को भी डराए।
उसने अंदर कदम रखा तो चांदी की दीवार पर उसकी परछाईं यूँ पड़ी जैसे कोई हस्ताक्षर — रनधीर की रजामंदी के बिना, वह भीतर नहीं आती।
लेकिन आज, वह खुद बुलाया गया ख्वाब थी।
रनधीर धीरे से उठा — उसके जूतों की एड़ी चांदी की फ़र्श पर म्यूटेड क्लिक देती रही।
"तुम जानती हो न, यहाँ पावर किसकी चलती है?"
उसने कहा, बिल्कुल धीमे, पर उसकी आवाज़ जैसे वॉल्ट का लॉक हो — एक बार खुला, तो सब कुछ बदल जाए।
वो मुस्कराई — “मैं आईना नहीं हूँ, जो तुम्हें देखे। मैं स्क्रीन हूँ, जो तुम्हारे अंदर झांके।”
रनधीर उसकी बात पर हँसा नहीं — सिर्फ़ पास आया, और उसकी ठोड़ी को उँगलियों से थोड़ा ऊपर उठाया।
“तो देख,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, “क्योंकि यहाँ डॉमिनेशन देखने से नहीं, महसूस करने से आता है।”
कमरे में हवा रुक गई थी — जैसे सब कुछ फ्रीज कर दिया गया हो।
रनधीर ने अपना कोट धीरे-धीरे उतारा — हर बटन खोलते वक्त उसकी आँखें उसके चेहरे पर थीं।
लड़की का हाथ उसकी कमर तक गया, और फिर जैसे किसी इंडिकेटर ने ग्रीन सिग्नल दे दिया हो — दोनों जैसे एक साथ भीतर की वॉल्ट में बंद हो गए।
बेड तक पहुँचने में सिर्फ़ छह क़दम थे, लेकिन हर क़दम एक क़ीमत थी — कंट्रोल का, कशिश का, और कन्फ़्यूज़न का।
वो उसे दीवार की ओर थोड़ा धकेलता गया — उसके हाथ उसकी गर्दन से होते हुए पीठ तक गए।
उसने चुपचाप उसकी ड्रेस की ज़िप खींची, जैसे कोई बैंक लॉकर खोल रहा हो।
“तुम्हें पता है न, यह सब कुछ सिर्फ़ आज रात का है?”
“हर रात ज़रूरी नहीं होती,” उसने कहा, “कभी-कभी सिर्फ़ एक पल ही काफ़ी होता है।”
बेड पर गिरते हुए लम्हे:
वो उसे बेड तक लाया — वहाँ कोई रोमांटिक संगीत नहीं था, कोई कैंडल नहीं।
सिर्फ़ उनकी साँसों की आवाज़ थी, और चांदी की दीवारों पर उनकी उलझती परछाइयाँ।
उसने उसे थोड़ा ज़ोर से पकड़ा — कोई हिंसा नहीं, लेकिन पूरी पकड़।
बेड पर वो दोनों गिरते नहीं, सामना करते हैं।
और फिर, कुछ हल्की आवाज़ें — कपड़े सरकते हैं, बदन चटखते हैं, साँसे तेज़ होती हैं।
क्लाइमैक्स कोई इमोज़न नहीं था — वह एक सिग्नेचर था, एक डील जो दो शरीरों के बीच साइलेंट मोड में हुई थी।
और फिर सब ख़त्म...
बेड के एक कोने पर रनधीर बैठा था — वापस अपना स्टील-पेन पॉकेट में रखते हुए, जैसे कोई अग्रीमेंट पर आख़िरी साइन कर चुका हो।
लड़की उठकर अपने बाल बांधती है — आईने की ओर नहीं देखती, क्योंकि वो जानती है, इस कमरे में चेहरा मायने नहीं रखता — बस वो जो पीछे छूट जाए।
“नाम क्या था तुम्हारा?”
रनधीर ने पूछा, जैसे कोई लास्ट कॉल रिकॉल कर रहा हो।
“नाम?” वह मुस्कराई —
“INFERNO में कोई नाम नहीं होते… सिर्फ़ एक रात के कोड होते हैं।”
लड़की कपड़े पहने लगे लेकिन तभी रनधीर उसे रोका और कहा,
" मेरे लिए ड्रिंक बनाओ, " रनधीर सैक्सी अंदाज में कहा |
लड़की का गला सूख गया और उसने कपड़े वही फेंक और केट वाॅक करते हुए बारटेबल तक गई वहाँ दो गिलास में ड्रिंक बनाई तभी रनधीर बेड पर बैठा लड़की उसी अंदाज में हाथों में जाम लिये लौटी एक रनधीर को दिया और दूसरे को अपने होठों से लगा लिया |