Saathi Ch. 1

साथी 1

Posted by Divya Verma • Sep 10, 2026 04:16 PM

वृंदावन

"माधव" एक लड़की ने रोते हुए कहा । उसकी आवाज़ मे इतनी पीड़ा थी कि भगवान उसकी पुकार से ही धरती पर अवतरित हो जाते ।

वो वृंदावन के उस पुराने मंदिर के कोने में बैठी थी, जहाँ चारों ओर तुलसी की सुवास, मृदंग की मधुर थाप, और आरती की लौ से उठता धुआँ वातावरण को पवित्र कर रहा था। पर उस लड़की के भीतर सिर्फ अंधेरा था।

मंदिर की दीवार के पास खड़ी एक वृद्ध महिला काफी देर से उसे देख रही थी — उस भावविहीन चेहरे, सूनी आँखों और अनकहे दुःख को पढ़ने की कोशिश कर रही थी। वो पंडित जी से जिज्ञासावश पूछती है - "पुजारी जी, ये लड़की कौन है? और इतना रो क्यों रही है? "।

पंडित जी गहरी साँस लेते हुए बोले: "इस बच्ची का नाम आरोही जोशी है। बहुत प्यारी और संजीदा बच्ची है। हर समय हँसती रहती थी, दूसरों को भी हँसाती थी। पर नियति ने उसकी हँसी छीन ली।"

उन्होंने आगे बताया — "उसके माता-पिता— स्वरा और अनिरुद्ध जोशी, बहुत ही प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे। आरोही खुद भी एक बेहतरीन गायिका है। उसकी ज़िंदगी संगीत, कॉलेज, और मंदिर की आरती में बसी थी। ‘माधव’... वो अपने कान्हा को इसी नाम से बुलाती है। रोज़ उनसे बातें करती थी। पर कुछ महीनों पहले एक दर्दनाक हादसे में उसके माता-पिता का निधन हो गया।

उसके मामा-मामी ने उसके देखभाल की ज़िम्मेदारी ली। सबको लगा कि अब वो उसकी परवरिश करेंगे, लेकिन उन्होंने तो छल का ऐसा जाल बुना कि आरोही की सारी संपत्ति अपने नाम करवा ली... और फिर एक दिन उसे घर से निकाल दिया।"

पंडित जी की बातों में दर्द था और सत्य का कटु रूप भी।

महिला की आँखें भर आईं —"भगवान अपने भक्तों की ऐसी कठिन परीक्षा क्यों लेते हैं?"

फिर कान्हा जी की मूर्ति की ओर देखते हुए प्रार्थना करती हैं - "हे कृष्ण, इस बच्ची को शक्ति देना। इसके जीवन में फिर से उजाला लाना।"

उसके बाद वो महिला मंदिर से निकल जाती है।

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आरोही जोशी- जिसकी उम्र 22 साल है, गेहुंआ रंग, लंबे काले घने बाल,और शहद जैसी भूरी आँखें (हनी ब्राउन) जिनमें से अभी झर-झर आंसू बह रहे हैं। वो देख तो भगवान कृष्ण की मूरत को रही थी लेकिन उसकी आँखों के सामने अपने माता-पिता के साथ बिताए पल आ रहे थे। जिसकी वजह से उसके आँसू ठहर ही नहीं रहे थे।

आरोही फिर रोते हुए- "माधव ! कोई नहीं रहा अब मेरा। आपकी आरोही बिल्कुल अकेली रह गई।" उसकी आवाज़ काँप रही थी।

वो ऐसी बेबसी महसूस कर रही थी, जो उसने कभी अनुभव नहीं की थी। ना कोई घर, ना कोई परिवार — सिर्फ एक मंदिर, एक मूर्ति, और एक टूटा हुआ दिल।

शाम ढलती है...

पंडित जी आगे बढ़कर कहते हैं — "बेटा, आज रात तुम मंदिर के पीछे वाले कमरे में रुक जाओ। और कुछ खा लो।"

आरोही चुपचाप सिर हिला देती है। वो खाना खा लेती है, मगर उसका मन बिल्कुल सूना था। वो कमरे में जाकर लेट जाती है लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। रात के 3-4 बजे कहीं जाकर उसकी आँख लगती है।

उसके सपने में अनिरुद्ध जी: "बेटा, हम तुम्हें एक बहुत ही इम्पोर्टेंट बात है जो तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हें बताएंगे।"

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अगले दिन

इसी के साथ सुबह 6 बजे उसकी आँख खुलती है। उसे याद आता है कि उसके पापा ने उसे कुछ बताने का कहा था लेकिन उससे पहले ही वो हादसा हो गया। फिर भी एक अलग ही ऊर्जा थी उसमें। वो सादगी से तैयार होकर मंदिर पहुंचती है।

जैसे हर रोज़ करती थी, वैसे ही आज भी वो ‘माधव’ के चरणों में बैठकर आरती गाना शुरू कर देती है:

राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक,

तीनों लोक में छाये रही है ।

भक्ति विवश एक प्रेम पुजारिन,

फिर भी दीप जलाये रही है ।

कृष्ण को गोकुल से राधे को...

कृष्ण को गोकुल से राधे को,

बरसाने से बुलाय रही है ।

दोनों करो स्वीकार कृपा कर,

जोगन आरती गाये रही है ।

दोनों करो स्वीकार कृपा कर,

जोगन आरती गाये रही है ।

भोर भये ते सांज ढ़ले तक,

सेवा कौन इतनेम म्हारो ।

स्नान कराये वो वस्त्र ओढ़ाए वो,

**** लगाए वो लागत प्यारो ।

कबते निहारत आपकी ओर...

कबते निहारत आपकी ओर,

की आप हमारी और निहारो ।

राधे कृष्ण हमारे धाम को,

जानी वृन्दावन धाम पधारो ।

राधे कृष्ण हमारे धाम को,

जानी वृन्दावन धाम पधारो ।

हर एक शब्द में उसकी आत्मा घुल चुकी थी। आज उसकी आँखों में न आँसू थे, न बेबसी। बस एक ठहराव, एक दिशा, और एक दृढ़ निश्चय।

पंडित जी को प्रणाम कर, वो मंदिर छोड़ देती है। वो अब अपनी राह चुन चुकी थी। सुबह-सुबह आरोही के फोन पर एक मैसेज आया था। मैसेज जिसने उसे उसकी अगली मंज़िल दिखा दी। उसी राह पर अब वो चल पड़ी थी...

वो वृंदावन रेलवे स्टेशन पहुंचती है।

उसके पास सिर्फ एक बैग है जिसमें कुछ कपड़े, ज़रूरत की चीज़ें, और एक फ़ोटो फ्रेम जिसमें वो अपने माँ-पापा के साथ मुस्कुरा रही है।

वो ट्रेन में चढ़ती उससे पहले ही एक छोटा बच्चा रोता हुआ दिखता है शायद वो खो गया था। आरोही उससे उसका नाम पूछती है उसके मम्मी पापा का नाम पूछती है।

भगवान की कृपा से बच्चे को सब पता था। तो आरोही उसे लेकर अनाउन्समेंट् करने वाले रूम ले जाती है और वहाँ रेल्वे अधिकारी अनाउन्समेंट् कर देते हैं और कुछ ही देर में उस बच्चे के मा पापा आकर उसे ले जाते हैं।

वो बच्चा आरोही को बहुत ही प्यारी सी स्माइल देता है। जिसे देख आरोही का मन थोड़ा शांत होता है। फिर वो इंदौर की ट्रेन में चढ़ती है और खिड़की वाली सीट पर बैठ जाती है।

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फ्लैशबैक

आरोही अपने शोपिंग करके लाए हुए आउटफिट्स पहन के दिखाती हुई - " पापा ! देखो मैं कैसी लग रही हूँ?" उसने एक पेस्टल ब्लू कलर का अनारकली पहना हुआ था।

अनिरुद्ध जी उसे देखकर कहते हैं - " हमारी प्रिंसेस बिल्कुल राजकुमारी लग रही है।" ।

स्वरा जी - " इतनी शॉपिंग करती है ये लड़की उसके लिए कभी कुछ नहीं कहते बस प्रिंसेस प्रिंसेस बोलकर सर पर बिठा लिया है।"

आरोही अपने पापा के पास सोफे पर बैठ कर पाउट करते हुए कहती है - " पापा, आपकी बीवी जलती है मुझसे। " निधि के पापा उसकी बात सुन हस देते हैं।

स्वरा जी -" अच्छा जी और मैं क्यों जलने लगी तुमसे?"

आरोही- " क्योंकि पापा मुझे ज्यादा प्यार करते हैं।" इस बात पर दोऩों बाप बेटी गले लग जाते हैं।

स्वरा जी नाराज होते हुए कहती हैं - " आप दोनों बाप- बेटी टीम बनाके हमें अलग कर देते हैं। और आप दोनों बस एक दुसरे से प्यार करते हैं हमसे तो कोई प्यार ही नहीं करता।"

स्वरा जी को उदास देख दोनों बाप बेटी उनके पास जा उन्हें ज़ोर से गले लगा एकसाथ कहते हैं -" हम आपसे भी बहुत प्यार करते हैं। "।

फ्लैशबैक एंड

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वृंदावन पीछे छूट रहा था। अब सामने था— इंदौर। एक नया शहर। एक नई लाइफ... अगर उसे लाइफ कहना सही हो।

बाहर खेत भाग रहे थे, ट्रेन की पटरी की आवाज़ एक मीठा-सा संगीत बन गई थी। आरोही ने सिर खिड़की की जाली से टिकाया और आँखें मूँद लीं। उसकी यादों ने उसे धीरे-धीरे नींद की ओर धकेल दिया—पापा का रियाज़, माँ की उँगलियों का उसके बालों में तेल लगाना, मंदिर की घंटियों की गूंज...

ये सब याद करते हुए एक कतरा आंसू उसकी आँख से बह जाता है। सोचते-सोचते कब उसकी आँख लग जाती है उसे पता ही नहीं चलता। कुछ देर बाद एक मीठी सी बांसुरी की धुन उसके कानों में पड़ने से उसकी नींद खुलती है।

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क्या था वो मैसेज जिसने बदल दी आरोही की दिशा?

क्या बताना चाहते थे आरोही के पापा उसे?

कौन है जो उसकी ज़िंदगी में नई धुन लेकर आ रहा है?

जानने के लिए पढ़ते रहिए ✨साथी✨।

Story में आगे क्या होगा जानने के लिए Stay Tuned 🌸!

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