अध्याय 2: आयशा-2
2. आयशा-2
अध्याय-1
आयशा
भाग-2
★★★
किचन में नमक के डिब्बे को बुलाने के बाद आयशा उसके आने का इंतजार करने लगी थी। नमक के डिब्बे ने संजीव होने के बाद कूदते हुए नीचे फर्श पर छलांग लगाई और फिर ऐसे ही कूदते हुए आयशा के पास चला गया। जब वह आयशा की कुर्सी के नजदीक पहुंचा आयशा ने नीचे हाथ कर उसे उठा लिया। उसने खाने में नमक डाला और खाना खाने लगी।
आयशा की मां सरिता ने उससे कहा “तुम सुधरोगे नहीं ना, तुम्हें कितनी बार कहा है आपने जादू का इस्तेमाल घर पर मत किया करो। घर पर क्या इसका इस्तेमाल कहीं भी मत किया करो। अगर यहां किसी को भी पता चल गया ना तुम इस तरह के जादू कर सकती हो तो हमारा रहना मुश्किल हो जाएगा। दुनिया इस चीज को कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
“मां,” आयशा बोली “तुहानु क्या होता रहता है हर बार। अरे मैं कभी-कभी तो इसका इस्तेमाल करती हूं। अब तक 19 साल की हो गई हूं, मुझे यह जादू बचपन से आता था, मगर कभी भी नहीं पकड़ी गई, क्योंकि किया ही नहीं। स्कूल तक पूरा कर लिया, वहां भी कभी आपको ऐसी शिकायत नहीं आई। इसके बावजूद आप हमेशा बड़ों की तरह यही कहती रहती है कि कम इस्तेमाल करो कम इस्तेमाल करो। अब और कितना कम इस्तेमाल करुं।”
आयशा की मां सरिता ने अपने पति विजेंद्र की तरफ देखा, विजेंदर ने आंखें झपकाई और आयशा से कहा “बेटा, तेरी मां दे कहने का मतलब है कभी भी जादू का इस्तेमाल इस तरह से छोटे-मोटे कामों के लिए नहीं करते। अगर आपके पास जादू है तो इसका मतलब है आपके पास बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस वजह से जादू का इस्तेमाल तभी किया जाए जब उसकी जरूरत हो, या आपके सामने कुछ ऐसा हो जाए जहां इसके इस्तेमाल करने की जरूरत आन पड़े। इस तरह से अगर बच्चों वाले कामों में भी जादू का इस्तेमाल होने लगा तो यह है बे मायने रह जाएगा।”
“समझ गई पापा समझ गई। मैं अब इसका इस्तेमाल तभी क्या करूंगी जब जरूरत पड़े।” इतना कहकर आयशा खाना खाने लगी। सरिता और विजेंदर भी खाना खाने लगे। तभी आयशा के दिमाग में कुछ आया और उसने पूछा “पर पापा, मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही, यह जरुरत वाली चीज कब सामने आएगी। मतलब ऐसा क्या होगा जहां में इसका इस्तेमाल करूंगी।”
“लो” विजेंद्र बोला “तुम वो बात भूल गई जब मैंने तुम्हें शैतान के शहंशाह और उसकी अंधेरी सेना के बारे में बताया था। तुम्हें बताया था वह लोग शैतान को धरती पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, और 1 दिन ऐसा हो कर भी रहेगा। इन सबके बीच उन्हें अगर कोई रोकने का काम कर रहा है तो वह आश्रम ही है। वह आश्रम जहां पहले हम कभी रहा करते थे। ऐसे में हो सकता है आने वाले समय में जब आश्रम को हमारी जरूरत पड़े तो हम वहां चले जाएं। वहां जाने के बाद तुम्हारी जरुरत ही जरुरत होगी जहां तुम जादू का इस्तेमाल कर सको”
“ओह...” आयशा ने हैरानी वाला चेहरा बनाया “आपका मतलब मैं आश्रम में जाकर जादू का इस्तेमाल करूंगी। वाउव, तब तो मजा आ जाएगा। जिस तरह का जादू मुझे आता है उस तरह का जादू तो कभी आश्रम ने देखा भी नहीं होगा। सबके होश मिल जाएंगे।” आयशा सपने देखने लगी “हर कोई मुझे किसी हीरोइन की तरह समझेगा। मगर पापा...” तभी उसने खुद को सोचने से रोका और विजेंद्र से पूछा “क्या वहां कोई मेरी उम्र का भी होगा या बस मुझे आप जैसे ज्ञान देने वाले लोग ही मिलेंगे। आई मीन बड़े बुजुर्ग टाइप, जो बस यही कहेंगे कि मुझे सही मौका देखना चाहिए, लाप लाप बलाह बलाह।”
विजेंद्र हंसने लगा “वैसे तो यह अच्छी बातें होती है, लेकिन अभी तुम्हारी उम्र छोटी है तो तुम्हें यह मजाक लग रही है। रही बात आश्रम की तो जब मैं आश्रम में रहता था तब छोटी उम्र के लड़के या लड़कियां नहीं दिखाई देते थे। तब हम जैसे लोग होते थे जो जादू सीखने का काम करते थे। इसके बाद सुनने में आया कि आश्रम में छोटे लड़के लड़कियों को भी रखा जाने लगा है, उनके पास कोई सुरक्षित जगह नहीं थी, बस आश्रम ही है जो उनके लिए सुरक्षित जगह है, तो उस हिसाब से तो तुम्हें काफी सारे अपनी उम्र के लड़के लड़कियां मिल जाएंगे।”
“सुनकर अच्छी वाली फीलिंग आ रही है...” आयशा ने कहा “कम से कम मैं बोर होने से तो बच जाऊंगी, अगर मुझे ज्ञान वाली बातें सुनने को भी मिलेगी तो अपनी उम्र के लड़के लड़कीयों से मिलकर उनका मजाक भी बना सकती हूं।” वह दोबारा खाना खाने लगी। खाना खाते हुए उसने आगे कहा “अच्छा पापा, यह जो आपने शैतान के शहंशाह वाली बात बताई, उसमें आप ने यह भी बताया था कि कोई भविष्यवाणी वाला लड़का भी है जो शैतान की मौत बनेगा, तो आपको क्या लगता है वह कहां रहता होगा?”
“यह तो रब ही जाने” विजेंद्र ने बिना आयशा की तरफ देखे जवाब दिया “उस लड़के के बारे में कोई नहीं जानता वह कहां है और किस हालत में है। किसी को यह भी नहीं पता वह कौन है। आश्रम के अलावा सिर्फ एक वही लड़का है जो शैतान के शहंशाह के सामने खड़ा होगा।”
“उसके बारे में सुनकर कितना अच्छा लग रहा है ना...” आयशा खोते हुए बोली “पता नहीं उसमें ऐसा क्या खास होगा जो भविष्यवाणी ने उसे शैतान की मौत के रूप में चुना। कुछ तो अलग होगा उसमें..”
विजेंद्र ने यह सुन कर कहा “हां... कुछ नहीं... बल्कि काफी कुछ, वरना भविष्यवाणी ऐसे ही किसी को चुनाव नहीं करती।”
आयशा ने एक हल्की सी मुस्कुराहट दी। वह भविष्यवाणी वाले लड़के के बारे में सोचते हुए खाना खाने लगी। बाकी भी अपना अपना खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद सरिता डाइनिंग टेबल पर पड़े बर्तन को उठाने लगी जबकि विजेंद्र टीवी देखने लगा। वही आयशा वापिस सीढीओ की तरफ गई और अपने कमरे का दरवाजा खोला।
उसका कमरा पूरी तरह से अस्त-व्यस्त था। आयशा ने अपनी चपले खोली और पलंग पर छलांग मारते हुए लेट गई। लेटने के बाद उसने ऊपर छत की तरफ देखते हुए कहा “इस दुनिया में भी बताओ कितनी कितनी अजीब चीजें हैं, शैतानी शहंशाह, आश्रम, अंधेरे की सेना, भविष्यवाणी वाला लड़का, कभी-कभी तो इन पर यकीन ही नहीं होता।” उसने पासा पलटा और खिड़की की तरफ देखने लगी। खिड़की की तरफ देखते हुए उसने कहा “ पता नहीं वह भविष्यवाणी वाला लड़का कैसा होगा, वह शैतान की मौत है तो जरूर डेसिंग हैंडसम और सिक्स पैक वाला होगा। ऐसे लड़के ही स्ट्रांग होते हैं और शैतान जैसी शख्सियत का सामना कर सकते हैं।”
वह खिड़की की तरफ देख रही थी, तभी उसने ध्यान दिया बाहर धूप वाले वातावरण में कुछ बदलाव हो रहे हैं। धूप के दृश्य गायब होकर गहरे काले बादलों से बनने वाले दृश्यों में तब्दील हो रहे हैं। यह देखकर आयशा के माथे पर शिकन से भरी लकीरे छा गई। ऐसा कभी भी नहीं हुआ था। कभी भी नहीं।
वह अपनी जगह से खड़ी हुई और धीमे कदमों से खिड़की की तरफ बढ़ कर खिड़की खोली। जैसे ही उसने खिड़की खोली एक अजीब सी तकलीफ देने वाली हवा आई और उसके बाल पीछे की तरफ लहरा पड़े। उसने चेहरे को हल्का सा बाहर निकालकर आसमान की तरफ देखा। पूरा का पूरा आसमान काला पड़ चुका था। वह भी इस तरह से की दिन में भी रात वाले दृश्यों का एहसास हो रहा था।
नीचे विजेंद्र टीवी स्क्रीन में कोई प्रोग्राम देख रहा था। प्रोग्राम देखते देखते अचानक टीवी स्क्रीन के दृश्य कभी गायब होने लगे तो कभी वापस दिखाई देने लगे। यह देखकर विजेंद्र ने भी अपने चेहरे पर हैरानी दिखाई। उसने रिमोट उठाया और उसे उठाते हुए चैनल बदलने लगा।
सरिता किचन में बर्तन धो रही थी। बर्तन धोते धोते अचानक उसका ध्यान आसपास की चीजों पर गया। सभी चीजों ने हल्का-हल्का कांपना शुरू कर दिया था। उसने चीजों को कापंते हुए देखा और सोच में पड़ गई की यह आखिर क्या हो रहा है।
खिड़की के दृश्यों को देखने के बाद आयशा नीचे की तरफ आ गई, वही सरिता भी हॉल में आ गई जहां विजेंद्र टीवी के रिमोट के साथ छेड़खानी करने में लगा हुआ था।
आयशा ने अपने पिता से कहा “पापा, आपने बाहर का मौसम देखा, अचानक काले से बादल आ गए जो काफी अजीब लग रहे हैं।”
सरिता ने भी साथ लगते कहा “हां और किचन में भी आसपास की चीजें कांप रहीं है।”
विजेंद्र ने यह सुना तो उसके हाथ जहां थे वहीं के वहीं रुक गए। उसने एक नजर दरवाजे की तरफ देखा और एक नजर आयशा और सरिता की तरफ।
इसके बाद वह चिल्लाता हुए आयशा को बोला “जल्दी बेसमेंट में जाओ...”
वह अभी इतना ही बोला था कि दरवाजे के बाहर किसी ने दस्तक दी और एक ही झटके में दरवाजे को ठोकर मारते हुए उसे तोड़ दिया। दरवाजे के टूटते ही आयशा एकदम से घबराकर अपनी मां के पास हो गई।
दरवाजे पर एक बिना चेहरे वाली अंधेरी परछाई खड़ी थी। एक ऐसी अंधेरी परछाई जिसके चेहरे वाली जगह पर काले रंग का धुआं तैर रहा था। उसके हाथ में एक अजीब सी तलवार थी। एक ऐसी अजीब सी तलवार जो आज से पहले कभी नहीं देखी गई। तलवार का ब्लेड काले रंग की धातु से बना हुआ था, काले रंग के ब्लेड के साथ साथ उससे काले रंग का धुआं भी निकल रहा था, जो ऐसे लग रहा था जैसे मानो उसे गर्म कर उस पर पानी गिराया गया हो। तलवार के ऊपर का हिस्सा जहां उसका हैंडल बना था वह सफेद हड्डियों का बना हुआ था। ऐसी सफेद हड्डियों से जिसके बारे में यह कहना मुश्किल था कि वह इंसान की है या फिर किसी जानवर की। तलवार के जॉइंट पॉइंट पर एक छोटी सी शैतानी खोपड़ी थी जिसका सर तलवार के ब्लेड की ओर था और ठोड़ी हैंडल की ओर।
उस शख्स ने अपने कदम आगे बढ़ाए और हॉल में मौजूद तीनों को कहा “स्वागत नहीं करोगे.... शैतान के सबसे छोटे सिपेहसालार का”
★★★