Mafia's War - Chapter 2
अब आगे...
लायन अपने काफ़िले के साथ अपने लायन महल पहुँच चुका था। वह उस लड़की को गोद में उठाए, बिना कुछ कहे, सीधे अंदर चला जाता है।
लायन का महल वाइट और गोल्डन रंगों में सजा हुआ था—बेहद शानदार। ऐसा लगता था जैसे किसी पुराने शाही महल को आधुनिक अंदाज़ में ढाल दिया गया हो।
लायन पूरे रौब और ठहराव के साथ चलते हुए फोर्थ फ्लोर तक पहुँचता है। वहाँ वह उस लड़की को एक मास्टर बेडरूम में ले जाकर बेड पर धीरे से लिटा देता है। उसके चेहरे पर अब भी मास्क था। लड़की को लिटाने के बाद वह उसके हाथ को बेड के साइड में लगी हथकड़ी से लॉक कर देता है और चाबी अपने पास रख लेता है।
वहीं नीचे हॉल में उसका लेफ्ट हेड और राइट हेड खड़े ऊपर की ओर देख रहे थे। तभी लेफ्ट हेड धीमे से फुसफुसाता है,
“ये पक्का हमारी भाभी बनेगी।”
राइट हेड तुरंत उसे घूरते हुए कहता है,
“अबे चुप रह! लायन के महल में खड़ा है, घर में नहीं। ज़ुबान संभाल, वरना एक गोली में खेल खत्म हो जाएगा तेरा।”
ये सुनते ही वह तुरंत सीधा खड़ा हो जाता है।
तभी लायन नीचे आता है और बिना कुछ कहे, मास्क पहने हुए ही पीछे के दरवाज़े की तरफ बढ़ जाता है। और वे दोनों भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ते हैं।
आगे एक बेसमेंट आता है। तीनों उसमें उतरते हैं और एक खुफिया रास्ते से होते हुए दूसरी जगह पहुँच जाते हैं—जहाँ चारों ओर सुनसान जंगल फैला हुआ था।
अब तीनों ने थ्री-पीस बिज़नेस सूट पहन रखा था और उनके चेहरे से मास्क गायब था। उन्होंने ज़मीन के अंदर ही अपना रूप बदल लिया था।
लायन आगे चल रहा था, 6.2 हाइट गहरी काली आंखें पैनी नाक और गुलाबी होंठ और चेहरे पर हल्की हल्की बियर्ड और बोड़ी इतनी सोलिड की सौ लोगों का एक साथ शिकार कर दे।
वहीं दोनों पीछे चल रहे लड़के भी बिल्कुल लायन की तरह थे। दोनों के नैन नक्श अलग थे लेकिन बेहद हैंडसम थे। इस समय लायन के फेस पर कोई इमोशन नहीं थे लेकिन पीछे वाले दोनों बिल्कुल चील मोड़ में थे। तभी वे सड़क पर पहुंचे हैं जहां पहले ही एक गाड़ी खड़ी हुई थी। तीनों गाड़ी के पास जाते हैं तभी लायन पूछता है,
“माँ का फोन आया था?”
लेफ्ट हेड जवाब देता है,
“हाँ, चार मिस्ड कॉल आ चुकी हैं… और मैसेज में धमकी भी आई है—‘तीनों के पैर तोड़ दूँगी।’”
यह सुनते ही लायन अपने माथे पर उँगलियाँ फेरता है और अचानक गाड़ी के शीशे पर ज़ोर से पंच मार देता है। उसके हाथ से खून बहने लगता है। ये देख वे दोनों उसे देखकर हैरान रह जाते हैं।
वहीं लायन के होंठों पर एक खतरनाक, डेविल स्माइल उभर आती है। उसे देखकर दोनों घबराकर थूक निगलते हैं और कहते हैं,
“साले… ये करते वक्त तुझे हम पर ज़रा भी दया नहीं आई?”
लायन उसी खतरनाक मुस्कान के साथ कहता है,
“लायन के सामने किसी की नहीं चलती… लेकिन कृष्णा राठौड़ सिंह पर उसकी माँ की ज़्यादा चलती है।”
लायन का असली नाम—कृष्णा राठौड़ सिंह।
मुंबई के सबसे बड़े डायमंड एम्पायर का इकलौता मालिक।
अंडरवर्ल्ड में ‘लायन’ नाम से खौफ, और बिज़नेस वर्ल्ड में ‘कृष्णा राठौड़ सिंह’ नाम से इज्ज़त और डर—दोनों।
कृष्णा तेज़ी से गाड़ी में बैठता है। उसके साथ शौर्य राजपूत (लेफ्ट हेड) और समर मेहरा (राइट हेड) भी बैठ जाते हैं। दोनों के चेहरे पर हल्की चिंता साफ झलक रही थी।
शौर्य कहता है,
“मां को बोल देंगे मीटिंग में देर हो गई और इसे होस्पिटल ले जाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ये खुद गाड़ी चला कर आ गया।”
समर सहमति में सिर हिलाता है,
“हम्म्म अब यही ऑप्शन है… वरना सुबह का खाना भी नहीं मिलेगा।”
कृष्णा सख्त आवाज में कहता है,
“मुँह बंद रखो, वरना खिड़की से बाहर फेंक दूँगा।”
शौर्य मुस्कुराते हुए कहता है,
“हाँ, हमारी आवाज़ क्यों पसंद आएगी तुझे…”
समर थोड़ा गंभीर होकर पूछता है,
“एक बात बता… तू उस लड़की को अपने साथ क्यों लेकर आया है?”
कृष्णा रियर-व्यू मिरर में उसे घूरता है, फिर सामने देखते हुए कहता है,
“उसके गले के लॉकेट में कैमरा है… और ईयररिंग्स में माइक्रोफोन। मतलब साफ है—वो उस कमीने की भेजी हुई जासूस है।”
थोड़ा रुककर वह धीमे लेकिन खतरनाक लहजे में कहता है,
“कल जब होश में आएगी… तब देखेंगे क्या करती है। उसे उसके ही खेल में फँसाएँगे। बहुत हो गया… अब ये आखिरी खेल होगा—जिसमें लायन जीतेगा… और मिस्टर बोस मरेगा।”
शौर्य तुरंत बोलता है,
“तूने सुना नहीं? किंग ने क्या कहा था—हम लीडर को नहीं मार सकते।”
कृष्णा हल्की हँसी के साथ कहता है,
“उसे मारकर हाथ गंदे नहीं करूँगा… खेल का मज़ा लो बस। मुझे पता है किसे कैसे गिराना है।”
इतना कहकर वह गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है। वहीं वे दोनों भी खामोश हो जाते हैं क्योंकि उन्हें पता था लायन सब की समझ से बाहर है।
थोड़ी देर में उनकी गाड़ी के आगे-पीछे दो-दो गाड़ियाँ आकर लग जाती हैं—कृष्णा राठोड़ सिंह के गार्ड्स की।
कुछ ही देर में वे राठौड़ मेंशन पहुँच जाते हैं।
ये मेंशन लायन के महल से बिल्कुल अलग था—डार्क ब्राउन और वाइट रंगों में सजा, शालीन लेकिन प्रभावशाली। यहाँ सुरक्षा भी सादगी में छिपी थी—बस दस गार्ड्स, जो आराम से सिक्योरिटी ऑफिस में बैठे थे।
कृष्णा की गाड़ी देखते ही मेंशन का गेट खुलता है, और वह अंदर चला जाता है।
तीनों गाड़ी से उतरकर गार्डन से होते हुए अंदर जाते हैं। अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले महादेव के दर्शन होते हैं। बगल में मंदिर में राधा-कृष्ण की सफेद संगमरमर की सुंदर मूर्ति थी—शांत, मनमोहक।
तीनों जूते उतारकर सिर झुकाते हैं और आगे हॉल में पहुँचते हैं, जहाँ उनकी माँ—कौशल्या जी—पहले से इंतज़ार कर रही थीं।
उनके चेहरे पर गुस्सा था, लेकिन जैसे ही उनकी नज़र कृष्णा के घायल हाथ पर पड़ती है, वो घबरा जाती हैं। तुरंत आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ती हैं,
“कृष! ये क्या हुआ? और तुमने पट्टी क्यों नहीं की?”
वो उसे बैठाकर तुरंत फर्स्ट-एड मँगवाती हैं और गुस्से में शौर्य और समर को देख कहती हैं,
“तुम दोनों किस लिए इसके साथ होते हो? ध्यान नहीं रख सकते इसका?”
शौर्य मासूम बनते हुए कहता है,
“माँ, हमने कहा था हॉस्पिटल चलते हैं… लेकिन आप तो जानती हैं इसे।”
समर जोड़ता है,
“और जब मैंने दवाई लगाने की बात की, तो बोला—‘तुम बंदरों से नहीं लगवाऊँगा।’”
कृष्णा बेपरवाही से कहता है,
“माँ, छोटी सी चोट है… ठीक हो जाएगी।”
कौशल्या जी सख्ती से कहती हैं,
“छोटी सी लगी कैसे?”
कृष्णा नज़रें चुराते हुए बोलता है,
“आते वक्त खिड़की से लग गई थी…”
“चुपचाप बैठो!” —कौशल्या जी उसे डाँटते हुए पट्टी करती हैं—
“एक तो देर से आते हो, ऊपर से टूटे-फूटे!”
फिर वो गुस्से में कहती हैं,
"मैं यहां तुम्हारा इंतज़ार करती रहती हूँ? और तुम्हें है की कोई चिंता ही नहीं है, टाइम देखा है? दो घंटे में सुबह हो जाएगी!”
तीनों चुप अपनी मां की प्यार भरी डांट सुन रहे थे। जहां बाहर वालों की उनके सामने मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती थी, वहां उनकी मां उन्हें कुछ भी कह सकती थी।।
“कल से नौ बजे के बाद जो भी आया… उसे अंदर नहीं आने दूँगी। बाहर गार्डन में ही सोना पड़ेगा।”
शौर्य और समर तुरंत कान पकड़ कर कहते हैं,
“सॉरी माँ… इम्पोर्टेंट मीटिंग थी।”
कृष्णा शांत स्वर में कहता है,
“माँ, आप इतनी देर तक मत जागा करो… हम बच्चे नहीं हैं।”
कौशल्या जी तुरंत जवाब देती हैं,
“हाँ, समझ गई मैं… अब शादी करवानी पड़ेगी तुम्हारी। जब बीवी सुनाएगी, तब समझ आएगी!”
पट्टी पूरी कर वो कहती हैं,
“जाओ, फ्रेश हो जाओ। खाना रूम में भिजवा रही हूँ। खाकर सो जाना।”
तीनों राहत की साँस लेते हैं और अपने-अपने कमरों में चले जाते हैं।
एक घंटे बाद…
शौर्य और समर गहरी नींद में सो चुके थे।
लेकिन कृष्णा… अपने कमरे में लैपटॉप खोले बैठा था।
स्क्रीन पर वही कमरा दिख रहा था—जहाँ वह उस लड़की को छोड़कर आया था।
लड़की बेफिक्र, किसी बच्ची की तरह सो रही थी—पूरे बेड पर फैली हुई। एक हाथ हथकड़ी से बंधा हुआ सिर के पास था, दूसरा नीचे लटक रहा था। पैर भी इधर-उधर फैले हुए थे।
उसकी इस बेढंगी, मासूम सी नींद को देखकर…
कृष्णा के होंठों पर अनजाने में एक हल्की मुस्कान आ गई थी।
जैसे किसी तूफ़ान के बीच…
उसे पहली बार कोई सुकून दिखा हो।
आगे का नेक्स्ट पार्ट में
धन्यवाद 😊🙏🏻