संगम दो दिलों का Ch. 2

संगम दो दिलों का - Chapter 2

Posted by Varun Kumar • Sep 23, 2026 10:44 PM

मां ने पिताजी से कहा-: वह बड़ा हो चुका है हम उसे बांध नहीं सकते हैं हमें उसे इजाजत देनी ही होगी।""

पिताजी ने कड़क आवाज में कहा-: मुझे पता है अब उसे कोई नहीं रोक सकता अब उसे इजाजत देनी होगी लेकिन एक माता-पिता के लिए यह बहुत मुश्किल होता है।""

" मुझे पता है लेकिन उसकी खुशी के लिए हम अपने मन को समझ लेंगे मां ने कहा।""

और अब मेरे मन में उत्सुकता हो गई क्योंकि मुझे विश्वास हो गया था कि अब मेरा रास्ता बिल्कुल सही है लेकिन जब तक उन्होंने मुझे आवाज नहीं लगाई तब तक मैं उनके पास नही गया फिर जब पिताजी ने आवाज लगाई तो मैं धीमे कदमों से अंदर गया जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।""

मैने धीमी आवाज में सर झुकाते हुए कहा -: जी पिता जी !""

पिताजी ने अपनी जगह से खडे होकर मेरी तरफ देखा मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुसकुराते हुए कहा -: मेरा बेटा मेरी आंखो के सामने जवान हो गया है। हमे मालूम है तुम्हारा सपना हम उसे पूरा करते है ।""

यह सुनकर मुझे खुशी हुई क्योंकि मुझे पता चल चुका था कि वह मेरे कि सपना की बात कर रहे हैं और मैंने उन्हे गले से लगा लिया। उसके बाद में बाहर आ गया मुझे इतना पता था मेरे बाहर आने के बाद में लोग काफी भावुक नजर आने वाले थे और उनको भावुक मैं देख नहीं सकता था।

जब मैं केतन को यह बात बताई तो हैरानी के साथ केतन ने कहा-: ओए ! मुझे तो इस बात का विश्वास ही नहीं होता है कि तुम्हारा खडूस बाप मान गया बहुत बढ़िया।""

मैंने उसकी तरफ देखकर रूखे अंदाज में कहा-: एक तो सबसे पहले मेरे पिताजी को खडूस कहना बंद करो उन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ?""

केतन ने हंसते हुए कहा -: कुछ नहीं कुछ नहीं मैं तो मजाक कर रहा था बुरा मत मानो सुना है जापान की लडकियां बहुत गोरी होती है देखना कोई पट जाए तो।""

मैंने उसकी तरफ देखा और तीखे अंदाज में कहां-: अपनी संस्कृति अपनी संस्कृति है मुझे अपनी संस्कृति से बाहर नहीं जाना है इसलिए अगर मैं शादी करता भी हूं तो सिर्फ भारतीय संस्कृति और भारतीय लडकी के साथ। ""

केतन-: गुड ! अब जल्दी घर जाओ कहीं तुम्हारी भारतीय संस्कृति के चक्कर में भारतीय एयरलाइन ना निकल जाए।""

और मैं घर जाकर अपना सामान बांधा अपने एक नए सफर की तैयारी पर था लेकिन बचपन से मेरे साथ एक इन्सेंडेट हुआ था मैं जब भी कुछ नया करना चाहता था मेरे साथ कुछ ना कुछ ऐसा होता था जिसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की होती थी। यहां क्या होने वाला था यह मुझे पता नहीं था।

फिलहाल सब कुछ तैयार हो चुका था अब माता-पिता से मिलना रह गया था और उनसे मुलाकात करते हुए मैंने कहा-: मैं बहुत जल्द लौट आऊंगा मां !""

मेरे पिताजी ने मेरी तरफ देखा और कड़क अनुशासन की बात सिखाते हुए कहा-: एक बात याद रखना जीवन में अच्छे लोग भी मिलते हैं और बुरे लोग भी मिलते हैं। लेकिन यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम किसके साथ रहना पसंद करते हो यह दुनिया बड़ी विचित्र है इतना ही कहूंगा इससे बच कर रहना। ""

यह बहुत महत्वपूर्ण सिख थी और मैं इसे कभी नहीं भूल सकता था और मैं सर झुकाकर इसका अभिवादन किया और प्रतिक्रिया देते हुए कहा-: जी मैं इसका पूरा ध्यान रखूंगा।""

फिर उन्होंने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और मैं अपने घर से टैक्सी में निकल गया मैं निकल चुका था जापान के एक अद्भुत सफर पर अब यह सफर कैसा होने वाला था यही सवाल मेरे मन में भी था।

फिलहाल एक लंबे सफर के बाद मैं सुकून की वादियों में था मेरा नया सफर मेरी नई शुरुआत शुरू हो चुकी थी जापान में पहुंच चुका था सब कुछ नया था हर एक चीज नई थी। लेकिन हर एक चीज को देखकर मैं आनंद महसूस कर रहा था। और सबसे पहले मेरी मुलाकात भारतीय समुदाय के एक पंजाबी सरदार से हो गई उसका नाम कर्म सिंह था और वह जापान में ही एक ढाबा चल रहा था जब उसे पता चला मैं भी भारतीय मूल का हूं और पहली बार जापान आया हूं तो वह बहुत खुश हुआ और उसने आदर के साथ मुझे अपने होटल में बिठाया कर्म सिंह ने उत्सुकता से मुझसे पूछा-: ओए ! भारत में तुसी किथो जी !""

मैंने उसकी तरफ देखा फिर कहा -: मैं लुधियाना से हूं मेरा पूरा परिवार वही रहता है।""

यह सुनकर वह और खुश हो गया और उसने कहा-: ओए ! की गल कर ती मै वी लुधिथाना से ही हूं। आप कहां से हैं लुधियाना में।""

पंजाबी मूल के लोगों में मैं विशेष रूप से यह बात बहुत अच्छी है कि अगर इन्हें कोई इनकी पहचान का थोड़ा सा भी मिल जाए तो यह उसकी पूरी डिटेल मांगते हैं और यह बात अच्छी भी है और मैं खुश होकर कहा-: मैं आकाश कॉलोनी से हूं। ""

यह सुनकर तो वह और भी ज्यादा खुश हो गया क्योंकि मुझे पता चला वह भी आकाश कॉलोनी से ही था फिर उसने मुझे पूछा कि मैं आकाश कॉलोनी में कहां से हूं मैं उसे बताया तो हमारी तो रिश्तेदारी भी निकल गई और यह देखकर सरदार ने मुझे गले से लगा लिया और कहा-: आप तो हमारी जान पहचान के निकले जापान में आपका स्वागत है।""

और मुझे भी इस बात की खुशी हुई की इस अंजान शहर में कोई भारतीय मूल का आदमी भी मिला।

( अब करम सिंह क्या मुझे जापान की सैर करवाने वाला है) और जापान की मेरी इस कहानी में ऐसा क्या मोड आने वाला है जिसके बारे में सोचा तो मैं भी नहीं है और जिंदगी सुकून से अब भर चुकी है या जिंदगी अब तूफानों से भरने वाली है सवाल बहुत है और सारे सवालों का जवाब आपको अगले भाग में मिलेगा और कहानी काफी इंटरेस्टिंग होने वाली है लेकिन आपको हमारे साथ अगले भाग तक बने रहना है बने रहिए और इंजॉय कीजिए हमारी कहानी। मुलाकात अगले भाग में करते हैं

100%