crowns of shadows Ch. 2

crowns of shadows - Chapter 2

Posted by Ishra Aalam • Aug 27, 2026 09:27 PM

अब आगे -----

मोक्ष ने एक ठंडी और पैनी नजर सड़क पर तड़पते हुए उस हमलावर पर डाली, जो इस वक्त अपनी टूटी कलाई को पकड़े हुए कराह रहा था और उठने की नाकाम कोशिशें कर रहा था।

उस गुंडे की तरफ से पूरी तरह बेफिक्र होकर मोक्ष की नजरें घूमीं और ठीक सामने ज़मीन पर बैठी मीरा पर जाकर ठहर गईं। उस एक पल के लिए जैसे आसपास की दुनिया की हर आवाज़, हवा की सरसराहट और सड़क का सन्नाटा मोक्ष के लिए पूरी तरह धुंधला हो गया।

रात के उस सुनसान, वीरान रास्ते पर मद्धम-मद्धम बहती ठंडी हवा मीरा के बिखरे बालों को उसके चेहरे पर लहरा रही थी। दूर हाईवे से कभी-कभार गुज़रती किसी भारी गाड़ी की गूंजती आवाज़ और आसमान में काले बादलों की ओट से छनकर आती चांदनी इस माहौल को एक अजीब सा रहस्यमयी रूप दे रही थी।

उसी चांदनी की दूधिया रोशनी में मीरा का चेहरा मोक्ष को बेहद साफ नज़र आ रहा था। मोक्ष के चेहरे पर गहरा सर्जिकल मास्क लगा था, जिसके कारण मीरा उसकी शक्ल, उसकी नाक या उसके होंठों की बनावट को बिल्कुल नहीं देख पा रही थी, लेकिन मोक्ष की दो कजरारी, गहरी और चंचल आंखें इस वक्त पूरी तरह मीरा के चेहरे के एक-एक नक्श पर टिकी हुई थीं।

मीरा सावंत की हालत कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बदल चुकी थी। जो औरत आमतौर पर एक-एक बाल को सलीके से संवारे, बेदाग ब्लेज़र और परफेक्ट कॉर्पोरेट लुक में घूमती थी, उसके वो रेशमी काले बाल इस वक्त बुरी तरह उलझकर उसके गालों और माथे पर फैले हुए थे।

उसकी बेशकीमती काली डिजाइनर ड्रेस पर सड़क की गंदी धूल और बजरी लगी हुई थी, और उसकी एक ऊंची हील टूटकर उससे कुछ दूरी पर बेसहारा पड़ी थी।

इस भयानक जानलेवा हादसे और मौत को इतने करीब से देखने के बावजूद उसके गुलाबी होंठों से डर की कोई चीख या रोना-धोना नहीं निकल रहा था, बस उसकी सीने की धड़कनें तेज़ थीं और सांसों में एक बेकाबू तेज़ी थी।

मगर उसकी आंखें मोक्ष की पैनी नज़रें सीधे उन्हीं नीली, गहरी और तीखी आंखों पर जाकर अटक गईं। वे आंखें किसी गहरे समंदर जैसी थीं, जिनमें इस वक्त आसमान के चांद का धुंधला और कांपता हुआ अक्स उतर आया था।

उन आंखों में इस जानलेवा हमले की घबराहट तो यकीनन थी, लेकिन उस घबराहट से कहीं ज्यादा एक अटूट ज़िद और गुरूर छलक रहा था। जैसे वह अंदर से कांप रही हो, फिर भी अपनी बेबसी को दुनिया के सामने जाहिर करने या उस डर को खुद पर हावी होने देने के लिए किसी कीमत पर तैयार न हो।

मोक्ष उसे कुछ देर तक यूं ही अपलक देखता रहा, मानो समय ठहर गया हो। शायद उसे खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह इतने ध्यान से इस अजनबी लड़की को क्यों ताक रहा था। उसने अपनी आर्मी लाइफ में और दुनिया भर में घूमते हुए एक से एक खूबसूरत लड़कियां देखी थीं,

मगर ज़मीन पर बैठी इस जख्मी लड़की में कुछ ऐसा अदम्य और तीखापन था जिसने उसके कदम रोक दिए थे। शायद उसकी आंखों में जमी वो बर्फ जैसी कठोरता, उसके चेहरे पर सालों से जमा थकान का बोझ, या फिर वो अजीब सी खामोशी जो इतने बड़े खौफनाक हादसे के ठीक बाद भी उसके वजूद के चारों तरफ एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ी थी।

मीरा ने बहुत अच्छी तरह महसूस कर लिया था कि सामने खड़ा यह लंबा-चौड़ा अजनबी लगातार अपनी मास्क के ऊपर से झिलमिलाती आंखों से उसे घूर रहा है। जीवन भर लोगों की निगाहों से दूर रहने वाली और सिर्फ अपने काम से मतलब रखने वाली मीरा को किसी अजनबी का इस तरह देखना जरा भी पसंद नहीं आया।

उसने अपनी भौंहों को हल्का सा सिकोड़ा, चेहरे पर एक तीखी सख्त रंगत लाई और सीधे मोक्ष की आंखों में अपनी कड़क नज़रें डाल दीं। मोक्ष जैसे उसकी उस कटीली नज़र के वार से अचानक होश की दुनिया में वापस लौटा।

उसने बिना एक शब्द कहे, बहुत ही सहजता और शालीनता से अपना मजबूत हाथ ज़मीन पर बैठी मीरा की तरफ बढ़ा दिया ताकि वह उसका सहारा लेकर खड़ी हो सके। मोक्ष की कड़क मगर बेहद साफ़ आवाज़ मास्क के पीछे से गूंजी।

“उठिए।”

मीरा ने सबसे पहले उसके सामने फैले उस चौड़े, सख्त हाथ को देखा, जिसकी कलाई पर लोहे जैसा खिंचाव था, फिर ऊपर उठकर उसके मास्क से ढके चेहरे और उसकी आंखों को घूरा। मीरा की समंदर जैसी नीली आंखों में कुछ पल के लिए गहरा संदेह और अविश्वास तैर गया।

वह कोई ऐसी-वैसी आम लड़की नहीं थी जो किसी भी अजनबी पर पलक झपकते ही भरोसा कर ले, खासकर तब जब पिछले दस मिनटों के अंदर उसकी ही अपनी कार में उसकी जान लेने की खौफनाक साजिश रची जा चुकी हो।

उसने मोक्ष के बढ़े हुए हाथ को बेहद बेरुखी से देखा और अगले ही पल अपनी सूजी हुई कलाई का झटका देकर उसके हाथ को हवा में ही दूर धकेल दिया। मोक्ष का बढ़ा हुआ हाथ वहीं हवा में खाली रह गया।

“मैं खुद उठ सकती हूं, मुझे किसी के सहारे की जरूरत नहीं है।”

मीरा ने अपने उसी बर्फ की तरह ठंडे, कड़क और घमंडी स्वर में कहा और सड़क पर अपनी छिली हुई हथेलियों का दबाव बनाकर खुद अपने बल पर खड़े होने की कोशिश करने लगी।

मोक्ष की घनी भौंहें उसके इस रूखे व्यवहार पर आश्चर्य से थोड़ी ऊपर उठ गईं। हालांकि उसके चेहरे पर मास्क लगा होने की वजह से उसकी आधी मुस्कान छुप गई थी, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सी शरारत और मज़ाक का भाव साफ तौर पर चमक उठा था। मोक्ष ने बेहद रिलैक्स अंदाज में अपनी गर्दन थोड़ी टेढ़ी करते हुए कहा।

“ओह... इतना एटीट्यूड? जान बचाने वाले के साथ भी ऐसा ही बर्ताव होता है क्या?”

मीरा ने उसे एक बार फिर अपनी कातिलाना निगाहों से घूरकर देखा, लेकिन उसे कोई जवाब देना अपनी शान के खिलाफ समझा। वह पूरे रोब के साथ अपने पैरों पर खड़ी हो ही पाई थी कि उसके मुड़े हुए घायल टखने में एक भयानक, कसकती हुई दर्द की लहर उठी।

दर्द इतना तीखा था कि उसके मुंह से हल्की सी सिसकी निकली, उसका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और उसका शरीर आगे की तरफ गिरने लगा। इससे पहले कि उसका चेहरा सीधे पक्की सड़क से जा टकराता, मोक्ष ने चीते जैसी फुर्ती दिखाते हुए आगे बढ़कर अपनी मजबूत उंगलियों से उसकी नाज़ुक बांह को दबोच लिया और उसे गिरने से बचा लिया।

मीरा ने अपनी लड़खड़ाती सांसों को संभाला और तुरंत उसकी तरफ ऐसी तीखी नजरों से देखा जैसे उसने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो। मीरा लगभग उस पर गुर्राई।

“हाथ छोड़िए मेरा!”

मोक्ष ने उसका हाथ तुरंत छोड़ने के बजाय उसे एक सेकंड और मजबूती से थामे रखा ताकि वह पूरी तरह अपनी सीध में खड़ी हो सके, फिर बेहद बेफिक्र लहजे में बोला,

“अरे मैडम, अभी-अभी तो नीचे गिरने से बचाया है आपको, थोड़ा सब्र रखिए।”

मीरा ने झल्लाकर अपनी बांह छुड़ाने की कोशिश की।

“मैंने आपसे कोई मदद नहीं मांगी थी!”

मोक्ष ने बड़े आराम से कहा।

“हां, वो तो मुझे अच्छी तरह पता है।”

मीरा ने चिढ़ कर कहा,

“तो फिर जबरदस्ती क्यों दया दिखा रहे हैं?”

मोक्ष ने बिना किसी झिझक के सीधे उसकी आंखों में देखते हुए कहा।

“क्योंकि आपके इस सख्त और अकड़े हुए चेहरे से साफ-साफ दिख रहा है कि आप अपनी पूरी जिंदगी में किसी से मदद मांगने वाली टाइप की इंसान हैं ही नहीं।”

मीरा ने कुछ पल स्तब्ध होकर उस अजनबी की ढीठता को देखा। उसके चेहरे पर बरसों बाद एक अजीब सी झुंझलाहट और गुस्सा साफ तौर पर उभर आया था। उसने पूरी ताकत से झटका देकर अपना हाथ उसकी ग्रिप से छुड़ाया और उससे दो कदम पीछे हटकर खड़ी हो गई।

उसका टखना अंदर ही अंदर सूज रहा था और तीखा दर्द दे रहा था, लेकिन मीरा सावंत अपने चेहरे पर दर्द की एक शिकन भी आने देने के लिए तैयार नहीं थी। मोक्ष ने उसकी इस बेतुकी ज़िद और आत्मसम्मान को बहुत गौर से देखा और मास्क के पीछे ही मन ही मन मुस्कुराया।

यह लड़की वाकई बेहद अजीब और अतरंगी थी। उसकी जगह अगर कोई और आम लड़की होती तो इस भयानक हमले के बाद रोने लगती, मदद के लिए चिल्लाती या उसके सीने से लगकर कांपने लगती;

लेकिन यह लड़की अपने टूटे हुए जूते, फटे कपड़ों और घायल पैर के बावजूद इस सुनसान सड़क पर किसी महारानी की तरह सीना ताने खड़ी थी जैसे कुछ हुआ ही न हो।

मीरा अपने कड़े शब्दों से उस अजनबी को डांटने ही वाली थी कि अचानक उसकी नज़र मोक्ष के चौड़े कंधों के पार पीछे की तरफ गई। उस एक ही पल में मीरा की आंखें खौफ से फैल गईं और उसके होंठ खुले के खुले रह गए।

ज़मीन पर पड़ा वह नब्बे किलो का हमलावर, जिसे मोक्ष ने कुछ देर पहले पटककर पस्त कर दिया था, अब चुपके से घुटनों के बल उठ खड़ा हुआ था।

उसके चेहरे पर अपनी हार और चोट का भयानक दर्द था, मगर उसकी आंखों में खून सवार था। उसके दाहिने हाथ में कोई धातु की चीज़ चमक रही थी।

चांदनी की हल्की रोशनी में उस तेज़ धारदार हथियार की चमक एक पल के लिए कौंधी और मीरा का दिल जैसे धड़कना भूलकर सीधे गले में आ गया।

चाकू! वह गुंडा पूरी ताकत से उस चाकू को मोक्ष की पीठ में घोंपने के लिए उसकी तरफ झपट रहा था।

“पीछे...! संभालो अपने आपको!”

मीरा के गले से एक चीख जैसी चेतावनी निकली। मोक्ष ने जैसे ही मीरा की आवाज़ में छिपे उस अचानक उभरे सच्चे खौफ और खतरे की आहट को महसूस किया, वह किसी सधे हुए शिकारी की तरह एक ही सेकंड में हवा में गोल घूमा।

अगले ही पल, इससे पहले कि उस गुंडे का चाकू उसकी पीठ को छू पाता, मोक्ष का मजबूत हाथ बिजली की गति से लपका और उसने हमलावर की कलाई को हवा में ही दबोच लिया।

चाकू का नुकीला सिरा मोक्ष के सीने से महज दो इंच दूर जाकर अचानक रुक गया। उस गुंडे ने अपनी पूरी ताकत लगाकर चाकू को आगे धकेलने और अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन मोक्ष की ग्रिप किसी लोहे के शिकंजे जैसी थी, जो एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं खिसक रही थी।

मोक्ष ने अपनी आंखों को छोटा किया और एक ही झटके में उस गुंडा की कलाई को उल्टी दिशा में मरोड़ दिया।

एक भयानक 'चटाक' की आवाज आई, कलाई की हड्डी चटकने के साथ ही हमलावर के मुंह से एक दर्दनाक चीख निकली और चाकू उसकी बेजान होती उंगलियों से छूटकर सीधे पक्की सड़क पर जा गिरा।

“बहुत बड़ी गलती कर दी तुमने दोस्त...”

मोक्ष की आवाज़ कुछ ही क्षण पहले वाले हल्के-फुल्के और मज़ाकिया अंदाज से पूरी तरह बदल चुकी थी। अब उसकी आवाज़ में एक फौजी की बेहद ठंडी, कातिलाना और खतरनाक कड़क थी।

उसकी आंखों में अब हंसी या शरारत का नामोनिशान नहीं बचा था। वे आंखें किसी भूखे भेड़िये की तरह जल रही थीं। उसने बिना कोई रहम दिखाए उस आदमी के हाथ को पीछे की तरफ घुमाकर उसकी पीठ पर लॉक कर दिया।

हमलावर दर्द के मारे बेकाबू होकर चीखने-चिल्लाने लगा, लेकिन मोक्ष ने उसकी कलाई और कोहनी पर दबाव थोड़ा और बढ़ा दिया। उस इंसान की कराहट उस वीरान रात के सन्नाटे को चीरने लगी।

मोक्ष ने उसे एक झटके से ज़मीन की तरफ नीचे धकेला, जिससे वह आदमी सीधे अपने घुटनों के बल सड़क पर आ गिरा।

मोक्ष ने अपना एक भारी बूट उसकी पीठ पर जमाया, उसकी बांह को उसी तरह मरोड़े रखा और बेहद शांत मगर खौफनाक आवाज़ में सीधे उसके कान के पास झुककर पूछा,

“आखरी बार पूछ रहा हूं... किसने भेजा है तुझे इस लड़की को मारने के लिए? नाम बता वरना अगली हड्डी तेरी गर्दन की टूटेगी।”

हमलावर दर्द से तड़पते हुए और हांफते हुए गिड़गिड़ाने लगा।

“मैं... मैं कसम से कुछ नहीं जानता साहब! मुझे तो बस... बस एक लाख रुपये एडवांस मिले थे... सिर्फ गाड़ी चलाकर सुनसान जगह लाने के लिए बोला गया था... साहब छोड़ दो!”

मोक्ष ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी कलाई पर थोड़ा और दबाव बनाया।

“गलत जवाब।”

आदमी की एक और दिल दहला देने वाली चीख हवा में गूंज उठी।

मीरा कुछ कदम दूर खड़ी यह पूरा मंज़र अपनी खुली आंखों से देख रही थी। उसकी पैनी नज़रें मोक्ष की हर एक हरकत पर मजबूती से टिकी हुई थीं।

अभी कुछ मिनट पहले तक जो इंसान उससे बेहद बेफिक्र, ढीठ और मज़ाकिया लहजे में बात कर रहा था, वही इंसान इस वक्त किसी ट्रेंड किलर या पेशेवर फौजी की तरह बेहद खतरनाक नज़र आ रहा था।

उसकी हर एक हरकत में एक अजीब सी सटीकता, प्रोफेशनल ट्रेनिंग और गज़ब का कंट्रोल था। वह गुस्से में अंधे होकर अनियंत्रित हाथ-पैर नहीं चला रहा था, बल्कि उसे बहुत अच्छी तरह पता था कि इंसान के शरीर के किस प्रेशर पॉइंट पर कितना दबाव देने से हड्डियां टूटती हैं और कितना दर्द होता है।

यही बात, यही पेशेवर महारत मीरा के तीखे दिमाग में ढेरों सवाल खड़े कर रही थी और उसे अंदर तक परेशान कर रही थी।

मोक्ष ने जब यह समझ लिया कि यह गुंडा सिर्फ एक मोहरा है और इसे सुपारी देने वाले का नाम नहीं पता, तो उसने एक झटके में उसे धक्का देकर छोड़ दिया। वह हमलावर सड़क पर गिरकर अपनी टूटी कलाई को छाती से सटाए कराहने और हांफने लगा। मोक्ष ने नीचे झुककर ज़मीन पर पड़े उस

धारदार चाकू को उठाया, कुछ सेकंड के लिए उसकी धार को अपनी आंखों के सामने लाकर देखा, और फिर एक ही झटके में उस चाकू को घुमाकर दूर झाड़ियों में फेंक दिया ताकि वह गुंडा दोबारा उसे न उठा सके।

इसके बाद उसने बहुत ही कैजुअल अंदाज में अपनी कार्गो पैंट पर लगी धूल को हाथों से झाड़ा, जैसे उसने अभी-अभी कोई बहुत ही मामूली और बोरिंग सा काम निपटाया हो।

यह सब करने के बाद, वह एक बार फिर पूरी तरह शांत होकर मीरा की तरफ मुड़ा।

मीरा अब भी अपनी जगह पर जम कर खड़ी थी और अपनी नीली आंखों से उसे ऐसे घूर रही थी जैसे उसके आर-पार देखना चाहती हो।

मोक्ष ने उसकी तरफ दो कदम बढ़ाए। अचानक उसकी आंखों में वही पुरानी चंचल और शरारती चमक वापस लौट आई, जैसे पिछला खौफनाक मंज़र कभी हुआ ही न हो।

उसने अपनी जेबों में हाथ डाले और बड़े लाड़ले अंदाज में बोला,

“अब बताइए चेयरवूमन साहिबा... इतने बड़े ड्रामे के बाद कम से कम एक छोटा सा 'धन्यवाद' तो बनता है न?”

मीरा के होंठ उस अजनबी को करारा जवाब देने के लिए खुले ही थे कि तभी अचानक मोक्ष की कार्गो पैंट की गहरी जेब में रखा उसका फोन ज़ोर-ज़ोर से वाइब्रेट करने लगा और उसकी एक खास रिंगटोन बज उठी।

रिंगटोन सुनते ही मोक्ष के चेहरे के भाव एक सेकंड के लिए बहुत गंभीर हुए। उसने जेब से फोन निकाला, स्क्रीन पर चमकते हुए किसी नाम या नंबर पर एक नज़र डाली, और बिना कॉल रिसीव किए सीधे पावर बटन दबाकर फोन को साइलेंट कर दिया।

मीरा की तेज़ और पारखी नज़रें अनायास ही उसके फोन की स्क्रीन की तरफ गईं, मगर मोक्ष ने इतनी फुर्ती से फोन वापस जेब में डाला कि वह स्क्रीन पर लिखा नाम नहीं पढ़ सकी।

ठीक उसी पल, दूर शहर की तरफ से आती हुई पुलिस की गाड़ियो के सायरन की तेज़, गूंजती हुई आवाज़ उस शांत वातावरण में फैलने लगी। नीली और लाल बत्तियों की रोशनी दूर मोड़ पर पेड़ों के पीछे चमकती हुई दिखाई देने लगी।

मोक्ष ने अपनी गर्दन घुमाकर सड़क के उस मोड़ की तरफ देखा जहां से सायरन की आवाज़ आ रही थी, और फिर अपनी नाक सिकोड़ते हुए एक बेहद ही बेतुका सा मुंह बनाया।

“ओह हो... आ गए हमारे देश के ग्रेट, हमेशा समय पर आने वाले लेट-लतीफ पुलिस वाले!”

मीरा ने पहली बार उसकी इस अजीब सी टिप्पणी पर हल्की सी हैरान होकर अपनी भौंहें उठाईं और सीधे उसकी आंखों में देखते हुए पूछा,

“ तुम भाग रहे हो। क्या?”

मोक्ष ने बहुत ही सीधे अंदाज़ में कहा,

“और नहीं तो क्या? वैसे इसे भागना नहीं, जाना कहते हैं। और मुझे पुलिस के उन लंबे, उबाऊ और फालतू के सवालों के जवाब देने का मुझे और मेरी लाइफ को कोई शौक नहीं है।”

मीरा ने उसे रोकने की कोशिश की।

“लेकिन तुमने मेरी जान बचाई है, तुम्हें पुलिस को बयान देना चाहिए!”

मोक्ष ने अपनी बात पूरी करने से पहले अपनी आंखों के कोने से मीरा के जख्मी मगर खूबसूरत चेहरे को देखा। उसकी आवाज़ में अचानक एक बेहद नरम और आश्वस्त करने वाला अहसास घुल गया,

“अब आप पूरी तरह से सुरक्षित हैं मैडम। पुलिस भी आ गई है, इसलिए अब आपको डरने की या किसी से घबराने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है।”

मीरा ने कुछ और कहना चाहा, लेकिन मोक्ष रुकने के मूड में बिल्कुल नहीं था। वह बड़ी तेजी से दो कदम पीछे हटा और सड़क के किनारे की तरफ बढ़ने लगा।

उस जगह पर सड़क के ठीक नीचे दूसरी निचली लेन पर जाने वाला एक काफी गहरा और खतरनाक ढलान था। मीरा ने उसे उस खतरनाक किनारे की तरफ बढ़ते देखा तो उसकी आंखें सिकुड़ गईं।

मीरा की आवाज़ में ना चाहते हुए भी एक चिंता झलक आई।

“ तुम उस तरफ क्यों जा रहे हैं? नीचे बहुत गहरी ढलान है!”

मोक्ष ने किनारे पर पहुंचकर एक बार फिर पीछे मुड़कर मीरा को देखा और बेहद बेफिक्र लहजे में जवाब दिया,

“क्योंकि मैडम, उधर सामने से पुलिस आ रही है।”

मीरा ने आंखें छोटी करते हुए कहा,

“तो उससे क्या? पुलिस से भागने की क्या तुक है?”

मोक्ष ने बड़े मजे से कहा।

“तुक यह है मैडम कि मुझे और मेरी बॉडी को पुलिस के लफड़ों से थोड़ी एलर्जिक प्रॉब्लम है!”

मीरा उसकी इस बचकानी और अजीबोगरीब बात का मतलब समझ ही पाती कि इससे पहले मोक्ष ने एक अविश्वसनीय हरकत कर दी।

उसने बड़े कूल अंदाज में अपनी उंगलियों से अपने माथे को छुआ, मीरा को देखकर एक आंख मारी, और बिना किसी डर के सीधे उस गहरी ढलान से नीचे अंधेरे में छलांग लगा दी।

मीरा का सांस एक पल के लिए रुक गया।

“यह आदमी पागल है क्या...!”

वह चीखने ही वाली थी। वह अपनी चोट और मोच की परवाह किए बिना तुरंत भागकर सड़क के उस किनारे पर पहुंची और नीचे झुककर देखने लगी।

जो नज़ारा उसकी आंखों के सामने था, उसने F&D ग्रुप की सबसे सख्त चेयरवूमन के होश उड़ा दिए। नीचे वाली सड़क पर इस वक्त लकड़ी के बड़े-बड़े बक्सों से भरा हुआ एक विशाल 18-व्हीलर कंटेनर ट्रक काफी तेज़ रफ्तार में गुज़र रहा था।

मोक्ष ने अपनी टाइमिंग का ऐसा गज़ब का प्रदर्शन किया था कि वह सीधे उस चलते हुए ट्रक की छत पर बिल्कुल सही जगह जा गिरा था। उसने गिरते ही एक रोल मारा ताकि चोट न लगे, और फिर बड़े ही आराम से उस चलते ट्रक की छत पर सीधा खड़ा हो गया।

उसने अपना संतुलन ऐसे बनाया जैसे वह किसी चलते ट्रक पर नहीं बल्कि अपने लिविंग रूम के कालीन पर खड़ा हो।

ट्रक आगे बढ़ रहा था।

मोक्ष ने अपनी गर्दन ऊपर उठाई और सीधे ऊपर सड़क के किनारे पर झुकी हुई मीरा से अपनी नज़रें मिलाईं। उतनी दूरी और अंधेरे के बावजूद मीरा को बहुत अच्छी तरह महसूस हुआ कि मास्क के पीछे उसके चेहरे पर वही पुरानी, शरारती और कातिलाना मुस्कान खिल रही थी।

मोक्ष ने बहुत ही स्टाइल से अपना हाथ हवा में उठाया, मीरा को एक विदाई वाली वेव (Wave) दी, और अगले ही पल वो तेज़ रफ्तार ट्रक अंधेरे मोड़ में मुड़ गया। मोक्ष पूरी तरह से मीरा की नजरों से ओझल हो चुका था।

आगे जानने के लिए बने रहीए ✨ 🙂

....

By ishra zafar aalam....

Continue.....

100%