पचेल्डा प्रथा - Chapter 1
वैसे इस पचेल्डा प्रथा का शुरुआती उद्देश्य किसी की जिंदगी बर्बाद करना नहीं था, यह प्रथा तो लोगों की जिंदगी संवारने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन समाज के स्वार्थी लोगों ने इस प्रथा को भी एक कुप्रथा का रूप दे दिया,,,,,,,,
जहा इस प्रथा से कुछ जिंदगीया संवर जाती है तो वहीं कुछ स्वार्थी लोगों के स्वार्थ के कारण इस प्रथा के कारण कही जिंदगियां बर्बाद हो जाती है,,,,,,,
यह समाज में एक ऐसी प्रथा है जिसका अगर सही रूप से पालन किया जाए तो इससे ना जाने कितनी जिंदगी सवर जाए,,,,,,,
लेकिन लोग तो इस प्रथा का पालन अपने स्वार्थ के कारण एक ऐसी प्रथा जो लोगों के लिए कभी वरदान साबित हुई तो वही अब अभिशाप बन गई,,,,,,, एक दो लोगों की जिंदगी अब सवर गई तो बही सैकड़ों लोगों की जिंदगी इससे बर्बाद हो गई,,,,,,,,
इस प्रथा से औरतों की ही नहीं कई पुरुषो की भी जिंदगी बर्बाद हो गई थी,,,,,,,
समाज के ठेकेदारों ने समाज में अपना रुतबा कायम करने के लिए समाज के कुछ स्वार्थी लोगों ने अपने मतलब के लिए इस प्रथा का एक कुप्रथा के रूप में प्रयोग किया,,,,,,
राजस्थान के अन्य समाजों का तो पता नहीं लेकिन मैं जिस मीणावाटी समाज से संबंधित हूं उसमें इस पचेल्डा प्रथा से संबंधित कहीं उदाहरण देखने को मिले हैं,,,,,,
इस प्रथा से जहा किसी की जिंदगी को सबरते हुए देखती हू तो दिल खुश हो जाता है बही जब इस प्रथा के दबाव में किसी की जिंदगी नरक बन जाती है तो मन बहुत दुखी हो जाता है,,,,,,
ऐसी ही इस पचेल्डा प्रथा जिसके बारे में में लिखने जा रही हूं,,,,,,
रचनाएं पढ़ने के साथ ही आपको इस प्रथा के बारे में भली भाती रूप से समझने के लिए मिलेगा,,,,,,,
इस प्रथा के कई उदाहरण कहानी के रूप में आप सब को पढ़ने के लिए मिलेंगे और मैं उम्मीद करती हूं कि आपको यह जरूर पसंद आएगी,,,,,,
बड़ी मेहनत के बाद मैंने इससे संबंधित कहानियां तैयार की है और उम्मीद करती हूं कि आपको जरूर पसंद आएगी इसलिए अपना साथ बनाए रखें अब शुरू करते हैं,,,,,,
सलोनी ने ऑफिस के अंदर अपना पैर रखा ही था कि अचानक उसके फोन की घंटी बज उठी,,,,,,
सलोनी ने फोन पर नजर डाली तो अपनी बेटी संजू का कॉल देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई, उसने फोन उठाकर कान पर लगाया तो उधर से सन्जू की चहककर बोली मम्मा आप कहां पर हो,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली और कहां बेटी ऑफिस में ही हूं अभी आई ही हूं बस,,,,,
यह सुनकर संजू बोली ओहो मेरी पत्रकार मां मुझे पता था कि आप आज भी ऑफिस में होगी आप भूल गई क्या आज आपकी और पापा की शादी की 15वीं सालगिरह है और आज के दिन भी आप ऑफिस में हो,,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली संजू तुम्हें तो पता है ना,,,,,,
उसकी बात बीच में काटते हुए संजू बोली हां हां मम्मा अब यह मत कहने लग जाना कि तुम्हारे लिए तुम्हारा काम ही सबसे ज्यादा जरूरी है तुम ऐसे ही अपने ऑफिस से छुट्टी नहीं ले सकती,,,,,,,
लेकिन मेरी प्यारी पत्रकार मां चाहे आप अपनी शादी की 15वीं सालगिरह के बारे में सोचो या ना सोचो लेकिन मैं चाहती हूं कि आप की 15 वीं शादी की सालगिरह हम सब साथ मनाएं और अच्छे से मनाए इसलिए मैं आज ही हॉस्टल से घर वापस आ रही हूं,,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली लेकिन बेटा,,,,,,
तब संजू बोली मम्मा मुझे कुछ नहीं सुनना है मैंने बोल दिया ना आज मैं हॉस्टल से वापस घर पर आ रही हूं हम सब एक साथ शादी की सालगिरह मनाएंगे,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली लेकिन बेटा तुम्हारे पापा,,,,,,
तब संजू बोली मेरे पापा आपकी तरह नहीं है बह अपनी बेटी की हर बात मानते हैं अरे भला ऐसा हुआ है कभी जो पापा ने आज तक अपनी संजू से किसी काम के लिए मना किया हो,,,,,,,
मैंने पापा को एक कॉल किया और पापा तो जैसे तैयार ही थे, आपको तो पापा की फिक्र ही नहीं है लेकिन मुझे तो है ना,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली लेकिन बेटा तुम्हें तो पता है ना कि,,,,,,
उसकी बात बीच में काटते हुए संजू बोली मम्मा अब मुझे कुछ नहीं सुनना मैं आज दोपहर तक आपके पास पहुंच जाऊंगी और हां अब की बार कोई बहाना नहीं चलेगा,,,,,,,,, बरना मेरी पत्रकार मां मैं आपकी ही ऑफिस के सामने धरना दे दूंगी और फिर आपके ही समाचार पत्र में मेरे धरने की खबर पहले पृष्ठ पर होगी,,,,,,,
यह सुनकर सलोनी मुस्कुराते हुए बोली तुम भी ना संजू अरे कुछ भी बोलती रहती हो ठीक है बही ठीक है मैं कोशिश करूंगी छुट्टी लेने की,,,,,,,
यह सुनकर संजू बोली कोशिश नहीं आज मैं दोपहर तक आपके पास आ जाऊंगी फिर आप मैं और पापा हम तीनों कहीं पर घूमने चलेंगे बाहर खाना खाएंगे और एक साथ एंजॉय करेंगे समझी ना आप,,,,,,, मैं यहां से बस अब निकल रही हूं,,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली लेकिन बेटा तुम्हारी तो एग्जाम है ना कुछ दिन बाद में, अगर तुम यहां पर आओगी तो तुम्हारी पढ़ाई डिस्टर्ब होगी,,,,,,,,
तब संजू बोली अरे मम्मा आप मेरी एग्जाम की चिंता मत करो मैंने उसकी तैयारी अभी से अच्छे से कर ली है आप अपनी शादी की सालगिरह के बारे में सोचो, कभी तो आप अपनी खुशियों के बारे में सोच लिया करो हमेशा बस दूसरों की हे खुशियों के बारे में सोचती रहती हो,,,,,,,,,
आज मैं आ रही हूं, पापा से मैंने बात कर ली है बह मुझे रेलवे स्टेशन पर लेने आ जाएंगे फिर हम सीधे ही आपको लेने के लिए आपके ऑफिस आ जाएंगे,,,,,,,
और अब की बार कोई बहाना नहीं चलेगा वरना मैं आपसे कभी बात नहीं करूंगी, और यह सब मैं ऐसे ही नहीं कह रही हूं अबकी बार अगर आपने हमारी बात नहीं मानी तो पक्का मैं आपसे कभी बात नहीं करूंगी पता है,,,,,,,,
अब की बार मैं कितने दिनों से आपकी शादी की सालगिरह अच्छे से मनाने के बारे में सोच रही थी, और आपकी और पापा की शादी की सालगिरह के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी ऐसे में आपको हमारी बात माननी ही होगी,,,,,
यह सुनकर सलोनी कुछ कहती उसे पहले ही सलोनी के साथ की एक सहकर्मी पूजा वहां पर आ गई और बोली सलोनी,,,,,,,
यह सुनकर सलोनी बोली अच्छा संजू तुम फोन रखो मैं कोशिश करती हूं ठीक है मुझे कुछ काम है,,,,,,
यह कहकर सलोनी ने फोन काट दिया फोन कटते ही सलोनी ने पूजा की तरफ देखा तो देखा कि पूजा बहुत उदास थी,,,,,,,,
उसे उदास देखकर सलोनी बोली क्या हुआ पूजा तुम इतनी उदास क्यों हो, कोई बात है क्या,,,,,,
यह सुनकर पूजा बोली सलोनी बह,,,,,,
उसे ज्यादा उदास देखकर सलोनी बोली अच्छा मेरे साथ मेरे केबिन में चलो, वहां बैठ कर बात करेंगे यह कह कर सलोनी पूजा को लेकर अपनी केबिन में आ गई,,,,,,,