तुम मेरी मोहब्बत हो (बेपनाह प्यार है का सीजन 2) Complete Ch. 1

तुम मेरी मोहब्बत हो (बेपनाह प्यार है का सीजन 2) - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • Aug 31, 2026 03:49 PM

बेपनाह प्यार है कि सीजन 1 जो कि एक हॉरर स्टोरी थी जिसको आप सभी ने बहुत प्यार दिया, यह स्टोरी पूरब और राधिका की प्रेम कहानी से संबंधित थी साथ में ही इस स्टोरी में पूरब के बड़े भाई वीरेंद्र प्रताप और गोरा की प्रेम कहानी को भी दिखाया गया था जिसे भी आप सभी ने बेखूफी बहुत पसंद किया,,,,,,

आपके उसी प्यार को देखते हुए मैं उस रचना का दूसरा सीजन बेपनाह प्यार है सीजन 2 लेकर आई हूं जो पूरब और राधिका की बेटी सेजल पर आधारित होगा,,,,,,,,,,,

बेपनाह प्यार है सीजन 1 में आप पढ़ चुके हो कि, पूरब का जीजा इंद्रावती का पति दुष्यंत धोखे से पूरब और राधिका की मार देता है लेकिन पूरब और राधिका की बेटी सेजल की जान बच जाती है,,,,,,,,,,,

फिर पूरब और राधिका की मौत से दुखी गांव वाले गुस्से में दुष्यंत को घेरकर रावण के पुतले के साथ विजयदशमी के दिन उसे जला देते हैं जिससे पापी दुष्यंत की भी मौत हो जाती है,,,,,,,

पूरब और राधिका की मौत के बाद उनकी बेटी सेजल की जिम्मेदारी पूरब की बहन इंद्रावती पर आ गई थी, क्योंकि अपने माता पिता की मौत के बाद सेजल अब इस दुनिया में कोई नहीं था,,,,,,,

वही राधिका की दादी भी राधिका की मौत के कुछ दिनों बाद ही इस सदमे से मर जाती है इसलिए अब राधिका को संभालने की पूरी जिम्मेदारी इंद्रावती पर थी,,,,,,,

इंद्रावती ने अपने दोनों बेटों को हॉस्टल में डाल दिया और सेजल की देखभाल के लिए अपने मायके में ही रहने लगी,,,,,,,

इंद्रावती ने सेजल का पालन पोषण बड़े ही लाड प्यार से किया,,,,,,, उसे कभी भी माता-पिता की कमी महसूस होने नहीं दी,,,,,,,

सेजल में बह पूरब राधिका वीरेंद्र प्रताप सब की परछाई देखती है और उसे देखकर ही जीती है शायद जैसे सेजल ही उसके जीने की वजह हो,,,,,,,, सेजल भी अपनी बुआ मां से अपनी जान से ज्यादा प्यार करती है,,,,,,,,

अब सेजल 19 साल की हो चुकी है और शहर में रहकर कॉलेज में पढ़ाई कर रही है,,,,,,

वह शहर में स्थित अपने बंगले में ना रह कर बह एक हॉस्टल में अपने बचपन की सहेली जो उसी के गांव की है बरसा उसके साथ रहती है,,,,,,,

इन दिनों कॉलेज की छुट्टियां आ जाने से वह अपनी बुआ के पास अपने गांव आई हुई है,,,,,

अमावस्या की काली अंधेरी रात बियाबान जंगल एक सूखा वटवृक्ष जिसके अगल बगल में दो मसाले जल रही है,,,,

जंगली जानवरों की चिल्लाने की आवाज भी यदा-कदा सुनाई दे रही थी, जंगल में चारों तरफ से अजीबोगरीब  चीखने चिल्लाने की आवाज आ रही थी,,,,

अपने आप को बचाने के लिए वह कभी इधर से कभी उधर रोते हुए भाग रही थी, लेकिन घूम फिर कर उसी जगह पर आ जाती,,,,,,,,

यह देखकर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि बह क्या करें, उसे समझ नहीं आ रहा था कि बह यहां पर कैसे आ गई आखिरी यह कौन सी जगह है,,,,,

उसका दिल बैठा जा रहा था डर की वजह से उसकी हालत खराब हो गई थी,,,,,,

उसका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो गया था सोचने समझने की शक्ति जैसे बची ही नहीं थी,,,,,,,

वह रोऐ जा रही थी, बह अपने आप को बचाने के लिए जोर जोर से चीखना चाहती थी लेकिन डर की वजह से जैसे उसकी आवाज गले में ही अटक गई थी,,,,,,, उसे बचाने वाला बहां कोई नहीं था,,,,,,

बह देवी मां से रोते हुए प्रार्थना कर रही थी कि ऐ देवी मां उसकी रक्षा करो, उसे यहां से निकालो,,,,,,,

तभी एक विशाल मानव आकृति वटवृक्ष की एक कोने में से निकल कर आती है,,,,,

यह देखकर बह और डर जाती है वह वहां से भागना  चाहती है तभी वह मानव रूपी आकृति झपट कर उसका हाथ पकड़ लेती है,,,,,

उस मध्यम उजाले में उसका चेहरा भी साफ दिखाई नहीं देता है,,,,

जैसे ही बह उससे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करती वैसे ही बह मानव आकृति ने उसे कसकर पकड़ लिया और जोर जोर से आहट करके हंसने लगा,,,,,,

अचानक सेजल की नींद खुल गई बह पसीने से तरबतर थी,,,,,,,

तब  उसे नींद में इस तरह चिल्लाते देखकर पास में ही सो रही उसकी बुआ इंद्रावती दौड़ कर उसके पास आई और बोली बेटा सेजल तुम ठीक तो हो ना,,,,,

सेजल जो काफी डरी हुई थी, अपनी बुआ के गले लग कर फूट-फूट कर रोने लग जाती है,,,,

तभी इंद्रावती कहती है डर मत बेटा मैं हूं ना तुम्हारे साथ तुम्हारी बुआ मां है ना तुम्हारे साथ, बेटा 19 साल गुजर गए हर अमावस्या को तू यह भयानक सपना देखती है और डर कर चीख कर उठ जाती है,,,,,

आज तक समझ नहीं आया कि आखिर में तुम्हारा इस सपने से क्या संबंध है यह कहते हुए इंद्रावती सोच में पड़ जाती है,,,,,,

सुबह अपनी नींद खुलने के बाद भी सेजल रात के उस सपने को लेकर काफी डरी हुई थी,,,,

तब उसे इस तरह उदास देखकर उसकी बुआ मां बोली बेटा कल रात के सपने को लेकर परेशान हो ना, परेशान मत हो मैं हूं ना तुम्हारे साथ बेटा,,,,,,,

वैसे बेटा जो कुल गुरु ने तुम्हें देवी मां का लॉकेट दिया था और गले में बांधने को वह कहां है,,,,,

जब बह तुम्हारे गले में होता है तो तुम्हें ऐसा डरावना सपना नहीं आता,,,

तब यह सुनकर सेजल बोली बह बुआ मां पिछली बार कॉलेज में एग्जाम की वजह से गले में कुछ भी पहनना अलाउ नहीं था,,,,,,,

इसलिए मैंने उसे खोल कर अपने पर्स में रख दिया और जब वापस देखा तो वह मुझे नहीं मिला,,,,,

तब यह सुनकर इंद्रावती बोली कोई बात नहीं बेटा आज हम फिर कुलगुरू के यहां चलते हैं तुम तैयार रहना,,,,,

यह सुनकर सेजल बोली जी बुआ मां,,,,

फिर अपना काम पूरा करने के बाद इंद्रावती सेजल को लेकर अपने कुल गुरु के पास गई जोकि दूर पहाड़ियों में रहते थे,,,,,,,

वही इंद्रावती के पूर्वज उसके माता-पिता उसका भाई ठाकुर विरेंद्र प्रताप जब भी घर परिवार से संबंधित या ऐसी कोई भी परेशानी जिनका उन्हें कोई समाधान नजर नहीं आता था ऐसे में जब कोई बड़ी परेशानी होती थी जिसका हल नहीं मिल पाता था तो वह अपने गुरु के पास ही जाते थे,,,,,,,

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