Triangle love - Chapter 1
कॉलेज में डांस प्रतियोगिता होने वाली थी। सभी छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे।
पर रिधिमा उन सभी की मदद कर रही थी तभी उसकी सहेली जिया ने उससे पूछा—
“यार रिधिमा, कॉलेज की सभी लड़कियाँ डांस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं। एक तू ही बची है, तू भी इसमें हिस्सा क्यों नहीं लेती?”
“नहीं यार, मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। तू तो जानती ही है।”
“पर क्यों यार? डांस तो तूने भी सीखा है। अगर तुझे डांस में दिलचस्पी नहीं होती, तो तू डांस कभी न सीखती।”
“हाँ, पर मेरा मन इन सब चीज़ों में नहीं लगता।”
“अच्छा, तो फिर किसमें लगता है तेरा मन?”
“छोड़ ना यार, तू भी कौन-सी बात को लेकर बैठ गई। मत भूल कि तुझे भी बहुत सारी तैयारियाँ करनी हैं। अगर तू इसी तरह मुझसे बहस करती रही, फिर तो हो चुकी तैयारी।”
“हाँ, बात को काटना तो कोई तुझसे सीखे। जब भी मैं तुझसे कुछ पूछती हूँ, तू इसी तरह बात को टाल देती है।”
जिया ने मुंह बना के रिधिमा से कहा, “मैंने सोचा कि तुम भी पार्टिसिपेट करोगी, तो दोनों लोग साथ में...”पर तुम तो मना कर रही हो।”
तभी रौनक वहाँ आकर बोला—
“हेलो गाइज! व्हाट्स अप? क्या बातें हो रही हैं मेरे बगैर?”
जिया ने मुस्कुराते हुए कहा—
“आ जाओ बस तुम्हारी कमी थी।”
रौनक : “इसलिए तो मैं आ गया। ये रौनक था, जो रिधिमा और जिया का बचपन का दोस्त था।”
“देखो ना रौनक, मैं रिधिमा से यही कह रही थी कि वह डांस प्रतियोगिता में हिस्सा क्यों नहीं ले रही।”
जिया मुँह बनाते हुए बोली—
“वैसे जिया बात तो सही कह रही है। रिधिमा, तुम क्यों हिस्सा नहीं ले रही? तुम्हें तो बहुत ही अच्छा डांस आता है।रौनक ने प्राउडली कहा
“आई एम श्योर, अगर तुम पार्टिसिपेट करोगी तो तुम ही जीतोगी।”
कॉम्पटीशन day_
धीरे-धीरे वो दिन भी आ गया, जब कॉलेज में डांस प्रतियोगिता थी। प्रतियोगिता बहुत ज़ोरदार थी। उसमें एक से बढ़कर एक छात्र ने भाग लिया था।
उन्हीं में से एक था विक्रम, जो बहुत ही होनहार था। उसने बहुत अच्छा डांस किया था, पर जिया से ज़्यादा अच्छा नहीं। जिसके चलते प्रतियोगिता जिया जीत चुकी थी।
विक्रम अपनी इस हार से बहुत तिलमिला कर रह गया, पर अपनी तिलमिलाहट को छिपाते हुए उसने जिया को बधाई दी।
उसे कॉन्ग्रेचुलेशन कहकर वो घूमा, तो उसके सामने रिधिमा आ गई।
उसने उसे देखा तो देखता ही रह गया।
वह थी ही इतनी खूबसूरत कि किसी का भी दिल उस पर आ जाए और फिर सफेद सूट में तो वो और भी सुंदर लग रही थी।
गुलाबी होंठ, लंबे काले बाल, कानों में छोटी-छोटी बालियाँ, नाक में छोटी-सी नथनी और पतली एड़ियों की सैंडल।
उसने कोई मेकअप नहीं किया था और उसे मेकअप करने की जरूरत भी नहीं थी। खुदा ने दिल खोलकर खूबसूरती दी थी। उसके नैन-नक्श भी कमाल के थे। उसकी काली-काली बड़ी-बड़ी आँखें बोलती थीं, तो जैसे कोई कोयल गा रही हो।
रिधिमा ने दौड़कर जिया को गले से लगा लिया और बधाई देने लगी। तभी रौनक वहाँ आ गया और उसने जिया और रिधिमा से कहा—
“चलो, इसकी खुशी में हम तीनों पार्टी करते हैं।”
जिया, रिधिमा और रौनक तीनों बचपन के दोस्त थे और रौनक मन ही मन रिधिमा से प्यार करता था, पर उसने कभी भी यह बात रिधिमा को बताई नहीं थी। हाँ, कोशिश तो बहुत की थी बताने की, पर जब भी वो बताने जाता है, उसकी हिम्मत नहीं होती थी। तो बस खामोशी से वो रिधिमा को चाहे जा रहा था।
वह तीनों चले जाते हैं और विक्रम वहीं खड़ा देखता रह जाता है। विक्रम की नज़र रिधिमा से हट ही नहीं रही थी।
“ओए हीरो, जा चुकी है वो।” विपुल ने पीछे से आते हुए कहा।
विक्रम ने पलट के देखा—“अरे यार, तुम कब आए?”
जब तुम उसे दुनिया भुलाए, उसे देखने में बिज़ी थे।”
“हाँ यार, क्या बोला कि खूबसूरत है? मैंने लाखों लड़कियाँ देखी हैं, पर इसके जैसी नहीं। कुछ तो खास है इसमें, जो विक्रम के दिल को भा गई।”
अच्छा, तो दिल आ गया है इस पर?” विपुल ने मस्ती में पूछा।
“तो क्या ख्याल है, शादी करोगे या बाकी सब की तरह इसे भी...”
“अरे नहीं यार, शादी तो मैं रितु से ही करूँगा। यह सब तो दिल बहलाने के लिए है। बस एक बार यह मेरे जाल में फँस जाए, तो मज़ा आ जाएगा।” विक्रम ने फ्लर्टी वे में कहा।
“पर ये इतना आसान नहीं होगा। यह उन लड़कियों की तरह नहीं है, जो दौलत के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएँ।”
“अगर यह आसान नहीं है, तो नामुमकिन भी नहीं है। विक्रम, अगर एक बार कुछ करने की ठान ले, तो खुद भगवान भी उसे नहीं रोक पाते हैं। अब तू देखता जा, मैं इसे कैसे पटाता हूँ।”
इतना कहकर विक्रम के होंठों पर एक जहरीली मुस्कान आ जाती है।
एक दिन रिधिमा कॉलेज से अपने घर आ रही थी कि तभी उसे कुछ गुंडों ने घेर लिया और बदतमीज़ी करने लगे।
“ओये होवे जानेमन, क्या लग रही हो हमे भी साथ ले चलो” कहते हुए उसने रिधिमा का दुपट्टा छीन लिया...
रिधिमा डर सी जाती है। तभी विक्रम वहां पर आता है और वो गुंडों की पिटाई कर देता है। मार खाने के बाद वो सब भाग जाते हैं।
तब विक्रम उसे कहता है,
“चलिए, मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ।”
“नहीं, मैं चली जाऊंगी। आपने मेरी हेल्प की, इसके लिए थैंक्स।”
“अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है, ये तो मेरा फ़र्ज़ था। आपके अलावा कोई और भी लड़की होती तो मैं यही करता।”
To be continued __
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