Three devil's dark desire Ch. 1

My three possessive husband's - Chapter 1

Posted by iskibutterfly iskibutterfly • Aug 28, 2026 10:45 PM

Three devil's dark desire

Episode 1 — “मां की वो एक कॉल”

मुंबई की चमचमाती रात...

आसमान में चांद अपनी पूरी रोशनी के साथ चमक रहा था। नीचे शहर की सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही लगी थी, ऊंची-ऊंची इमारतों की खिड़कियों से निकलती रोशनी पूरे शहर को जगमगा रही थी।

लेकिन उस शोर से बिल्कुल अलग, एक आलीशान अपार्टमेंट की बालकनी में एक लड़की बिल्कुल खामोश खड़ी थी।

उसका नाम था एशाना।

लंबे खुले बाल हवा के साथ धीरे-धीरे उड़ रहे थे। चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी और उसकी आंखें आसमान में चमकते चांद पर टिकी थीं।उसकी उम्र 20साल होगी। उसकी हाइट 5,5 की आसपास होगी उसकी खूबसूरती बेमिसाल , उसकी नाजुक से चेरी जैसे लिप्स , उसकी हिरणी जैसे आंखे, उसका परफेक्ट फिगर किसी को अपनी तरफ सम्मोहित कर लेती थी ।

हाथ में कॉफी का मग लिए वह धीरे से बोली—

“पता नहीं क्यों... आज ये चांद कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रहा है।”

तभी उसके फोन की घंटी बज उठी।

एशाना ने स्क्रीन की तरफ देखा।

MOM CALLING...

उसके चेहरे की मुस्कान तुरंत गायब हो गई।

“इतनी रात को मां का फोन?”

उसने जल्दी से कॉल रिसीव किया।

“हैलो मां?”

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक सिर्फ सिसकियों की आवाज सुनाई दी।

एशाना के चेहरे पर चिंता आ गई।

“मां? क्या हुआ? आप रो क्यों रही हो?”

मां ने खुद को संभालते हुए कहा—

“बेटा... तू कहां है?”

“मैं घर पर हूं मां। लेकिन हुआ क्या है?”

कुछ पल की चुप्पी के बाद मां की कांपती हुई आवाज आई—

“तेरी दादी की तबीयत बहुत खराब है।”

एशाना के हाथ से कॉफी का मग लगभग छूट गया।

“क्या?”

“डॉक्टर ने कहा है कि उनकी हालत बहुत नाजुक है।”

एशाना कुछ बोल नहीं पाई।

मां रोते हुए बोली—

“वो बार-बार सिर्फ तेरा नाम ले रही हैं... कह रही हैं कि एक बार अपनी एशाना को देखना है।”

एशाना की आंखें नम हो गईं।

“मां... आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”

“मैं डर गई थी बेटा।”

“किस बात से?”

मां ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

कुछ सेकंड तक दूसरी तरफ सिर्फ उनकी सिसकियां सुनाई देती रहीं।

फिर उन्होंने कहा—

“तू बस कल सुबह पहली फ्लाइट से आ जा।”

एशाना ने बिना सोचे कहा—

“मैं अभी आती हूं मां।”

“नहीं बेटा, रात हो गई है। सुबह आना।”

“लेकिन दादी...”

उसकी आवाज भर्रा गई।

“अगर उन्हें मेरी जरूरत है तो मैं सुबह तक इंतजार कैसे कर सकती हूं?”

मां ने धीरे से कहा—

“एशाना... प्लीज। सुबह आ जाना।”

कॉल कट गई।

एशाना कुछ देर तक फोन को देखती रही।

उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—

दादी उसे देखना चाहती थीं।

दूसरी तरफ मुंबई से हजारों किलोमीटर दूर एक पहाड़ी गांव में...

एक पुराने लेकिन खूबसूरत घर के कमरे में एशाना की मां खिड़की के पास बैठी थीं।

उनकी आंखों में डर था।

उन्होंने फोन धीरे से टेबल पर रखा और खुद से कहा—

“हे भगवान... मैंने उसे बुला तो लिया... लेकिन क्या मैं अपनी बेटी को उस गांव में सुरक्षित रख पाऊंगी?”

उनकी नजर कमरे के बाहर पड़ी।

बाहर पहाड़ों पर रात उतर चुकी थी।

घर के बाकी लोग दादी के कमरे के आसपास परेशान खड़े थे।

दादी बार-बार एक ही बात कह रही थीं—

“मेरी एशाना को बुलाओ... मुझे अपनी बच्ची को देखना है।”

मां ने आंखें बंद कर लीं।

उन्हें पता था कि एशाना ने इस गांव को बहुत कम देखा था।

शहर में पली-बढ़ी उनकी बेटी को गांव की जिंदगी, वहां के रीति-रिवाज और लोगों के बारे में कुछ खास मालूम नहीं था।

फिर भी आज पहली बार उन्हें लगा कि शायद उन्होंने उसे बहुत दूर रखकर गलती की है।

लेकिन उनकी चिंता सिर्फ गांव को लेकर नहीं थी।

वह धीरे से बुदबुदाईं—

“बस मेरी बेटी वहां जाकर किसी मुसीबत में न फंस जाए...”

तभी कमरे के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।

मां ने तुरंत अपने आंसू पोंछे।

“कौन?”

बाहर से आवाज आई—

“भाभी... दादी आपको बुला रही हैं।”

मां उठकर कमरे से बाहर चली गईं।

उधर मुंबई में एशाना अपने कमरे में तेजी से सामान पैक कर रही थी।

कपड़े बैग में जाते जा रहे थे।

पासपोर्ट, फोन चार्जर, कुछ जरूरी सामान...

सब कुछ बैग में डालते हुए वह अचानक रुक गई।

उसे बचपन की एक धुंधली याद आई।

दादी उसे अपनी गोद में बैठाकर पहाड़ों की कहानियां सुनाया करती थीं।

एशाना के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

“दादी... मैं आ रही हूं।”

लेकिन अगले ही पल उसे मां की रोती हुई आवाज याद आ गई।

उसका चेहरा फिर गंभीर हो गया।

“आखिर मां इतनी परेशान क्यों थीं?”

उसने फोन उठाया और मां को दोबारा कॉल किया।

फोन नहीं उठा।

एशाना ने फिर कॉल किया।

इस बार भी कोई जवाब नहीं।

“मां फोन क्यों नहीं उठा रही?”

उसके मन में एक अजीब-सी बेचैनी होने लगी।

तभी फोन पर एक मैसेज आया।

Mom:

“सुबह जल्दी निकलना। गांव पहुंचते ही मुझे कॉल करना।”

एशाना ने मैसेज पढ़ा।

फिर उसने फोन बंद कर दिया।

उसे क्या पता था कि उस एक सफर के बाद उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहने वाली थी।

क्योंकि जिस पहाड़ी गांव में वह सिर्फ अपनी बीमार दादी से मिलने जा रही थी...

वहीं उसका सामना होने वाला था तीन बिल्कुल अलग दुनिया के तीन भाइयों से।

एक था—

दानिश।

शहर का बड़ा businessman, जिसके नाम से बड़े-बड़े लोग भी सावधान रहते थे।

दूसरा—

शिवांश।

राजनीति की दुनिया में अपनी पहचान बना चुका, बेहद रूखा और गुस्सैल इंसान।

और तीसरा—

देवांश।

कॉलेज में पढ़ने वाला, खुशमिजाज और अपनी बातों से हर किसी को परेशान करने वाला लड़का।

एशाना को अभी इन तीनों के बारे में कुछ नहीं पता था।

उसे तो बस इतना मालूम था कि वह अपनी दादी से मिलने जा रही है।

लेकिन पहाड़ों की उस यात्रा के साथ...

उसकी जिंदगी में एक ऐसा रिश्ता आने वाला था जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

और सबसे बड़ा सवाल—

क्या एशाना उस रिश्ते को सिर्फ एक पुरानी परंपरा समझकर ठुकरा देगी... या उसके दिल को इन तीनों में कुछ ऐसा मिलेगा जिसे वह खुद भी समझ नहीं पाएगी?

जारी रहेगा...

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