Romance Romantic Suspense
My psycho dear
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" बेरहमी है वो,
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दि...
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दि...
" बेरहमी है वो,
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दिये बगैर नहीं भरता वाणी के पलको की जाली से झड़ते अश्को को सुखने का मौका नहीं देता वो, कभी श्लोक हाथो से जख्म देता कभी उसे छुये बिना ही फक़त बातो के जरिये अतीत के जख्मो को ताजा कर देता वो, श्लोक को बरदास्त नहीं उसकी वाणी किसी और को एक नजर देखे भी और गवारा नहीं खुद पर भी किसी और की निगाहें ,, मगर बेइंतहा नफरत के आसमान में भी चाहत की सांझ सी है चाहत वाणी की,फिर भी बेइंतहा मोहब्बत है वाणी को उसके श्लोक से , नफरत जरूर करता है वो उस्से मगर जख्म देने के बाबजूद कभी दर्द देने के बाद श्लोक को कभी सुकून नहीं मिला,उसके बेहते अश्कों से दर्द श्लोक को भी होता फिर भी वो उसे दर्द देता है ,,
आखिर क्या है वजह है? क्यों करता है श्लोक ऐसा? आखिर ऐसा क्या हुआ था अतीत में, जो श्लोक उसके इश्क़ वाणी से इस हद्द तक नफरत करता है अब?आखिर क्या हुआ था सालो पहले?
इन सारे सबालो के जबाब जानने के लिए पढ़ें
इश्क़ जुनून पागल और नफरत की काहानी श्लोक और वाणी की काहानी my psycho dear
# होश से परे इश्क़
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दिये बगैर नहीं भरता वाणी के पलको की जाली से झड़ते अश्को को सुखने का मौका नहीं देता वो, कभी श्लोक हाथो से जख्म देता कभी उसे छुये बिना ही फक़त बातो के जरिये अतीत के जख्मो को ताजा कर देता वो, श्लोक को बरदास्त नहीं उसकी वाणी किसी और को एक नजर देखे भी और गवारा नहीं खुद पर भी किसी और की निगाहें ,, मगर बेइंतहा नफरत के आसमान में भी चाहत की सांझ सी है चाहत वाणी की,फिर भी बेइंतहा मोहब्बत है वाणी को उसके श्लोक से , नफरत जरूर करता है वो उस्से मगर जख्म देने के बाबजूद कभी दर्द देने के बाद श्लोक को कभी सुकून नहीं मिला,उसके बेहते अश्कों से दर्द श्लोक को भी होता फिर भी वो उसे दर्द देता है ,,
आखिर क्या है वजह है? क्यों करता है श्लोक ऐसा? आखिर ऐसा क्या हुआ था अतीत में, जो श्लोक उसके इश्क़ वाणी से इस हद्द तक नफरत करता है अब?आखिर क्या हुआ था सालो पहले?
इन सारे सबालो के जबाब जानने के लिए पढ़ें
इश्क़ जुनून पागल और नफरत की काहानी श्लोक और वाणी की काहानी my psycho dear
# होश से परे इश्क़
Chapter
72
Words
78K
Updated
4 days ago
Published
Feb 19, 2025
Published Chapters
My psycho dear - Chapter 1
Free
My psycho dear - Chapter 2
Free
My psycho dear - Chapter 3
Free
My psycho dear - Chapter 4
Free
My psycho dear - Chapter 5
Free
My psycho dear - Chapter 6
Free
My psycho dear - Chapter 7
Free
My psycho dear - Chapter 8
Free
My psycho dear - Chapter 9
Free
My psycho dear - Chapter 10
Free
My psycho dear - Chapter 11
Free
My psycho dear - Chapter 12
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My psycho dear - Chapter 13
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My psycho dear - Chapter 14
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My psycho dear - Chapter 15
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My psycho dear - Chapter 16
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My psycho dear - Chapter 17
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My psycho dear - Chapter 18
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My psycho dear - Chapter 19
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My psycho dear - Chapter 20
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My psycho dear - Chapter 21
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My psycho dear - Chapter 22
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My psycho dear - Chapter 23
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My psycho dear - Chapter 24
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My psycho dear - Chapter 25
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My psycho dear - Chapter 26
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My psycho dear - Chapter 27
Free
My psycho dear - Chapter 28
Free
My psycho dear - Chapter 29
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My psycho dear - Chapter 30
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My psycho dear - Chapter 31
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My psycho dear - Chapter 32
Free
My psycho dear - Chapter 33
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My psycho dear - Chapter 34
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My psycho dear - Chapter 35
Free
My psycho dear - Chapter 36
Free
My psycho dear - Chapter 37
Free
My psycho dear - Chapter 38
Free
My psycho dear - Chapter 39
Free
My psycho dear - Chapter 40
Free
" बेरहमी है वो,
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दिये बगैर नहीं भरता वाणी के पलको की जाली से झड़ते अश्को को सुखने का मौका नहीं देता वो, कभी श्लोक हाथो से जख्म देता कभी उसे छुये बिना ही फक़त बातो के जरिये अतीत के जख्मो को ताजा कर देता वो, श्लोक को बरदास्त नहीं उसकी वाणी किसी और को एक नजर देखे भी और गवारा नहीं खुद पर भी किसी और की निगाहें ,, मगर बेइंतहा नफरत के आसमान में भी चाहत की सांझ सी है चाहत वाणी की,फिर भी बेइंतहा मोहब्बत है वाणी को उसके श्लोक से , नफरत जरूर करता है वो उस्से मगर जख्म देने के बाबजूद कभी दर्द देने के बाद श्लोक को कभी सुकून नहीं मिला,उसके बेहते अश्कों से दर्द श्लोक को भी होता फिर भी वो उसे दर्द देता है ,,
आखिर क्या है वजह है? क्यों करता है श्लोक ऐसा? आखिर ऐसा क्या हुआ था अतीत में, जो श्लोक उसके इश्क़ वाणी से इस हद्द तक नफरत करता है अब?आखिर क्या हुआ था सालो पहले?
इन सारे सबालो के जबाब जानने के लिए पढ़ें
इश्क़ जुनून पागल और नफरत की काहानी श्लोक और वाणी की काहानी my psycho dear
# होश से परे इश्क़
बेदर्दी से जख्म देते हैं
इश्क़ से अश्क को छुके
हक से वो केहते है
नफरत हमसे करते हैं "
बेइंतहा नफरत करता है श्लोक वाणी से ,हर पल दर्द देना आदत है उसकी जख्म देना फितरत में हैं उसकी एक सांस भी उसे जख्म दिये बगैर नहीं भरता वाणी के पलको की जाली से झड़ते अश्को को सुखने का मौका नहीं देता वो, कभी श्लोक हाथो से जख्म देता कभी उसे छुये बिना ही फक़त बातो के जरिये अतीत के जख्मो को ताजा कर देता वो, श्लोक को बरदास्त नहीं उसकी वाणी किसी और को एक नजर देखे भी और गवारा नहीं खुद पर भी किसी और की निगाहें ,, मगर बेइंतहा नफरत के आसमान में भी चाहत की सांझ सी है चाहत वाणी की,फिर भी बेइंतहा मोहब्बत है वाणी को उसके श्लोक से , नफरत जरूर करता है वो उस्से मगर जख्म देने के बाबजूद कभी दर्द देने के बाद श्लोक को कभी सुकून नहीं मिला,उसके बेहते अश्कों से दर्द श्लोक को भी होता फिर भी वो उसे दर्द देता है ,,
आखिर क्या है वजह है? क्यों करता है श्लोक ऐसा? आखिर ऐसा क्या हुआ था अतीत में, जो श्लोक उसके इश्क़ वाणी से इस हद्द तक नफरत करता है अब?आखिर क्या हुआ था सालो पहले?
इन सारे सबालो के जबाब जानने के लिए पढ़ें
इश्क़ जुनून पागल और नफरत की काहानी श्लोक और वाणी की काहानी my psycho dear
# होश से परे इश्क़
Gagandeep Kaur
My psycho dear - Chapter 58 • 2 months ago
JULLY KUMARI
My psycho dear - Chapter 8 • 2 months ago
Simran Singh
My psycho dear - Chapter 5 • 2 months ago
JULLY KUMARI
2 months ago
nisce
1 likes • My psycho dear - Chapter 8
JULLY KUMARI
2 months ago
Nice 👍🙂
1 likes • My psycho dear - Chapter 7No fan art available for this story yet.
achi novel hai
1 likes • My psycho dear - Chapter 58