वारिस (एक श्राप) Ch. 2

वारिस (एक श्राप) - Chapter 2

Posted by Mamta Meena • Sep 11, 2026 02:46 PM

खाना खाने के बाद देवांशी जैसे ही कमरे में आई तो अंतरा को देख कर बोली अरे अंतरा तुम अभी तक मुंह फुलाई बैठी हो,,,,,,,

अगर नानी मां ने तुम्हारे लिए कोई रिश्ता देखा है और तुम्हें पसंद आ जाता है तो विवाह कर लेना वरना मत करना,,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है सच तो यह है कि मैं अरेंज मैरिज करना ही नहीं चाहती अरेंज मैरिज में जरूरी तो नहीं ना जो लड़का सामने से अच्छा दिख रहा हो वह अंदर से भी उतना ही अच्छा हो बाहर से तो काफी सज्जन दिखता हो और पता नहीं अंदर से उतना सज्जन है या नहीं,,,,,,,

मैं लव मैरिज करना चाहती हूं हां अरेंज मैरिज कि मैं खिलाफ नहीं हूं लेकिन अरेंज मैरिज में भी अगर ऐसा लड़का मिल जाए जो सिर्फ मुझसे प्यार करे उसे हीर महल की धन दौलत से नहीं,,,,,,,

तो फिर मुझे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि यह नहीं हो सकता क्योंकि अरेंज मैरिज में जो भी हम से विवाह करने के लिए राजी होता है वह हमसे रिश्ता जोड़ना नहीं चाहता वह हीर महल से रिश्ता जोड़ना चाहता है,,,,,,

तब देवांशी बोली ऐसी बात नहीं है,,,,,,

तब अंतरा बोली देखो दीदी आप चाहे अरेंज मैरिज के पक्ष में हो लेकिन मुझे तो लगता है कि मेरे हिसाब से लव मैरिज ठीक होती है,,,,,,

और कल तो मैं किसी भी हालत में उस लड़के को पसंद नहीं करने वाली चाहे वह कितना ही कहीं का राजकुमार हो,,,,,,

तब देवांशी बोली तो फिर तुम क्या करोगी,,,,,

तब अंतरा बोली तुम बस यह मेरे ऊपर छोड़ दो और  दीदी हमेशा की तरह इस बार भी मेरा साथ दे देना,,,,,

यह सुन कर देवांशी बोली नहीं अंतरा मैं हर बार की तरह तुम्हारा साथ नहीं दूंगी अरे सब घरवाले चाहते हैं कि यह रिश्ता हो जाए तो भला मैं तुम्हारा साथ देकर सभी घर वालों के खिलाफ कैसे जाऊं,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली मेरी प्यारी दीदी एक तुम ही तो हो जो मुझे समझती हो बस इस बार मेरा साथ दे दो देखना कैसे मैं उस लड़के को यहां से रफा-दफा करती हूं,,,,,,

तब देवांशी बोली वैसे तुम्हारे दिमाग में क्या खिचड़ी पक रही है,,,,,,

तब अंतरा बोली बस दीदी देखते जाओ,,,,, यह कहते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,,,,,

अगले दिन सुबह से ही गायत्री ने कमली और उसके बेटे बहू से कहकर कई तरह के पकवान बनवाएं, सभी मेहमानों के आने की तैयारी में लगे हुए थे,,,,,,

लगभग 11:00 बजे के आसपास दो गाड़ियां आकर हीर महल के सामने रुकी, जिसमें से लड़का उसके माता-पिता तो वहीं दूसरी गाड़ी में शायद लड़के के भैया भाभी और बहन और बहनोई थे,,,,,,

गाड़ियों के रुकते ही गायत्री सबके साथ उनका स्वागत करने के लिए चली गई और उन्हें बड़े प्यार से अपने परिवार के साथ अंदर लेकर आई,,,,,,

सभी घरवाले बड़ी हंसी खुशी उनका स्वागत कर रहे थे खुशनुमा माहौल था बड़े ही प्यार से उन्हें अंदर लाकर बैठाया गया,,,,,,

गायत्री के कहने से पहले ही कमली और उसके बेटे बहू आने वाले मेहमानों की खातिरदारी में लग गए,,,,,

उधर कात्यानी के कहने पर पहले ही देवांशी अंतरा को तैयार करने लग गई, लेकिन अंतरा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान थी शायद बह कुछ करने वाली थी,,,,,,,

मेहमानों के आने की 10 मिनट बाद ही गायत्री ने कात्यानी से अंतरा को लाने के लिए कहा,,,,,,

तब कात्यानी अंदर गई और अंतरा से बोली अरे बेटी तैयार तो हो गई ना,,,,,

तब अंतरा मुस्कुराते हुए बोली हां मां,,,,,,

तब कात्यानी बोली देखो अंतरा हम यह सब कुछ तुम्हारी ही भलाई के खातिर कर रहे है बेटा आजकल अच्छा लड़का मिलना आसान नहीं है,,,,,,

अरे अच्छा खानदान है अच्छा लड़का है और कौन सी ही तुम विदा होकर ससुराल जाने वाली हो हमेशा हमारी आंखों के सामने ही रहोगी,,,,,,

अगर यह रिश्ता हो जाए तो हमें भी बड़ी खुशी होगी हमें लगता है कि यह लड़का पूरी तरह तुम्हारी योग्य है,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली आप चिंता मत कीजिए मैं उसी लड़के से विवाह करूंगी जो मेरे योग्य हो यह कहते हुए उसके चेहरे पर एक बार फिर रहस्यमई मुस्कान आ गई,,,,,

तब कात्यानी देवांशी की तरफ देखते हुए बोली देवांशी बेटा जल्दी से अंतरा को लेकर नीचे आ जाओ,,,,

यह सुनकर  देवांशी बोली जी मौसी मां,,,,, तब कात्यानी नीचे आ गई,,,,,

तब देवांशी बोली मुझे तो घबराहट हो रही है  अंतरा पता नहीं तुम अब क्या करने वाली हो,,,,,

तब अंतरा बोली आप चिंता मत करो दीदी बस हां जब मैं आपकी तरफ इशारा करूं आप हां में हां मिला देना,,,,,,

लेकिन मुझे लगता है आपकी इन सब में ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी बस आप चुपचाप बैठे रहना कोई आपत्ति मत जताना, अब देखना मैं आगे आगे क्या करती हूं,,,, यह कहते हुए बह मुस्कुराने लगी,,,,,

तब देवांशी बोली अरे जो करना है कर लेना मेरी देवी मां पर अब तो चलो नीचे,,,,,

तक अंतरा बोली हां क्यों नहीं वैसे भी मेरा नीचे जाना जरूरी है,,,, यह कहकर अंतरा देवांशी के साथ नीचे आ गई,,,,

जैसे ही देवांशी और अंतरा दोनों नीचे आई तो गायत्री मुस्कुराते हुए बोली आओ बेटी आओ,,,,,

यह सुनकर अंतरा और देवांशी उसके पास चली गई और अपने नानी मां के पास बैठ गई,,,,,

सभी आने वाले मेहमान उन्हें देखने लगे फिर लड़के का पिता बोला अरे इस खानदान से रिश्ता जोड़ना तो हमारे लिए सौभाग्य की बात है,,,,,,

हमें तो कुछ भी नहीं चाहिए बस आपकी बेटी से हमारी बेटी का रिश्ता जुड़ जाए यही हमारे लिए सौभाग्य की बात है,,,,,,

और वर्षों पुराना रिश्ता फिर से एक बार घनिष्ट हो जाए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है,,,,,,

तब लड़के की मां बोली अरे हमें तो ना धन दौलत चाहिए ना रूप रंग बस हमारे पुराने से पुराना रिश्ता बना रहे इससे बेहतर हमें और क्या चाहिए,,,,,

तब गायत्री बोली आप लोग बड़े ही नेक दिल और समझदार हो अरे आज तक बेटियां विदा होकर पराए घर जाती है,,,,,,

लेकिन इस खानदान के बारे में तो आप जानते ही हो सब कुछ जानते हुए भी आप अपना बेटा हमारे घर हमेशा के लिए भेजने की लिए तैयार है,,,,,, यह आप लोगों का  बड़प्पन और हम पर एहसान हैं,,,,,,

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