love Arranged Marriage
तो इश्क है !
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कभी-कभी मोहब्बत आवाज़ से नहीं, इंतज़ार से पनपती है।
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, म...
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, म...
कभी-कभी मोहब्बत आवाज़ से नहीं, इंतज़ार से पनपती है।
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, मगर जब फोन की स्क्रीन पर 'लल्ला' लिखा चमका, तो उसकी धड़कनों ने हल्की सी मुस्कान ओढ़ ली।
अरेंज मैरिज का ये रिश्ता, अभी शब्दों से ज़्यादा चुप्पियों से बंधा था। पति से जुदाई और घर के अनकहे तानों के बीच भी, उसके दिल में एक नर्म-सी उम्मीद थी — कि कभी तो वो भी उसकी हर पुकार में, हर आहट में, अपने हिस्से का प्यार पाएगी।
वो चाय बनाते-बनाते भी उस आवाज़ में अपने लिए एक टुकड़ा अपनापन ढूंढती रही, जैसे दूर कहीं उसका नाम लेना ही उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी खुशी बन गया हो।
यह कहानी उस धैर्य की है, जो हर अरेंज मैरिज में बुनता है — उम्मीद से भरा, नर्म, मासूम, और सच्चा।
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, मगर जब फोन की स्क्रीन पर 'लल्ला' लिखा चमका, तो उसकी धड़कनों ने हल्की सी मुस्कान ओढ़ ली।
अरेंज मैरिज का ये रिश्ता, अभी शब्दों से ज़्यादा चुप्पियों से बंधा था। पति से जुदाई और घर के अनकहे तानों के बीच भी, उसके दिल में एक नर्म-सी उम्मीद थी — कि कभी तो वो भी उसकी हर पुकार में, हर आहट में, अपने हिस्से का प्यार पाएगी।
वो चाय बनाते-बनाते भी उस आवाज़ में अपने लिए एक टुकड़ा अपनापन ढूंढती रही, जैसे दूर कहीं उसका नाम लेना ही उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी खुशी बन गया हो।
यह कहानी उस धैर्य की है, जो हर अरेंज मैरिज में बुनता है — उम्मीद से भरा, नर्म, मासूम, और सच्चा।
Chapter
33
Words
37.5K
Updated
8 days ago
Published
Apr 28, 2025
Published Chapters
तो इश्क है ! - Chapter 1
Free
तो इश्क है ! - Chapter 2
Free
तो इश्क है ! - Chapter 3
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तो इश्क है ! - Chapter 4
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तो इश्क है ! - Chapter 5
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तो इश्क है ! - Chapter 6
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तो इश्क है ! - Chapter 10
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तो इश्क है ! - Chapter 11
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तो इश्क है ! - Chapter 12
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तो इश्क है ! - Chapter 13
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तो इश्क है ! - Chapter 16
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तो इश्क है ! - Chapter 20
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तो इश्क है ! - Chapter 21
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तो इश्क है ! - Chapter 22
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तो इश्क है ! - Chapter 23
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तो इश्क है ! - Chapter 24
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तो इश्क है ! - Chapter 25
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तो इश्क है ! - Chapter 27
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तो इश्क है ! - Chapter 28
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तो इश्क है ! - Chapter 29
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तो इश्क है ! - Chapter 30
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तो इश्क है ! - Chapter 31
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तो इश्क है ! - Chapter 32
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तो इश्क है ! - Chapter 33
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कभी-कभी मोहब्बत आवाज़ से नहीं, इंतज़ार से पनपती है।
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, मगर जब फोन की स्क्रीन पर 'लल्ला' लिखा चमका, तो उसकी धड़कनों ने हल्की सी मुस्कान ओढ़ ली।
अरेंज मैरिज का ये रिश्ता, अभी शब्दों से ज़्यादा चुप्पियों से बंधा था। पति से जुदाई और घर के अनकहे तानों के बीच भी, उसके दिल में एक नर्म-सी उम्मीद थी — कि कभी तो वो भी उसकी हर पुकार में, हर आहट में, अपने हिस्से का प्यार पाएगी।
वो चाय बनाते-बनाते भी उस आवाज़ में अपने लिए एक टुकड़ा अपनापन ढूंढती रही, जैसे दूर कहीं उसका नाम लेना ही उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी खुशी बन गया हो।
यह कहानी उस धैर्य की है, जो हर अरेंज मैरिज में बुनता है — उम्मीद से भरा, नर्म, मासूम, और सच्चा।
एक साधारण-से घर के आँगन में, चूड़ी की खनक और जप की गूँज के बीच, एक नई दुल्हन अपनी पहचान ढूँढ रही थी। कली — हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, शर्माई, थकी-थकी सी — हर ताने के जवाब में सिर झुकाती रही, मगर जब फोन की स्क्रीन पर 'लल्ला' लिखा चमका, तो उसकी धड़कनों ने हल्की सी मुस्कान ओढ़ ली।
अरेंज मैरिज का ये रिश्ता, अभी शब्दों से ज़्यादा चुप्पियों से बंधा था। पति से जुदाई और घर के अनकहे तानों के बीच भी, उसके दिल में एक नर्म-सी उम्मीद थी — कि कभी तो वो भी उसकी हर पुकार में, हर आहट में, अपने हिस्से का प्यार पाएगी।
वो चाय बनाते-बनाते भी उस आवाज़ में अपने लिए एक टुकड़ा अपनापन ढूंढती रही, जैसे दूर कहीं उसका नाम लेना ही उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी खुशी बन गया हो।
यह कहानी उस धैर्य की है, जो हर अरेंज मैरिज में बुनता है — उम्मीद से भरा, नर्म, मासूम, और सच्चा।
Varsha Ahirwar
तो इश्क है ! - Chapter 33 • 4 months ago
Aarya Rai
तो इश्क है ! - Chapter 33 • 8 months ago
ss
तो इश्क है ! - Chapter 18 • 9 months ago
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