वारिस (एक श्राप) Ch. 1

वारिस (एक श्राप) - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • Sep 06, 2026 03:23 PM

यह रचना पूर्णरूपेण काल्पनिक है केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है इससे संबंधित मेल होने पर एक संयोग मात्र है,,,,,

धरमगढ़ राजस्थान का चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों और खूबसूरत झरनों से घिरा हुआ एक गांव जो इस दौर में भी प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आधुनिकता लिए हुए हैं जो राजस्थान के उस कोने में एक स्वर्ग को दर्शाता है,,,,,,,

वहीं पर पूर्वी दिशा में एक पहाड़ी की तलहटी में बना हुआ है हीर महल,,,,,,

हीर महल वहां के सौंदर्य और अपने महल की खूबसूरती से उस इलाके का एक स्वर्ग का टुकड़ा मालूम होता है,,,,,

यह मानो कि उस इलाके उस गांव में हीर महल में रहने वाले लोगों का ही शासन है,,,,,

आजादी के इस दौर में भी ग्रामवासी हीर महल में रहने वाले सदस्यों का काफी सम्मान करते हैं,,,,,

किसी जमाने में धरमगढ़ एक रजवाड़ी रियासत थी, जिस पर हीर महल में रहने वाले राजपूतों का राज था लेकिन आज के दौर में भी वहां की जनता के लिए धरमगढ़ एक रियासत ही है और हीर महल में रहने वाले धर्मगढ़ के शासक,,,,

हीर महल की मालकिन यानी शासक है बाईसा गायत्री जो कि काफी बुजुर्ग है, उसकी उम्र 85 वर्ष के आसपास है लेकिन इतनी उम्र में भी बह काफी चुस्त तंदुरुस्त नजर आती है,,,,,,

गायत्री के पति की काफी वर्षों पहले की मौत हो चुकी है उसके दो बेटियां हैं बड़ी बेटी सुजाता और दूसरी बेटी कात्यानी,,,,,,

दोनों का विवाह दो संगे भाइयों से हुआ है कात्यानी का पति तेज सिंह और सुजाता का पति गज सिंह,,,,,,,

बाईसा गायत्री अपनी दोनों बेटी दामादों और नवासीयों के साथ उसी महल में रहती है,,,,,,,

कात्यानी और सुजाता दोनों की एक एक बेटी है कात्यानी और तेज सिंह की बेटी का नाम है देवांशी,,,,,,

वही सुजाता और गज सिंह की बेटी का नाम है अंतरा,,,,,,

देवांशी अंतरा से उम्र में 1 साल बड़ी है दोनों शहर में रहकर एक हॉस्टल में रहकर अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रही है,,,,,,,

वही परंपरा के हिसाब से बाईसा गायत्री की बड़ी बेटी सुजाता की बेटी होने से अंतरा ही हीर महल की भावी शासिका है,,,,,,

वही घर में एक और सदस्य यानी एक नौकरानी है कमली जोकि काफी बुजुर्ग है कहने को तो नौकरानी है लेकिन परिवार के सदस्य की तरह है,,,,,,

क्योंकि कमली के सास ससुर यहां तक कि उसके पूर्वज हीर महल के यहां सेवा करते आए थे,,,,,,

कमली भी अपने पति के साथ वर्षो से हीर महल में ही सेवा कर रही थी लेकिन उसके पति की मौत के बाद अब बह अपने बेटे बहू के साथ हीर महल में काम करती है,,,,,,

हीर महल में रहने वाले लोग भी उसे एक परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं कमली सभी की विश्वासपात्र है उसका बेटा श्यामू और बहू राधा उसी हीर महल में काम करते हैं,,,,,,,

कमली अपने बेटे बहु के साथ रसोई का काम संभालती है इसके अलावा घर में अनगिनत नौकर चाकर है पूरे महल में राजसी ठाठ बाट है आज भी हीर महल की शासिका बाईसा गायत्री के पास बेशुमार दौलत जमीन जायदाद है,,,,,,,

लेकिन हीर मेल से जुड़ा हुआ है एक श्राप एक ऐसा श्राप जहां लड़कियां ससुराल नहीं जाती लड़के विदा होकर ससुराल आते हैं,,,,,

जहां पुत्री जन्म पर खुशियां और पुत्र जन्म पर शोक मनाया जाता है,,,,,

जहां हर सुहागिन स्त्री को दूधों नहायों पूतो फलो की जगह पुत्रवती हो का आशीर्वाद मिलता है,,,,

जहां पुत्री के जन्म पर उत्सव मनाया जाता है पूरे गांव में मिठाइयां बांटी जाती हैं,,,,,,

वही पुत्र जन्म पर पूरे गांव में शोक छा जाता है लोगों के चूल्हे तक नहीं जलते पूरे गांव में मातम छा जाता है,,,,,

हीर महल में रहने वालों के लिए पुत्र जन्म कि वह घड़ी किसी बड़ी संकट से कम नहीं होती,,,,,,

आखिर ऐसा कौन सा है श्राप जुड़ा हुआ है हीर महल से की उस महल में रहने वाले उस श्राप के बारे में जानते हुए भी चाहते हुए भी उस महल को छोड़कर नहीं जा सकते और उस महल में रहने के लिए मजबूर है,,,,,,

आज हीर महल में काफी चहल-पहल थी बाईसा गायत्री सुबह से सभी से तैयारियां करने के लिए कह रही थी,,,,,,

आखिर हीर महल में चहल-पहल क्यों नहीं होती आज अंतरा और देवांशी दोनों ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने पर हॉस्टल से हमेशा के लिए घर पर आ रही थी,,,,,,

अचानक बाहर गाड़ी रुकने की जैसी ही आवाज आई सभी घर वाले नौकर चाकर बाहर की तरफ दौड़ पड़े,,,,,,

फिर महल के आगे जैसे ही गाड़ी रुकी गाड़ी का दरवाजा खुलते ही देवांशी और अंतरा बाहर निकली,,,,,

अंतरा लंबा कद गोरे रंग की बहुत खूबसूरत थी ऐसा लगता जैसे साक्षात स्वर्ग की अप्सरा जमीन पर आ गई हो,,,,,,

अंतरा परिवार में सबसे छोटी है इसलिए सबसे ज्यादा प्यार उसकी नानी मां गायत्री उससे ही करती है,,,,,,

वही देवांशी भी कम खूबसूरत नहीं थी लेकिन अपने पिता की तरह सांवले रंग की थी,,,,,,

अंतरा और देवांशी भागकर अपनी नानी के गले लग गई, अंतरा की मां कात्यानी ने दोनों की आरती उतारी दोनों बहने सभी घरवालों से मिलकर दोनों बहुत खुश हुई,,,,,,

वहीं उन्हें देखकर सभी घरवाले भी काफी खुश थे अंदर आते ही अंतरा की नानी गायत्री बोली जाओ जल्दी से दोनों हाथ मुंह धो कर आ जाओ खाना तैयार हो चुका है और शाम भी हो गई है,,,,,,

यह सुनकर अंतरा और देवांशी बोली जी नानी मां और दोनों अपने कमरे में चली गई,,,,,,

कुछ देर बाद दोनों हाथ मुंह धो कर कपड़े बदल कर बाहर आई तब तक खाने की टेबल सज चुकी थी,,,,,,

खाने की टेबल देखकर अंतरा बोली नानी मां क्या पूरे महीने का राशन आज ही बनवा लिया आपने इतना सारा खाना,,,,,,

तभी कमली बोली और नहीं तो क्या बिटिया अरे तुम्हें तो पता है जब भी तुम दोनों हॉस्टल से आती थी तो तुम्हारी नानी मां तुम्हारे लिए कितनी सारी चीजें बनवा देती है,,,,,,

अरे जब से सुना है कि तुम दोनों आने वाली हो तब से ही तैयारी में लगी हुई है सुबह से ही तुम्हारी पसंद की सारी चीजें बनवा डाली,,,,,,

यह सुनकर गायत्री बोली और नहीं तो क्या कमली अरे मेरी दोनों बेटियों में ही तो मेरी जान बसती है मैं नहीं चाहती कि उनकी पसंद की कोई भी चीज छूटे,,,,,,,

अब जल्दी से सब को बुला कर ला खाना तैयार हो चुका है,,,,,,

यह सुनकर कमली बोली जी बाईसा और चली गई कुछ ही देर में सब घर वाले खाना खाने के लिए आ गए और एक साथ खाना खाने लगे,,,,,,

तभी अंतरा की नानी गायत्री बोली अरे बड़ी खुशी की बात है हमारी दोनों बेटियां घर आ गई है हमेशा के लिए अब तो इनकी पढ़ाई भी पूरी हो गई है दोनों ही विवाह के लायक है,,,,,,

मैंने तो अजीत गढ़ के घराने मे अंतरा के लिए रिश्ता देखा है वे लोग भी विवाह करने के लिए तैयार है, और उन्हें हमारी परंपरा के बारे में पता है सब कुछ जान कर भी बे लोग तैयार है,,,,,

यह सुनकर अंतरा का तो जैसे खाना ही गले में अटक गया और उसे खांसी आ गई,,,,,

तभी उसकी नानी मां जल्दी से पानी का गिलास उसे देते हुए बोली लो बेटी क्या हुआ जरा धीरे खाओ,,,,,,

अंतरा ने पहले पानी पिया और कहा नानी मां विवाह और मेरा अरे मैं नहीं करने वाली कोई विवाह,,,,,,

तब गायत्री बोली अरे बेटी विवाह तो हर किसी को करना है एक न एक दिन तो तुम्हें भी करना है और मैं तो कब से  उस दिन का इंतजार कर रही हूं जब तुम्हारा विवाह होगा,,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली लेकिन नानी मां देवांशी दीदी मुझसे बड़ी है ना तो पहले देवांशी दीदी का विवाह कीजिए ना,,,,,,

यह सुनकर गायत्री बोली तुम्हारी बात सही है लेकिन यह रिश्ता तुम्हारे लिए ही आया है अजीतगढ़ के कुंवर सा के लिए अजीतगढ़ के घराने ने तुम्हें ही पसंद किया है और मैं कोई अच्छा रिश्ता देवांशी के लिए भी देख रही हूं जो हमारी सारी शर्तें मानने के लिए तैयार हो,,,,,,

तब अंतरा बोली लेकिन नानी मां मुझे अभी कोई विवाह नहीं करना मैं इन सब के लिए तैयार नहीं हूं,,,,,

तब गायत्री बोली बेटा अरे और लड़कियां तो इस बात से घबराती है कि वह ससुराल जाएगी लेकिन तुम तो बेटी हमारे साथ हमेशा के लिए रहोगी तो फिर विवाह करने में क्या आपत्ति है,,,,,,,

उसकी बात सुनकर कात्यानी बोली हां बेटा विवाह तो तुम्हें करना ही है अब तुम्हारे विवाह की उम्र भी हो गई है,,,,,,,

और फिर अजीतगढ़ घराने से हमारा वर्षों पुराना रिश्ता है जाने पहचाने अच्छे खानदानी लोग हैं लड़का भी अच्छा भला है तो फिर विवाह करने में क्या परेशानी है,,,,,

यह सुनकर अंतरा बोली मां आप समझती क्यों नहीं है,,,,,,

तब तेज सिंह बोले देखो बेटा इस तरह बड़ों की बातों को नहीं काटते अरे तुम्हारी नानी मां ने तुम्हारे लिए रिश्ता देखा है बह लोग कल सुबह ही यहां आ रहे है अगर तुम मना करोगी तो कल हम उन लोगों से क्या कहेंगे यह सब अच्छा नहीं लगेगा,,,,,,

यह सुनकर अंतरा गुस्से बोली मेरे विवाह का फैसला लेने से पहले किसी ने एक बार मुझसे पूछना जरूरी नहीं समझा तुम्हें जो करना है करो यह कहकर बह उठ खड़ी हुई और वहां से जाने लगी,,,,,,,

तब गायत्री बोली अरे बेटी ठीक तरह से खाना खाकर जा,,,,,

यह सुनकर अंतरा गुस्से में बोली मेरा पेट भर गया है मुझे भूख नहीं है और बह गुस्से में दनदनाते हुए वहां से चली गई,,,,,,

तब कात्यानी बोली अरे मां आप तो उसका सिद्धांत जानते ही हो कुछ देर गुस्सा रहेगी फिर हमारी बात को समझेगी,,,,,,

वैसे भी हमारी अंतरा काफी समझदार है आप उसकी चिंता मत कीजिए और रही बात खाने की अगर उसका पेट नहीं भरा होगा ना तो देखना रात को कैसे छुप छुप कर खाना खाएगी आप तो जानती है उसे भूख बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होती,,,,,,

आप चिंता मत कीजिए विवाह से पहले सब लड़कियों को ऐसा ही लगता है,,,,,, धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा,,,,,,,

यह सुनकर गायत्री बोली भगवान करे सब कुछ ठीक हो जाए,,,, फिर सब खाना खाकर अपने अपने कमरे में चले गए,,,,

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