पचेल्डा प्रथा - Chapter 2
सलोनी पूजा को अपने साथ अपने केबिन में ले आई और उसे अपने पास बिठाते हुए बोली अब बताओ पूजा की क्या बात है,,,,,,,
हमेशा फूल की तरह खिला हुआ तुम्हारा चेहरा आज कैसे मुरझाया हुआ है क्या बात है कोई परेशानी है क्या कहीं तुम्हारा सुबोध के साथ झगड़ा तो नहीं हो गया ना,,,,,,,
यह सुनकर पूजा बोली नहीं सलोनी बात कुछ और है,,,,,
तब सलोनी बोली हां बताओ अरे तुम मेरी सहकर्मी होने के साथ मेरी एक अच्छी दोस्त भी हो भला मुझसे क्या छुपाना बताओ क्या बात है,,,,,,,
यह सुनकर पूजा बोली सलोनी तुम्हें पता है ना मेरे पापा और चाचा दोनों दो भाई है,,,,,,
बरसों पहले जब हम छोटे छोटे थे तब पापा और चाचा का जमीन जायदाद को लेकर झगड़ा हुआ ऐसे में पापा तो हमें लेकर शहर आ गए और चाचा बही गांव में रहने लगे,,,,,,,
सलोनी मेरे पापा और चाचा दोनों की सोच बिल्कुल अलग है,,,,,,,
जहा पापा थोड़े खुले विचारों के है वही चाचा एकदम रूढ़िवादी विचारों के हैं शहर आने के बाद भी कभी कबार हमारा गांव जाना होता था,,,,,,,
ऐसे ही मेरे चाचा की लड़की लक्ष्मी जो कि मेरी ही हम उम्र है बह मेरी अच्छी सहेली और बहन थी, हम दोनों एक दूसरे से काफी घुलमिल कर रहते थे,,,,,,,,
वह बेचारी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है लेकिन दुनियादारी की समझ अच्छे से है,,,,,,
मेरे पापा ने मेरे सपनों को देखते हुए मेरे विवाह करने का ख्याल अपने मन से निकाल दिया और विवाह करने का फैसला मेरे ऊपर ही डाल दिया क्योंकि यह मेरी जिंदगी है और पापा के लिए मेरी खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है,,,,,,,
वही चाचा के लिए समाज का झूठा दिखावा झूठा रूतबा समाज की इज्जत सब कुछ है, अपने बच्चों की खुशी से बढ कर उसके लिए समाज की इज्जत सबसे ज्यादा मायने रखती है,,,,,,
चाचा ने अपनी बेटी को इसलिए नहीं पढ़ाया लिखाया कि कही पढ़ लिख कर उसकी बेटी को जमाने की हवा ना लग जाए,,,,,,,,
इस रूढ़िवादी विचार की वजह से उसने अपनी बेटी को चारदीवारी में कैद करके रखा और कम उम्र में ही अपनी बेटी का विवाह पास के ही गांव में लक्ष्मी से उम्र में तेरह साल बड़े आदमी के साथ कर दिया,,,,,,,
शादी बाद भी कभी कबार मेरी बहन लक्ष्मी से मेरी फोन पर बातें हो जाया करती थी,बह अपने पति और ससुराल वालों के साथ खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन करती थी,,,,,,,
लेकिन अभी 5 दिन पहले ही उनके पति की खेत पर से आते हुए मौत हो गई,,,,,,,
क्योंकि सामने से सड़क पर आते एक ट्रक ने गलती से उन्हें टक्कर मार दी जिससे मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया,,,,,,,,
उसकी मौत की खबर सुनकर हमें काफी दुख हुआ तुम्हें तो पता है ना कि उसके पति की मौत पर मैं छुट्टी लेकर उसके ससुराल गई थी,,,,,,,
मेरे चाचा की लड़की अपने पति की मौत के बाद टूट कर बिखर गई जैसे उसकी दुनिया ही उजड़ गई हो, लेकिन अपने 5 साल के बेटे के लिए उसने अपने आप को संभाला,,,,,,,,
अभी उसके पति की मौत को 2 दिन भी नहीं बीते थे कि उसके ससुराल वाले उसके देवर का पचेंल्डा ओढ़ने के लिए उस पर दबाव बनाने लगे,,,,,,,
उसका देवर एक नंबर का निकम्मा और शराबी आवारा घटिया इंसान है ना जाने कितनी बार लड़कियों से छेड़खानी करने चोरी करने मारपीट करने जैसे कारनामों की वजह से कई महीनों तक जेल में भी रहकर आ चुका है,,,,,,,
ऐसे में कोई भी उसे अपनी बेटी तो देना नहीं चाहता शादी की उम्र भी लगभग निकली चुकी है ऐसे में लक्ष्मी के सास ससुर चाहते हैं कि अगर लक्ष्मी उनका पचेल्डा ओढ ले तो उनके छोटे बेटे का भी घर बस जाए,उसका भी बंश चल जाऐ,,,,,,
सलोनी कैसे कैसे लोग होते हैं लक्ष्मी के सास ससुर अपने बड़े बेटे की मौत से दुखी होने की वजाह इस कोशिश में लगे हुए हैं कि उनके छोटे बेटे का घर भी बस जाए इसके लिए बे मेरी बहन पर दबाव बनाने लगे है,,,,,,,,
लेकिन लक्ष्मी अपने देवर से नफरत करती है क्योंकि कई बार उसके देवर ने उसके साथ भी छेड़खानी करने की कोशिश की थी,,,,,,
लेकिन अपने पति से शिकायत करने पर उसके पति ने उसके देवर को काफी फटकार लगाई और सख्त चेतावनी दी कि अगर आइंदा ऐसा कुछ करने की कोशिश की तो उससे बुरा कोई नहीं होगा,,,,,,,
लेकिन अब तो लक्ष्मी के पति की भी मौत हो चुकी है ऐसे में उसका देवर भी लक्ष्मी पर गन्दी नजर रखता है यही नहीं बह अकेले में लक्ष्मी के साथ छेड़खानी करने की कोशिश करता है,,,,,,,
और उसके सास ससुर दिन रात लक्ष्मी पर दबाव बनाते कि उसका घर फिर से बस जाएगा उसके मासूम बेटे को फिर से एक बाप का सहारा मिल जाएगा बह,,,,,,,
और साथ में ही उनके छोटे बेटे का बंस भी चल जाएगा लक्ष्मी के सास ससुर को लगता है कि अगर लक्ष्मी ऐसा कर लेती है तो उनके छोटे बेटे का घर तो बस ही जाऐगा साथ में उनके बेटे के जो आए दिन कारनामे है शायद बह भी कुछ कम हो जाए,,,,,,,,
लेकिन लक्ष्मी जानती है कि उसके देवर का पचेल्डा ओढ ने पर उसकी और उसके मासूम बेटे की जिंदगी नरक से भी बदतर बन जाएगी बह कभी खुश नहीं रह पाएगी,,,,,,,
लक्ष्मी अपने देवर से सख्त नफरत करती है बह चाहती है कि बह अपने 5 साल के बेटे के साथ ही अपना जीवन यापन जैसे तैसे कर लेगी लेकिन अपने देवर का पचेल्डा कभी नहीं ओढेगी,,,,,,,,
लेकिन उसकी तकलीफ सुनने वाला कोई नहीं है सास-ससुर के साथ खुद मेरे चाचा चाची यानी लक्ष्मी के माता-पिता भी उस पर यह दबाव बना रहे है कह रहे है अरे अभी तो जवान है उम्र ही कितनी सी है तुम्हारी,,,,,,,
अगर अपने देवर का पचेल्डा ओढ लेगी तो तेरा घर दोबारा बस जाएगा,घर की बात घर मे रह तो कितना अच्छा है,,,,,,
हमारी बात मान ले हमेशा सुखी रहेगी तुझे भी आदमी का सहारा मिल जाएगा वरना लोग तो तेरे पर पता नहीं कैसी कैसी नजर डालेंगे बिना आदमी के जीवन यापन करना आसान नहीं होता,,,,,,,
और वैसे भी जिंदगी बहुत लंबी है आज तेरा देवर तुझे अच्छा नहीं लगता है तो क्या हुआ,अपना घर धणी बनने पर समय के साथ अपने आप ही उससे लगाव हो जाएगा,धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा,,,,,,,
सलोनी कैसे माता-पिता है मेरे चाचा चाची जो अपनी बेटी का दर्द समझने की वजाह बस समाज और लोगों के सामने दिखावा करने के लिए उस पर दबाव बना रहे है,,,,,,,,,
क्यों नहीं समझ रहे है कि जिस बेटी ने इतने साल अपने पति के साथ गुजारे हैं जिसे बह अपनी जान से ज्यादा प्यार करती थी जब मैं पति उसे छोड़ कर गया है तो उस पर क्या गुजर रही है,,,,,,,,
ऐसे में उसे सहारा देने की वजाह से हिम्मत बधाने की वजाह उल्टा उस पर दबाव दे रहे है कि बह अपने देवर का पचेल्डा ओढ ले और साथ में जिससे उसका घर बस जाए और लोगों की उल्टी सीधी बातें सुनने को ना मिले,,,,,,,,
उसकी बात सुनकर सलोनी जैसे कई खो गई थी उसके चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आऐ पचेल्डा प्रथा का नाम सुनकर उसके दिमाग जैसे फटने लगा था,,,,,,,