Fiction Story Ch. 1

सबने महाशक्ति चुनी, उसने अनुकूलन चुना

Posted by Aman Aj • Aug 27, 2026 03:40 PM

<h2>अध्याय 1 — आखिरी सामान्य सुबह</h2>

<p>दिल्ली की वह सुबह बाकी दिनों जैसी ही शुरू हुई थी। मेट्रो में भीड़ थी, सड़कों पर हॉर्न बज रहे थे और लोग मोबाइल की स्क्रीन देखते हुए अपने-अपने काम की ओर भाग रहे थे। उन्नीस वर्षीय आरव भी कॉलेज की सीढ़ियाँ चढ़ रहा था। उसके हाथ में किताबें थीं और जेब में वह इनहेलर जिसे वह बचपन से अपने साथ रखता था। दूसरे लड़के अक्सर उसके कमजोर शरीर और साँस की बीमारी का मजाक उड़ाते थे। आरव जवाब नहीं देता था। उसने बहुत पहले समझ लिया था कि हर लड़ाई ताकत से नहीं जीती जाती।</p>

<p>सुबह ठीक नौ बजकर सत्रह मिनट पर दुनिया की सारी आवाजें एक साथ बंद हो गईं। उड़ते पक्षी हवा में स्थिर हो गए, सड़क पर चलती गाड़ियाँ रुक गईं और लोगों के कदम जहाँ थे वहीं जम गए। केवल मनुष्य अपनी आँखें हिला सकते थे। आसमान अचानक काला हुआ और हर व्यक्ति के सामने नीली रोशनी की एक स्क्रीन प्रकट हो गई।</p>

<p>उस पर लिखा था—पृथ्वी का सुरक्षा-काल समाप्त हो चुका है। प्रथम प्रलय सात मिनट में आरंभ होगा। प्रत्येक जीवित मनुष्य तत्काल एक प्रारंभिक शक्ति चुने। चुनाव स्थायी होगा।</p>

<p>नीचे दस चमकते चिन्ह थे। अग्नि, बर्फ, बल, गति, उपचार, धातु, भ्रम, बिजली, पशु-संवाद और अनुकूलन। हर चिन्ह के नीचे उसकी श्रेणी लिखी थी। अग्नि और बिजली ए-श्रेणी की शक्तियाँ थीं। बल, गति और उपचार बी-श्रेणी में थे। सबसे नीचे धूसर रंग में अनुकूलन लिखा था—एफ-श्रेणी। विवरण केवल इतना था: जीवित बचा शरीर अपनी पिछली पीड़ा को याद रखता है।</p>

<p>कॉलेज के गलियारे में समय फिर चल पड़ा। हर ओर चीख-पुकार मच गई। छात्रों ने स्क्रीन को छूना शुरू कर दिया। जो पहले अग्नि चुनता, उसके हाथों पर लाल रोशनी फैल जाती। कोई बिजली चुनते ही उत्साह से चिल्लाया। उपचार शक्ति कुछ ही क्षणों में उपलब्ध सीमा तक पहुँच गई और उसका चिन्ह बाकी लोगों की स्क्रीन से गायब हो गया।</p>

<p>आरव का सहपाठी युवराज भीड़ को पीछे धकेलकर आगे आया। वह कॉलेज की मुक्केबाजी टीम का कप्तान था और आरव को परेशान करने का कोई अवसर नहीं छोड़ता था। उसने बल चुना। उसके शरीर की मांसपेशियाँ तुरंत उभर आईं। उसने पास की लोहे की बेंच एक हाथ से उठाकर हवा में फेंक दी। लोग उसकी ताकत देखकर जयकार करने लगे।</p>

<p>आरव की मित्र सना ने उपचार चुनने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी। उसने बर्फ की शक्ति ले ली। उसके हाथ से ठंडी हवा निकली और फर्श पर सफेद परत जम गई। उसने आरव से कहा, “जल्दी करो। अग्नि चुन लो।”</p>

<p>आरव अग्नि के चिन्ह तक हाथ ले गया, फिर रुक गया। स्क्रीन पर एक छोटी चेतावनी चमकी—शक्ति का प्रदर्शन क्षमता नहीं, उपयोगकर्ता की जीवित रहने की संभावना तय करेगी। उसने बाकी विकल्प ध्यान से पढ़े। अग्नि शक्तिशाली थी, लेकिन ऊर्जा तेजी से समाप्त करती। गति शरीर पर दबाव डालती। बल हड्डियों को नुकसान पहुँचा सकता था। अनुकूलन के बारे में कोई स्पष्ट सीमा नहीं थी।</p>

<p>उसे अपनी माँ की कही बात याद आई—कमजोर शरीर ने तुम्हें एक लाभ दिया है, आरव। तुम दर्द आने से पहले उसके संकेत पहचान लेते हो।</p>

<p>स्क्रीन पर केवल चालीस सेकंड बाकी थे। सब उसे अग्नि लेने को कह रहे थे, मगर आरव ने धूसर चिन्ह छू दिया।</p>

<p>घोषणा हुई—उपयोगकर्ता आरव मेहरा ने एफ-श्रेणी अनुकूलन चुना है। प्रारंभिक गुण: विष प्रतिरोध एक प्रतिशत, पीड़ा नियंत्रण एक प्रतिशत, पर्यावरणीय स्मृति सक्रिय।</p>

<p>युवराज जोर से हँसा। “प्रलय शुरू होने से पहले ही इसने सबसे बेकार शक्ति चुन ली।”</p>

<p>आरव को भी कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ। उसके हाथ से न आग निकली, न शरीर मजबूत हुआ। केवल उसकी कलाई पर एक छोटा धूसर चिह्न बन गया। एक पल के लिए उसे लगा कि उसने जीवन की सबसे बड़ी गलती कर दी है।</p>

<p>सात मिनट पूरे हुए। आसमान में काली दरारें खुलीं और शहर के अलग-अलग हिस्सों में हरे रंग की बारिश होने लगी। कॉलेज के मैदान में खड़ा चौकीदार सबसे पहले उस बारिश से भीगा। उसका शरीर काँपा, गर्दन अस्वाभाविक ढंग से मुड़ी और त्वचा के नीचे काली नसें फैल गईं। पास खड़ी छात्रा उसकी मदद करने आगे बढ़ी तो उसने उसके गले पर दाँत गड़ा दिए।</p>

<p>कुछ ही सेकंड में मैदान नरक बन गया। जिन लोगों के शरीर पर हरी बारिश पड़ी थी, वे दूसरों पर टूट पड़े। काटे गए लोग एक मिनट के भीतर बदलने लगे। कॉलेज के दरवाजे बंद हो गए और नीली स्क्रीन पर नया संदेश आया—प्रथम चरण: मृत-जागरण। अगले बहत्तर घंटे जीवित रहिए। चरण पूरा होने पर सुरक्षित क्षेत्र खुलेंगे।</p>

<p>गलियारे में दौड़ते छात्रों की ओर तीन संक्रमित बढ़ रहे थे। युवराज ने अपनी नई शक्ति से एक को मुक्का मारा। उसका सिर दीवार से टकराकर फट गया, मगर हड्डी के टुकड़े युवराज के हाथ में धँस गए। सना ने दूसरे संक्रमित के पैरों को बर्फ में जमा दिया। तीसरा तेजी से आरव की ओर झपटा। आरव पीछे हटते हुए प्रयोगशाला में घुसा और दरवाजा बंद करने लगा। संक्रमित की बाँह बीच में फँस गई। उसके नाखून आरव के कंधे को चीर गए।</p>

<p>त्वचा पर हरी जलन फैल गई। स्क्रीन चमकी—अज्ञात संक्रमण शरीर में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान प्रतिरोध अपर्याप्त। अनुमानित परिवर्तन समय: अट्ठावन सेकंड।</p>

<p>सना चीखी, “आरव को काट लिया गया!”</p>

<p>युवराज ने लोहे की छड़ उठाई। “दरवाजा खोलो। बदलने से पहले इसे खत्म करना होगा।”</p>

<p>आरव ने अपने घाव को देखा। सामने मृत्यु की उलटी गिनती चल रही थी। उसने एफ-श्रेणी शक्ति चुनी थी, मगर अब उसी बेकार समझी गई शक्ति ने दूसरा संदेश दिखाया—घातक संक्रमण दर्ज। अनुकूलन आरंभ करने के लिए उपयोगकर्ता को साठ सेकंड तक जीवित रहना होगा।</p>

<p>परिवर्तन अट्ठावन सेकंड में होना था। अनुकूलन के लिए साठ सेकंड चाहिए थे। आरव के पास मृत्यु और जीवन के बीच केवल दो सेकंड का अंतर था।</p>

<h2>अध्याय 2 — दो सेकंड की लड़ाई</h2>

<p>प्रयोगशाला का दरवाजा भीतर से बंद था और बाहर युवराज उसे तोड़ने की कोशिश कर रहा था। आरव की नसों में आग दौड़ रही थी। स्क्रीन पर समय तेजी से घट रहा था। पचास सेकंड। उसके सामने रखी काँच की अलमारी में रसायन थे। वह जीव-विज्ञान का छात्र था और जानता था कि संक्रमण रक्त के साथ तेजी से फैलता है। इलाज संभव नहीं था, लेकिन शायद वह उसकी गति धीमी कर सकता था।</p>

<p>उसने कंधे के ऊपर अपनी बेल्ट कसकर बाँधी और घाव पर प्रयोगशाला में रखा ठंडा संपीड़न पैक दबाया। शरीर का तापमान कम होने पर रक्त प्रवाह कुछ धीमा हो सकता था। फिर उसने अपना इनहेलर लिया। साँस पहले ही बिगड़ रही थी। यदि फेफड़े बंद हुए तो अनुकूलन पूरा होने से पहले वह मर जाता।</p>

<p>तीस सेकंड बचे थे। आँखों के सामने हरा रंग फैलने लगा। उसके कानों में बाहर की चीखें दूर होती गईं। स्क्रीन ने परिवर्तन समय बढ़ाकर उनसठ सेकंड दिखाया। ठंडे पैक ने उसे केवल एक सेकंड दिया था। उसे एक और सेकंड चाहिए था।</p>

<p>आरव ने मेज पर रखा एड्रेनलिन का आपातकालीन इंजेक्शन देखा। मात्रा गलत हुई तो हृदय रुक सकता था। सही हुई तो शरीर कुछ क्षण और लड़ सकता था। उसने बिना झिझक इंजेक्शन जाँघ में लगा लिया। दिल हथौड़े की तरह धड़कने लगा। उलटी गिनती शून्य पर पहुँची। उसका शरीर अकड़ गया और मुँह से चीख निकली।</p>

<p>युवराज ने दरवाजा तोड़ दिया। वह छड़ लेकर आरव की ओर बढ़ा, लेकिन सना उसके सामने खड़ी हो गई। “रुको! उसकी आँखें अभी सामान्य हैं।”</p>

<p>“एक सेकंड में नहीं रहेंगी।”</p>

<p>उसी क्षण आरव की स्क्रीन चमकी—साठ सेकंड पूर्ण। संक्रमण संरचना दर्ज। अनुकूलन सफल। मृत-जागरण संक्रमण के प्रति प्रतिरोध तीस प्रतिशत। अस्थायी परिवर्तन रोका गया। पूर्ण प्रतिरोध के लिए अतिरिक्त संपर्क अथवा विकास आवश्यक।</p>

<p>आरव जमीन पर गिर पड़ा। घाव की काली नसें पीछे हटने लगीं, मगर पूरी तरह गायब नहीं हुईं। युवराज ने छड़ नीचे नहीं की। “यह अभी भी संक्रमित है।”</p>

<p>आरव ने कठिनाई से कहा, “तीस प्रतिशत प्रतिरोध है। मैं नहीं बदलूँगा… अभी नहीं।”</p>

<p>उनकी स्क्रीन पर समूह सूचना दिखाई दी। जीवित रहने की संभावना बढ़ाने के लिए दस या कम सदस्यों का दल बनाया जा सकता था। सना ने तुरंत आरव को अपने दल में जोड़ लिया। युवराज ने विरोध किया, लेकिन बाहर से दर्जनों संक्रमितों की आवाजें आ रही थीं। अकेले निकलना संभव नहीं था। अंत में कुल आठ लोग साथ हुए—आरव, सना, युवराज, कंप्यूटर छात्र निखिल, तीरंदाजी खिलाड़ी मीरा, नर्सिंग की छात्रा तान्या, मैकेनिक इमरान और इतिहास के प्राध्यापक जोशी।</p>

<p>कॉलेज का मुख्य द्वार संक्रमितों से घिरा था। छत से जुड़ी पुरानी सेवा सीढ़ी पीछे की गली तक जाती थी। समूह वहाँ पहुँचा तो देखा कि सीढ़ी का निचला हिस्सा टूट चुका है। नीचे छह संक्रमित घूम रहे थे। युवराज ने कहा कि वह कूदकर उन्हें मार देगा। आरव ने रोका। “तुम्हारे हाथ की हड्डी घायल है। शक्ति उसे मजबूत नहीं कर रही, केवल दर्द छिपा रही है।”</p>

<p>युवराज ने ध्यान दिया कि उसकी मुट्ठी सूज चुकी थी। पहले संक्रमित को मारते समय सच में हड्डी टूट गई थी। ताकत ने उसे शक्तिशाली बनाया था, अटूट नहीं।</p>

<p>आरव ने योजना बनाई। सना ने नीचे पानी की पाइप पर बर्फ जमा दी। इमरान ने ऊपर से अग्निशामक सिलेंडर गिराया। सिलेंडर बर्फ पर फिसलता हुआ संक्रमितों से टकराया और मीरा ने एक तीर से उसका वाल्व तोड़ दिया। तेज गैस के दबाव और फिसलन से सभी संक्रमित दीवार की ओर जा गिरे। समूह रस्सी के सहारे नीचे उतर गया।</p>

<p>आरव अंतिम था। नीचे पहुँचते ही एक घायल संक्रमित ने कचरे के ढेर से उसका पैर पकड़ लिया। उसने लोहे के टुकड़े से उसके सिर पर वार किया। काला खून उसके घाव पर लगा और स्क्रीन फिर चमकी—संक्रमण संपर्क दर्ज। प्रतिरोध बढ़कर बत्तीस प्रतिशत।</p>

<p>उसे अपनी शक्ति का नियम समझ आने लगा था। जो चीज उसे मारने की कोशिश करती और वह उससे बच जाता, शरीर अगली बार उसके लिए थोड़ा तैयार हो जाता। लेकिन हर विकास की कीमत असली दर्द और असली खतरा था। वह आग से बचना सीख सकता था, मगर पहले उसे जलना पड़ता। वह विष से मजबूत हो सकता था, मगर पहले विष को शरीर में आने देना होता। यह बेकार शक्ति नहीं थी। यह ऐसी शक्ति थी जिसका हर लाभ मृत्यु के दरवाजे से होकर आता था।</p>

<p>समूह पीछे की गली से निकला। शहर बदल चुका था। सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियाँ थीं, इमारतों से धुआँ उठ रहा था और हर ओर संक्रमित घूम रहे थे। मोबाइल नेटवर्क बंद था। नीली स्क्रीन ने निकटतम अस्थायी आश्रय तीन किलोमीटर दूर एक मॉल में दिखाया। वहाँ पहुँचने में शाम हो सकती थी।</p>

<p>रास्ते में उन्हें एक छोटी दवा दुकान दिखाई दी। आरव को इनहेलर चाहिए था और तान्या को प्राथमिक उपचार की सामग्री। दुकान का शटर आधा खुला था। भीतर अँधेरा था। निखिल ने कहा कि पहले जाँच करनी चाहिए, लेकिन युवराज अपनी ताकत पर भरोसा करते हुए अंदर चला गया।</p>

<p>कुछ क्षण बाद उसकी चीख सुनाई दी। छत से एक ऐसा संक्रमित उस पर गिरा जो बाकी से अलग था। उसकी बाँहें लंबी थीं, उँगलियों पर काले पंजे थे और वह दीवार पर छिपकली की तरह चल सकता था। स्क्रीन ने उसका नाम दिखाया—प्रथम विकसित शिकारी। स्तर पाँच।</p>

<p>समूह के सभी सदस्य अभी स्तर एक पर थे। शिकारी ने युवराज को गले से पकड़कर छत की ओर खींच लिया।</p>

<h2>अध्याय 3 — पहला विकसित शिकारी</h2>

<p>मीरा ने तुरंत तीर चलाया, लेकिन शिकारी ने शरीर मोड़कर उसे बचा लिया। सना की बर्फ छत तक नहीं पहुँच पा रही थी। युवराज की ताकत बेकार थी, क्योंकि उसके पैर हवा में थे और गला पंजे में दबा था। आरव ने दुकान के भीतर एक नजर दौड़ाई। फर्श पर टूटी दवाइयाँ, शराब की बोतलें और बिजली के तार पड़े थे। बाहर इमरान के पास छोटा लाइटर था।</p>

<p>आरव ने इमरान से लाइटर माँगा और तान्या को युवराज के नीचे गद्दे फेंकने को कहा। उसने शराब की बोतल का कपड़ा जलाया, मगर शिकारी पर नहीं फेंका। उसने बोतल दुकान के धातु शटर पर मारी। आग फैलते ही शटर गर्म होने लगा और स्वचालित अग्नि-सुरक्षा प्रणाली से छत पर पानी बरस पड़ा। शिकारी की पकड़ ढीली हुई। सना ने उसी पानी को जमा दिया। छत पर बर्फ की परत बनी और शिकारी फिसलकर नीचे गिरा।</p>

<p>युवराज गद्दों पर गिरा। शिकारी जमीन छूते ही आरव पर झपटा। आरव पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ा और जलता हुआ धातु का डंडा उसके खुले मुँह में घुसा दिया। पंजे उसके सीने पर लगे और कमीज फट गई। मीरा का दूसरा तीर शिकारी की आँख में धँसा। युवराज ने उठकर दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ा और पूरी शक्ति से जमीन पर दे मारा। इस बार उसकी खोपड़ी टूट गई।</p>

<p>नीली रोशनी पूरे समूह पर फैली। विकसित संक्रमित को मारने के कारण सभी को अनुभव मिला। आरव स्तर दो पर पहुँच गया। उसे एक गुण-बिंदु मिला जिसे वह शक्ति, गति या सहनशक्ति में लगा सकता था। उसने सहनशक्ति चुनी। उसके फेफड़ों का दबाव थोड़ा कम हुआ।</p>

<p>शिकारी के शरीर से एक काला क्रिस्टल निकला। स्क्रीन के अनुसार वह विकास-कोर था। उसे किसी शक्ति में मिलाने पर नया गुण खुल सकता था, लेकिन एक ही व्यक्ति उसका उपयोग कर सकता था। युवराज ने कहा कि अंतिम वार उसने किया है, इसलिए कोर उसका है। मीरा ने विरोध किया कि योजना आरव की थी। समूह में बहस होने लगी।</p>

<p>आरव ने कोर युवराज को दे दिया। “ले लो। हमें यहाँ से जल्दी निकलना है।”</p>

<p>युवराज ने विजयी मुस्कान के साथ उसे अपनी बल शक्ति में मिला लिया। कुछ क्षण उसका शरीर लाल चमका, फिर स्क्रीन ने चेतावनी दी—असंगत विकास। मांसपेशी घनत्व बढ़ा, गतिशीलता दस प्रतिशत घटी। उसकी बाँहें मजबूत हो गईं, मगर चलना भारी लगने लगा। शक्ति का हर चमकता पुरस्कार लाभ ही हो, यह जरूरी नहीं था।</p>

<p>दुकान से आवश्यक दवाइयाँ लेकर वे बाहर निकले। आरव को नया इनहेलर मिला, मगर उसने केवल एक लिया और बाकी साँस की बीमारी वाले लोगों के लिए छोड़ दिए। तान्या ने उसके सीने की खरोंच साफ की। शिकारी का काला खून घाव तक पहुँचा था। अनुकूलन ने पंजों में मौजूद लकवा पैदा करने वाले विष को दर्ज किया। कुछ देर उसकी उँगलियाँ सुन्न रहीं, फिर प्रतिरोध पाँच प्रतिशत हो गया।</p>

<p>शाम तक वे मॉल के पास पहुँचे। प्रवेश द्वार पर हथियारबंद लोगों का एक दल पहरा दे रहा था। उसका नेता राघव नाम का पूर्व सुरक्षाकर्मी था, जिसने धातु की शक्ति चुनी थी। वह आसपास की लोहे की वस्तुओं को मोड़कर भाले बना सकता था। उसने घोषणा की कि आश्रय में प्रवेश के बदले प्रत्येक व्यक्ति को भोजन या उपयोगी सामान देना होगा। जिसके पास कुछ नहीं, वह बाहर रहेगा।</p>

<p>जोशी सर के पास कोई सामान नहीं था। राघव ने उन्हें रोक दिया। आरव ने अपनी दवाओं का आधा हिस्सा देकर उन्हें अंदर कराया। मॉल में करीब दो सौ लोग थे। दुकानें रहने के कमरों में बदल दी गई थीं। जनरेटर चल रहा था और ऊपर के खाद्य भंडार में कई दिनों का राशन था। कुछ समय के लिए वह सुरक्षित लग रहा था।</p>

<p>रात में नीली स्क्रीन पर वैश्विक आँकड़ा आया—प्रथम प्रलय के दस घंटे पूरे। पृथ्वी की जीवित जनसंख्या उनहत्तर प्रतिशत। विकसित संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अगला विकास चक्र सूर्योदय पर।</p>

<p>केवल दस घंटे में लगभग एक-तिहाई मनुष्य समाप्त हो चुके थे। मॉल में रोने की आवाजें फैल गईं। आरव ने अपनी छोटी बहन काव्या को फोन लगाने की कोशिश की। वह शहर के दूसरे छोर पर स्कूल के छात्रावास में थी। नेटवर्क नहीं मिला, लेकिन सिस्टम की संपर्क सूची में उसका नाम हरे रंग में था। इसका अर्थ था कि वह जीवित थी। उसके नाम के पास स्थान छिपा था और एक संदेश चमक रहा था—उपयोगकर्ता सुरक्षित क्षेत्र की परीक्षा में है।</p>

<p>आरव ने तय किया कि सुबह होते ही वह उसे खोजने जाएगा। सना भी साथ चलने को तैयार हुई। निखिल ने शहर के पुराने ऑफलाइन नक्शे डाउनलोड कर रखे थे। उसने बताया कि छात्रावास तक सबसे तेज रास्ता मेट्रो सुरंग से जाता है। सतह पर पंद्रह किलोमीटर थे, सुरंग से केवल नौ।</p>

<p>तभी मॉल की सारी बत्तियाँ बंद हो गईं। जनरेटर वाले कमरे से चीखें सुनाई दीं। आपातकालीन रोशनी में लोगों ने देखा कि एक महिला जमीन पर गिरकर काँप रही है। उसके बच्चे ने बताया कि उसे शाम को हल्की खरोंच लगी थी, लेकिन उसने प्रवेश के डर से छिपा लिया। महिला की आँखें काली हो गईं और वह पास खड़े आदमी पर टूट पड़ी। उसी समय अलग-अलग मंजिलों से और चीखें उठीं। संक्रमित लोग पहले से मॉल के भीतर थे।</p>

<p>मुख्य दरवाजे के बाहर हजारों मृत-जागृत एक साथ मॉल की ओर मुड़े। किसी अदृश्य संकेत ने उन्हें बुला लिया था। स्क्रीन पर लाल संदेश आया—रक्त-चंद्र विकास आरंभ। सुरक्षित समझे गए सभी बड़े समूह अब झुंड का लक्ष्य होंगे।</p>

<p>मॉल आश्रय नहीं रहा था। वह दो सौ जीवित लोगों से भरा एक बंद भोजन-पात्र बन चुका था।</p>

<h2>अध्याय 4 — मॉल का पतन</h2>

<p>अँधेरे में भगदड़ मच गई। लोग मुख्य दरवाजे की ओर भागे, जबकि बाहर मृतकों का समुद्र था। राघव ने धातु के शटर बंद करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ उसके आदेश नहीं सुन रही थी। आरव ने अपने समूह को दूसरी मंजिल की खेल-सामान दुकान में पहुँचाया। वहाँ बेसबॉल बैट, हेलमेट और रस्सियाँ थीं। इमरान ने स्केटबोर्ड के पहियों और धातु की छड़ों से छोटे चलने वाले अवरोध बनाए।</p>

<p>सना ने सीढ़ियों पर बर्फ की दीवार खड़ी कर दी। संक्रमित उससे टकराकर जमा होने लगे, मगर हर उपयोग के साथ उसका चेहरा पीला पड़ रहा था। शक्ति मन की इच्छा से चलती थी, ऊर्जा बिना सीमा के नहीं थी। तान्या घायल लोगों की पट्टी कर रही थी। युवराज नीचे फँसे लोगों को उठाकर ऊपर भेज रहा था। पहली बार उसकी ताकत प्रदर्शन के बजाय सच में किसी काम आ रही थी।</p>

<p>आरव ने मॉल की अग्नि-निकास योजना देखी। पीछे माल उतारने वाली सुरंग थी, लेकिन उसका इलेक्ट्रॉनिक द्वार बिजली के बिना नहीं खुल सकता था। जनरेटर भूतल पर था जहाँ संक्रमित फैल चुके थे। निखिल दरवाजे की प्रणाली को ऊपर से खोल सकता था, यदि जनरेटर केवल तीस सेकंड के लिए चल जाए।</p>

<p>आरव, मीरा और राघव नीचे जाने को तैयार हुए। राघव ने आरव की ओर देखकर कहा, “तुम्हारे पास हमला करने की कोई शक्ति नहीं। रास्ते में बोझ बनोगे।”</p>

<p>आरव ने उत्तर दिया, “मुझे जनरेटर का रास्ता और संक्रमितों की चाल याद है। तुम्हारी शक्ति दरवाजा खोल सकती तो मुझे जाना नहीं पड़ता।”</p>

<p>तीनों सेवा-सीढ़ियों से नीचे पहुँचे। गलियारे में हरी आपातकालीन रोशनी थी। आरव ने पाया कि संक्रमित अँधेरे में आँखों से अधिक आवाज पर प्रतिक्रिया करते हैं। उसने दुकानों में रखे अलार्म वाले खिलौने अलग-अलग दिशाओं में फेंके। आवाज के पीछे झुंड मुड़ता और वे आगे बढ़ जाते।</p>

<p>जनरेटर कक्ष के पास एक मोटा संक्रमित खड़ा था जिसकी पीठ पर फूलों जैसी मांसल थैलियाँ थीं। स्क्रीन ने नाम दिखाया—विष-विस्फोटक, स्तर सात। उसे चोट पहुँचते ही जहरीली गैस फैल सकती थी। राघव ने धातु का भाला बनाया, मगर आरव ने हाथ रोक लिया। बंद कमरे में गैस निकली तो सब मर जाते।</p>

<p>मीरा ने पूछा, “फिर इसे हटाएँ कैसे?”</p>

<p>आरव ने छत पर लगी भारी पानी की पाइप देखी। राघव ने अपनी शक्ति से पाइप मोड़कर फंदा बनाया। मीरा ने तीर से दूर खड़ा अलार्म चालू किया। संक्रमित आवाज की ओर बढ़ा और फंदे में फँस गया। राघव ने पाइप कसकर उसे जमीन से ऊपर उठा दिया। वे उसके नीचे से निकलकर जनरेटर कक्ष में पहुँचे।</p>

<p>इमरान रेडियो पर उन्हें निर्देश देता रहा। मशीन का ईंधन था, लेकिन स्टार्टर खराब था। आरव और मीरा ने हाथ से पहिया घुमाया। जनरेटर चालू होते ही निखिल ने माल-द्वार खोलना शुरू किया। स्क्रीन पर तीस सेकंड की उलटी गिनती आई।</p>

<p>बाहर लटका विष-विस्फोटक छटपटा रहा था। पाइप टूट गई और वह जमीन पर गिरा। राघव ने उसे रोकने के लिए भाला मारा। संक्रमित का शरीर गुब्बारे की तरह फूला और हरा धुआँ कमरे में भर गया। मीरा और राघव खाँसते हुए गिर पड़े। आरव के फेफड़े जलने लगे। स्क्रीन ने नया विष दर्ज किया और अनुमान लगाया कि बिना प्रतिरोध वह चालीस सेकंड में बेहोश होगा। अनुकूलन पूरा होने में एक मिनट चाहिए था।</p>

<p>इस बार उसके पास ठंडा पैक या इंजेक्शन नहीं था। उसने अपना इनहेलर मीरा को दिया, गीला कपड़ा राघव के मुँह पर बाँधा और स्वयं जनरेटर का पहिया पकड़े रहा। यदि मशीन बंद हुई तो ऊपर दो सौ लोग फँस जाते। उसकी आँखों से खून आने लगा। तीस सेकंड पूरे हुए और रेडियो पर निखिल चिल्लाया कि दरवाजा खुल गया है।</p>

<p>आरव अब पहिया छोड़ सकता था, मगर बाहर निकलने की ताकत नहीं बची थी। स्क्रीन पर अनुकूलन के लिए अठारह सेकंड बाकी थे। उसने फर्श पर घुटनों के बल बैठकर साँस रोकी। राघव ने उसे उठाने की कोशिश की, पर स्वयं गिर गया। मीरा ने अपने अंतिम तीर से कमरे की खिड़की तोड़ी। थोड़ा धुआँ बाहर निकला।</p>

<p>अनुकूलन पूरा हुआ—विष प्रतिरोध पच्चीस प्रतिशत। फेफड़ों की विष-छानन क्षमता सक्रिय।</p>

<p>आरव ने पहली साफ साँस ली। वह पूरी तरह सुरक्षित नहीं था, लेकिन चल सकता था। उसने राघव को कंधे पर लिया, मीरा का हाथ पकड़ा और तीनों बाहर निकले। पीछे विष-विस्फोटक फिर उठ रहा था। आरव ने जनरेटर से ईंधन की पाइप खींची और उसे संक्रमित तक फैला दिया। मीरा ने जलता तीर छोड़ा। विस्फोट ने गलियारा बंद कर दिया।</p>

<p>मॉल के लोग माल-द्वार से बाहर निकल रहे थे। मगर राघव के कुछ आदमी राशन की गाड़ी लेकर पहले ही भाग गए थे और उन्होंने बाकी लोगों के लिए बसें नहीं छोड़ी थीं। बाहर केवल पैदल रास्ता था। संक्रमितों का झुंड मुख्य द्वार तोड़कर भीतर आ चुका था।</p>

<p>जोशी सर बच्चों को लेकर अंतिम समूह में निकले। एक संक्रमित ने उनका पैर पकड़ लिया। उन्होंने बच्चे को तान्या की ओर धकेला और स्वयं पीछे रह गए। युवराज वापस जाने लगा, लेकिन लोहे का द्वार गिर चुका था। काँच के पार जोशी सर ने केवल हाथ उठाकर उन्हें जाने का संकेत दिया। कुछ क्षण बाद झुंड ने उन्हें घेर लिया।</p>

<p>समूह भारी मन से आगे बढ़ा। दो सौ में से केवल एक सौ सात लोग मॉल से निकल पाए। आरव की स्क्रीन पर शक्ति की नई जानकारी आई—पर्यावरणीय स्मृति ने जहरीली हवा, कम ऑक्सीजन और अत्यधिक शारीरिक तनाव दर्ज किया। अनुकूलन अब एफ से ई-श्रेणी में विकसित हो गया था। नया गुण खुला—संकट श्वास। गंभीर स्थिति में शरीर तीन मिनट तक न्यूनतम ऑक्सीजन पर काम कर सकता था।</p>

<p>जिस लड़के को कुछ घंटे पहले अपने इनहेलर के बिना सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल लगता था, उसने जहरीले कमरे में तीन लोगों को जीवित बाहर निकाला था। फिर भी उसे जीत महसूस नहीं हुई। जोशी सर पीछे छूट गए थे और उसकी बहन अब भी शहर के दूसरे छोर पर थी।</p>

<h2>अध्याय 5 — जमीन के नीचे</h2>

<p>मॉल से बचे लोगों ने पास के पुलिस प्रशिक्षण केंद्र की ओर जाने का निर्णय किया। सिस्टम के अनुसार वहाँ छोटा सुरक्षित क्षेत्र खुलने वाला था। आरव अपने समूह के साथ उनसे अलग हो गया। काव्या तक पहुँचने के लिए उनके पास बहत्तर घंटे के चरण में केवल पैंतालीस घंटे बाकी थे। राघव भी उनके साथ आया। उसके अपने आदमी राशन लेकर भाग चुके थे और मॉल में आरव ने उसकी जान बचाई थी।</p>

<p>मेट्रो स्टेशन का प्रवेश अँधेरा था। नीचे से ठंडी और सड़ी हुई हवा आ रही थी। निखिल ने पुराने नियंत्रण नक्शे में देखा कि सुरंग सीधे छात्रावास के क्षेत्र तक जाती है। पटरियों पर बिजली बंद थी, मगर किसी भी समय वापस आ सकती थी। समूह ने मोबाइल की रोशनी ढककर केवल जमीन की ओर रखी।</p>

<p>प्लेटफॉर्म पर एक ट्रेन खड़ी थी। उसके दरवाजे खुले थे और भीतर दर्जनों शव बैठे दिखाई दे रहे थे। किसी के शरीर पर काटने के निशान नहीं थे। तान्या ने जाँचकर बताया कि शायद भूमिगत व्यवस्था बंद होने पर हवा की कमी से उनकी मृत्यु हुई। आरव की पर्यावरणीय स्मृति ने हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा दर्ज की। सुरंग में वायु-प्रवाह बंद था। सामान्य व्यक्ति दो घंटे में कमजोर हो सकता था। उसके पास संकट श्वास था, बाकी लोगों के पास नहीं।</p>

<p>इमरान और निखिल वेंटिलेशन चालू करने के लिए नियंत्रण कक्ष गए। बाकी प्लेटफॉर्म पर रुके। ट्रेन के अंतिम डिब्बे से हल्की खटखटाहट आई। युवराज ने दरवाजा खींचा तो भीतर लगभग बारह वर्ष का लड़का मिला। उसने गति की शक्ति चुनी थी और हवा कम होने पर अपने शरीर को बहुत धीमा करके बचा रहा था। उसका नाम दीप था। उसके माता-पिता उसी ट्रेन में मर चुके थे। तान्या ने उसे पानी दिया और सना ने दल में शामिल कर लिया।</p>

<p>वेंटिलेशन चालू हुआ तो सुरंग से हवा का तेज झोंका आया। उसी के साथ दूर से किसी भारी चीज के दौड़ने की आवाज सुनाई दी। ट्रेन के मृत यात्री एक-एक कर आँखें खोलने लगे। वे संक्रमण से नहीं मरे थे, फिर भी रक्त-चंद्र के प्रभाव ने हर ताजा शव को जगा दिया था। समूह सुरंग की ओर भागा।</p>

<p>पीछे से सैकड़ों कदमों की आवाज आ रही थी। दीप अपनी गति से आगे जाकर रास्ता देखता और लौटकर जानकारी देता। लगभग दो किलोमीटर बाद सुरंग दो भागों में बँटी। दायाँ रास्ता छोटा था, लेकिन दीप ने वहाँ दीवारों पर सफेद जाल देखे। बायाँ रास्ता लंबा था और पानी से भरा था। युवराज ने छोटा रास्ता चुनने को कहा। आरव ने जाल के पास पड़ी हड्डियों को देखकर मना किया। वे किसी विशाल जीव का इलाका था।</p>

<p>युवराज ने चिढ़कर कहा, “हर चीज से डरकर हम समय पर नहीं पहुँचेंगे।”</p>

<p>आरव ने उत्तर दिया, “डर रास्ता रोकता नहीं, खतरा दिखाता है।”</p>

<p>वे बाईं सुरंग में घुटनों तक पानी के बीच आगे बढ़े। पीछे का झुंड करीब आ रहा था। अचानक पानी में बिजली दौड़ गई। दूर किसी उपकेंद्र ने स्वचालित रूप से पटरियों की आपूर्ति चालू कर दी थी। राघव ने धातु की शक्ति के कारण सबसे पहले झटका महसूस किया और गिर पड़ा। सना ने पानी को जमा करने की कोशिश की, लेकिन बिजली बर्फ से भी गुजर सकती थी।</p>

<p>आरव ने दीवार पर रखरखाव के लिए बना सूखा किनारा देखा। वहाँ तक पहुँचने के लिए पाँच मीटर पानी पार करना था। इमरान ने रबर की सीटें ट्रेन से निकाले औजारों के साथ बाँधकर छोटा रास्ता बनाया। एक-एक करके लोग उस पर चढ़े। अंतिम में आरव और युवराज थे। पीछे झुंड पानी में घुसा। बिजली के झटकों से सामान्य संक्रमित गिर गए, मगर उनके ऊपर से एक नीली चमक वाला मृत-जागृत आगे बढ़ता रहा। उसका शरीर बिजली संग्रह कर रहा था।</p>

<p>वह युवराज पर झपटा। आरव ने उसे धक्का देकर किनारे पहुँचाया और स्वयं पानी में गिर गया। बिजली ने उसके पूरे शरीर को जकड़ लिया। उसकी साँस रुक गई और दिल की गति बेकाबू हो गई। राघव ने धातु की केबल को शक्ति से मोड़कर आरव की कमर में लपेटा, लेकिन केबल छूते ही उसे भी झटका लगा। सना ने दीवार से बर्फ की लंबी छड़ बनाई जो विद्युत को कम प्रवाहित करती थी। उसकी सहायता से उन्होंने आरव को बाहर खींचा।</p>

<p>तान्या ने देखा कि उसकी नाड़ी बंद थी। उसने छाती दबाना शुरू किया। आरव की चेतना अँधेरे में डूब रही थी। स्क्रीन पर संदेश था—विद्युत आघात दर्ज। अनुकूलन के लिए जीवित हृदय आवश्यक। पाँच सेकंड बाद जैविक मृत्यु।</p>

<p>तान्या ने आखिरी प्रयास में उसके सीने पर जोर दिया। आरव का दिल फिर धड़का। उसने पानी उगला और आँखें खोल दीं। अनुकूलन ने तंत्रिका-विद्युत सहनशीलता दस प्रतिशत कर दी थी। वह बिजली से सुरक्षित नहीं हुआ था, लेकिन अगला सामान्य झटका शायद उसका हृदय तुरंत बंद नहीं करता।</p>

<p>युवराज उसके पास बैठ गया। पहली बार उसके चेहरे पर घमंड नहीं था। उसने धीमे से कहा, “तुम मुझे बचाने के लिए क्यों कूदे?”</p>

<p>आरव ने कठिनाई से उत्तर दिया, “क्योंकि अगली लड़ाई में तुम्हारी ताकत चाहिए।”</p>

<p>युवराज समझ गया कि यह पूरा उत्तर नहीं था। उसने आरव को उठने में सहारा दिया। उस क्षण उनके बीच स्कूल के दिनों से चली आ रही दुश्मनी समाप्त नहीं हुई, लेकिन जीवित रहने का विश्वास शुरू हो गया।</p>

<h2>अध्याय 6 — शक्ति की दूसरी परीक्षा</h2>

<p>सुरंग से निकलते समय सूरज डूब चुका था। छात्रावास एक ऊँची दीवार के भीतर था और उसके चारों ओर नीली रोशनी का गुंबद बना था। आरव ने राहत की साँस ली, लेकिन प्रवेश द्वार पर स्क्रीन ने उन्हें रोक दिया—सुरक्षित क्षेत्र अभी सक्रिय नहीं। भीतर मौजूद उम्मीदवारों की शक्ति-परीक्षा पूर्ण होने पर द्वार खुलेगा। अनुमानित समय: छह घंटे।</p>

<p>दीवार के बाहर सैकड़ों लोग जमा थे। दूर-दूर से संक्रमित उनकी ओर आ रहे थे। इतने बड़े समूह की गंध और आवाज झुंड को खींच रही थी। भीतर स्कूल के बच्चे अलग परीक्षा में फँसे थे और बाहर उनके परिवार असहाय थे। आरव की संपर्क सूची में काव्या अब भी हरे रंग में थी।</p>

<p>निखिल ने गुंबद की प्रणाली समझने की कोशिश की। हर दस मिनट में उसका एक छोटा हिस्सा कुछ सेकंड के लिए खुलता था, जिससे परीक्षा में हार मानने वाले बच्चे बाहर आ सकते थे। बाहर का कोई व्यक्ति भीतर नहीं जा सकता था। दीप की गति शायद उसे उस छोटे अंतर से पार करा सकती थी, मगर वह स्वयं बच्चा था और अंदर जाने से डर रहा था।</p>

<p>आरव ने उससे मजबूरी नहीं की। उसने केवल कहा, “तुम्हारे माता-पिता तुम्हें जीवित देखना चाहते। किसी और को बचाना जरूरी नहीं, पहले स्वयं को बचाना भी साहस है।”</p>

<p>दीप ने कुछ देर बाद अपनी इच्छा से सहायता करने का निर्णय लिया। सना ने उसके जूतों के नीचे बर्फ की चिकनी परत बनाई और राघव ने धातु की हल्की ढाल दी। गुंबद खुलते ही दीप इतनी तेजी से अंदर गया कि नीली दीवार बंद होने से पहले केवल चमक दिखाई दी। उसने भीतर से निखिल को सिस्टम-संदेश भेजा। सभी बच्चे अलग-अलग कमरों में थे। उन्हें अपनी चुनी शक्ति से एक रक्षक को हराना था। हारने पर मृत्यु नहीं, शक्ति छिनती थी; मगर बहुत से बच्चे डर के कारण परीक्षा शुरू नहीं कर रहे थे। जब तक आखिरी बच्चा फैसला न करे, सुरक्षित क्षेत्र नहीं खुलता।</p>

<p>काव्या ने कौन-सी शक्ति चुनी थी, यह जानकारी छिपी थी। दीप उसके कमरे तक पहुँचा। कुछ मिनट बाद संदेश आया—काव्या ने कोई शक्ति नहीं चुनी। चयन के समय उसने स्क्रीन के सभी विकल्प अस्वीकार कर दिए थे। सिस्टम ने उसे छिपी शक्ति “साझेदारी” दी, जिससे वह अपनी शक्ति बनाने के बजाय स्वेच्छा से जुड़े लोगों की क्षमताओं का छोटा हिस्सा साझा कर सकती थी। मगर परीक्षा में वह अकेली थी, इसलिए उसके पास कुछ भी नहीं था।</p>

<p>आरव ने सिस्टम स्क्रीन पर समूह संपर्क खोला और काव्या को आमंत्रण भेजा। गुंबद अलग करता था, समूह-संबंध नहीं। उसने निमंत्रण स्वीकार किया। उसी पल उसकी साझेदारी शक्ति सक्रिय हुई। उसे आरव की अनुकूलन क्षमता का दस प्रतिशत, सना की बर्फ, युवराज का बल और दीप की गति का छोटा भाग मिल गया।</p>

<p>काव्या के कमरे में पत्थर का रक्षक था। वह किसी एक शक्ति से आसानी से नहीं टूट सकता था। उसने सना की बर्फ से उसके जोड़ रोके, युवराज के बल से घुटने पर प्रहार किया और दीप की गति से पीछे हट गई। रक्षक ने जहरीली धूल छोड़ी तो आरव से मिला प्रतिरोध उसे कुछ सेकंड जीवित रखने के लिए पर्याप्त था। उसने अंतिम प्रहार किया और परीक्षा जीत ली।</p>

<p>अंदर बाकी बच्चों ने उसका नाम रैंक सूची में ऊपर आते देखा। दीप गलियारों में दौड़कर उन्हें बता रहा था कि कमजोर या अनुपयोगी समझी गई शक्ति भी मिलकर काम कर सकती है। एक-एक करके बच्चों ने अपनी परीक्षाएँ शुरू कीं। बाहर गुंबद की रोशनी तेज होने लगी।</p>

<p>लेकिन सुरक्षित क्षेत्र खुलने से पहले मृतकों का विशाल झुंड पहुँच गया। आगे वही बिजली वाला संक्रमित था, जो सुरंग से उनका पीछा कर रहा था। अब उसने बिजली के तारों से इतनी ऊर्जा सोख ली थी कि उसका पूरा शरीर नीला चमक रहा था। उसके पीछे विष-विस्फोटक, शिकारी और सैकड़ों सामान्य संक्रमित थे। स्क्रीन ने उसे नया नाम दिया—झुंड-नायक, स्तर बारह।</p>

<p>बाहर मौजूद लोगों में कई शक्तिशाली उपयोगकर्ता थे, मगर कोई नेतृत्व नहीं था। अग्नि वाले बिना दिशा के आग फेंक रहे थे, जिससे रास्ते बंद हो रहे थे। गति वाले अकेले भागने लगे। उपचार करने वाले पीछे छिप गए। आरव एक टूटी बस की छत पर चढ़ा और जोर से बोला कि यदि हर कोई अपनी शक्ति अकेले चलाएगा तो पाँच मिनट में सब मरेंगे। उसने लोगों को गुणों के अनुसार दलों में बाँटा। धातु और बल वाले अवरोध बनाएँगे। बर्फ और पानी वाले झुंड की गति रोकेंगे। अग्नि वाले केवल तय स्थान पर हमला करेंगे। गति वाले घायल लोगों को हटाएँगे।</p>

<p>कुछ लोगों ने एक एफ-श्रेणी उपयोगकर्ता का आदेश मानने से इनकार किया। तभी युवराज बस पर चढ़ा और कहा, “जिसे अपनी ए-श्रेणी पर ज्यादा भरोसा है, वह सामने जाकर नायक को अकेले मार दे। बाकी आरव की बात सुनेंगे।”</p>

<p>युद्ध शुरू हुआ। राघव ने सड़क की गाड़ियों को मोड़कर धातु की दीवार बनाई। सना और दूसरे बर्फ उपयोगकर्ताओं ने उसके आगे जमीन जमा दी। संक्रमित फिसलकर एक जगह इकट्ठे हुए और अग्नि दल ने नियंत्रित हमला किया। मीरा ऊँचाई से विकसित संक्रमितों की आँखों को निशाना बना रही थी। तान्या और दीप घायलों को पीछे पहुँचा रहे थे।</p>

<p>योजना काम कर रही थी, लेकिन झुंड-नायक ने दोनों हाथ जमीन पर रखे और बिजली की लहर फैला दी। धातु की पूरी दीवार विद्युत से भर गई। राघव और उसके साथी गिर पड़े। रास्ता खुल गया। नायक सीधे आरव की ओर बढ़ा, जैसे उसे समझ आ गया हो कि लोगों को जोड़ने वाला कौन है।</p>

<p>गुंबद खुलने में अभी चार मिनट बाकी थे। यदि आरव पीछे हटता, झुंड बच्चों तक पहुँच जाता। उसने लोहे का डंडा उठाया और उस जीव के सामने खड़ा हो गया जिसकी बिजली एक बार उसका हृदय रोक चुकी थी।</p>

<h2>अध्याय 7 — एफ-श्रेणी बनाम झुंड-नायक</h2>

<p>झुंड-नायक ने बिजली का गोला फेंका। आरव ने धातु का डंडा जमीन में गाड़कर स्वयं को उसके पीछे कर लिया। अधिकांश बिजली धरती में गई, फिर भी झटके ने उसे कई कदम पीछे फेंक दिया। तंत्रिका प्रतिरोध के कारण उसका हृदय चलता रहा। स्क्रीन ने प्रतिरोध बारह प्रतिशत कर दिया।</p>

<p>युवराज नायक पर पीछे से झपटा और पूरी शक्ति से उसकी रीढ़ पर प्रहार किया। सामान्य संक्रमित उस वार से टूट जाता, लेकिन नायक केवल घुटनों पर आया। उसने युवराज को पकड़कर बस के शीशे में फेंक दिया। सना ने उसकी बाँह जमा दी। मीरा के तीर ने कंधे का नीला ऊर्जा-कोष तोड़ा। विस्फोट से सना बेहोश हो गई और मीरा का धनुष दूर जा गिरा।</p>

<p>आरव ने देखा कि हर बिजली हमले से पहले नायक के सीने का कोर चमकता और आसपास के तारों से ऊर्जा खींचता है। उसे हराने के लिए केवल शरीर तोड़ना पर्याप्त नहीं था। उसका संबंध बिजली के स्रोत से काटना था। सड़क के नीचे मुख्य विद्युत लाइन चल रही थी। निखिल ने बताया कि पास के वितरण बक्से में हाथ से चलने वाला आपातकालीन ब्रेकर है, लेकिन वह झुंड के पीछे था।</p>

<p>दीप उसे बंद कर सकता था, पर रास्ते में बहुत संक्रमित थे। काव्या ने भीतर से साझेदारी के जरिए संदेश भेजा। वह दीप को अपनी शक्ति का हिस्सा देकर दूसरे लोगों की क्षमताएँ कुछ क्षण के लिए साझा करा सकती थी। उसने सना की बची हुई बर्फ और युवराज का बल दीप तक पहुँचाया। दीप दौड़ा। गति से वह झुंड के बीच से निकला, बर्फ से पीछा करने वालों के पैर रोके और बल से ब्रेकर का जाम दरवाजा तोड़ दिया।</p>

<p>मुख्य बिजली बंद होते ही पूरा क्षेत्र अँधेरे में डूब गया। नायक की चमक कमजोर पड़ी, लेकिन उसके सीने में जमा ऊर्जा अभी बाकी थी। उसने अंतिम बड़ी लहर के लिए दोनों हाथ फैलाए। यदि वह निकलती तो गुंबद के बाहर खड़ा कोई व्यक्ति जीवित नहीं बचता।</p>

<p>आरव उसकी ओर दौड़ा। सबने उसे पीछे हटने को कहा, मगर वह सीधे नायक से लिपट गया। जीव के शरीर की सारी बिजली उसके भीतर उतरने लगी। त्वचा जलने लगी, मांसपेशियाँ अकड़ गईं और दृष्टि सफेद हो गई। वह जानता था कि उसका बारह प्रतिशत प्रतिरोध इतनी ऊर्जा के लिए पर्याप्त नहीं था। उसका उद्देश्य जीवित रहना नहीं, नायक को बाकी लोगों से दूर रखना था।</p>

<p>स्क्रीन पर चेतावनी आई—घातक विद्युत भार। हृदय विफलता आठ सेकंड में। अनुकूलन सीमा से अधिक।</p>

<p>उसी क्षण गुंबद के भीतर काव्या ने आरव की पीड़ा महसूस की। साझेदारी केवल शक्तियाँ नहीं, उनका भार भी बाँट सकती थी। उसने परीक्षा पूरी कर चुके सभी बच्चों से जुड़ने की अनुमति माँगी। अस्सी से अधिक बच्चों ने हाँ कहा। बिजली का भार एक शरीर में रहने के बजाय पूरे समूह में बहुत छोटे हिस्सों में बँट गया। किसी को झटका लगा, किसी की उँगलियाँ सुन्न हुईं, मगर आरव का हृदय रुकने से बच गया।</p>

<p>अनुकूलन सक्रिय हुआ। विद्युत प्रतिरोध पैंतीस प्रतिशत। नया गुण—ऊर्जा निकास। शरीर में प्रवेश की गई बाहरी ऊर्जा को एक दिशा में छोड़ने की सीमित क्षमता।</p>

<p>आरव ने अपनी बची चेतना से सारी बिजली जमीन की ओर मोड़ दी। सड़क फट गई और नायक का सीने वाला कोर बाहर दिखाई देने लगा। युवराज घायल होने के बावजूद उठा। उसने राघव के बनाए धातु के भाले को पकड़ा और पूरी शक्ति से कोर में घुसा दिया। मीरा ने जमीन से धनुष उठाकर उसी जगह तीर मारा। कोर टूट गया।</p>

<p>झुंड-नायक की चीख पूरे इलाके में गूँजी। उसके गिरते ही बाकी संक्रमित कुछ क्षण दिशाहीन हो गए। गुंबद की परीक्षा पूरी हुई और सुरक्षित क्षेत्र के दरवाजे खुल गए। जीवित लोग भीतर भागने लगे। सना और तान्या ने आरव को उठाया। उसके शरीर पर जले हुए निशान थे और वह होश में नहीं था। काव्या बाहर दौड़ी और अपने भाई का हाथ पकड़ लिया।</p>

<p>सुरक्षित क्षेत्र की नीली रोशनी ने झुंड को पीछे धकेल दिया। प्रथम चरण समाप्त होने में अभी कई घंटे थे, लेकिन वे उस रात के लिए बच गए थे। झुंड-नायक को मारने का अनुभव सभी जुड़े सदस्यों में बँटा। आरव सीधे स्तर सात पर पहुँचा। अनुकूलन ई से डी-श्रेणी बन गया। सिस्टम ने उसे तीन विकास विकल्प दिए—त्वरित पुनर्जीवन, स्थायी कवच या जीवित अभिलेख।</p>

<p>त्वरित पुनर्जीवन घाव जल्दी भर सकता था। कवच शरीर को मजबूत बनाता। दोनों स्पष्ट रूप से उपयोगी थे। तीसरे विकल्प का वर्णन अस्पष्ट था—अनुकूलित खतरों की स्मृति केवल शरीर में नहीं, शक्ति में संग्रहित होगी। भविष्य में उनका सीमित रूप दोहराया जा सकेगा।</p>

<p>होश आने पर आरव ने फिर वही किया जो पहले चयन में किया था। उसने सबसे चमकदार विकल्प नहीं चुना। उसने जीवित अभिलेख चुन लिया। स्क्रीन ने पूछा—क्या उपयोगकर्ता निश्चित है? यह विकास तत्काल शक्ति प्रदान नहीं करता।</p>

<p>आरव ने हाँ दबाया। उसकी कलाई का धूसर चिह्न एक खुली आँख जैसा बन गया। अब तक उसने संक्रमण, विष, कम ऑक्सीजन और बिजली को सहना सीखा था। जीवित अभिलेख के साथ वह इन अनुभवों को केवल प्रतिरोध नहीं, जरूरत पड़ने पर छोटी क्षमताओं की तरह प्रयोग कर सकता था। वह कुछ मिनट संकट श्वास चला सकता था, अपनी त्वचा पर विष-छानन सक्रिय कर सकता था और एक बार में थोड़ी ऊर्जा छोड़ सकता था।</p>

<p>लोगों ने पहली बार उसकी शक्ति के आगे एफ-श्रेणी नहीं, बदलता हुआ प्रश्न-चिह्न देखा। सिस्टम स्वयं तय नहीं कर पा रहा था कि अनुकूलन की अंतिम सीमा क्या है।</p>

<h2>अध्याय 8 — बहत्तरवाँ घंटा</h2>

<p>सुरक्षित क्षेत्र एक खेल परिसर के भीतर बना था। नीला गुंबद संक्रमितों को रोकता था, साफ पानी देता था और प्रत्येक व्यक्ति को दिन में दो साधारण भोजन उपलब्ध कराता था। लेकिन उसकी क्षमता केवल पाँच सौ लोगों की थी। बाहर हजारों जीवित लोग आ रहे थे। सिस्टम ने चेतावनी दी कि सीमा पूरी होने के बाद प्रवेश बंद हो जाएगा।</p>

<p>आरव का शरीर धीरे-धीरे ठीक हो रहा था। त्वरित पुनर्जीवन न चुनने के कारण जलने के घाव वैसे ही दर्द कर रहे थे। फिर भी वह आराम करने के बजाय क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था देखता रहा। उसे विश्वास नहीं था कि कोई भी सुरक्षित स्थान हमेशा सुरक्षित रहेगा। मॉल ने यह बात सिखा दी थी।</p>

<p>काव्या ने बताया कि शक्ति चयन के समय उसे लगा था हर विकल्प उसे किसी एक भूमिका में बाँध देगा। उसने पूछा था कि क्या वह शक्ति लेने से मना कर सकती है। सिस्टम ने उसके निर्णय को साहस मानकर छिपा विकल्प दिया। उसकी साझेदारी अकेले लगभग बेकार थी, लेकिन समूह में असाधारण थी। आरव ने हँसकर कहा कि भाई-बहन दोनों को बेकार दिखाई देने वाली शक्तियाँ चुनने की आदत है।</p>

<p>सना स्वस्थ होने के बाद उनके पास आई। उसके बालों का एक हिस्सा बर्फ के अधिक उपयोग से सफेद हो गया था। युवराज के दाएँ हाथ पर पट्टी थी। राघव ने अपने पुराने आदमियों की चोरी का दोष स्वयं को देना बंद कर दिया और सुरक्षित क्षेत्र के धातु-दल को प्रशिक्षित करने लगा। मीरा ने बच्चों को धनुष चलाना सिखाया। तान्या ने छोटा उपचार केंद्र बनाया, जबकि उसके पास उपचार शक्ति नहीं थी। उसने कहा कि ज्ञान भी एक शक्ति है, बस उसकी स्क्रीन नहीं चमकती।</p>

<p>प्रथम प्रलय के अंतिम घंटे में सिस्टम ने सभी जीवित लोगों को परिणाम दिखाया। पृथ्वी की केवल बावन प्रतिशत जनसंख्या बची थी। करोड़ों मृत-जागृत शहरों में घूम रहे थे। हजारों विकसित संक्रमित बन चुके थे। फिर भी कुछ सुरक्षित क्षेत्र सक्रिय हुए और मानव समूह बनने लगे थे।</p>

<p>आरव को झुंड-नायक के प्रथम विनाश और बड़े समूह का नेतृत्व करने के लिए विशेष पुरस्कार मिला। वह कोई हथियार या शक्ति नहीं था। उसे “मार्गदर्शक” अधिकार मिला, जिससे वह अपने दल के सदस्यों की स्थिति, थकान और संक्रमण का अनुमान देख सकता था। यह युद्ध में किसी भी अग्नि-गोले से अधिक उपयोगी हो सकता था। उसने सना, काव्या, युवराज, निखिल, मीरा, तान्या, इमरान, राघव और दीप को स्थायी दल में जोड़ा। उन्होंने दल का नाम “जीवित” रखा।</p>

<p>बहत्तर घंटे पूरे होते ही आसमान की काली दरारें कुछ देर के लिए बंद हुईं। संक्रमित जमीन पर स्थिर हो गए। हर सुरक्षित क्षेत्र में लोगों ने राहत की साँस ली। उन्हें लगा पहला प्रलय समाप्त हो गया है। फिर विश्व स्क्रीन पर नया संदेश आया—प्रथम चरण पूर्ण। पृथ्वी ने प्रवेश परीक्षा पार कर ली है। सात दिन बाद द्वितीय प्रलय आरंभ होगा। मृत-जागृतों में बुद्धि विकास शुरू। पशु संक्रमण सक्रिय। सुरक्षित क्षेत्रों को अगले चरण से पहले स्तर दो तक विकसित करना अनिवार्य।</p>

<p>नीचे एक और पंक्ति थी—जिस ग्रह का कोई सुरक्षित क्षेत्र स्तर दो तक नहीं पहुँचेगा, उसे असफल मानकर पूर्ण रूप से शुद्ध कर दिया जाएगा।</p>

<p>लोगों के चेहरे से राहत गायब हो गई। उनका सुरक्षित क्षेत्र स्तर शून्य था। उसे बढ़ाने के लिए तीन चीजें चाहिए थीं—सौ विकास-कोर, एक क्षेत्र-नायक का हृदय और शहर के मध्य स्थित ऊर्जा स्तंभ पर अधिकार। विकास-कोर संक्रमितों को मारकर मिल सकते थे। क्षेत्र-नायक झुंड-नायक से कई गुना शक्तिशाली था। ऊर्जा स्तंभ शहर के सबसे घने संक्रमित क्षेत्र में प्रकट होने वाला था।</p>

<p>आरव ने सात दिन का नक्शा देखा। यह आश्रय उन्हें बचाने वाला किला नहीं था; यह अगली लड़ाई का प्रारंभिक शिविर था। यदि वे भीतर छिपे रहे तो सातवें दिन सब मरेंगे।</p>

<p>उसी रात गुंबद के बाहर एक अकेली छोटी लड़की दिखाई दी। उसकी उम्र शायद आठ वर्ष थी। वह संक्रमितों के बीच बिना डर चलती हुई मुख्य द्वार तक आई। किसी मृत-जागृत ने उसे छुआ तक नहीं। पहरेदारों ने हथियार उठाए। लड़की ने काँच के पार सीधे आरव की ओर देखा और मुस्कराई। उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं, लेकिन वह सामान्य मनुष्य की तरह बोली।</p>

<p>“अनुकूलन वाला मिल गया।”</p>

<p>आरव के सामने लाल स्क्रीन खुली—अज्ञात उच्च बुद्धिमान संक्रमित। स्तर पढ़ना असंभव। दूरी बनाए रखें।</p>

<p>लड़की ने अपनी हथेली काँच पर रखी। दूसरी ओर आरव की कलाई का चिह्न जलने लगा। उसने कहा, “तुम सोचते हो तुम्हारी शक्ति ने तुम्हें चुना क्योंकि तुम कमजोर थे। सच यह है कि इस दुनिया में केवल तुम्हारी शक्ति ऐसी है जो हम जैसे बनकर भी मनुष्य रह सकती है।”</p>

<p>काव्या ने आरव का हाथ पकड़ लिया। युवराज और सना उसके दोनों ओर आ खड़े हुए। लड़की पीछे मुड़ी तो बाहर स्थिर पड़े हजारों संक्रमितों ने एक साथ सिर उठाया। उसने जाते-जाते कहा, “सात दिन बाद ऊर्जा स्तंभ पर आना। यदि तुम जीवित रहे तो मैं तुम्हें बताऊँगी कि यह प्रलय किसने शुरू किया। और यदि नहीं आए, तो अगली बार मैं इस गुंबद के बाहर नहीं रुकूँगी।”</p>

<p>वह अँधेरे में गायब हो गई। उसके पीछे पूरा झुंड बिना आवाज किए चला गया।</p>

<p>आरव ने अपने दल की ओर देखा। तीन दिन पहले वह एक कमजोर छात्र था जो सीढ़ियाँ चढ़ते समय इनहेलर खोजता था। अब उसके शरीर में उन खतरों की स्मृतियाँ थीं जिन्होंने उसे मारने की कोशिश की थी। हर घाव ने उसे कुछ सिखाया, हर मृत्यु ने उसे सावधान किया और हर साथी ने साबित किया कि कोई भी शक्ति अकेले पर्याप्त नहीं होती।</p>

<p>उसने सुरक्षित क्षेत्र के बड़े नक्शे पर शहर के मध्य बने लाल निशान को छुआ। “हम सुबह निकलेंगे। पहले विकास-कोर जमा करेंगे, फिर क्षेत्र-नायक को खोजेंगे और सातवें दिन ऊर्जा स्तंभ लेंगे।”</p>

<p>राघव ने पूछा, “और वह लड़की?”</p>

<p>आरव ने कलाई के बदलते चिह्न को देखा। “उससे भी मिलेंगे। लेकिन उसकी शर्तों पर नहीं।”</p>

<p>सूरज उगने से पहले “जीवित” दल ने हथियार, दवाइयाँ और भोजन तैयार कर लिया। सुरक्षित क्षेत्र के बहुत से लोग उन्हें पागल समझ रहे थे। कुछ कहते थे गुंबद के भीतर रहना ही समझदारी है। मगर आरव जानता था कि सुरक्षा और प्रतीक्षा एक चीज नहीं होते। कभी-कभी दीवार केवल मृत्यु को थोड़ी देर बाहर रोकती है। जीवित वही रहता है जो उस समय का उपयोग बदलने के लिए करता है।</p>

<p>मुख्य द्वार खुला। बाहर सड़कों पर धुंध थी और दूर कहीं किसी विशाल जीव की गर्जना सुनाई दी। आरव सबसे आगे चला। उसके पीछे काव्या, सना, युवराज और बाकी साथी थे। किसी के पास आग थी, किसी के पास बर्फ, किसी के पास बल और किसी के पास केवल ज्ञान। आरव के पास उन सभी खतरों की याद थी जिनसे वह अब तक बचा था।</p>

<p>दुनिया ने लोगों से सबसे शक्तिशाली विकल्प चुनने को कहा था। अधिकांश ने वही चुना जो युद्ध के पहले क्षण में चमकता था। आरव ने वह शक्ति चुनी थी जो केवल हार के किनारे पर जागती थी। वह हर चोट के बाद बदलती, हर संकट के बाद सीखती और हर बार मृत्यु से लौटकर पहले से कठिन शिकार बन जाती।</p>

<p>प्रलय अभी शुरू ही हुआ था। सामने ऐसे संक्रमित थे जो सोच सकते थे, ऐसे पशु थे जो बदलने वाले थे और कोई अज्ञात शक्ति थी जिसने पृथ्वी को परीक्षा का मैदान बनाया था। आरव को नहीं पता था कि वह सात दिन बाद जीवित रहेगा या नहीं। उसे केवल इतना पता था कि अगली बार मृत्यु उसके सामने आएगी तो उसका शरीर उसे पहचानता होगा।</p>

<p>और मृत्यु को पहली बार यह सीखना पड़ेगा कि एक ही तरीके से आरव मेहरा को दो बार नहीं मारा जा सकता।</p>

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