Fiction Story Ch. 3

वह मृत लोगों की आखिरी दस सेकंड देख सकता था

Posted by Aman Aj • Aug 28, 2026 03:38 PM

ईशान अरोड़ा को मृत लोगों से डर नहीं लगता था। उसे जीवित लोगों के सामने बोलने में घबराहट होती थी, भीड़ में सांस तेज हो जाती थी और किसी अनजान व्यक्ति से आंख मिलाते समय वह शब्द भूल जाता था, लेकिन शवगृह की ठंडी शांति में उसे कभी असुविधा नहीं हुई। वहां कोई उससे उत्तर की उम्मीद नहीं करता था। बाइस वर्ष की उम्र में वह मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विभाग में प्रशिक्षु था और उसकी ड्यूटी अक्सर उन शरीरों के पास लगती थी जिनकी कहानी पुलिस रिपोर्ट की दो पंक्तियों में समाप्त कर दी जाती थी।

उस शाम भी वह एक सड़क दुर्घटना में मरे युवक के हाथों से मिट्टी साफ कर रहा था। बाहर तेज वर्षा हो रही थी और अस्पताल की बत्तियां बार-बार झपक रही थीं। ईशान की वरिष्ठ डॉक्टर शालिनी ने उसे जल्दी काम खत्म करने को कहा। शहर में दंगे जैसी स्थिति थी। पिछले एक घंटे में लोगों के फोन पर अजीब काली स्क्रीन दिखाई दे रही थी, लेकिन नेटवर्क बंद होने के कारण किसी को सही जानकारी नहीं मिल रही थी।

ईशान ने मृत युवक की मुट्ठी खोली। उसकी हथेली में कांच का छोटा नीला टुकड़ा दबा था। उसे छूते ही शवगृह की सारी रोशनी बुझ गई।

ईशान ने खुद को अचानक किसी दूसरी सड़क पर खड़ा पाया। बारिश उसके चेहरे पर पड़ रही थी। सामने तेज गति से आती बस थी। उसने हटने की कोशिश की, मगर शरीर उसकी बात नहीं सुन रहा था। वह अपनी आंखों से नहीं, मृत युवक की आंखों से देख रहा था। बस से पहले उसकी नजर सड़क किनारे खड़ी एक छोटी बच्ची पर गई। युवक ने उसे धक्का देकर बचाया था और स्वयं बस के नीचे आ गया था। टक्कर हुई। दर्द की एक सफेद चमक उठी और दृश्य समाप्त हो गया।

ईशान वापस शवगृह में गिर पड़ा। वास्तविक दुनिया में केवल एक पल बीता था, लेकिन उसने किसी मनुष्य की मृत्यु से पहले के पूरे दस सेकंड महसूस किए थे। उसके सामने धुएं जैसी स्क्रीन बनी।

विश्व-संग्रह आरंभ। प्रत्येक जीवित मनुष्य को एक व्यक्तिगत क्षमता दी जा रही है। आपकी क्षमता—मृत्यु-अभिलेख, एफ श्रेणी। मृत शरीर को छूकर उसकी अंतिम दस सेकंड की स्मृति देख सकते हैं। यदि मृत्यु के समय उसने कोई अधूरा प्रयास किया हो तो आप उस प्रयास से एक क्रिया सीख सकते हैं। चेतावनी: अभिलेख केवल जानकारी नहीं, अनुभव भी संचित करते हैं।

ईशान ने स्क्रीन को भ्रम समझा। तभी अस्पताल के बाहर घंटी बजी। वह मंदिर या स्कूल की घंटी नहीं थी। उसकी आवाज इतनी भारी थी कि दीवारों की धूल नीचे गिरने लगी। पहली घंटी के बाद बारिश काली हो गई। दूसरी घंटी पर शहर की सारी खिड़कियों में लोगों की परछाइयां एक क्षण के लिए उल्टी दिखाई दीं। तीसरी घंटी के साथ मृत युवक ने आंखें खोल दीं।

वह जीवित नहीं हुआ था। उसके शरीर को किसी काली डोरी ने उठा दिया था। गर्दन टूटी होने के बावजूद वह ईशान की ओर दौड़ा। ईशान पीछे हटते हुए मेज से टकराया। उसी समय स्क्रीन पर मृत युवक का अधूरा प्रयास दिखाई दिया—बच्ची को धक्का देकर बस की दिशा से हटाना। उपलब्ध क्रिया: पार्श्व छलांग।

ईशान ने सीखने का विकल्प चुना। उसके पैरों में अचानक वह संतुलन आ गया जो उसने कभी अभ्यास नहीं किया था। उसने दाईं ओर तेज छलांग लगाई। मृत शरीर दीवार से टकराया। डॉक्टर शालिनी ने धातु की ट्रे उसके सिर पर मारी, पर वह नहीं रुका। ईशान ने शवगृह का भारी दरवाजा खोला और दोनों बाहर भागे।

अस्पताल अराजकता में बदल चुका था। जिन मरीजों की कुछ मिनट पहले मृत्यु हुई थी, वे काली डोरियों से उठ रहे थे। जीवित लोगों के सामने अलग-अलग क्षमताओं की स्क्रीन थी। किसी नर्स के हाथ से रोशनी निकल रही थी, कोई सुरक्षा कर्मचारी अपनी त्वचा पत्थर जैसी बना चुका था और एक वार्ड बॉय हवा में चीजें धकेल रहा था। फिर भी कोई नहीं समझ रहा था कि हमला किस दिशा से आ रहा है।

ईशान की छोटी बहन रिया अस्पताल की दूसरी इमारत में भर्ती थी। उसके हृदय का ऑपरेशन दो दिन बाद होना था। बिजली बंद होने पर उसके कमरे के उपकरण अधिक देर नहीं चलते। ईशान और शालिनी सीढ़ियों की ओर भागे। तीसरी मंजिल पर एक सुरक्षा कर्मचारी मृत पड़ा था। उसके सीने में काली डोरी का छेद था। ईशान उसे पार कर गया, मगर स्क्रीन ने संकेत दिया कि नया अभिलेख उपलब्ध है।

वह रुकना नहीं चाहता था। किसी की मृत्यु महसूस करना शक्ति नहीं, यातना थी। पीछे से उठते कदमों की आवाज आई तो उसे चुनाव करना पड़ा। उसने शव का हाथ छुआ।

दस सेकंड के लिए वह सुरक्षा कर्मचारी बन गया। कर्मचारी ने काली डोरी से बचने के लिए ढाल उठाई थी, मगर डोरी ऊपर से घूमकर उसकी गर्दन में घुसी। मृत्यु से पहले उसने हमले का कोण पहचान लिया था, केवल शरीर समय पर मुड़ नहीं सका।

उपलब्ध क्रिया: ऊपरी दिशा का पूर्वानुमान।

ईशान ने उसे स्वीकार किया। उसकी आंखों के किनारे हल्का काला निशान बना। अगले ही पल छत से डोरी आई। उसने शालिनी को नीचे खींच लिया। डोरी उनके ऊपर से निकलकर दीवार में धंस गई। अंधेरे गलियारे के अंत में एक लंबी आकृति खड़ी थी। उसके शरीर पर अस्पताल के कई मृत लोगों के पहचान-पत्र लटक रहे थे और उंगलियों से काली डोरियां निकल रही थीं।

ईशान ने उसे संग्रहकर्ता नाम दिया।

दोनों भागकर रिया के कमरे तक पहुंचे। बैकअप मशीन चल रही थी, पर बैटरी चालीस मिनट की थी। रिया कमजोर थी, फिर भी होश में थी। उसने भाई को देखते ही कहा, “तुम फिर शवगृह की गंध लेकर आए हो।” ईशान हंसना चाहता था, लेकिन नीचे से आती चीखों ने शब्द रोक दिए।

डॉक्टर शालिनी ने पोर्टेबल दवा और बैटरी जुटाई। उन्हें अस्पताल छोड़ना था। बाहर सेना का अस्थायी केंद्र बनाया जा रहा था, ऐसी घोषणा लाउडस्पीकर पर हुई। वहां पहुंचने के लिए सात मंजिल नीचे जाना पड़ता। लिफ्ट बंद थी और सीढ़ियों में मृत मरीज घूम रहे थे।

रिया तेज नहीं चल सकती थी। ईशान ने उसे व्हीलचेयर पर बैठाया। रास्ते में उन्हें चार लोग मिले—नर्स माया, इंजीनियर समर, पुलिस उपनिरीक्षक अर्जुन और पंद्रह वर्षीय संदेशवाहक लड़का फैजान। अर्जुन को बी श्रेणी की प्रहार शक्ति मिली थी। उसकी मुट्ठी से निकली हवा मृत शरीरों को पीछे फेंक सकती थी। वह स्वाभाविक नेता बन गया और उसने ईशान की एफ श्रेणी क्षमता सुनकर कहा कि शवों को छूने में समय बर्बाद नहीं किया जाएगा।

छठी मंजिल पर रास्ता बंद मिला। दो मृत नर्सें दरवाजे के पास पड़ी थीं और उनके आगे दीवार काली डोरियों से भर चुकी थी। अर्जुन ने दूसरा रास्ता चुना, मगर ईशान ने पहली नर्स के हाथ की स्थिति देखी। उसकी उंगलियां अग्नि चेतावनी पैनल की ओर थीं। उसने अभिलेख खोला।

नर्स मृत्यु से पहले पैनल तक पहुंची थी। उसने स्प्रिंकलर चलाने की कोशिश की, पर बिजली नहीं थी। गिरते समय उसने लाल आपातकालीन पाइप का वाल्व देखा था। उपलब्ध क्रिया कोई युद्ध कौशल नहीं थी—दबाव वाल्व संचालन। अर्जुन ने इसे बेकार कहा। समर ने समझा कि पाइप में हाथ से दबाव छोड़ा जाए तो पानी काली डोरियों को कमजोर कर सकता है।

उन्होंने वाल्व खोला। तेज पानी निकला और डोरियां सिकुड़ गईं। समूह ने रास्ता पार किया। ईशान ने पहली बार समझा कि अधूरा प्रयास हमेशा तलवार चलाना नहीं होता। मरने वाला मनुष्य अंतिम क्षण में जो समाधान देखता था, उसकी क्षमता उसे वह समाधान पूरा करने का अवसर देती थी।

नीचे जाते हुए वे अस्पताल की रसोई में फंस गए। संग्रहकर्ता वेंटिलेशन शाफ्ट से उनके पीछे आ रहा था। उसकी डोरियां मृत शरीरों को कठपुतली की तरह चला रही थीं। अर्जुन हर प्रहार में ऊर्जा खो रहा था। शालिनी ने चेतावनी दी कि उसकी नाक से खून निकल रहा है, लेकिन वह रुकने को तैयार नहीं था।

रसोई के कोने में शेफ का शव था। ईशान ने तीसरा अभिलेख खोला। शेफ ने मरने से पहले गैस बंद करने के लिए रेंगने की कोशिश की थी। उसे पता था कि मुख्य पाइप में रिसाव है और चिंगारी पूरे कमरे को उड़ा सकती है। उपलब्ध क्रिया: गर्मी की दिशा पहचानना।

ईशान ने गैस को पूरी तरह बंद करने के बजाय एक ओवन में मोड़ा। समर ने टाइमर लगाया। समूह पिछली खिड़की से सेवा सीढ़ी में उतरा। संग्रहकर्ता रसोई में पहुंचा तो ओवन फटा। आग ने उसे नहीं मारा, लेकिन उसकी कई डोरियां जल गईं। पहली बार उस जीव ने दर्द जैसी आवाज निकाली।

स्क्रीन पर सूचना आई—तीन अभिलेख संचित। स्मृति-भार बारह प्रतिशत।

ईशान को अचानक अपनी मां की आवाज याद नहीं आई। वह जानता था कि मां उसके बचपन में गुजर गई थीं। उसे उनका चेहरा याद था, रसोई में गुनगुनाना याद था, लेकिन आवाज की वास्तविक ध्वनि खाली हो चुकी थी। उसने घबराकर स्क्रीन पढ़ी। हर अभिलेख केवल मृत व्यक्ति की स्मृति जोड़ नहीं रहा था; दिमाग में जगह बनाने के लिए उसकी अपनी यादों के छोटे हिस्से मिटा रहा था।

उसने यह बात किसी को नहीं बताई। रिया को बचाने से पहले वह अपनी क्षमता छोड़ नहीं सकता था।

अस्पताल से निकलते समय उन्होंने देखा कि सेना का केंद्र नष्ट हो चुका था। सड़क पर काले शीशे जैसे स्तंभ उगे थे। हर स्तंभ के भीतर किसी मृत व्यक्ति के अंतिम दस सेकंड बार-बार चल रहे थे। शहर के ऊपर विशाल स्क्रीन दिखाई दी—पहले चरण का उद्देश्य: दस लाख मृत्यु-अभिलेख एकत्र करना। शेष समय अठारह घंटे। लक्ष्य पूरा होने पर शहर स्थायी संग्रह में बदल जाएगा।

जीव लोगों को केवल मार नहीं रहे थे। वे उनकी आखिरी स्मृतियां जमा कर रहे थे। ईशान की क्षमता उसी प्रणाली का छोटा मानवीय रूप थी।

समूह ने पास के भूमिगत पार्किंग क्षेत्र में शरण ली। वहां लगभग साठ लोग थे और उनका नेतृत्व वीर प्रताप नाम का पूर्व सैनिक कर रहा था। वीर को ए श्रेणी की क्षमता मिली थी—आदेश। उसकी आवाज सुनने वाला कमजोर इच्छाशक्ति का व्यक्ति कुछ सेकंड तक उसके निर्देश का विरोध नहीं कर सकता था। उसने भोजन, पहरे और शक्तियों का व्यवस्थित बंटवारा किया था। पहली नजर में वह सक्षम और अनुशासित लगा।

वीर ने रिया को चिकित्सा क्षेत्र में जगह दी, बदले में ईशान से उसकी क्षमता का प्रदर्शन मांगा। पार्किंग में तीन शव रखे थे। वीर चाहता था कि ईशान उनकी आखिरी स्मृतियां देखकर बताए कि बाहर के जीव कैसे हमला करते हैं। ईशान ने एक शव छुआ।

मृत व्यक्ति पार्किंग तक पहुंचने वाला स्काउट था। अंतिम दस सेकंड में उसने सड़क के मोड़ पर सुरक्षित रास्ता देखा था, मगर पीछे छूटे दोस्त को बचाने लौटा और डोरी से मारा गया। उपलब्ध क्रिया: बिना आवाज दौड़ना। ईशान ने जानकारी दे दी, लेकिन क्रिया स्वीकार नहीं की। उसकी स्क्रीन पर पहली बार अस्वीकार का विकल्प था। स्मृति-भार नहीं बढ़ा।

वीर ने उसकी आंखों का काला निशान देख लिया। उसने अनुमान लगाया कि क्षमता की कोई कीमत है। “कीमत जितनी बड़ी हो, शक्ति उतनी उपयोगी होती है,” उसने कहा। “तुम्हें भावुक होने की जरूरत नहीं। मृत लोग अब संसाधन हैं।”

ईशान को यह वाक्य संग्रहकर्ता की पहचान-पत्रों वाली देह जैसा लगा। उसने कहा, “वे संसाधन बनने से पहले लोग थे।”

वीर मुस्कराया। “इसीलिए तुम एफ श्रेणी हो।”

रात में पार्किंग पर हमला हुआ। काली डोरियां हवा के रास्ते भीतर आईं और पहरेदारों को उठा ले गईं। वीर ने आदेश क्षमता से लोगों को मोर्चे पर खड़ा रखा। डर से भागना असंभव था। कई लोग उसके आदेश के कारण मर गए, पर बाकी बच गए। हर नई लाश को वह ईशान के सामने रखता और अभिलेख खोलने को कहता।

ईशान ने दो स्मृतियां स्वीकार कीं। एक महिला ने मरने से पहले डोरी की छाया देखकर उसका समय पहचाना था। एक युवक ने कार की बैटरी से विद्युत जाल बनाने की कोशिश की थी। दोनों प्रयास अधूरे थे। ईशान ने उनके अंतिम निर्णय अपने शरीर में महसूस किए। स्मृति-भार इकतीस प्रतिशत हुआ। अब उसे अपने पिता के अंतिम संस्कार का स्थान याद नहीं था।

विद्युत जाल काम कर गया। डोरियां कुछ समय के लिए पीछे हट गईं। लोग वीर की प्रशंसा करने लगे, जबकि योजना मरने वालों की थी। वीर ने श्रेय स्वीकार किया। ईशान ने विरोध नहीं किया; रिया की सांस अस्थिर हो रही थी। डॉक्टर शालिनी ने बताया कि पोर्टेबल बैटरी छह घंटे में खत्म होगी। शहर के केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में स्वतंत्र बिजली संयंत्र था। उन्हें वहां पहुंचना होगा।

वीर ने संस्थान जाने से मना किया। केंद्रीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा स्तंभ थे। उसने रिया के लिए एक बैटरी देने की पेशकश की, मगर शर्त रखी कि ईशान पार्किंग में रहेगा और हर मृत स्काउट की स्मृति पढ़ेगा। बैटरी केवल दो घंटे चलती। वह ईशान को धीरे-धीरे खाली करके अपनी सूचना मशीन बनाना चाहता था।

ईशान ने बाहर से डरने वाले अपने पुराने स्वभाव को याद किया। वह हमेशा ऊंची आवाज वाले लोगों को निर्णय करने देता था। इस बार उसकी बहन की जिंदगी उस चुप्पी पर निर्भर थी। उसने वीर की आंखों में देखकर कहा, “हम जा रहे हैं।”

वीर ने आदेश क्षमता इस्तेमाल की। “घुटनों पर बैठो।”

ईशान का शरीर झुकने लगा। उसी क्षण उसके भीतर सुरक्षा कर्मचारी की अंतिम क्रिया जागी—ऊपर से आने वाले हमले का पूर्वानुमान। आदेश आवाज से आया था, पर दिमाग ने उसे हमला माना। ईशान ने कानों में उंगलियां डालीं और पार्श्व छलांग से वीर की सीमा से बाहर हो गया। अर्जुन ने हवा का प्रहार किया। समर ने पार्किंग की बत्तियां बंद कर दीं। माया, शालिनी और फैजान रिया की व्हीलचेयर लेकर निकास की ओर दौड़े।

कई शरणार्थी उनके साथ आना चाहते थे। वीर ने उन्हें रुकने का आदेश दिया। कुछ लोग मजबूरी में जम गए। ईशान लौटना चाहता था, पर अर्जुन ने कहा कि अभी लड़ेंगे तो सभी पकड़े जाएंगे। वे सेवा सुरंग से बाहर निकले। पीछे वीर ने चेतावनी दी, “शहर तुम्हें मार देगा। फिर तुम्हारी आखिरी दस सेकंड भी मेरी होंगी।”

केंद्रीय संस्थान तक पहुंचने के लिए उन्हें पुराने बाजार से गुजरना था। वहां समय सामान्य नहीं चल रहा था। किसी दुकान में घड़ी तेज घूमती, अगले मोड़ पर बारिश की बूंद हवा में स्थिर रहती। काले स्तंभ स्मृतियों को खींचते हुए आसपास के समय को तोड़ रहे थे। कई जीव मनुष्य की आवाज में मदद पुकारते, क्योंकि उनके भीतर मृत लोगों के अंतिम शब्द फंसे थे।

फैजान ने दूर से अपनी मां की आवाज सुनी और गली में भागा। ईशान ने उसे पकड़ा। आवाज एक ऐसे जीव से आ रही थी जिसके चेहरे पर दर्जनों मुंह खुलते-बंद होते थे। अर्जुन ने प्रहार किया, मगर हर मुंह से अलग दिशा में काली लहर निकली। समूह बिखर गया। समर की छाती में कांच का टुकड़ा घुसा। शालिनी उसे बचाने दौड़ी, पर उसने समझ लिया कि समय नहीं है। उसने ईशान का हाथ पकड़कर स्वयं अपनी स्मृति खोलने को कहा।

ईशान ने मना किया। समर अभी जीवित था।

“दस सेकंड बाद नहीं रहूंगा,” समर ने कहा। “मेरी कोशिश अधूरी मत रहने देना।”

उसने टूटे विद्युत बोर्ड की ओर रेंगकर तार जोड़ने की कोशिश की। राक्षस की लहर आई और उसकी सांस रुक गई। ईशान ने कांपते हाथ से उसका अभिलेख खोला। अंतिम दस सेकंड में समर ने बाजार की पुरानी भूमिगत केबल देखी थी। अगर तीन तार सही क्रम में जुड़ते तो पूरे इलाके का विद्युत भार राक्षस पर छोड़ा जा सकता था। उसकी उंगलियां दूसरे तार तक पहुंचीं, तीसरे से पहले मृत्यु आ गई।

उपलब्ध क्रिया: विद्युत परिपथ की त्वरित रचना।

ईशान ने स्वीकार किया। स्मृति-भार इकतालीस प्रतिशत। उसके दिमाग से स्कूल के सबसे अच्छे दोस्त का नाम मिट गया। फिर उसने समर के हाथों की स्मृति से तार जोड़े। अर्जुन ने राक्षस को गीली सड़क पर रोका। माया ने पानी का पाइप फोड़ा। बिजली छोड़ी गई तो दर्जनों मुंह एक साथ चीखे और जीव राख बन गया।

फैजान अपनी मां की आवाज के पीछे जाने के लिए रोता रहा। ईशान ने उसे बताया कि वह आवाज असली नहीं थी। कहते समय उसे डर लगा कि एक दिन उसके भीतर संचित आवाजें भी असली और नकली का अंतर मिटा देंगी।

संस्थान के मुख्य द्वार पर सैकड़ों शव थे। किसी ने उन्हें व्यवस्थित पंक्तियों में रखा था। बीच में संग्रहकर्ता खड़ा था, अब पहले से बड़ा। उसके शरीर पर अस्पताल ही नहीं, पूरे शहर के पहचान-पत्र लटक रहे थे। हर डोरी एक शव से जुड़ी थी। उसने ईशान की ओर चेहरा घुमाया और उसकी मां की भूली हुई आवाज में कहा, “तुम भी संग्रह हो।”

ईशान जम गया। वही आवाज जिसे उसकी क्षमता ने मिटा दिया था, अब दुश्मन के पास थी। संग्रहकर्ता केवल मृत लोगों की स्मृतियां नहीं रखता था। वह ईशान द्वारा छोड़ी गई निजी यादें भी खींच रहा था। हर अभिलेख के बदले मिटा हिस्सा उसी विशाल संग्रह में पहुंचता था।

रिया ने कमजोर आवाज में भाई को पुकारा। संग्रहकर्ता ने तुरंत उसकी ओर डोरी भेजी। ईशान ने ऊपरी दिशा का पूर्वानुमान और पार्श्व छलांग एक साथ इस्तेमाल की। उसने व्हीलचेयर हटाई, मगर डोरी उसकी पीठ चीर गई। अर्जुन और माया ने उसे भीतर खींचा। संस्थान का मोटा दरवाजा बंद हुआ।

अंदर कुछ वैज्ञानिक जीवित थे। उनकी प्रमुख डॉक्टर अनन्या घोष ने बताया कि काले स्तंभ पृथ्वी से मृत्यु के अंतिम क्षण एकत्र कर रहे हैं। दस लाख अभिलेख पूरे होने पर शहर समय से काट दिया जाएगा और हर मृत्यु अनंत बार दोहराई जाएगी। केंद्रीय स्तंभ संस्थान के नीचे था। उसे नष्ट करने के लिए उसके भीतर संग्रहित दस लाख अंतिम प्रयासों में से एक पूर्ण समाधान खोजना पड़ता। मशीन गणना नहीं कर पा रही थी, क्योंकि स्मृतियां भावनाओं और अधूरे निर्णयों से बनी थीं।

ईशान की क्षमता उन स्मृतियों को समझ सकती थी। अनन्या ने कहा कि वह केंद्रीय स्तंभ से जुड़कर पूरे संग्रह की अंतिम दस सेकंड देख सकता है। शायद किसी मृत वैज्ञानिक ने उसे बंद करने का तरीका खोजा हो। लेकिन दस लाख स्मृतियों का भार उसका व्यक्तित्व तुरंत मिटा देता।

रिया ने कहा कि कोई दूसरा रास्ता खोजेंगे। ईशान ने पहली बार उससे अपनी मिटती यादों की बात स्वीकार की। उसने मां की आवाज, पिता के अंतिम संस्कार और अपने दोस्त का नाम खो दिया था। रिया की आंखों में डर आया। उसने भाई से वादा मांगा कि वह उसे नहीं भूलेगा।

ईशान वादा नहीं कर सका। उसने केवल उसका हाथ पकड़ा।

संस्थान की बिजली अभी चल रही थी, लेकिन केंद्रीय स्तंभ हर मिनट उसकी ऊर्जा खींच रहा था। डॉक्टर अनन्या ने रिया को जीवन रक्षक इकाई से जोड़ा। जनरेटर अधिकतम तीन घंटे चल सकता था। केंद्रीय स्तंभ बंद किए बिना न रिया बचती, न शहर। अर्जुन ने कहा कि वे ईशान को दस लाख स्मृतियों में नहीं फेंक सकते। वह वैज्ञानिकों से दूसरा रास्ता खोजने को कहता, मगर जीवित वैज्ञानिक पहले ही महीनों का काम कुछ घंटों में करने की कोशिश कर रहे थे।

तभी मुख्य द्वार पर धमाका हुआ। वीर अपने सशस्त्र लोगों के साथ संस्थान पहुंच गया था। उसके पीछे पार्किंग के कई शरणार्थी मजबूरी में चल रहे थे। वीर ने रास्ते में मृत सैनिकों के हथियार जुटा लिए थे। उसने घोषणा की कि संस्थान अब उसके आदेश में है। डॉक्टर अनन्या ने विरोध किया तो उसने केवल एक शब्द कहा—“चुप।” उसकी क्षमता ने कमरे के लगभग सभी लोगों की आवाज रोक दी।

ईशान पर आदेश का असर पहले से कम था। उसके भीतर जमा पांच मृत लोगों की इच्छाएं किसी एक आवाज को पूर्ण नियंत्रण नहीं लेने देती थीं। वीर ने यह देखकर क्षमता की सीमा बढ़ाई। “अपनी शक्ति मुझे सौंप दो।”

स्क्रीन ने हस्तांतरण असंभव बताया। वीर ने योजना बदल दी। वह ईशान को केंद्रीय स्तंभ से जोड़कर जो जानकारी निकलेगी, उसे अपने आदेश से नियंत्रित करना चाहता था। उसके अनुसार शहर बचे या न बचे, संग्रह की लाखों युद्ध-कुशलताएं उसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली मनुष्य बना सकती थीं।

रिया ने मशीन से जुड़े हुए कहा, “आपको हर चीज अपनी क्यों चाहिए?”

वीर ने उसकी ओर देखा। “क्योंकि जो चीज मेरी नहीं होती, वह मेरे खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है।”

उसने अपने लोगों को रिया की मशीन बंद करने का आदेश दिया। ईशान आगे बढ़ा, मगर अर्जुन ने पहले प्रहार कर दिया। हवा की लहर ने दो बंदूकधारी गिरा दिए। माया ने धुएं का इंजेक्शन वेंट में छोड़ा। फैजान संस्थान की आपातकालीन बत्तियां बंद करके अंधेरे गलियारों में गायब हो गया। लड़ाई शुरू हुई।

वीर की आदेश क्षमता अंधेरे में और खतरनाक थी। वह किसी का नाम लेकर रुकने को कहता और व्यक्ति का शरीर जम जाता। उसने अर्जुन को घुटनों पर बैठाया, फिर उसके ही हाथों डॉक्टर अनन्या को मारने का आदेश दिया। अर्जुन अपनी बांह रोकने के लिए संघर्ष करता रहा। ईशान ने मृत सुरक्षा कर्मचारी का पूर्वानुमान इस्तेमाल किया और आवाज आने से पहले धातु की ट्रे वीर के मुंह पर फेंकी। आदेश टूट गया।

संग्रहकर्ता ने उसी समय बाहरी दीवार तोड़ दी। वह वीर या ईशान में अंतर नहीं कर रहा था। उसकी डोरियां सबसे अधिक स्मृतियों वाले जीवित मस्तिष्क की ओर बढ़ीं। वीर के आदेशों से सैकड़ों लोगों के अंतिम भय जुड़े थे; संग्रहकर्ता ने पहले उसे लक्ष्य बनाया। वीर ने अपने ही लोगों को ढाल बनने का आदेश दिया। तीन व्यक्ति इच्छा के विरुद्ध उसके सामने खड़े हुए और डोरियों से कट गए।

ईशान ने उनमें से एक, बुजुर्ग शिक्षक, को मरते देखा। शिक्षक की आंखें वीर पर नहीं, पास पड़े अग्निशामक सिलेंडर पर थीं। अंतिम क्षण में उसने सिलेंडर का पिन खींचा था ताकि धुआं वीर की आवाज दबा दे, लेकिन हाथ पूरा नहीं घूम पाया। ईशान ने अभिलेख खोला और क्रिया स्वीकार की। स्मृति-भार उनचास प्रतिशत हुआ। उसके बचपन के घर का रंग मिट गया।

उसने शिक्षक का प्रयास पूरा किया। सफेद धुआं कमरे में फैल गया। वीर खांसने लगा और आदेश अस्पष्ट हो गए। शरणार्थियों पर उसका नियंत्रण टूटा। जिन लोगों को उसने आगे धकेला था, वे पीछे हटने के बजाय उसके हथियार छीनने लगे। संग्रहकर्ता ने धुएं के बीच काली डोरी वीर की छाती में घुसा दी।

वीर जमीन पर गिरा। ईशान के सामने नया अभिलेख चमका। वह उसे छूना नहीं चाहता था, मगर वीर ने मरने से पहले उसकी कलाई पकड़ ली। दस सेकंड खुल गए।

वीर की अंतिम स्मृति युद्धभूमि की नहीं थी। वह आठ वर्ष का बच्चा था और बाढ़ में अपने घर की छत पर फंसा था। उसके पिता मदद लेने गए और वापस नहीं आए। आसपास के लोग अपनी नाव में जगह बचाने के लिए उसके परिवार को छोड़ गए। उसी दिन उसने मान लिया था कि नियंत्रण के बिना सुरक्षा संभव नहीं। अंतिम क्षण में उसने संग्रहकर्ता को आदेश दिया था—मुझे छोड़कर ईशान को पकड़ो। आदेश असफल हुआ, लेकिन क्षमता का ढांचा ईशान के सामने था।

उपलब्ध क्रिया: एक अंतिम आदेश। उपयोग के बाद मृत्यु-अभिलेख की वर्तमान सभी क्रियाएं मिट जाएंगी।

ईशान ने उसे तुरंत स्वीकार नहीं किया। वीर ने बहुत लोगों को मारा था, मगर उसकी अंतिम स्मृति में एक डरा हुआ बच्चा था। ईशान ने पहली बार समझा कि मृतकों की आखिरी दस सेकंड व्यक्ति का पूरा न्याय नहीं थीं। वे केवल वह दरवाजा थीं जिससे मृत्यु उनके भीतर आई।

संग्रहकर्ता धुएं से बाहर आया। अर्जुन ने उसे रोका, पर काली डोरी ने उसकी दाईं बांह काट दी। माया ने रक्तस्राव रोकने की कोशिश की। संग्रहकर्ता की अगली डोरी रिया की मशीन की ओर गई। ईशान ने वीर की क्रिया स्वीकार कर ली। स्मृति-भार साठ प्रतिशत पर पहुंचा और उसके पिता का चेहरा धुंधला हो गया।

उसने संग्रहकर्ता को आदेश दिया, “दस सेकंड तक किसी जीवित मनुष्य को मत छूना।”

जीव का पूरा शरीर रुक गया। काली डोरियां हवा में जम गईं। ईशान के भीतर संचित पार्श्व छलांग, पूर्वानुमान, गर्मी पहचान, विद्युत परिपथ और बाकी क्रियाएं बुझने लगीं। उनके साथ मृत लोगों की आवाजें भी शांत हो गईं। दस सेकंड का रास्ता खुला था।

डॉक्टर अनन्या ने केंद्रीय कक्ष का दरवाजा खोला। ईशान, फैजान और शालिनी भीतर दौड़े। रिया ने मशीन से उठने की कोशिश की, मगर शरीर ने साथ नहीं दिया। उसने ईशान को अपना लाल धागे वाला कंगन दिया। “अगर सब भूल जाओ तो इसे देखकर याद करना कि कोई तुम्हारा इंतजार कर रहा है।”

केंद्रीय कक्ष पृथ्वी के भीतर जाता विशाल कुआं था। बीच में काला स्तंभ धड़क रहा था और उसकी सतह पर लाखों चेहरों की अंतिम झलकियां चमकती थीं। स्तंभ के सामने सात वैज्ञानिकों के शव पड़े थे। डॉक्टर अनन्या ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग तरीके से नियंत्रण प्रणाली बंद करने की कोशिश की और हर कोई अंतिम चरण में मारा गया। उनके प्रयासों को सही क्रम में जोड़ा जाए तो शायद मशीन रुक सकती थी।

ईशान ने पहला शव छुआ। वैज्ञानिक ने सुरक्षा कोड डाला था, लेकिन आखिरी अंक गलत था। दूसरी वैज्ञानिक ने ऊर्जा नली काटी, मगर दबाव की दिशा नहीं बदली। तीसरे ने शीतलन चालू किया, पर मुख्य वाल्व तक नहीं पहुंचा। चौथे ने स्तंभ की भाषा समझी, मगर संदेश भेजने से पहले डोरी ने हृदय रोक दिया। हर अभिलेख के साथ ईशान का स्मृति-भार बढ़ता गया।

सत्तर प्रतिशत पर उसे अपने कॉलेज का नाम भूल गया। पचहत्तर पर डॉक्टर शालिनी से पहली मुलाकात मिट गई। अस्सी पर उसे यह याद नहीं रहा कि वह मृत शरीरों के बीच काम क्यों करना चाहता था। फिर भी उसके हाथ वैज्ञानिकों के अधूरे काम याद रखते थे। उसने सही कोड डाला, ऊर्जा नली मोड़ी, दबाव बाहर छोड़ा और शीतलन वाल्व खोला।

पांचवें वैज्ञानिक की अंतिम स्मृति में स्तंभ का असली उद्देश्य दिखाई दिया। यह कोई प्राकृतिक प्रलय नहीं था। दूर की एक सभ्यता अपनी दुनिया में मृत्यु समाप्त करना चाहती थी। उन्होंने दूसरी दुनियाओं से मरने के अनुभव एकत्र किए ताकि मृत्यु के हर संभावित कारण का समाधान बनाया जा सके। एक शहर की पीड़ा उनके लिए शोध सामग्री थी। संग्रहकर्ता उस प्रणाली का स्थानीय प्रबंधक था।

छठे वैज्ञानिक ने वापसी संदेश बनाया था—पृथ्वी संग्रह की अनुमति नहीं देती। वह संदेश भेजने से एक कदम पहले मरा। ईशान ने उसकी उंगलियों का क्रम सीखा। स्मृति-भार नब्बे प्रतिशत हुआ। उसे मां का चेहरा भी याद नहीं रहा। केवल संग्रहकर्ता द्वारा चुराई गई आवाज की अनुभूति बची थी।

सातवां शव सबसे युवा वैज्ञानिक का था। उसका नाम नील था। मृत्यु के आखिरी दस सेकंड में उसने पाया कि स्तंभ बंद करने के लिए किसी जीवित स्मृति को केंद्रीय अभिलेख में स्वेच्छा से रखना होगा। जितनी प्रिय स्मृति होगी, उतनी मजबूत पहचान बनेगी और प्रणाली उसे शहर की सामूहिक अनुमति मानेगी। नील अपनी बेटी की स्मृति देने वाला था, मगर अंतिम बटन तक नहीं पहुंच सका।

ईशान के पास कौन-सी प्रिय स्मृति बची थी? मां की आवाज चली गई, पिता का चेहरा चला गया, घर और दोस्त मिट गए। उसने रिया का लाल कंगन देखा। उसे पता था कि वह किसी का इंतजार दर्शाता है, लेकिन वह लगभग भूल चुका था कि किसका। बाहर मशीन की कमजोर ध्वनि आ रही थी।

शालिनी ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “तुम्हारी बहन।”

शब्द ने धुंध में रास्ता बनाया। रिया की हंसी, बचपन में अस्पताल से डरते समय उसका हाथ पकड़ना, उसकी दवाओं का समय, ऑपरेशन के लिए बचाए रुपये—सारी स्मृतियां एक साथ सामने आईं। यही उसका सबसे सुरक्षित हिस्सा था। अगर वह इसे देता तो शहर बच सकता था, पर उसे रिया का अस्तित्व याद नहीं रहता।

ईशान अंतिम बटन की ओर बढ़ा। फैजान ने उसे रोका। लड़के की क्षमता अब तक किसी ने नहीं पूछी थी। उसकी स्क्रीन पर सी श्रेणी का शब्द लिखा था—संदेश। वह किसी व्यक्ति की एक बात दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता था, चाहे दूरी या दीवार कुछ भी हो। अभी तक वह इसे लोगों की आवाज भेजने के लिए इस्तेमाल करता रहा था।

फैजान ने पूछा, “अगर आपकी याद स्तंभ में जाएगी तो क्या मैं उसका संदेश वापस आपके पास भेज सकता हूं?”

डॉक्टर अनन्या ने निश्चित उत्तर नहीं दिया। क्षमता के नियम अक्सर शब्दों के अर्थ पर निर्भर थे। ईशान ने जोखिम स्वीकार किया। उसने रिया की पूरी स्मृति केंद्रीय अभिलेख को सौंप दी।

एक गर्म रोशनी उसके सीने से निकलकर स्तंभ में गई। उसे याद रहा कि वह किसी को बचाने आया था, फिर यह भी भूल गया कि कौन। लाल कंगन केवल अनजान वस्तु बन गया। स्क्रीन पर सामूहिक अस्वीकृति दर्ज हुई। काला स्तंभ कांपने लगा। शहर भर के कांच स्तंभों में दरारें पड़ीं।

उसी क्षण संग्रहकर्ता केंद्रीय कक्ष में पहुंच गया। वीर का आदेश समाप्त हो चुका था। जीव का आकार अब छत तक था और उसके शरीर पर हजारों पहचान-पत्र घूम रहे थे। उसने ईशान की दी हुई स्मृति पकड़ने के लिए डोरियां स्तंभ में भेजीं। अगर वह उसे निगल लेता तो अस्वीकृति रुक जाती।

ईशान के पास सीखी हुई क्रियाएं समाप्त हो चुकी थीं। वह फिर वही युवक था जो भीड़ में बोलते समय घबरा जाता था। मगर उसके सामने सात वैज्ञानिकों के प्रयासों से बनी मशीन चल रही थी। हर असफल व्यक्ति ने अगला कदम उसके लिए छोड़ा था। उसे नई शक्ति नहीं चाहिए थी; केवल अंतिम बटन दबाना था।

संग्रहकर्ता ने मां की आवाज में उसे रुकने को कहा। फिर पिता की, फिर रिया की। ईशान उन आवाजों को पहचान नहीं पा रहा था, इसलिए उनका दर्द उसे नियंत्रित नहीं कर सका। उसने डोरियों के बीच दौड़ लगाई। पूर्वानुमान मिट चुका था, फिर भी शरीर ने पुराने घावों से रास्ता सीखा था। एक डोरी कंधे में घुसी, दूसरी पैर में। वह गिरा और बटन से कुछ दूरी पर रुक गया।

फैजान ने अपनी क्षमता सक्रिय की। उसने स्तंभ में रखी रिया की स्मृति से केवल एक संदेश उठाया और ईशान तक भेजा—“भैया, तुम डरते हुए भी वापस आते हो। यही तुम्हारी सबसे बड़ी बात है।”

ईशान को चेहरा याद नहीं आया, पर शब्दों में भरोसा महसूस हुआ। उसने आगे हाथ बढ़ाकर बटन दबा दिया।

केंद्रीय स्तंभ ने शहर की सारी अंतिम दस सेकंड एक साथ छोड़ दीं। लाखों अधूरे प्रयास हवा में रोशनी बनकर चमके—कोई बच्चे को बचाने दौड़ा था, कोई दरवाजा बंद कर रहा था, कोई अनजान व्यक्ति का हाथ पकड़ रहा था, कोई मरते समय भी किसी और को रास्ता बता रहा था। वे केवल मृत्यु नहीं थीं। वे मनुष्यों द्वारा अंतिम क्षण तक किए गए चुनाव थे।

संग्रहकर्ता उन स्मृतियों के भार में टूटने लगा। उसके पहचान-पत्र एक-एक करके जमीन पर गिरे। हर काली डोरी सफेद होकर गायब हुई। आखिरी बार उसने ईशान की मां की आवाज में कहा, “संग्रह अधूरा है।”

ईशान ने उत्तर दिया, “इंसान हमेशा अधूरा रहेगा। इसीलिए अगला व्यक्ति कोशिश पूरी करता है।”

स्तंभ फट गया। काली बारिश साधारण पानी में बदल गई और शहर के ऊपर की विशाल स्क्रीन बुझ गई। जो मृत शरीर डोरियों से चल रहे थे, वे शांत होकर गिर पड़े। समय में फंसे बाजार और सड़कें सामान्य होने लगीं।

ईशान तीन दिन बाद संस्थान के चिकित्सा कक्ष में जागा। स्मृति-भार घटकर बीस प्रतिशत था, क्योंकि केंद्रीय संग्रह टूटने पर अधिकांश बाहरी अनुभव निकल गए थे। फिर भी खोई निजी यादें वापस नहीं आईं। डॉक्टर शालिनी उसे परिचित लगीं, पर वह उनका नाम नहीं जानता था। अर्जुन की एक बांह नहीं थी। माया घायलों की देखभाल कर रही थीं। फैजान दरवाजे पर बैठा लाल कंगन घुमा रहा था।

एक लड़की उसके पास आई। उसके सीने पर ऑपरेशन का नया निशान था। संस्थान की बिजली बचने के कारण उसका उपचार सफल हो गया था। उसकी आंखों में खुशी और डर दोनों थे।

“मैं रिया हूं,” उसने कहा। “तुम्हारी बहन।”

ईशान ने नाम दोहराया। उसके भीतर कोई पूरी स्मृति नहीं खुली, मगर एक खाली जगह में गर्माहट हुई। उसने कंगन लिया और कलाई पर बांध लिया। “मुझे शायद बहुत कुछ दोबारा सीखना होगा।”

रिया ने एक मोटी नोटबुक उसके सामने रखी। उसमें ईशान के बारे में छोटी-छोटी बातें लिखी थीं—उसे चाय में कम चीनी पसंद थी, वह झूठ बोलते समय बायां कान छूता था, मां कौन-सा गीत गाती थीं और बचपन में उसने रिया को साइकिल चलाना कैसे सिखाया था। शालिनी, अर्जुन, माया और फैजान ने भी अपनी यादें उसमें जोड़ दी थीं।

शहर में बचे लोगों ने मृतकों के पहचान-पत्र इकट्ठे करके एक स्मृति दीवार बनाई। वीर का नाम भी वहां था, लेकिन उसके साथ यह सच लिखा गया कि उसने लोगों को नियंत्रित किया और अंत में उसका असफल आदेश शहर को दस सेकंड का रास्ता दे गया। किसी को देवता या दानव बनाकर नहीं छोड़ा गया। उनकी पूरी कहानी जितनी उपलब्ध थी, उतनी लिखी गई।

ईशान की क्षमता समाप्त नहीं हुई थी। अब भी किसी मृत शरीर के पास जाने पर स्क्रीन अंतिम दस सेकंड दिखाने की पेशकश करती। उसने हर बार स्वीकार करना बंद कर दिया। वह पहले परिवार से अनुमति मांगता, फिर केवल तब अभिलेख खोलता जब उससे किसी जीवित व्यक्ति की सहायता हो सकती थी। उसने मृत्यु-अभिलेख को हथियार नहीं, अधूरे कामों की जिम्मेदारी माना।

कुछ सप्ताह बाद दूसरे शहर से संदेश आया। वहां भी एक काला स्तंभ बचा था और रात में मृत लोगों की आवाजें सुनाई देती थीं। सरकार ने ईशान से सहायता मांगी। रिया ने पूछा कि क्या वह जाएगा।

ईशान ने स्मृति दीवार पर चमकते हजारों नाम देखे। उसे उनमें से अधिकांश लोग याद नहीं थे, फिर भी उनके अंतिम प्रयासों ने उसे यहां तक पहुंचाया था। उसने अपनी नोटबुक, लाल कंगन और चिकित्सा बैग उठाया।

“डर लग रहा है?” रिया ने पूछा।

ईशान ने सच कहा, “बहुत।”

रिया मुस्कराई। “अच्छा है। मेरी एक याद के अनुसार तुम डरते हुए भी वापस आते हो।”

ईशान को वह घटना याद नहीं थी, पर उसने उन शब्दों पर विश्वास किया। वह संस्थान से बाहर निकला। बारिश अब साफ थी। शहर की दीवार पर सुबह की धूप पड़ रही थी और हर बूंद में किसी अंतिम क्षण के बजाय एक नई शुरुआत दिखाई दे रही थी।

उसकी शक्ति मृत लोगों की आखिरी दस सेकंड दिखाती थी। धीरे-धीरे उसने समझा कि उन दस सेकंड का अर्थ यह नहीं था कि जीवन मृत्यु पर समाप्त हो गया। उनका अर्थ था कि कभी-कभी एक मनुष्य का अधूरा कदम दूसरे मनुष्य के पैरों में आगे चलना जारी रखता है।

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