दिल दहला देने वाली भूतिया कहानियां Ch. 1

टोना टोटका भाग-1

Posted by Mamta Meena • Aug 22, 2026 04:34 PM

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अनामिका है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूं। आज मैं अपने जीवन से जुड़ी हुई एक डरावनी घटना जो आप सबको बताना चाहती हूं, वह मेरी शादी से संबंधित है। आज से लगभग डेढ़ साल पहले मेरी शादी हुई थी। मेरी और वीर दोनों की लव मैरिज थी। हम एक ही कंपनी में साथ काम करते थे और वहीं पर छह महीने की मुलाकात के बाद हमने शादी कर ली थी। जब मैं अपने ससुराल में आई, तो बड़े धूमधाम से मेरा स्वागत किया गया। धीरे-धीरे पंद्रह दिन गुजर गए, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था। उस वक्त सपनों से भी ज्यादा सुंदर मेरी जिंदगी थी। लेकिन उसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिसकी कभी हमने कल्पना भी नहीं की थी।

हमारी शादी के लगभग चौदह दिन बाद एक रात जब मैं सो रही थी, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे कमरे में चलकर कोई आया है। अपने कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर मैंने नींद में ही आंखें खोलकर देखा तो मेरे आंखों के सामने मेरे पैरों की तरफ एक अजीब सा डरावना आदमी जो पूरी तरह जला हुआ था, आंखों की पुतली लाल रंग की थी, वह खड़ा हुआ था जो गुस्से में मुझे घूरते जा रहा था। यह देखकर मैं बहुत ज्यादा डर गई और हड़बड़ाते हुए ठीक से आंखें खोलीं तो अब ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। अब दरवाजे की तरफ देखा तो वह भी बंद था, जबकि मैंने तो दरवाजा खुलने की आवाज सुनी थी। शायद ऐसे ही नींद में कोई भ्रम हुआ होगा या डरावना सपना देखा होगा, यह सोचकर ज्यादा इस बात पर ध्यान नहीं दिया और फिर से सो गई।

अभी सोए हुए कुछ ही वक्त हुआ था कि तभी फिर से मुझे ऐसा लगने लगा जैसे कोई मेरे बेड के आसपास में घूम रहा है। कभी लगता कि बहुत सारे बच्चे भाग रहे हैं, तो कभी लगता कि कोई औरत चल रही है क्योंकि उसकी पायल के बजने की आवाज सुनाई दे रही थी। यह महसूस होते ही हड़बड़ाते हुए मैंने आंखें खोलकर देखा तो मुझे कुछ भी नजर नहीं आया। यह देखकर ज्यादा इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि शायद ऐसे ही नींद में भ्रम हुआ है, यह सोचकर फिर से मैंने सोने की कोशिश की। कुछ देर में नींद आ गई और एक अजीब सा बड़ा डरावना सपना मैंने देखा जिसे देखकर मेरी नींद खुल गई थी। कितना डरावना सपना था, यह सोचकर मैंने पानी पिया और फिर से सोने की कोशिश करने लगी। लेकिन तभी देखा कि सुबह के चार बजने वाले हैं तो मैं ऐसे ही लेट गई और थोड़ी देर के लिए सो गई।

फिर थोड़ी देर बाद जैसे ही उजाला हो गया, तो सुबह मेरी नींद खुली और मेरा सिर थोड़ा भारी सा था। शायद रात को नींद ठीक तरीके से नहीं आई थी, जिस वजह से सिर दर्द कर रहा था, यह सोचकर जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गई, तो सामने दीवार पर खून से किसी ने लिखा हुआ था - "चली जाओ हमेशा के लिए सब कुछ छोड़कर, वरना जिंदा नहीं बच पाओगी।" यह देखकर मैं घबरा गई। हड़बड़ाते हुए मैंने ठीक तरीके से आंखें खोलकर देखा, क्योंकि अभी तक तो अपने सिर दर्द की वजह से मैं थोड़ी नींद में ही थी। लेकिन अब ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। शायद ऐसे ही कोई भ्रम हुआ होगा। वैसे भी आज रात को मैंने बहुत ज्यादा डरावना सपना देखा था जिसमें एक औरत देखी थी जो काली साड़ी पहने हुए थी, उसके हाथों से खून टपक रहा था, मुंह से भी खून बह रहा था और वह मेरी तरफ बढ़ रही थी। शायद यह सब कुछ उन्हीं का असर था, यह सोचकर मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और नहाने के बाद बाथरूम से बाहर आ गई थी।

तभी वीर जब नींद से उठा, तो बहुत ज्यादा बेचैन सा था। उसे इस तरह परेशान देखकर मैं बोली, "क्या हुआ?" तो वह मेरी तरफ देखकर गुस्से में बोला, "मुझे तुमसे डिवोर्स चाहिए।" यह सुनकर पहले तो मुझे लगा कि वीर मुझसे ऐसे ही मजाक कर रहा है, इसलिए मैं मुस्कुराते हुए बोली, "क्यों जनाब, मुझसे पंद्रह दिन में ही परेशान हो गए क्या? जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करके आई हूं, इतनी जल्दी तुम्हारा पीछा थोड़ी ना छोडूंगी।" यह सुनकर वीर कुछ नहीं बोला, लेकिन गुस्से में वहां से चला गया। यह देखकर थोड़ा मुझे अजीब भी लग रहा था, लेकिन सोचा शायद ऐसे ही मुझे परेशान करने के लिए बोला होगा।

अब मैं कमरे से बाहर आई तो मैंने देखा कि वीर मुझे छोड़कर ऑफिस के लिए निकल गया था, जबकि हम दोनों साथ में गाड़ी में जाते थे। अब यह सोचकर मेरे समझ में नहीं आया कि वीर ने आखिर ऐसा क्यों किया। शायद उसे कुछ काम होगा, मुझे ना बताया हो, यह सोचकर अपने आप को तसल्ली देते हुए फिर मैं भी ऑफिस चली गई थी। ऑफिस में भी वीर ने मुझसे ठीक तरीके से बातें नहीं कीं। वीर का एक दोस्त था अनिकेत, लंच टाइम में जब मैं वीर के पास गई, तो वह उठकर वहां से चला गया। तो अनिकेत मेरे पास आकर बोला, "तुम दोनों के बीच में कोई झगड़ा हुआ है क्या?" यह सुनकर मैं बोली, "नहीं तो।" अब अनिकेत बोला, "पता नहीं वीर आया है तब से ही बहुत ज्यादा परेशान है और बार-बार तुमसे डिवोर्स लेने के लिए बोल रहा है।" अब तो मेरे पैरों तले ही जमीन खिसक गई, क्योंकि अब तक तो मुझे वीर की डिवोर्स लेने की बात मजाक लग रही थी, लेकिन अब कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसने अपने दोस्त से भी ऐसी बातें क्यों की हैं।

मैंने वीर से बातें करने की कोशिश की, लेकिन वह एक ही बात पर अड़ा हुआ था कि उसे डिवोर्स चाहिए। अब तो मेरी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। जब मैं वीर के साथ वापस ऑफिस से आने के लिए गाड़ी की तरफ आई, तो मुझे वहीं पर छोड़कर वीर घर चला गया था। वीर का अचानक इस तरह बदल जाना, उसका इस तरह व्यवहार करना मुझे काफी अजीब लग रहा था। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, जबकि हमारे बीच तो सब कुछ ठीक था। किसी बात को लेकर जरा सी बहस भी नहीं हुई थी। रात को भी वह अच्छे से सोया था, तो फिर अचानक वह इतना क्यों बदल गया है, यह सोचते हुए तभी मैंने एक टैक्सी रुकवाई और घर जाने के लिए रवाना हो गई।

अभी मैं टैक्सी में बैठी यही सब सोच रही थी कि तभी मुझे अपने कानों में भयानक से किसी के हंसने की आवाज सुनाई दी। तो हड़बड़ाते हुए मैंने चारों तरफ देखा, लेकिन कोई भी नहीं हंस रहा था। वैसे उस वक्त मेरे साथ टैक्सी में एक अधेड़ उम्र की औरत बैठी हुई थी, जो अपने मोबाइल में लगी हुई थी। तो फिर यह आवाज कैसी? क्योंकि टैक्सी ड्राइवर का पूरा ध्यान भी टैक्सी चलाने में था, तो ऐसे में यह देखकर मेरे कुछ भी समझ में नहीं आया। फिर सोचा कि शायद टैक्सी के बगल में से कोई साधन गुजरा होगा, उसी में से किसी की हंसने की आवाज मुझे सुनाई दी होगी, इसलिए इस बात को भी मैंने ज्यादा सीरियस नहीं लिया। अब मैं घर पर आ गई थी।

तभी वीर जब अपनी मां से बहस कर रहा था, मैं रोते हुए बस वीर की तरफ देखती जा रही थी। वीर ने गुस्से में मेरी तरफ देखा और कमरे में चला गया। मैं भी जल्दी-जल्दी उसके पीछे जाने लगी, तो मुझे ऐसा लगने लगा कि फिर से किसी के हंसने की भयानक आवाज मेरे कानों में गूंजी। हड़बड़ाते हुए मैंने चारों तरफ देखा, लेकिन मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। मैंने ज्यादा इस बात पर ध्यान नहीं दिया और कमरे में आई, तो देखा कि वीर बेचैनी से इधर-उधर घूम रहा था, पूरी तरह पसीने में भीगा हुआ था।

यह देखकर मैं बोली, "आखिर कोई बात भी तो होगी, मुझे कोई गलती हुई है क्या जो तुम इस तरह की बातें कर रहे हो?" यह सुनकर वीर ने गुस्से में मेरी तरफ देखा और कुछ नहीं बोला। वह वहां से निकलकर चला गया। उस दिन तो पूरे घर में जैसे क्लेश हो गया था। मेरे परिवार में मेरी सास, मैं और वीर हम लोग ही थे। मेरे जेठ-जिठानी कोलकाता रहते थे और देवर-देवरानी की पोस्टिंग दूसरे शहर में थी।

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