The Devil's Possession Ch. 3

The Devil's Possession - Chapter 3 रूहानी की नई मुसीबत

Posted by Hayat Khan • Sep 15, 2026 02:07 PM

इधर घर में सविता काफी परेशान बैठी थी। रिश्ता देखने आए मेहमानों को गए हुए अभी दो-तीन मिनट ही हुए थे, लेकिन उनके चेहरे और बातों से ही साफ हो गया था कि उन्हें रिद्धिमा कुछ खास पसंद नहीं आई थी।

तान्या ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा, “माँ, मुझे नहीं लगता कि ये लोग रिश्ता करेंगे। आपने देखा नहीं, कैसे अजीब-अजीब सवाल पूछ रहे थे हमारी रिद्धिमा से?”

रिद्धिमा भी इस बात से परेशान थी। वहीं मेज पर मेहमानों के लिए तरह-तरह के खाने-पीने की चीजें रखी हुई थीं। सविता ने अपनी हैसियत से बढ़कर अच्छे और महंगे पकवान बनवाए थे, ताकि लड़के वालों पर अच्छा प्रभाव पड़े।

तान्या खर्च के बारे में सोच-सोचकर परेशान हो रही थी।

सविता ने रिद्धिमा के चेहरे की तरफ देखते हुए कहा, “अरे, परेशान मत हो। मुझे तो लगता है ये रिश्ता हो जाएगा। आखिर मेरी रिद्धिमा है ही इतनी खूबसूरत।”

रिद्धिमा के चेहरे पर उस वक्त पार्टी मेकअप था। तभी लड़के की बहन ने उससे बड़े ध्यान से पूछा था, “रिद्धिमा जी, इतना सारा पार्टी मेकअप करने में तो तीन-चार घंटे लग जाते हैं। आपने इतना सारा खाना इतनी जल्दी कैसे बना लिया?”

सविता ने तुरंत अपनी बेटी की तारीफ करते हुए कहा था, “मेरी बेटी हर काम में माहिर है।”

तभी तान्या ने एक बात पर सबका ध्यान दिलाया, “वैसे माँ, आपने एक बात notice की? उन लोगों ने सिर्फ खाने की तारीफ की। वो भी उस लड़की के हाथ के बने खाने की।”

तान्या ने अपनी बात कहते हुए पूरा ध्यान रूहानी की तरफ कर दिया।

मान्या ने भी उसकी तरफ देखा।

सविता का चेहरा तुरंत सख्त हो गया।

“हाँ माँ, उसे बुलाइए। ये सारा सामान उठाकर यहाँ से ले जाए। मुझे तो इस रिश्ते से कोई अच्छी उम्मीद नहीं है।”

यह कहते हुए मान्या उठकर घर की दीवार के पास जाकर खड़ी हो गई।

सविता ने संध्या से कहा था कि रूहानी को घर भेज दे। दुनिया के सामने रूहानी उसकी सौतेली बेटी थी, लेकिन रिद्धिमा, तान्या और मान्या उसे अपनी बहन कहती थीं। कम से कम बाहर वालों के सामने तो यही दिखाती थीं।

लेकिन संध्या से घर की कोई बात छिपी नहीं थी।

मान्या की आवाज सुनते ही रूहानी ने अंदर से काँपती आवाज में कहा, “दीदी, मैं बस अभी आई।”

वह जल्दी से संध्या के घर से निकलकर अपने घर पहुँची।

जैसे ही उसने घर में कदम रखा, सविता की नजर उस पर पड़ गई।

“आ गई मनहूस? चल, ये सारा सामान उठाकर अंदर रख।”

रूहानी ने बिना कोई सवाल किए सिर झुका लिया और तेजी से आगे बढ़कर सामान उठाने लगी।

उधर सविता, रिद्धिमा, तान्या और मान्या चारों बाहर आँगन में कुर्सियों पर बैठी थीं। तभी अचानक दरवाजा खुला और एक खूबसूरत, जवान लड़का अंदर आया।

रिद्धिमा तुरंत सीधी होकर बैठ गई। तान्या और मान्या भी उसे देखने के लिए खड़ी हो गईं।

सबसे पहले सविता ने खुद को संभाला और बनावटी खुशी के साथ बोली, “अरे, अहम बेटा! कुछ भूल गए थे क्या? आओ, आओ।”

अहम मुस्कुराता हुआ अंदर आया।

“आंटी, दरअसल मेरा मोबाइल वहीं मेज पर रह गया था।”

वह आगे बढ़कर अपना फोन उठाने लगा।

उसी समय रूहानी रसोई से बाहर आई और मेज की तरफ बढ़ने लगी। उसका पूरा ध्यान सामने खड़े लड़के पर नहीं था। वह बस मेज पर रखा सामान उठाने में लगी हुई थी।

लेकिन अहम की नजर रूहानी पर पड़ गई।

उसका ध्यान रूहानी की तरफ जाता देखकर रिद्धिमा की आँखें गुस्से से लाल हो गईं।

सविता भी तुरंत समझ गई कि अहम का ध्यान किस तरफ जा रहा है।

उसने रूहानी का हाथ पकड़कर उसे पीछे खींच लिया और सख्त नजरों से अंदर जाने का इशारा किया।

“ये हमारे घर में काम करती है,” सविता ने जल्दी से कहा।

रूहानी ने कुछ नहीं कहा। वह तुरंत वापस रसोई में चली गई और चुपचाप अंदर खड़ी हो गई।

अहम की नजर अभी भी रसोई के दरवाजे की तरफ थी।

उसने पूछा, “आंटी, आपके घर में कोई काम करने वाली भी है? आपने पहले तो इसका जिक्र नहीं किया था।”

सविता ने बात संभालते हुए कहा, “हाँ बेटा, वो इसी मोहल्ले से आती है। थोड़ा-बहुत काम कर देती है, तो मेरी रिद्धिमा भी उसे कुछ न कुछ दे देती है।”

लेकिन सविता की कोशिश बेकार जा रही थी। अहम के चेहरे की बेरुखी साफ बता रही थी कि उसे रिद्धिमा में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी।

उसने फिर पूछा, “इसी मोहल्ले में उसका घर है? कहाँ?”

अहम के इस सवाल ने जैसे रूहानी की किस्मत को एक बार फिर उसके सामने ला खड़ा किया।

रसोई के अंदर खड़ी रूहानी को पहले से ही किसी अनहोनी का एहसास होने लगा था।

और फिर वही हुआ।

कुछ ही देर बाद घर के बाहर से रिद्धिमा के चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं।

“मैंने कहा था ना माँ, ये लड़की मेरा घर नहीं बसने देगी! देखा आपने, कैसे वो अहम के सामने उसे देख रहा था? उसके बारे में पूछ रहा था और उसके घर के बारे में जानना चाह रहा था!”

रिद्धिमा गुस्से में रसोई की तरफ बढ़ी।

“ये लड़की कभी मेरा घर नहीं बसने देगी। मैं इसे जान से मार डालूँगी। जान-बूझकर अहम के सामने आई थी!”

वह रूहानी के बाल पकड़कर उसे रसोई से घसीटते हुए बाहर ले आई।

रूहानी खुद को छुड़ाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसके सामने चार लोग थे और वह अकेली।

रिद्धिमा, तान्या और मान्या को भी जैसे आज अपना गुस्सा निकालने का मौका मिल गया था। सुबह से उन्हें रूहानी पर हाथ उठाने का मौका नहीं मिला था, लेकिन अब उनके सामने वजह भी थी और मौका भी।

रूहानी चुपचाप उनकी मार सहती रही।

दीवार से दीवार जुड़ी होने की वजह से उसे जोर से चीखने की भी इजाजत नहीं थी। वह न जाने कितनी देर तक खामोशी से उन चारों की मार सहती रही।

कभी-कभी उसका मन करता था कि वह इस दुनिया से ही भाग जाए। कभी उसे लगता था कि अगर उसकी जिंदगी में प्यार नाम की कोई चीज होती, तो शायद कोई तो उसे अपना समझता। कोई तो होता जो उसके जख्मों पर मरहम लगाता।

लेकिन उसकी जिंदगी में ऐसा कोई नहीं था।

वह खुद को हमेशा एक अनचाहा वजूद ही समझती आई थी।

इतनी मार और इतनी बेइज्जती सहने के बावजूद वह किसी तरह उठी और रात का खाना बनाने लगी। शरीर में इतनी ताकत नहीं बची थी कि खुद खाना खा सके। खाना बनाने के बाद वह चुपचाप अपनी पुरानी चटाई पर जाकर लेट गई।

उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।

अगले दिन दोपहर करीब ग्यारह बजे वे लोग फिर वापस आ गए।

सविता को इतनी जल्दी उनके वापस आने की उम्मीद नहीं थी। उसे तो लगा था कि वे लोग कुछ दिन सोचकर जवाब देंगे। रिद्धिमा भी कल की तरह तैयार नहीं थी। वह अभी-अभी उठी थी।

सविता ने तुरंत चेहरे पर बनावटी मुस्कान लाकर उनका स्वागत किया।

“आइए, अंदर आइए।”

लेकिन अगली ही बात सुनकर सविता के चेहरे का रंग उड़ गया।

उनमें से एक ने पूछा, “वो लड़की जो आपके घर में काम करती है, जरा बताइए उसका घर कहाँ है?”

रसोई में खड़ी रूहानी का दिल एक बार फिर काँप उठा।

उस आदमी ने आगे कहा, “दरअसल, अहम ने जब से उसे देखा है, हमें एक पल के लिए भी चैन नहीं लेने दिया। वह बार-बार उसी लड़की के बारे में पूछ रहा है।”

रूहानी की साँसें जैसे वहीं रुक गईं।

उसके शरीर पर कल की मार के निशान अभी भी ताजा थे।

कुछ ही देर में बाहर से सविता की ऊँची आवाज सुनाई देने लगी।

“अगर उसे रिद्धिमा पसंद नहीं है, तो रूहानी भी नहीं मिलेगी, क्योंकि वो भी इसी घर की लड़की है।”

सविता के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

“इसी मनहूस ने न जाने क्या कर दिया है। पहले तो मैं इसे इस घर से निकाल दूँगी!”

अब उन लोगों को भी अंदाजा हो चुका था कि उनके यहाँ रिश्ता लेकर आने की वजह से इस मासूम लड़की की जान मुश्किल में पड़ गई है।

उनमें से एक औरत ने रसोई की खिड़की से झाँकती रूहानी को देखा। वह डरी-सहमी खड़ी थी और अपनी किस्मत का इंतजार कर रही थी।

कुछ पल बाद वे लोग वहाँ से चले गए।

लेकिन रूहानी के लिए मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई थी।

सविता ऊँची आवाज में उसे पुकार रही थी।

“रूहानी! बाहर आ!”

रूहानी के कदम भारी हो गए। वह धीरे-धीरे रसोई से बाहर निकली।

बाहर सविता हाथ में पाइप लिए खड़ी थी और उसे अपने पास आने का इशारा कर रही थी।

रूहानी की आँखों में डर उतर आया।

उसे पता था कि अब फिर क्या होने वाला है।

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मिलते हैं अगले chapter में…

तब तक के लिए,

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