संगम दो दिलों का - Chapter 1
मैं दस साल का था और तभी से बस एक ही नाम मेरे दिमाग के अंदर रहता था और एक ही सपना था मुझे जापान जाना है।
वह 10 में से 10 साल और बीत चुके हैं लेकिन अभी तक वह सपना भूला नहीं है बी ए करने के बाद मैंने वकालत की डिग्री हासिल की और अब मेरे पास अच्छी पावर है। आज मैं अपने मित्र केतन से इसी विषय में बात कर रहा था हम दोनों खुली हवा में बैठे थे चारों ओर हरे भरे पेड़ ही पेड़ थे। और हरियाली से भरा मैदान था। मैने केतन की तरफ देखकर कहा -: केतन ! तुम्हे याद है जब हम बहुत छोटे थे और एक साथ पढ़ा करते थे मैंने तब तुम्हे एक बात कही थी और अपना सपना भी बताया था।"
केतन ने कुछ सोचने के बाद कहा-: हां ! थोड़ा बहुत याद है तुम कुछ जापान जाने का सपना रखते हो लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ है।"
मैने उसकी तरफ देखते हुए कहा-: हुआ नहीं है लेकिन मैं बहुत जल्दी उसे साकार करने वाला हूं।"
केतन ने कहा -: क्या मतलब ?""
मैने कहा -: आज मैं अपने पिताजी से इस विषय में बात करने वाला हूं।""
मेरी यह बात सुनकर केतन की हंसी छूट गई और वह काफी देर हंसता ही रहा मैं उसके इस तरह हंसते रहने का कारण पूछा तो उसने कहा-: मुझे तो बिल्कुल नहीं लगता है कि तुम्हारा वह अडियल और खड़ूस बाप तुम्हे कभी जाने देगा।"
मैने कहा -: जाने क्यों नहीं देगा यह मेरे करियर और मेरी जिंदगी का सवाल है।""
केतन ने व्यंग्य के बहाने लेकिन एक सच्ची बात कही उसने कहा-: तुम्हारा कैरियर जापान में है लेकिन तुम्हारे बाप का कैरियर तुम्हें यहां पर पिसने में है वह चाहता है कि तुम उसका काम संभालो न की इधर-उधर के चक्कर में पडो।""
केतन ने अपना बैग उठाकर कंधे पर टांगा और कहा -: अच्छा ठीक है मैं चलता हूं मुझे बाहर जाना है तुम अपना प्रयास जारी रख लो क्या पता सफल हो जाए ?"
इतना बोलकर वह वहां से चला गया उसकी बात शायद काफी हद तक ठीक थी क्योंकि पूरे गांव के अंदर मेरे पिताजी का दबदबा रहा था और यही बात थी की बहुत लोग आज भी उन्हें आदर की नजर से देखते थे। लेकिन यह बात तो मुझे भी पता थी कि वह इसकी इजाजत मुझे कभी नहीं देने वाली लेकिन मैं यह भी सोचता था अगर मै अपनी मां को बोलूंगा तो वह उसे मना सकती है।
मां के अलावा इस दुनिया में ऐसा कोई इंसान पैदा ही नहीं हुआ जो ऐसा काम कर सकता है इसलिए मैं सबसे पहले अपनी मां के पास दौड़ा गया मेरी मां उस समय स्वेटर बुन रही थी मैने अपनी मां के करीब जाकर कहा -: मां ! मुझे तुम्हारा बहुत जरूरी काम है।""
मेरी मां ने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और कहा -: बताओ!""
मैने कहा -: तुम्हे तो पता ही है मैं बचपन से एक सपना देखा है जापान जाने का सपना अब मेरी उम्र भी हो चुकी है और मैं बा कॉलेज की डिग्री की प्राप्त करती है अब मुझे जापान जाने दो।
मेरी मां ने मेरी तरफ देखा उसके बाद कहा-: यह इजाजत तो तुम्हे तुम्हारे पिता से लेनी होगी।""
मैंने घबराते हुए कहा-: उन्हें तुम्हारे अलावा और कोई नहीं मना सकता है यह और किसी के हाथ में नहीं है केवल तुम्हारे हाथ में है।""
मां ने मेरी आंखों में एक उम्मीद देखी थी और इसी उम्मीद को देखकर उसने मुस्कुराते हुए कहा-: अगर तुम मुझसे मेरी जान भी मांग लेता हूं मैं हंसते-हंसते जो भी दे देती लेकिन तुम मुझसे खुद को दूर करने के लिए कह रहा है जो मेरे लिए बहुत मुश्किल है। एक मां बाप के लिए बहुत मुश्किल होता है अपने बच्चों को अपनी आंखों से दूर भेजना।""
मां की बात सुनकर मैं निराश हो गया उनकी बातों से यह लग रहा था कि वह मेरा समर्थन नहीं करेगी मैंने अपनी आंखों में आंसू लाते हुए कहा-: तुम्हारी बात अपनी जगह सही है लेकिन मैं अपनी जगह से हूं मुझे भी मेरी जिंदगी जीने का अधिकार है क्या आप मुझसे वह अधिकार छीन लेना चाहते हैं ?""
मां ने मेरी तरफ देखकर कहा -: यह कैसी बात कर रहा है तुमसे कोई तुम्हारा अधिकार छिनना नहीं चाहता तुम अपनी इच्छा को देख रहे हो लेकिन हमारी ममता को नहीं देख रहे हो।""
लेकिन उस वक्त यह बातें मेरी समझ के बाहर थी और मैं कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था और मैं उठकर वहां से चला गया केवल जाने से पहले मैंने इतना कहा-: आपकी यह बातें सच हो सकती है लेकिन इस वक्त यह मेरी समझ के बाहर है अगर आपको मेरी बात उचित लगी हो तो आप मेरा समर्थन जरुर कीजिए क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि आप मुझे कभी निराश नहीं कर सकती चाहे आपके दिल पर पत्थर रखकर वह काम क्यों न करना पड़े ?""
यह बात पहले के बाद मैंने मां को कितनी असमंजस में डाल दिया यह मैं खुद बाद में सोच रहा था तो जो यह महसूस कर रहा था उसे तो पता चल रहा होगा कि वह कितनी बड़ी दुविधा में है। एक मां के लिए उसकी औलाद भी सब कुछ होती है और वह उसे आंखों से दूर नहीं कर सकते और कुछ मेरे साथ भी यही घटना यहां पर हो रही थी। लेकिन मेरी मां मेरे पिताजी से बात जरूर करें कि मुझे पूरा विश्वास था।
और शाम में जब मैं उनकी बातें सुनी तब मेरा कलेजा फटने को हुआ और मेरी आंखों से आंसू की धारा बह निकली।
( आखिर ऐसी क्या बातें हुई माता-पिता के अंदर जिसे सुनकर मुझे इतना दुख हुआ क्या मेरे पिता जापान जाने की मेरी स्थिति को मान सकते हैं क्या जापान मेरी जिंदगी में कुछ नया मोड़ लेकर आने वाला है यह आपको अगले भाग में जरूर पता चलेगा कहानी काफी इंटरेस्टिंग होने वाली है बने रहिए हमारे साथ आगे आपको और रोचक मोड़ देखने को इसके अंदर मिलने वाले हैं जब जापान का सफर शुरू होता है या नहीं यह देखने वाली बात है)